HIGHLIGHTS
- धनुष यज्ञ प्रसंग सुन भावविभोर हुए भक्त, छठवें दिन की कथा में उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब

सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज स्थित बरैला महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित सातवें अभिषेकात्मक रुद्र महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ के छठवें दिन श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 8 बजे पीडब्ल्यूडी विभाग के यज्ञ कमेटी अध्यक्ष इंजीनियर अखिलेश चतुर्वेदी, साधना चतुर्वेदी, जितेंद्र त्रिपाठी, अमित शुक्ला और अभय त्रिपाठी द्वारा देवाधिदेव महादेव के भव्य रुद्राभिषेक और श्रृंगार पूजन के साथ हुई, जो सायंकाल 5 बजे तक चला।

इस दौरान हजारों की संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने मंदिर मंडप की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की। कथा के मुख्य प्रसंग ‘धनुष यज्ञ’ पर प्रकाश डालते हुए विंध्याचल से पधारे पंडित धर्मराज शास्त्री ने कहा कि जब यज्ञ की रक्षा के लिए कोई आगे नहीं आया, तब महामुनि विश्वामित्र स्वयं आगे आए

और राम-लक्ष्मण को राजा दशरथ से मांगने पहुंचे। उन्होंने शास्त्र सम्मत दान की महिमा बताते हुए कहा कि यज्ञ, कन्यादान और धर्म कार्यों के लिए सहयोग करना परम पुनीत कार्य है, इसलिए सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य करना चाहिए।

वहीं जौनपुर से पधारे पंडित प्रकाश चंद्र विद्यार्थी ने वैदिक रीति से संपन्न हुए भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म में वर्णित आठ प्रकार के विवाहों में ‘ब्रह्म विवाह’ सर्वश्रेष्ठ है, जिसमें लक्ष्मी स्वरूपा कन्या और विष्णु स्वरूप वर का पूजन कर कन्यादान किया जाता है।

महाराज जनक द्वारा किए गए कन्यादान का उल्लेख करते हुए उन्होंने मानस की चौपाई ‘पुत्री पवित्र किये कुल दोऊ, सुजस विमल यह कह सबकोऊ’ के माध्यम से बताया कि वह पिता अत्यंत भाग्यशाली होता है जिसे कन्यादान का अवसर मिलता है। गुरु वशिष्ठ और शतानंद जी के मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए विवाह प्रसंग को सुनकर भक्त जयकारों के साथ झूम उठे।

इस अवसर पर पूर्व विधायक इंजीनियर रमेश चंद्र दुबे, डॉ. जटाशंकर देव पांडे, सुरेश चंद्र शुक्ला सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। यज्ञ कमेटी के प्रबंधक पंडित सौरभ भारद्वाज ने बताया कि क्षेत्रीय जनता के सहयोग से आयोजित इस अनुष्ठान का समापन 13 अप्रैल को विशाल भंडारे के साथ होगा, जिसमें सभी भक्त आमंत्रित हैं।































