सोनभद्र। नगर स्थिति बांके बिहारी मंदिर में गोवर्धन पूजा का भव्य आयोजन मथुरा वृंदावन के तर्ज पर किया गया ,इस अवसर पर बांके बिहारी जी को 56 प्रकार का भोग, मेवा, मिश्री, दही, दूध, मक्खन इत्यादि का भोग लगाया गया और उनकी विधिवत पूजा, आरती श्रद्धालुओं द्वारा किया गया।
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इस अवसर पर उपस्थित महिला श्रद्धालुओं ने बांके बिहारी जी के सम्मान में विभिन्न प्रकार के लोकगीत ढोलक की थाप, करताल की ध्वनि पर गाया।
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ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान गोवर्धन इंद्र का घमंड चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया था और देवराज इंद्र द्वारा बरसाए गए जल से नगर वासियों को बाढ़ की विभीषिका से बचाया था और नागरिकों के जीवन की रक्षा किया था।
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बांके बिहारी मंदिर सहित नगर के श्री राम जानकी हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा महाबली हनुमान को 56 प्रकार का भोग, लड्डू, मिष्ठान आदि का भोग लगाया गया।
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इस अवसर पर मुख्य रूप से जितेन्द्र सिंह, पवन कुमार जैन, राकेश गुप्ता, प्रमोद गुप्ता, आनंद मिश्रा, धर्मवीर तिवारी, विजय कनोडिया प्रकाश केसरी,धर्मराज जैन, संगम गुप्ता, नरेंद्र गर्ग, राजेंद्र द्विवेदी, धर्मराज सिंह मनोज जालान ,मनीष खंडेलवाल आशीष अग्रवाल प्रदीप जायसवाल,सहित अन्य लोग उपस्थित रहें।
रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को स्त्रियों द्वारा भैया दूज का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने अपने भाई के लिए व्रत रखा और सार्वजनिक का स्थान, आंगन, पोखरा, तालाब,
नदी के किनारे खुले स्थान पर गोबर से जमीन पर अलंकरण बनाया, इस अलंकरण में मुख्य रूप से गोदना और उसके पुत्र की आकृति होती है,
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इन चित्रों में गोवर्धन भगवान गोपिया, नारायण, सूरज, चांद अन्य प्राकृतिक दृश्य स्त्रियां गोबर से करती है इसके साथ-साथ चौकीदार, ओखली मे गोबर से बने एक अलंकृत चौकियां बनाई जाती है जो सफेद रूई तथा सिंदूर से बनता है।
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इससे संबंधित हैं, लोकगीत गाती हैं और एक विचित्र परंपरा है कि अपने प्रिय को सकती हैं भैया खाऊं आदि गालियां देती है। साहित्यकार प्रतिभा देवी के अनुसार-“आज के दिन जिसको जितना सरापा जाएगा उसकी उतनी ही उम्रअधिक होगी वह अपने भाइयों का नाम का नाम लेकर उनके चिरायु होने तथा भाभी के सौभाग्य की कामना करती हैं,
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अलंकरण के मध्य में एक मूर्ति बनाती हैं,इसे गोधन कहते हैं, गोदना बनाने से जो गोबर बच जाता है उसे सभी बांट दिया जाता है स्त्रियां उस गोबर का गोल गोल पिंड बनाकर अप ने घर ले जाती हैं तथाअनाज भंडार में उसे रखी है ऐसी मान्यता है कि इससे अनाज बढ़ता है, खराब नहीं होता।
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इस पर्व पर अनेकों प्रकार की लोक कथाएं लोकगीत कहने, गाने की परंपरा हैभाई दूज से जुड़ी पौराणिक कथा: शिक्षिका तृप्ति केसरवानी का मानना है कि-“मान्यताओं अनुसार इस दिन मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के अनेकों बार बुलाने के बाद उनके घर गए थे।
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यमुना ने यमराज को भोजन कराया और तिलक कर उनके खुशहाल जीवन की प्रार्थना की। प्रसन्न होकर यमराज ने बहन यमुना से वर मांगने को कहा। यमुना ने कहा आप हर साल इस दिन मेरे घर आया करो और इस दिन जो बहन अपने भाई का तिलक करेगी उसे आपका भय नहीं रहेगा।
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यमराज ने यमुना को आशीष प्रदान किया। कहते हैं इसी दिन से भाई दूज पर्व की शुरुआत हुई। एक कथा के अनुसार भैया दूज वाले दिन यमुना अपने भाई से मिलने गई थी और यमराज ने उनसे प्रसन्न होकर उसे वर दिया था कि जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करेगा, वह यमलोक नहीं जाएगा है।
पूजा में भाग लेने वाली रीना देवी के अनुसार-” नरक चतुर्दशी एवं भैया दूज यमराज से संबंधित त्यौहार है और इस दिन यमराज को प्रसन्न करने के लिए पूजा पाठ हवन इत्यादि श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है। भारतीय लोक में यम के पूजा का विधि विधान है जो अपने आप में लोकजीवन, लोक कला, लोक साहित्य, लोक धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखता है
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गीता देवी का मानना है कि-“भारतीय मृत्यु के देवता यमराज की पूजा करते हैं यह परंपरा सिर्फ हमारे देश में ही कायम है और अनंत काल तक कायम रहेगी। दूज का पर्व भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। इस त्योहार को भाई टीका, यम द्वितीया आदि नामों से भी जाना जाता है।
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ये पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती हैं। मान्यता है कि इस दिन मृत्यु के देवता यम अपनी बहन यमुना के बुलावे पर उनके घर भोजन के लिए आये थे।
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बिहार में भाई दूज पर एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इस दिन बहनें भाइयों को डांटती हैं और उन्हें भला बुरा कहती हैं और फिर उनसे माफी मांगती हैं। दरअसल यह परंपरा भाइयों द्वारा पहले की गई गलतियों के चलते निभाई जाती है।
इस रस्म के बाद बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उन्हें मिठाई खिलाती हैं। कथा वाचिका अमरावती देवी के अनुसार-” भाई दूज के दिन भगवान श्री कृष्ण नरकासुर राक्षस का वध कर द्वारिका लौटे थे। इस दिन भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने फल,फूल, मिठाई और अनेकों दीये जलाकर उनका स्वागत किया था।
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सुभद्रा ने भगवान श्री कृष्ण के मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना की थी। इस अवसर पर बहनों ने पूजा आरती लोकगीत, भजन का गायन किया एवं रोली, फल, फूल, सुपारी, चंदन और मिठाई की थाली सजाईऔर चावल के मिश्रण से एक चौक तैयार कर किया,
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चावल से बने इस चौक पर भाई को शुभ मुहूर्त में बहनो ने भाई को तिलक लगा कर गोला, पान, बताशे, फूल, काले चने और सुपारी दिया और भाई की आरती उतारकर चना एवं मिठाई खिलाकर उनके दीर्घायु होने की प्रार्थना किया बदले में भाइयों ने अपनी बहन को उपहार भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।उपहार भेंट किया।
चिकित्सकों, अधिवक्ताओं समाजसेवियों ने पूजा में लिया भाग
चित्रगुप्त पूजन के संबंधित कथाओं का किया गया वाचन
सोनभद्र। चित्रगुप्त जयंती के अवसर पर रविवार को जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में सोनभद्र जनपद के हैनीमैन कहे जाने वाले होम्योपैथ चिकित्सक, समाजसेवी डॉक्टर जयराम लाल श्रीवास्तव द्वारा स्थापित जय प्रभा होमियो सदन में ब्रह्मा के पुत्र चित्रगुप्त जयंती का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
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इस अवसर पर वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉक्टर कुसुमाकर श्रीवास्तव ने बताया कि लोक मान्यताओं के अनुसार कायस्थ बंधु दीपावली के दिन अपनी कलम का प्रयोग बंद कर देते हैं और दीपावली के बाद यमराज के लेखाकार चित्रगुप्त की पूजा अर्चना करते हैं इसके साथ-साथ कलम दवात की पूजा करते हुए लेखन कार्य करते हैं।
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इस अवसर पर डॉ. कुसुमाकर श्रीवास्तव, दिवाकर श्रीवास्तव प्रभाकर श्रीवास्तव, इजी० शुभम श्रीवास्तव, कुसांग श्रीवास्तव, डॉ. समर्थ श्रीवास्तव, राहुल श्रीवास्तव, आदित्य, दिव्यम, साधना श्रीवास्तव,
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विनीता श्रीवास्तव लक्ष्मी श्रीवास्तव डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव, इंजी. नितिशा श्रीवास्तव, दिव्यांशी, पंखुड़ी श्रीवास्तव दीप्ति अदिति श्रीवास्तव अपनी पूजन समारोह में भाग लिया।
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इस अवसर पर प्रमिला देवी, शैलेंद्र चौबे, मुन्नू पांडे, बबूंदर रूबी खुशी आयुषी, संजय राजकुमार, दिनेश चौबे सहित अन्य भक्तगण उपस्थित रहे।
नगवां ब्लॉक में टैंकर परिचालन व हैंडपंप मरम्मत के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च, उठे उच्चस्तरीय जांच की मांग
सोनभद्र। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी “हर घर नल से जल” योजना के तहत जिले के अधिकांश गांवों में घर-घर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों ने भी लिखित रूप में पुष्टि की है कि उनके गांवों में नल से पानी आ रहा है और वे इसका लाभ नियमित रूप से उठा रहे हैं।
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इसके बावजूद नगवां ब्लॉक के कई ग्राम पंचायतों में टैंकरों से पानी आपूर्ति, समरसेबल और हैंडपंप मरम्मत के नाम पर सरकारी धन का बड़ा खेल सामने आ रहा है।
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सूत्रों के अनुसार, जब गांवों में पहले से ही पेयजल की आपूर्ति हो रही है, तो हर साल टैंकर संचालन और पंप मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का औचित्य क्या है? ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाए हैं और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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भारी भुगतान का आरोप
सूत्रों ने खुलासा किया है कि नगवां ब्लॉक में कई ग्राम पंचायतों को हर महीने टैंकर परिचालन के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया है। जबकि इन पंचायतों में नल जल योजना से नियमित पानी मिल रहा है।
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आरोप है कि ग्राम प्रधान, सचिव और एडीओ पंचायत की मिलीभगत से यह रकम गलत तरीके से खर्च की जा रही है।
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कुछ पंचायतों में तो पेयजल आपूर्ति 30 जून को बंद हो जाने के बाद भी अक्टूबर तक टैंकरों के नाम पर भुगतान जारी है।
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जवाब में टालमटोल
मामले में जब जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किया गया तो विभागों में जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल दी गई। सूत्रों का कहना है कि यदि टैंकर परिचालन के दिनों का जीपीएस डेटा और फोटो मांगे जाएं, तो विभाग के पास कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं होगा।
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जांच और कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के ग्रामीण समाजसेवियों ने जिलाधिकारी सोनभद्र से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कड़ी कार्रवाई की अपील की है, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके और गांवों में विकास के लिए वास्तविक कार्यों में निवेश हो सके।
सड़क सुरक्षा हेतु चलाए गए विशेष चेकिंग अभियान : विनोद कुमार
सोनभद्र। जनपद में महिला सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन को लेकर संचालित “मिशन शक्ति फेज 5.0” के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के आदेश पर क्षेत्राधिकारी यातायात डा० चारु द्विवेदी (नोडल अधिकारी-मिशन शक्ति) के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक यातायात
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विनोद कुमार द्वारा जनपदीय यातायात पुलिस द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ सड़क सुरक्षा नियमों के पालन हेतु सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान यातायात नियमो का उल्लंघन करने पर कुल 295 चालान किया गया।
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इन वाहनों के किए गए चालान जिसमें ब्लैक फिल्म-02 फॉल्टी नम्बर प्लेट-06 स्टंटबाजी-03 जातिसूचक शब्द- 01 अन्य धाराओं में (बिना हेलमेट, तीन सवारी, हूटर, जाति सूचक शब्द, बिना नंबर प्लेट, सीट बेल्ट न पहनना
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आदि)-284 वही टोटल चालान 295 किए गए है।
वहीं यातायात प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार ने बताया महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना सड़क सुरक्षा नियमों के पालन को सुनिश्चित करन अशोभनीय/असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना।
SP ने छठ घाटों का किया व्यापक स्थलीय निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी
सोनभद्र। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा द्वारा आगामी छठ महापर्व को लेकर थाना चोपन क्षेत्रान्तर्गत स्थित प्रमुख छठ घाटों का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया गया।
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निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक द्वारा घाटों की सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, गोताखोरों की तैनाती, भीड़ नियंत्रण तथा महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा आदि की बिंदुवार समीक्षा की गई।
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उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पूर्ण कर ली जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि छठ पर्व के दौरान नदी व तालाबों के घाटों पर पुलिस, पीएसी, जल पुलिस तथा स्थानीय गोताखोरों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही अग्निशमन दल, एम्बुलेंस, होमगार्ड, और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से निरंतर गश्त व निगरानी की व्यवस्था की जाए।
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पुलिस अधीक्षक ने यह भी निर्देशित किया कि घाटों पर आने-जाने वाले मार्गों पर यातायात सुगम रहे, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा विशेष रूप से व्यवस्थाएं की जाएं।
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उन्होंने यह भी कहा कि संवेदनशील घाटों पर कैमरों एवं सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाए तथा महिला पुलिस कर्मियों की पर्याप्त तैनाती के साथ मिशन शक्ति के तहत सतर्क दृष्टि रखी जाए।
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इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय, क्षेत्राधिकारी नगर, प्रभारी निरीक्षक चोपन, सहित पुलिस बल के अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। पुलिस अधीक्षक ने सभी को यह निर्देशित किया कि “सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य होगी।”
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अंत में उन्होंने स्थानीय नागरिकों से अपील की कि छठ पर्व जैसे धार्मिक आयोजन में शांतिपूर्ण, स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करें।
बाल हनुमान मंदिर में मनाया गया हनुमान जन्मोत्सव, सजा दिव्य दरबार
सोनभद्र। रविवार की देर शाम नगर के श्री राम अवतार उपवन (केडिया जी का बगीचा) में अवस्थित बाल हनुमान मंदिर पर हनुमान जन्मोत्सव का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया गया।
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इस अवसर पर मंदिर का भव्य श्रृंगार किया गया। इसके पश्यात निर्मल केडिया अनुज केडिया एवं किशोर केडिया सहित अन्य श्रद्धालुओं ने हनुमान जी की दिव्य आरती की। वहीं मंदिर परिसर में सुंदर कांड का पाठ भी किया गया।
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इस अवसर पर किशोर केडिया ने बताया कि हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है। पहली हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को अर्थात ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक मार्च या अप्रैल के बीच और दूसरी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी अर्थात नरक चतुर्दशी को अर्थात सितंबर-अक्टूबर के बीच।
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उन्होंने आगे बताया कि चैत्र पूर्णिमा को मेष लग्न और चित्रा नक्षत्र में प्रातः 6:03 बजे हनुमानजी का जन्म एक गुफा में हुआ था। मतलब यह कि चैत्र माह में उनका जन्म हुआ था।
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फिर चतुर्दर्शी क्यों मनाते हैं? वाल्मिकी रचित रामायण के अनुसार हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मंगलवार के दिन, स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था।
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एक तिथि को विजय अभिनन्दन महोत्सव के रूप में जबकि दूसरी तिथि को जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। पहली तिथि के अनुसार इस दिन हनुमानजी सूर्य को फल समझ कर खाने के लिए दौड़े थे, उसी दिन राहु भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया हुआ था लेकिन हनुमानजी को देखकर सूर्यदेव ने उन्हें दूसरा राहु समझ लिया।
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इस दिन चैत्र माह की पूर्णिमा थी जबकि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को उनका जन्म हुआ हुआ था। एक अन्य मान्यता के अनुसार माता सीता ने हनुमानजी की भक्ति और समर्पण को देखकर उनको अमरता का वरदान दिया था। यह दिन नरक चतुर्दशी का दिन था।
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हालांकि वाल्मिकीजी ने जो लिखा है उसे सही माना जा सकता है। श्रीराम के जन्म के पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था। इस अवसर पर मुख्य रूप से कार्यक्रम के संयोजक निर्मल केडिया, अनुज केडिया, हरिकिशोर केडिया, शुशील पाठक,शिखर केडिया, स्तुति संकल्प, तरुण, राघव, अंजू केडिया, सीमा, दीप्ति केडिया, साची बजाज, निताची अग्रवाल सहित अन्य श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।
सोनभद्र। सोमवार को जिले में प्रकाश पर्व दीपावली की धूम रही। इस दौरान रातभर आतिशबाजी का दौर चला और उल्लास व उमंग संग दीप जलाए गए। पूरा जिला दूधिया रोशनी से नहा उठा था। लोगों ने अपने घरों में जहां रंगोली बनाई वही दुकानों व प्रतिष्ठानों को रंग-बिरंगे झालरों की मदद से दुल्हन की तरफ सजाया गया। सुबह से ही दुकानों पर मिष्ठान व दीपावली के उपहार की खरीदारी के लिए लोगो की लम्बी कतारें लगी रही।
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बतादे कि बाजारों में पर्व को लेकर भारी उत्साह नजर आया जिसमे शहरी क्षेत्र के अधिकांश बाजारों में जाम की स्थिति बनी रही वही दूसरी ओर पुलिस भी पर्व को लेकर सतर्क नजर आई। सोनांचल में दीपावली के त्योहार को लेकर चहुंओर खुशी का माहौल रहा।
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शाम होते ही सोनांचल का हर कोना दूधिया रोशनी से जगमगा उठा। दीपावली के एक सप्ताह पूर्व से ही लोग घरों के रंग-रोगन के साथ ही विद्युत झालरों से सजाने -संवारने का कार्य प्रारंभ कर दिया था। दीपावली पर उनका यह प्रयास पूरी तरह परवान चढ़ता नजर आया।
जिला मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में शाम को मानो स्वर्ग की इंद्रधनुषी आभा जमीन पर उतर आई। एक से एक बढ़कर एक विद्युत झालरों के दूधिया रोशनी से सजाए गए मकान शहर की शोभा में चार चांद लगा रहे थे। इसके मध्य में दीपों की सजावट आभा को और बढ़ाती नजर आई।
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आवासों के साथ कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों व मंदिरों को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था। घरों में भक्तिभाव से भगवान श्रीगणेश व मां लक्ष्मी की वेद मंत्रोच्चार के मध्य विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। शाम होते ही छोटे-बड़े सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों में पूजा-पाठ का दौर चलता रहा।
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इस बीच पर्व की ग्रामीणों इलाकों में भी जबरदस्त धूम रही। महालक्ष्मी पूजन व दीपावली का पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या में प्रदोष काल, स्थिर लग्न समय में मनाया जाता है।
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इस दिन लोग धन की देवी महालक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए लक्ष्मी पूजन करते हैं। दीपावली के दिन की विशेषता मां लक्ष्मीजी के पूजन से संबंधित है। इस दिन हर घर, परिवार, कार्यालय में महालक्ष्मीजी का पूजन कर उनका स्वागत किया जाता है।
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लोग धन की देवी मां लक्ष्मी से समृद्धि व वित्तकोष की कामना करते हैं। पर्व को लेकर बाजार में चहल- पहल दिखाई दे रही थी।
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दीप जलाकर मिटाया अंधियारा दीपोत्सव पर शाम होते ही ज्योति के पर्व का उल्लास व उत्साह लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा। घरों से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठान रंग-बिरंगे झालर व मिट्टी के दीए जगमगा उठे। इस दौरान उजियारा फैलते ही चारों ओर अंधियारा मिट गया।
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फूल व मिठाई की दुकानों पर रही भीड़ दीपावली पर्व पर भगवान गणेश व महालक्ष्मी की पूजा के लिए फूलों की दुकानों पर भीड़ रही। सबसे अधिक कमल के फूल की डिमांड रही।
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दुकानदार भी मौका देखकर अधिक दामो में कमल के फूल बेचे रहे थे। गेंदा का माला 30 से 60 रुपये तक बिक रहा था। इसके अलावा मिठाई की दुकानों पर लोग मिष्ठान खरीदते रहे। कई दुकानों पर मिठाई खत्म हो गई। लोगों ने एक दूसरे को मिठाई संग सूखे मेवे आदि तोहफे में दिए।
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जमकर हुई आतिशबाजी
प्रकाश पर्व दीपावली पर रविवार को लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। शाम होते हुए संपूर्ण वातावरण पटाखों के धूम-धड़ाके से गुंजायमान हो उठा। वहीं आतिशबाजी को लेकर न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पुलिस सुबह से ही चौकस नजर आई।
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प्रकाश पर्व पर पटाखों का शोर व फूलझड़ियों की जगमगाहट न हो तो पर्व का उल्लास फीका रहता है। इस वर्ष भी माहौल अपेक्षा के अनुरूप रहा। वैसे तो चार दिन पहले से ही बच्चों द्वारा आतिशबाजी प्रारंभ कर दी गई थी, कितु दीपावली को आतिशबाजी का उमंग देखते ही बना। संपूर्ण वातावरण जहां पटाखों से शोर से गूंज रहा था वहीं पूरा आकाश रंग-बिरंगी रोशनी से मानो चहक रहा था।
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बीजपुर। सोमवार को दीपो का त्योहार दीपावली क्षेत्र के जरहा, नेमना, पिडारी, बकरिहवा, अंजानी, लीलाढेवा, डोडहर, सिरसोती, बीजपुर में धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पूरे दिन बाजारों में दुकानों पर खरीददारों की भीड़ उमड़ी रही।
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लोग एक दूसरे को मिठाईयां खिला बधाई देते नजर आए। क्षेत्र के बीजपुर बाजार के सब्जी मंडी में लगी पटाखों की दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई बच्चों ने मनपसंद पटाखे खरीदे। पटाखों की दुकानों पर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन किया गया।
सभी घरों की साफ-सफाई एवं रंग पोतन कर आकर्षक ढंग से विद्युत झालरों से सजाया गया था। शाम होते ही विद्युत झालर, द्वीप व मोमबत्ती से घरों को सजाकर लक्ष्मी-गणेश व मां काली की विधि-विधान से पूजन कर धनधान्य की कामना की गई।
अनपरा। ऊर्जांचल की औद्योगिक कालोनी समेत ग्रामीण इलाकों में धनधान्य की कामना के साथ लोगों ने दीपावली का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर लोगों की तरफ से मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए एक सप्ताह से तैयारियां की जा रही थी।
लोगों ने गणेश-लक्षमी की पूजा अर्चना के बाद मिठाईयां बांटकर एक दूसरों को शुभकामनाएं दी।बच्चों ने भी उत्साह व उमंग के पटाखे फोड़कर खूब मनोरंजन किया। अनपरा, रेणुसागर, ककरी, बीना, खड़िया, शक्तिनगर समेत अन्य जगहों पर मिठाई व सजावट की दुकानें सजी रही। बाजारों मे काफी चहल-पहल बनी रही। देर रात तक पटाखों की दुकानों पर भीड़ उमड़ी रही।
सोनभद्र। इस वर्ष दीपावली के अवसर पर बाजारों में ‘वोटर लिस्ट’ वाले पटाखों की जबरदस्त मांग देखी जा रही। इन पटाखों पर वोटरों की तस्वीरें और आईडी छपी हुई हैं, जिन्हें लोग सोशल साइट्स पर भी सर्च कर रहे हैं। यह एक नया चलन है, जो पारंपरिक पटाखों से हटकर है।
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भारत में दीपावली का पर्व भगवान श्रीराम के वनवास से अयोध्या लौटने और नगरवासियों द्वारा दीप जलाकर उनके स्वागत की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन घरों में लक्ष्मी-गणेश का पूजन किया जाता है। बदलते समय के साथ अब दीपक जलाने और पूजन के साथ पटाखे फोड़कर भी दीपावली मनाई जाती है।
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पहले देश में देवी-देवताओं की तस्वीरों वाले पटाखों का विरोध होता रहा है, लेकिन अब ‘वोटर लिस्ट’ वाले पटाखों ने बाजार में अपनी जगह बना ली है। इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
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वहीं, डाला परिक्षेत्र में खनन क्षेत्रों में दीपावली से पहले लगातार हुई जांच का स्थानीय व्यवसाय पर बड़ा असर पड़ा है। खनन और क्रशिंग कार्य प्रभावित होने से लोगों के रोजगार पर भी काफी प्रभाव पड़ा है, जिसका असर दीपावली पर बाजारों में खरीदारी में कमी के रूप में देखा जा रहा है।
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हालांकि, वाहनों की खरीदारी में तेजी देखी गई है। बाजारों में मिट्टी के बर्तन, बांस के बने खिलौने और आधुनिक सजावट के सामानों से दुकानें सजी हुई हैं। इलेक्ट्रॉनिक झालरें भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। सजावट के सामानों में आर्टिफिशियल फूलों की मांग भी काफी है।
खनन क्षेत्र में कार्य प्रभावित होने से लोगों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है। बाजारों में भीड़ तो देखी जा रही है, लेकिन खरीदारी कम होने से फुटकर व्यापारियों में मायूसी है।
सोनभद्र। जिले के करमा ब्लॉक स्थित मधुपुर सुकृत पुलिस चौकी के इंचार्ज रविकांत मिश्रा ने हाल ही में आदिवासियों के साथ दीपावली का पर्व मनाया। 20 अक्टूबर 2025, सोमवार रात करीब 8:30 बजे, मिश्रा ने मधुपुर क्षेत्र की आदिवासी बस्ती में पहुंचकर बच्चों और ग्रामीणों के साथ दीप जलाए और मिठाइयां बांटीं।
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इस अवसर पर चौकी इंचार्ज मिश्रा ने कहा कि दीपावली केवल रोशनी का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। उन्होंने जोर दिया कि जब सभी लोग एक साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं, तभी इस पर्व का वास्तविक अर्थ पूरा होता है।
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आदिवासी बस्ती के निवासियों ने पुलिस विभाग की इस मानवीय पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में पुलिस और जनता के बीच आपसी विश्वास और अपनापन बढ़ता है।
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बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक दीप जलाए और मिठाइयों का स्वाद चखकर अपनी खुशी व्यक्त की। इस दौरान क्षेत्र के कई ग्रामवासी और पुलिसकर्मी भी उपस्थित थे।
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सुकृत पुलिस चौकी की यह पहल समाज में भाईचारा और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम मानी जा रही है