अमृत महोत्सव पर्व के रूप में मनाया गया धनतेरस

हर्षवर्धन केसरवानी

रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र): संपूर्ण देश में धनतेरस का पर्व अमृत महोत्सव के रूप में मनाया गया ।
वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-” कार्तिक माह (पूर्णिमान्त) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को अमृत प्राप्त करने के उपलक्ष में अमृत महोत्सव के रूप में धनतेरस पर्व को मनाने की परंपरा प्राचीन है।

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धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए यह पर्व चिकित्सकों के लिए महत्वपूर्ण है इसलिए भारत सरकार इस पर्व को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
देशभर के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में आयुर्वेद की महत्ता पर सेमिनार और विचार गोष्ठी,आयुर्वेदिक दवाओं की कंपनियों द्वारा धन्वंतरी पूजा का भी आयोजन किया गया।
जैन धर्म के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी
जैन आगम में धनतेरस को ‘धन्य तेरस’ या ‘ध्यान तेरस’ भी कहते हैं।

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भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे।
इसलिए इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है। लोगों ने नगर की दुकानों पर बर्तनों की खूब खरीदारी किया ।

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आभूषण की दुकानों पर लोगों ने चांदी के बने बर्तन खरीदा इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में सन्तोष रूपी धन का वास होता है। संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है, सुखी है, और वही सबसे धनवान है।

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भगवान धन्वन्तरि जो चिकित्सा के देवता भी हैं। उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है। लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी, गणेश की पूजा हेतु मूर्ति की दुकानों पर काफी भीड़ देखी गई

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शाम को घर के बाहर
मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा है, इस प्रथा के पीछे एक लोककथा है कि-” किसी समय में एक राजा थे जिनका नाम हेम था। दैव कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। ज्योंतिषियों ने जब बालक की कुण्डली बनाई तो पता चला कि बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद वह मृत्यु को प्राप्त होगा। राजा इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े। दैवयोग से एक दिन एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया।

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विवाह के पश्चात विधि का विधान सामने आया और विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा। परन्तु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा। यमराज को जब यमदूत यह कह रहे थे, उसी समय उनमें से एक ने यम देवता से विनती की- हे यमराज! क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाए। दूत के इस प्रकार अनुरोध करने से यम देवता बोले, हे दूत! अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है, इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें बताता हूं, सो सुनो। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीपमाला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं।

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भगवान धनवंतरी, कुबेर और लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा
पूजा घर में उत्तर दिशा में स्थापित कर भगवान कुबेर को सफेद मिठाई, धनवंतरी भगवान को पीली मिठाई धनिया चढ़ाया।
लोगों ने दीप जलाकर भगवान धन्वन्तरि की पूजा करते हुए भगवान धन्वन्तरि से स्वास्थ और सेहतमंद बनाये रखने की प्रार्थना किया।

चांदी का कोई बर्तन या लक्ष्मी गणेश अंकित चांदी का सिक्का खरीदा नया बर्तन खरीदा। पौराणिक कथा है
कि-” समुद्र मन्थन के दौरान भगवान धन्वन्तरि और मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था, यही वजह है कि धनतेरस को भगवान धनवंतरी और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है ।
धनतेरस दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता है।

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रात्रि में भगवान सूर्य, भगवान गणेश, माता दुर्गा, भगवान शिव, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि जी की प्रतिमा स्थापित कर कपूर, केसर, कुमकुम, चावल, अबीर, गुलाल, अभ्रक, हल्दी, सौभाग्य द्रव्य, मेहंदी, चूड़ी, काजल, पायजेब, बिछुड़ी, नाड़ा, रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान पत्ता, पुष्पमाला, कमलगट्टे, धनिया खड़ा, सप्तमृत्तिका, सप्तधान्य, कुशा, दूर्वा, पंच मेवा, गंगाजल, शहद, शकर, घृत, दही, दूध, ऋतुफल, नैवेद्य या मिष्ठान्न, मालपुए इत्यादि), इलायची (छोटी), लौंग, मौली, इत्र शीशी, तुलसी दल, सिंहासन, पंच पल्लव, औषधि, लक्ष्मीजी का पाना, गणेश मूर्ति, सरस्वतीजी चित्र, चांदी सिक्का, लक्ष्मीजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र, गणेशजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र, अम्बिका को अर्पित करने हेतु वस्त्र, जल कलश (तांबे या मिट्टी का), सफेद कपड़ा (आधा मीटर), लाल कपड़ा, पंच रत्न, दीपक, बड़े दीपक के लिए तेल, ताम्बूल, श्रीफल (नारियल), धान्य, लेखनी (कलम), बही-खाता, स्याही की दवात, तुला (तराजू), पुष्प (गुलाब एवं लाल कमल), एक नई थैली में हल्दी की गांठ, खड़ा धनिया, दूर्वा आदि, खील-बताशे, अर्घ्य पात्र। भगवान धन्वंतरि को गंध, अबीर, गुलाल, पुष्प, रोली, अक्षत आदि चढ़ाएं। उनके मंत्रों का जाप करें। उन्हें खीर का भोग लगाया।भगवान धन्वंतरि को श्रीफल और कर्पूर से आरती कर मुख्य द्वार एवं आंगन में दीपक जलाया।

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पूजा के पश्चात लोगों ने अपने घर हूं व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भगवान धन्वंतरी की आरती का गायन किया-
*जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।जय धन्वं.।।
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।जय धन्वं.।।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।जय धन्वं.।।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।जय धन्वं.।।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।जय धन्वं.।।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।जय धन्वं.।।
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।जय धन्वं.।।

लोगों ने अपनी- अपनीराशियों के अनुसाररा की खरीदारी-

मेष – चांदी की कटोरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, स्वर्णाभूषण।

वृष – कपड़े, कलश।

मिथुन – सोने के आभूषण, स्टील के बर्तन।

कर्क – चांदी के आभूषण या बर्तन, घरेलू सामान।

सिंह – तांबे के बर्तन या कलश, लाल रंग के कपड़े।

कन्या – सोने या चांदी के आभूषण या कलश।

तुला – कपड़े, सौंदर्य सामान या सजावटी सामान।

वृश्चिक – इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सोने के आभूषण।

धनु – सोने के आभूषण, तांबे के बर्तन,मिट्टी के कलश।

मकर – वस्त्रत्त्, वाहन, चांदी के बर्तन या आभूषण।

कुम्भ – सौंदर्य के सामान, स्वर्ण ,तांबे के बर्तन।

मीन – सोने के आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।

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धनतेरस पर बुध तुला राशि में गोचर कर रहे हैं। ज्योतिषविदों का मानना है कि बुध का राशि परिवर्तन जातकों के आर्थिक, सामाजिक जीवन पर असर डाल सकता है। धनतेरस पर बुध का राशि परिवर्तन मेष, वृश्चिक, कर्क, मिथुन, सिंह और धनु राशियों को आर्थिक और सामाजिक लाभ देगा।
अच्छी सेहत सबसे बड़ा धन है। यदि स्वस्थ देह ही न हो, तो माया किस काम की। शायद इसी विचार को हमारे मनीषियों ने युगों पहले ही भांप लिया था। उत्तम स्वास्थ्य और स्थूल समृद्धि के बीच की जागृति का पर्व है धनतेरस, जो प्रत्येक वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है।

आध्यात्मिक मान्यताओं में दीपावली की महानिशा से दो दिन पहले जुंबिश देने वाला यह काल धन ही नहीं, चिकित्सा जगत की समृद्ध विरासत का प्रतीक है। या काल यक्ष यक्षिणीयों के जागरण दिवस के रूप में भी प्रख्यात है। यक्ष-यक्षिणी स्थूल जगत के उन चमकीले तत्वों के नियंता कहे जाते हैं, जिन्हें जगत दौलत मानता है। लक्ष्मी और कुबेर यक्षिणी और यक्ष माने जाते हैं। यक्ष-यक्षिणी ऊर्जा का वो पद कहा जाता है, जो हमारे जीने का सलीक़ा नियंत्रित करता हैं। सनद रहे कि धन और वैभव का भोग बिना बेहतर सेहत के सम्भव नहीं है, लिहाज़ा ऐश्वर्य के भोग के लिये कालांतर में धन्वन्तरि की अवधारणा सहज रूप से प्रकट हुई, जो नितांत वैज्ञानिक प्रतीत होती है।

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साहित्यकार प्रतिभा देवी के अनुसार-“
धनतेरस एक ऐसा और इकलौता महापर्व है जिसमें भौतिक समृद्धि के साथ स्‍वास्‍थ्‍स को भी महत्‍व दिया गया है। लक्ष्मी और कुबेर के साथ इस दिन धन्वन्तरि का पूजन हमें जीने का सलीक़ा सिखाता हैं।सनद रहे कि धन और वैभव का भोग बिना बेहतर सेहत के सम्भव नहीं है। लिहाज़ा ऐश्वर्य के भोग के लिये कालांतर में धन्वन्तरि की जो अवधारणा प्रकट हुई, वह नितांत वैज्ञानिक प्रतीत होती है।
धनतेरस का पर्व लोगों ने अपने घरों व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बड़े ही सौहार्दपूर्ण ढंग से विधिवत पूजा पाठ के साथ मनाया इस अवसर पर जनपद सोनभद्र के विभिन्न कस्बों बाजारों में खरीदारों की भीड़ आभूषण, बर्तन, मिठाई, कपड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मूर्तियों की दुकानों पर काफी भीड़ देखी गई।

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मनाई गई घनवन्तरी जयंती

हर्षवर्धन केसरवानी

रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र): श्री वैधनाथ आयुर्वेद भवन एंव कानोडिया औषघालय के संयुक्त तत्वाघान मे धनतेरस के दिन श्री घनवन्तरी जयन्ती मनायी गयी। आचार्य कृपा शंकर पाण्डे द्वारा विधिवत पूजन प्रतिष्ठIन के आधिष्ठाता विजय कानोडिया द्वारा कराया गया

। कम्पनी के प्रतिनिधि रितेश जायसवाल ने आये हुए सभी अतिथियो का स्वागत किया और बताया कि श्री वैधनाथ आयुवेद भवन विश्व की सबसे प्राचीन आयुर्वेद कम्पनी है और इसमे गुणवत्ता युक्त दवाओ का निमाण होता है | धन्वन्तरि जयन्ती आज धनतेरस का दिन है।

पूरे देश-विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोग आज धन अर्जित करने का दिन मानते हैं और खरीददारी करते हैं। कहीं बर्तन खरीदे जाते हैं तो कहीं कपड़े, कोई चांदी के सिक्के खरीदता है तो कुछ लोग सोने के आभूषण को सही धन मानकर उसको घर लाते हैं। समाज भौतिकवादी होता जा रहा है और धन की परिभाषा में उसे भौतिक चीजें दिखाई देने लगी हैं।

धनतेरस दो शब्दों से बना है धन्वन्तरि तेहरवा दिन तेरस यानी त्रयोदशी पर पड़ने वाले भगवान धन्वन्तरि की जयन्ती जिसे सरल भाषा में धन तेरस कहते हैं।
पुराणों में लिखा है कि जब मंत्राचल पहाड और वासु की सांप की मदद से देवों और असुरों ने समुद्र मन्थन किया, तो भगवान धन्वन्तरि अपने हाथ में अमृत क्लथ लेकर प्रकट हुए। इसीलिए इस दिन को भगवान धन्वन्तरि का जन्मदिवस मानकर धन्वन्तरि जयन्ती के रूप में मनाया जाता है।

असल धन स्वस्थ काया है, जो आयुर्वेद के दाता भगवान धन्वन्तरि आपको देते हैं। उन्होंने मानव जाति को स्वस्थ, खुशहाल जीवन जीने के लिए ही आयुर्वेद का जन्म किया।
आज के दिन पूरा वैद्य समुदाय भगवान धन्वन्तरि को याद करता है और उनकी अर्चना कर उनके बताये रास्ते पर चलते हैं। यहीं नहीं भारत के अधिकांश घरों में आज के दिन स्वस्थ रहने के लिए कोई न कोई उत्पाद खरीद कर घर लाया जाता है।

विष्णु भगवान के इस अवतार को जिनके एक हाथ में अमृत, दूसरे हाथ में जड़ी-बूटी, तीसरे हाथ में शंख और चौथे हाथ में आयुर्वेद ग्रन्थ को नमन करते हुए आज का दिन व्यतीत करें।
विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-धनतेरस आदिकाल से धनतेरस धन्वंतरी जयंती के रूप में मनाया जाता रहा है समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरी कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए थे और यह देवताओं के वैद्य थे।

धन्वंतरी जयंती (धनतेरस) आदिकाल से अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जाता रहा है।आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों में मानव जीवन के रक्षण का मंत्र छिपा हुआ है और आदि काल से लेकर आज तक यह चिकित्सा पद्धति भारतीयों के इलाज का मुख्य साधन रहा है, वर्तमान समय में यह पूरे विश्व में प्रचलित है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद ज्ञापित

उन्होंने आगे कहा कि-” भारत की प्राचीन आयुर्वेद पद्धति को संरक्षण, संवर्धन, विकास के लिए भारत सरकार द्वारा धनवंतरी जयंती को पूर्व मे आयुर्वेद दिवस के रूप में घोषित किया जा चुका हैऔर पूरा देश धन्वंतरी जयंती को आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाता आ रहा है।
डाo के के सिंह ने आवला के आयुर्वेदिक महत्व पर विधिवत प्रकाश डालते कहा कि- “नियमित अगर दो आवले का सेवन किया जाय तो तमाम रोगों से बचा जा सकता है।

इस अवसर पर वैद्यनाथ कंपनी के प्रतिनिधि रितेश जयसवाल आ गए संस्कृति लाइव चैनल के जिला संवाददाता हर्षवर्धन केसरवानी को सम्मानित किया।कनोडिया औषधालय के अधिष्ठाता विजय कनोडिया संचालक पंकज कनोडिया ने उपस्थित अतिथियो को उपहार प्रदान किया और उन्हे दीपावली की बधाई दिया।

कार्यक्रम मे मुख्य रुप से इन्द्र कुमार दूबे, गोपाल दत तिषाठी, वैघ सत्य नारायण मिश्रा, सुयश कानोडिया, विनोद झुननुझन वाला, नरेन्द्र झुनझन वाला, मनोज अग्रवाल, संजय जैन, गो२व जैन, अनिल सिंह, संस्कार, रविन्द्र सिंह, बालेश्वर सिंह आदि लोग उपस्थित थे॥

दुष्कर्म के दोषी डॉक्टर सुनील बैसवार को 10 वर्ष की कैद

• 55 हजार रुपये अर्थदंड, न देने पर होगी एक वर्ष की अतिरिक्त कैद

• अर्थदंड की समूची धनराशि नियमानुसार पीड़िता को मिलेगी

• चार वर्ष पूर्व घर में चाकू दिखाकर नाबालिग लड़की के साथ किया था मुंह काला

राजेश पाठक

रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र): चार वर्ष पूर्व घर में अकेली नाबालिग लड़की को पाकर चाकू दिखाकर जबरन दुष्कर्म करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी झोलाछाप डॉक्टर सुनील बैसवार को 10 वर्ष की कैद एवं 55 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं अर्थदंड की समूची धनराशि नियमानुसार पीड़िता को मिलेगी।

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अभियोजन पक्ष के मुताबिक जुगैल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 25 फरवरी 2017 को एसपी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी की तवियत खराब थी तो घोरावल थाना क्षेत्र के शिल्पी गांव निवासी झोलाछाप डॉक्टर सुनील बैसवार जो वर्तमान में जुगैल थाना क्षेत्र के कुरछा गांव में रहता है को बुलाया गया था।

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जब उसकी नाबालिग लड़की गिलास में पानी लेकर डॉक्टर को देने के लिए आयी तो डॉक्टर ने उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। जब इसकी जानकारी हुई तो डॉक्टर माफी मांगने लगा और कहा कि अब भविष्य में गलती नहीं होगी। तब मामला शांत हो गया। एक दिन घर पर अकेली उसकी नाबालिग लड़की थी तभी डॉक्टर सुनील बैसवार घर पर आ गया। आते ही बेटी से पूछा कि तुम्हारी मम्मी की तबियत कैसी है और कहां पर हैं।

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जब बेटी ने बताया कि मम्मी की तबियत ठीक है और वह घर पर नहीं है आप जाइए। इतना सुनते ही डॉक्टर सुनील ने बेटी के पेट पर चाकू सटा दिया, जिसकी वजह से बेटी डर गई और वह जबरन दुष्कर्म किया। जब वह चिल्लाने लगी तो शोरगुल की आवाज सुनकर कई लोग आ गए तो चाकू लहराते हुए जान मारने की धमकी देते हुए भाग गया।

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एसपी के निर्देश पर एक मार्च 2017 को जुगैल थाने में झोलाछाप डॉक्टर सुनील बैसवार के विरूद्ध दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज किया गया। विवेचक ने विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था।

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मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी झोलाछाप डॉक्टर सुनील बैसवार को 10 वर्ष की कैद एवं 55 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं अर्थदंड की समूची धनराशि नियमानुसार पीड़िता को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील दिनेश अग्रहरि एवं सत्यप्रकाश त्रिपाठी एडवोकेट ने बहस की।

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धन्वंतरी जयंती पर सम्मानित हुए दीपक केसरवानी

हर्षवर्धन केसरवानी

रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र): श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन एवं कनोडिया औषधालय के संयुक्त तत्वाधान धन्वंतरी जयंती का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम विंध्य संस्कृति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी को वैद्यनाथ कंपनी के सेल्स मैनेजर रितेश जयसवाल, कनोडिया औषधालय के संचालक/ समाजसेवी पंकज कनोडिया द्वारा उपहार एवं धनवंतरी जी का स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।

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विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-धनतेरस आदिकाल से धनतेरस धन्वंतरी जयंती के रूप में मनाया जाता रहा है समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरी कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए थे और यह देवताओं के वैद्य थे।

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धन्वंतरी जयंती (धनतेरस) आदिकाल से अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जाता रहा है।आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों में मानव जीवन के रक्षण का मंत्र छिपा हुआ है और आदि काल से लेकर आज तक यह चिकित्सा पद्धति भारतीयों के इलाज का मुख्य साधन रहा है, वर्तमान समय में यह पूरे विश्व में प्रचलित है।

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उन्होंने आगे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि-” भारत की प्राचीन आयुर्वेद पद्धति को संरक्षण, संवर्धन, विकास के लिए भारत सरकार द्वारा धनवंतरी जयंती को पूर्व मे आयुर्वेद दिवस के रूप में घोषित किया जा चुका है और पूरा देश धन्वंतरी जयंती को आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाता आ रहा है।

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कार्यक्रम मे बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन के इन्द्र कुमार दूबे, गोपाल दत तिषाठी, वैघ सत्य नारायण मिश्रा सहित सुयश कानोडिया, विनोद झुननुझन वाला, नरेन्द्र झुनझन वाला, मनोज अग्रवाल, संजय जैन, गो२व जैन, अनिल सिंह, संस्कार, रविन्द्र सिंह, बालेश्वर सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी विमल अग्रवाल ने किया।

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डाला नवनिर्माण सेना ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

संस्कृति लाइव संवाददाता, डाला (सोनभद्र): जम्मू कश्मीर में शहीद हुए लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार व उनके एक साथियों को युवाओं ने श्रद्धांजलि अर्पित किया।
श्रद्धांजलि सभा में डाला नवनिर्माण सेना के संरक्षक व छात्र संघ के पूर्व महामंत्री अनिकेत श्रीवास्तव ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए बताया कि बीते शनिवार को सेना के कंपनी कमांडर ने बेगूसराय निवासी राजीव रंजन को उनके पुत्र की शहादत की खबर फ़ोन पर दी।

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ऋषि कुमार व उनके साथी लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के करीब राजौरी के नौशेरा सुंदरवन सेक्टर में गश्त के दौरान हुए विस्फोट में शहीद हो गए थे। एक साल पहले ही ऋषि ने सेना ज्वाइन की थी। इस दौरान डाला नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष अमृत कुमार पटेल उर्फ़ अंशु पटेल ने कहा कि भारत मां के वीर सपूत वीर शहीद ऋषि कुमार और उनके साथी ने देश की सरहद की निगहबानी करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।

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देश उन्हें हमेशा याद रखेगा। युवाओं ने शहीदों की आत्मा की शांति हेतु दो मिनट का मौन रखा और शहीद की तस्वीर के आगे मोमबत्तियां जलाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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इस दौरान डाला नवनिर्माण सेना के उपाध्यक्ष श्रीकांत पांडे,अवनीश पांडे,चंदू नियाज़,गोविंद भारद्वाज,अहमद हुसैन,विक्की गुप्ता,अमित सिंह,संजय गुप्ता,सर्वेश पटेल,गंगा सागर,अनुपम सिंह,अज्जू,पारस यादव,अवधेशचौहान,नीरज,पंकज जायसवाल आदि मौजूद रहे।

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जिला अभिहित अधिकारी ने लिया खाद्य तेलों का नमूना

दुद्धी (सोनभद्): मुख्य सचिव के निर्देश पर जिला अभिहित अधिकारी सुशील कुमार सिंह के नेतृत्व में मंगलवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की चार सदस्यीय टीम ने दुद्धी क़स्बे में छापा मारा। इस दौरान ऑयल का नमूना लिया। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम का एकाएक क़स्बे में धमकने से हड़कंप मच गया। कई दुकानदार व स्टॉकिस्ट फरार हो गए। जिला अभिहित अधिकारी सुशील सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर बाजार में बिक रहे सरसों तेल व राइस ब्रान ऑयल की जांच की जा रही है। इसी क्रम में दुर्गा एजेंसी के गोदाम से भारी मात्रा में स्टॉक किये गए दो तेलों का नमूना लिया गया है। उन्होंने बताया कि-” लिए गए नमूनों को आगरा प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। मिलावटी तेल पाए जाने पर फर्म संचालक के खिलाफ अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
इस मौके पर मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय कुमार सिंह ,खाद्य सुरक्षा अधिकारी मयंक दुबे, क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार सोनकर उपस्थित रहें।

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बलात्कार व जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज

डाला (सोनभद्र): न्यायालय के आदेश पर चोपन थाने में एक ब्यक्ति के विरूद्ध किशोरी के साथ बलात्कार करने व जान से मारने का मुकदमा पंजीकृत किया गया।
चोपन पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार चोपन थाना क्षेत्र अन्तर्गत रहने वाली एक किशोरी ने न्यायालय में वाद दाखिल कर उसी के गाँव के रहने वाले एक ब्यक्ति पर आरोप लगाया था कि जब वह खेत से काम कर साम को अपने घर वापस लौट रही थी तो उसी गाँव का रहने वाला एक ब्यक्ति ने उसके साथ जबर्दस्ती बलात्कार कर किसी को न बताने की हिदायत दिया था और किसी से कहने पर उसे जान से मारने की धमकी दी थी। इस आश्य का न्यायालय से मिले आदेश के बावत चोपन थाने में धारा 376,504 व 506 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

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बलात्कार व जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज

संपर्क मार्ग का ग्राम प्रधान ने किया भूमि पूजन

जल्द बनेगी संपर्क मार्ग ग्रामीणों ले सकेंगे इसका लाभ

दुद्धी (सोनभद्र): दुद्धी विकासखंड क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत डूमरडीहा में मंगलवार को राम सुरेश टेलर के घर से महेश गौड़ प्राथमिक विद्यालय कंनकोडवा तक लगभग 1.5 किलोमीटर एवं दो पुलिया का निर्माण होने हेतु ग्राम प्रधान फूलपति देवी के साथ वार्ड 11 सदस्य अजय कुशवाहा एवं वार्ड 14 सदस्य अनीसा देवी ने संयुक्त रुप से ग्राम बैगा के द्वारा ग्राम देवताओं का आहवान, मंत्र उच्चारण व पूजा अर्चना के साथ भूमि पूजन तथा फावड़ा चला कर निर्माण कार्य शुभारंभ किया गया।

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इस दौरान ग्राम प्रधान ने कहा कि गांव में यह सड़क लगभग 1.5 किलोमीटर बनेगी। जिससे हमारी ग्रामीण जनता को इसका सीधा लाभ मिलेगा और इसके द्वारा कई किलोमीटर अनावश्यक रूप से जाने वाले मार्ग से ग्रामीणों को छुटकारा मिलेगा। जिससे हमारे गांव के ग्रामीण विकास की मुख्यधारा से सीधा जुड़कर विकास की ओर बढ़ेंगे। इस दौरान विश्वनाथ कुशवाहा ,भयराम सिंह गौड़, सोबरन सिंह गौड़, जमुना सिंह गौड, राजेश सिंह गौड़, महेश सिंह गौड़, राजेश सदस्य रूप नारायण कुशवाहा, सुभाष चंद्र कुशवाहा, पंचायत मित्र मेराज अहमद जेई विनोद शर्मा, सरोजा देवी, अनीशा देवी, सीता देवी राजकुमारी, सुमित्रा देवी सहित दर्जनों ग्रामीण उपस्थित रहे।

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हम कर्मयोगी बनेंगे तो आत्मनिर्भर बनेंगे

• सत्यनिष्ठा से आत्मनिर्भरता चुनौतियां एवं समाधान विषयक हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

संस्कृति लाइव संवाददाता, वाराणसी। केंद्रीय सतर्कता आयोग, भारत सरकार के मुहिम के तहत एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय द्वारा सोमवार को रथयात्रा स्थित नंदन भवन में सत्य निष्ठा से आत्मनिर्भरता चुनौतियां एवं समाधान विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। धार्मिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक राजधानी काशी में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में पधारे हुए विभिन्न वक्ताओं एवं अतिथियों का स्वागत एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय की ओर से सहायक प्रबंधक मानव संसाधन मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ने अंगवस्त्रम से किया तथा स्वागत उद्बोधन के दौरान कहा कि हमारे छोटे से मंदिर में बड़े-बड़े देवता पधारे हुए हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के महानिदेशक संजय द्विवेदी ने सत्य निष्ठा और आत्मनिर्भरता पर प्रकाश डालते हुए गांधी जी के दर्शन का जिक्र करते हुए बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने कहा था कि मेरा जीवन ही संदेश है। उन्होंने गीता के कर्म योग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जब हम कर्म योगी बनेंगे तो आत्मनिर्भर बनेंगे।

राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के सहायक निदेशक तेज स्वरूप त्रिवेदी ने कहा कि सत्य बताने की नहीं अपितु बरतने की जरूरत है। बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा चेन्नई के पूर्व कुलपति डॉ. राम मोहन पाठक ने कहा कि-” समर्पण एवं पारदर्शिता सत्य निष्ठा के महत्वपूर्ण आयाम हैं। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व निदेशक प्रोफेसर श्रद्धानंद ने कहा कि-” सत्य निष्ठा एवं आत्मनिर्भरता एक दूसरे के पर्याय हैं हमें गांधी जी के विचारों को आत्मसात करना चाहिए। आर्य महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ रचना दूबे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-” प्राचीन शिक्षा पद्धति में नैतिकता एवं सत्य निष्ठा पर विशेष जोर दिया जाता था। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय गया से पधारे असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. किंशुक पाठक ने कहा कि-” समर्थ एवं आत्मनिर्भर भारत के लिए सत्य निष्ठा आवश्यक है। राजकीय बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज चोलापुर की प्रधानाचार्या डॉ. निशा यादव ने कहा कि-” हमें बच्चों में नैतिक शिक्षा घर से ही देना चाहिए।
वाराणसी के विधिक सलाहकार प्रदीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि-” सबसे पहले हमें सत्य को अपने आचरण में उतारना चाहिए। राष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन कर रहे नागरिक पीजी कॉलेज जौनपुर से पधारे मनोविज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आनंद श्रीवास्तव ने भी अपने विचार अभिव्यक्ति के दौरान नैतिकता एवं सत्य निष्ठा की शिक्षा को बच्चों के साथ -साथ सभी के लिए आवश्यक बतलाया।
उक्त संगोष्ठी में दिल्ली से पधारे विधिवेत्ता देव स्वरूप त्रिवेदी, चिंतक एवं समाजसेवी आशुतोष आशुतोष धर दुबे, समाजसेवी रुपेश नागवंशी, क्रिएटिव मीडिया के निदेशक भरत गुप्ता एवं डॉ अर्चना सिंह, माही सिंह राजपूत, दिलीप श्रीवास्तव, दिनेश कुमार, अतुल जायसवाल आदि उपस्थित रहे।
सहायक प्रबंधक मानव संसाधन मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी ने किया छठ घाटों का औचक निरीक्षण

संस्कृति लाइव संवाददाता, डाला (सोनभद्र): महापर्व छठ के अवसर पर छठ घाट तट पर होने वाले महापर्व छठ पूजन की तैयारी जोर शोर से डाला नगर में शुरु हो गई। डाला नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी महेंद्र सिंह ने डाला नगर के छठ घाट नई बस्ती कुरदहवा नाला काली मंदिर छठ घाट सेक्टर सी हनुमान मंदिर छठ घाट का निरीक्षण किया और नगर पंचायत कमिर्यों को जल्द से जल्द साफ सफाई को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सभी छठ घाट पर मुकम्मल व्यवस्था की तैयारी की जा रही है। साफ सफाई के साथ ही पूरे घाट को आकर्षक लाईट झालरों से सजाया जाएगा।

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व्रतियों के स्नान के लिए उचित व्यवस्था के साथ टेंट भी लगाये जाएंगे।जिससे श्रद्धालुओं को सहूलियत मिले। 8 नवंबर 2021 नहाए खाए के साथ छठ महापर्व की शुरुआत हो जाएगी। नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी महेंद्र सिंह ने बताया कि छठ घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो इसका विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा।

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जिसको लेकर डाला नगर पंचायत हर कदम पर श्रद्धालुओं के सहयोग के लिए हर संभव मदद करने के लिए खड़ा रहेगी। इस दौरान डाला नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी महेंद्र सिंह, धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ सोनू, विशाल गुप्ता, गोबिंद गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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