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- विंध्य संस्कृति शोध समिति ने आयोजित की संगोष्ठी

सोनभद्र। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती यानी शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्य, कला, संस्कृति और पर्यावरण के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय ‘ विंध्य संस्कृति शोध समिति’ द्वारा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। साहित्यकार सदन में आयोजित इस कार्यक्रम में हास्य-व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर एवं राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज के पूर्व विज्ञान प्रवक्ता सुशील श्रीवास्तव “राही” को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

ट्रस्ट के संस्थापक निदेशक दीपक कुमार केसरवानी, वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञानेंद्र शरण राय, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आनंद नारायण सिंह तथा समाजसेवी हर्षवर्धन केसरवानी ने संयुक्त रूप से सुशील “राही” को माल्यार्पण कर अंगवस्त्रम, लेखनी तथा आध्यात्मिक कृति ‘यथार्थ गीता’ की प्रति भेंट कर सम्मानित किया।
सम्मान समारोह के उपरांत आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने शिक्षक दिवस की महत्ता और समाज निर्माण में गुरुओं की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजनीति में आने से पहले एक प्रख्यात दार्शनिक और शिक्षाविद थे,

जिन्होंने अपने जीवन के करीब 40 वर्ष अध्यापन को समर्पित किए। वर्ष 1962 में राष्ट्रपति बनने के बाद जब उनके शुभचिंतकों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई, तो उन्होंने इसे व्यक्तिगत रूप से मनाने के बजाय देश के सभी शिक्षकों को समर्पित करते हुए ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाने का सुझाव दिया। तभी से हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
संगोष्ठी में बोलते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञानेंद्र शरण राय ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों में सही और गलत की पहचान कराने के साथ अनुशासन और आत्मविश्वास का संचार करते हैं। वहीं डॉ. आनंद नारायण सिंह ने संत कबीर दास के दोहों का उदाहरण देते हुए गुरु महिमा का बखान किया और कहा कि विश्व के हर महान व्यक्तित्व के चरित्र निर्माण में गुरु की मुख्य भूमिका रही है।

समाजसेवी हर्षवर्धन केसरवानी ने कहा कि माता-पिता के बाद शिक्षक ही बच्चों के पहले सच्चे मार्गदर्शक होते हैं और एक सशक्त व ज्ञानी समाज के निर्माण में उनका योगदान अप्रतिम है। कार्यक्रम में अरविंद कुमार श्रीवास्तव, आयुषी श्रीवास्तव, राधा श्रीवास्तव, संजय गुप्ता तथा हरीकिशोर सहित कई साहित्यकार, कवि व समाजसेवी उपस्थित रहे।


































