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- विंध्य कैमूर वन क्षेत्र को बचाने के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को सौंपा पत्रक, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के नाम पर पहाड़ों और पर्यावरण से खिलवाड़ का लगाया आरोप

सोनभद्र। भारत सरकार के केंद्रीय राज्यमंत्री और भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सोनभद्र आगमन पर पर्यावरण विदों और स्थानीय प्रबुद्ध जनों ने उनसे मुलाकात कर जनपद के ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यावरणीय अस्तित्व को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण मांग पत्र सौंपा। पत्रक के माध्यम से प्रदेश अध्यक्ष को अवगत कराया गया कि सोनभद्र का विंध्य कैमूर तारिया वन क्षेत्र प्रागैतिहासिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद अनमोल है, जिसे सृष्टि के सृजन और मानव सभ्यता की उत्पत्ति स्थली के रूप में जाना जाता है।
इस पावन क्षेत्र में ओम पर्वत, गोमुख, बाबा मछंदर नाथ, ऐतिहासिक विजयगढ़ दुर्ग, गौ माता मंदिर और अमिलाधाम जैसे अनगिनत प्रमुख धार्मिक व पौराणिक स्थल मौजूद हैं, जो प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि इस अद्भुत हिल स्टेशन की खूबसूरती और भू-तात्विक महत्व को देखकर ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे ‘स्विट्जरलैंड’ की संज्ञा दी थी, जिसके बाद इसे सेंचुरी एरिया घोषित कर संरक्षित किया गया था। हाल ही में जनपद के दौरे पर आए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इसके प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर कहा था कि ‘सोनभद्र नहीं देखा तो भारत नहीं देखा’।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष को पर्यावरण के गंभीर संकट से रूबरू कराते हुए बताया कि यह वही सघन वन क्षेत्र है जहां से भारत की टाइमलाइन चलती है और जो कर्क रेखा के ठीक नीचे स्थित है। यह पूरा इलाका बरसात के बादलों को आकर्षित कर जल संचयन करता है, जहां से कर्मनाशा, घाघर और बेलन जैसी नदियों का उद्गम होता है। ये नदियां सोनभद्र और आसपास के कई जिलों की लाइफलाइन हैं, जिन पर बने बांधों से लाखों किसानों की आजीविका और सिंचाई व्यवस्था टिकी हुई है। लेकिन वर्तमान में इस अति-संवेदनशील क्षेत्र पर विनाश का काला साया मंडरा रहा है।

इस सेंचुरी एरिया में एक साथ आठ हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लगाने की अनुमति दिए जाने के कारण यह पूरा प्राकृतिक तंत्र गहरे खतरे में पड़ गया है। इस गंभीर विषय को लेकर खुद माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए इन परियोजनाओं को ऐसे स्थानों पर हस्तांतरित करने के लिए संबंधित विभागों को पत्र लिखा था, जहां पेड़ न हों या न के बराबर हों। सोनभद्र में ऐसे कई नंगे पहाड़ और बंजर इलाके मौजूद हैं, जहां आसानी से पच्चीसों हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।

पत्रक में स्थानीय जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया कि वर्तमान जिलाधिकारी द्वारा इस संवेदनशील मामले की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। बिना उचित अनुमति के ही इन सघन वनों और पहाड़ों की नापी करा दी गई और पहाड़ों में गहरे होल (ड्रिलिंग) कर दिए गए। इस मनमानी के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका भी दाखिल है, जिस पर निरंतर सुनवाई चल रही है।

आरोप है कि जब न्यायालय द्वारा इस मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी की गई, तो अधिकारियों ने आनंद-फानन में जनसुनवाई का ढोंग रचकर बैक डेट (पिछली तिथियों) में गलत तरीके से अनुमतियां जारी कर दीं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से वार्ता करते हुए पर्यावरण प्रेमियों ने स्पष्ट किया कि ये वन और पहाड़ कोई साधारण नहीं हैं, बल्कि भारत की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं।

मानव जीवन के अस्तित्व और भारत को बड़े पर्यावरणीय विनाश से बचाने के लिए इनका सुरक्षित रहना बेहद अनिवार्य है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मांग की कि वे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर इन विनाशकारी परियोजनाओं को सघन वन क्षेत्र से हटाकर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित कराएं और दोषियों के खिलाफ जांच सुनिश्चित करें।






































