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- गौ रक्षा धर्म युद्ध यात्रा: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार को घेरा, गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग

सोनभद्र। गौ रक्षा धर्म युद्ध यात्रा लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सोमवार को सोनभद्र पहुंचे, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। यात्रा के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करते हुए शंकराचार्य ने सनातनियों को गौ रक्षा की शपथ दिलाई और वर्तमान सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया।

रॉबर्ट्सगंज में पूर्व विधायक रमेशचंद्र दुबे के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार गौ हत्या रोकने और धर्म-संस्कृति की रक्षा के नाम पर केवल दिखावा कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के समर्थन में नहीं, बल्कि गौ माता के सम्मान और जनजागरण के लिए है। शंकराचार्य ने दो टूक कहा कि जो भी गौ रक्षा और सनातन संस्कृति के लिए वास्तविक कार्य करेगा, वे उसके साथ खड़े रहेंगे।

इससे पूर्व ओबरा के राम मंदिर स्थित मानस भवन पहुंचे शंकराचार्य ने जनता से अपील की कि प्रदेश में गौ हत्या रोकने के लिए समाज को खुलकर आगे आना होगा। उन्होंने शास्त्र आधारित जीवन और मर्यादा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज धर्म के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है,

जिससे सावधान रहने की जरूरत है। गौ-सेवा और संरक्षण कार्यों को मजबूती देने के लिए उन्होंने प्रत्येक विधानसभा स्तर पर प्रतिनिधियों की नियुक्ति की घोषणा की, जिसके तहत ओबरा विधानसभा के लिए राकेश मिश्रा को जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान ओबरा में ईश्वरी नारायण सिंह, रामनिहोर यादव और दुर्गावती देवी सहित तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सांयकाल घोरावल क्षेत्र के मां शिव देवी पीजी कॉलेज पहुंचे शंकराचार्य का स्वागत प्रबंधक जयप्रकाश उर्फ चेखुर पांडेय ने किया। यहां अपने संबोधन में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से पुरजोर मांग की कि गाय को अविलंब ‘राष्ट्रमाता’ घोषित किया जाए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि गौ माता केवल पशु नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की आत्मा हैं।
उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जिस प्रकार गाय का खून और दूध एक पात्र में नहीं रह सकते, उसी प्रकार गौ हत्यारों के समर्थकों और गौ सेवकों की विचारधारा कभी एक साथ नहीं चल सकती। इस अवसर पर सांसद छोटेलाल खरवार, अविनाश कुशवाहा, श्रीकांत दुबे सहित भारी संख्या में श्रद्धालु और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन आचार्य प्रमोद चौबे और राकेश तिवारी ने किया।



































