HIGHLIGHTS
- नीति, सीबीबीओ और कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
देश में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की संख्या और उनके हजारों करोड़ रुपये के टर्नओवर के आंकड़ों के बीच जमीनी स्तर पर किसान की वास्तविक आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तेजस्वी संगठन न्यास के संस्थापक ई. प्रकाश पाण्डेय ने एफपीओ योजना, क्लस्टर आधारित व्यावसायिक सहायता संगठनों (सीबीबीओ) की भूमिका और वर्तमान प्रबंधन प्रणाली की आलोचना करते हुए कहा कि कागजों पर तो किसान संगठन बेहद मजबूत दिख रहे हैं,
लेकिन हकीकत में किसान आज भी बाजार और बिचौलियों की दोहरी मार झेलने को मजबूर है। वर्ष 2020 में दस हजार नए एफपीओ बनाने की महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रबंधकीय सहायता, अंश पूंजी अनुदान और ऋण गारंटी जैसे तमाम प्रावधानों के बावजूद बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि इन संगठनों से किसान की उत्पादन लागत में कितनी कमी आई, उसकी उपज का मूल्य कितना बढ़ा और उसके जीवन में क्या वास्तविक सुधार हुआ।

मैदानी आकलनों और धरातलीय अनुभवों के आधार पर यह बात सामने आई है कि दर्ज शेयरधारकों में से करीब 80 प्रतिशत किसान एफपीओ की वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। इसके अलावा स्वतः स्फूर्त ढंग से बने किसान संगठनों में जहां 70 प्रतिशत तक सक्रियता देखने को मिलती है, वहीं सरकारी योजनाओं से पोषित संगठनों में यह आंकड़ा कई इलाकों में महज 10 प्रतिशत के आसपास ही सिमट कर रह गया है।

अधिकांश एफपीओ अपनी मूल भूमिका—जैसे उपज की सीधी खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और सीधा विपणन करने में विफल रहे हैं तथा महज खाद, बीज व कीटनाशक बेचने वाली कृषि सामग्री की दुकानों तक सीमित होकर रह गए हैं, जिससे वे किसान और व्यापारी के बीच केवल एक और मध्यस्थ बनकर रह गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशिक्षण के प्रमाणपत्र बांटने, बड़ी बैठकें आयोजित करने या कुल टर्नओवर दिखाने से किसान का भला नहीं होने वाला, जब तक कि संस्था का शुद्ध लाभ सीधे किसान की जेब तक न पहुंचे। सीबीबीओ की जिम्मेदारी केवल संस्था का पंजीकरण कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए थी, बल्कि उन्हें व्यावहारिक बिजनेस प्लान लागू कर एफपीओ को आत्मनिर्भर बनाना था।

अब समय आ गया है कि नए एफपीओ बनाने के बजाय बने हुए संगठनों का स्वतंत्र व निष्पक्ष जमीनी मूल्यांकन किया जाए। कागजों से निकलकर खेत तक, शेयरधारक से लेकर सक्रिय किसान तक और केवल अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय वास्तविक व्यवसाय की ओर कदम बढ़ाने की सख्त जरूरत है, ताकि किसान केवल उत्पादक ही न रहे बल्कि सही मायनों में आर्थिक रूप से सशक्त उद्यमी बन सके।












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सोनभद्र। मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ सोनभद्र पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष “ऑपरेशन शुद्धि” के तहत थाना रॉबर्ट्सगंज पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने एक बड़े अंतर्राज्यीय गांजा तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी नगर रणधीर मिश्र के पर्यवेक्षण में कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने ओडिशा से दिल्ली ले जाया जा रहा 220 गांजा बरामद किया है, /






















