• बीते शनिवार राजधानी लखनऊ में प्रियंका ने पार्टी के पदाधिकारियों के साथ मीटिंग की है।
• अब उम्मीदवारों से टिकट के लिए आवेदन मांगे गए हैं आवेदन के लिए 11 सितंबर से 25 सितंबर तक की तारीख रखी गई है।
लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव 2022 आने से पहले सभी दल जीत की तैयारियों में लग गए हैं। ऐसे में कांग्रेस भी अब एक बड़ा दांव खेलने जा रही है। जानकारी मिल रही है कि प्रियंका गांधी 30 सालों के बाद संगठन का पुनर्गठन कर सकती हैं। इसके लिए गांधी परिवार महाराष्ट्र के मॉडल पर काम करने वाला है। दरअसल, कुछ महीने पहले महराष्ट्र में कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उसी के साथ, 6 कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए गए थे। अब माना जा रहा है कि यूपी में भी इसी तर्ज पर काम होगा।
100 सीटों पर फोकस मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बताया जा रहा है कि कांग्रेस के कुछ लोग प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू से नाराज चल रहे हैं. ऐसे में चुनाव से चंद महीने पहले प्रियंका गांधी नहीं चाहतीं कि पार्टी में गुटबाजी हो. अब माना जा रहा है कि पार्टी के असंतुष्ट नेताओं और जातीय समीकरण को साधने जा रही है. वहीं, यह भी बताया जा रहा है कि यूपी की 403 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस पूरा जोर नहीं देगी, बल्कि सिर्फ 100 सीटों पर जीतने की तैयारी करेगी, ताकि वह बाकी पार्टियों के साथ गठबंधन की जरूरत बन सके.
कांग्रेस कम से कम 80 सीटें की कोशिश में याद हो, साल 2017 के चुनाव में कांग्रेस के पास 7 सीटें ही थीं। लेकिन इस बार कांग्रेस ज्यादा सीटें लाने के लिए पूरी ताकत लगाने वाली है। चुनाव में इस बार प्रियंका गांधी बड़ा चेहरा हैं। मीडिया द्वारा दी जा रही जानकारी के अनुसार, प्रियंका गांधी का यूपी प्लान एक और बड़ी चीज लेकर आ सकता है। माना जा रहा है कि इस बार कांग्रेस सिर्फ 100 जीतने वाले उम्मीदवार तलाश कर रही है। क्योंकि अगर 100 में से 80 सीट भी जीत जाती है, तो उसके बिना सरकार बनना मुश्किल हो जायेगा।
25 सितंबर तक करना होगा आवेदन गौरतलब है कि बीते शनिवार राजधानी लखनऊ में प्रियंका ने पार्टी के पदाधिकारियों के साथ मीटिंग की है। अब उम्मीदवारों से टिकट के लिए आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन के लिए 11 सितंबर से 25 सितंबर तक की तारीख रखी गई है।
• गुजरात सीo एमo विजय रुपाणी ने शनिवार को दिया इस्तीफा।
गुजरात,गांधीनगर : गुजरात के सीएम विजय रुपाणी के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद राज्यमें हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देर शाम अहमदाबाद पहुंचने वाले हैं। माना जा रहा है कि रविवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक हो सकती है।
विजय रुपाणी ने शनिवार को दिया इस्तीफा- बताते चलें कि गुजरात के सीएम विजय रुपाणी शनिवार को राज्यपाल भवन पहुंचे और गवर्नर को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने प्रेस वार्ता करके सारी बातें स्पष्ट की। रुपाणी ने कहा कि संगठन और विचारधारा आधारित दल होने के नाते बीजेपी में समय के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के दायित्व बदलते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि अब पार्टी उन्हें जो भी दायित्व देगी, उसका वे पूरी ऊर्जा के साथ निर्वहन करेंगे। विजय रुपाणी ने कहा, ‘हमारी सरकार ने पारदर्शिता, विकासशीलता और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया है. कोरोना के समय में हमारी सरकार ने जनता की यथासंभव मदद करने का प्रयास किया है।
बीजेपी ने रविवार को बुलाई विधायक दल की बैठक- उनके इस्तीफे के बाद बीजेपी ने रविवार को पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई है। इस बैठक में नए सीएम के नाम का ऐलान हो सकता है. चर्चाओं के मुताबिक इस रेस में डिप्टी सीएम नितिन पटेल, पुरुषोत्तम रुपाला, सी आर पटेल और मनसुख मांडविया के नाम आगे चल रहे हैं। इसके अलावा कोई नया नाम भी अचानक सामने आ सकता है।
विपक्षी विधायक जिग्नेश मेवाणी ने ली चुटकी- बीजेपी में अचानक हुई इस हलचल पर विपक्षी विधायक जिग्नेश मेवाणी ने चुटकी ली है।मेवाणी ने ट्वीट करके कहा, ‘गुजरात के सीएम विजय रुपाणी राज्य में कोरोना महामारी को कंट्रोल करने में फेल रहे थे। इसलिए प्रदेश की जनता को अब उनके इस्तीफे की सराहना करनी चाहिए। उनका इस्तीपा अगले साल राज्य में होने जा रहे चुनावों के गुणा-भाग को ध्यान में रखकर लिया गया है।
नई दिल्ली: आधार कार्ड आज के समय में भारत में एक अनिवार्य दस्तावेज है। इसके बिना आप कोई भी सरकारी या गैरसरकारी काम या फिर बैंक से जुड़ा कोई काम नहीं कर सकते हैं। इसलिए आपका आधार से जुड़े हर नियम पर अपडेट होना जरूरी है। यूआईडीएआई समय समय पर आधार कार्ड से जुड़ी हर जानकारी आप तक पहुंचता है जिससे आपको किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इसी बीच अब एक नया मामला सामने आया है कि क्या गाड़ी के नंबर की तरह आधार कार्ड का नंबर भी हम अपनी मर्जी से ले सकते हैं? आइए जानते हैं यूआईडीएआई ने क्या जानकारी दी है।
दिल्ली उच्च न्यायालय में लगाई गई अर्जी दरअसल, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने एक व्यापारी को नया आधार संख्या जारी करने की मांग संबंधी अर्जी का दिल्ली उच्च न्यायालय में विरोध किया है और कहा कि ऐसा अनुरोध लोगों द्वारा अपनी पसंद की वाहन पंजीकरण संख्या मांगने के जैसा होगा। नियम बदले गए तो क्या होगा? प्राधिकरण की ओर से पेश वकील जुहैब हसन ने न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष कहा, ‘यह किसी कार के लिए फैंसी नंबर प्लेट के डिमांड जैसा होगा। दरअसल, न्यायमूर्ति पल्ली एक अर्जी पर सुनवाई कर रही हैं जिसमें आरोप लगाया गया है कि आधार क्रमांक समेत याचिकाकर्ता के निजी विवरण के साथ समझौता किया गया है। यानी उन्हें उनकी मर्जी का आधार नंबर इशू किया जा रहा है।
हसन ने कहा कि वर्तमान ढांचा आधार कार्ड धारकों को ‘सुरक्षा के कई स्तर’ प्रदान करता है और यदि इस अर्जी को स्वीकार कर लिया गया तो बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आयेंगे जो अपना आधार क्रमांक बदलवाने की मांग करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता अपना मोबाइल नंबर और ई-मेल एड्रेस जुड़वाएं ताकि उसके आधार क्रमांक का गलत जगह उपयोग नहीं हो सके। आपको बता दें कि इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी।
• परियोजना के पहले चरण की लागत 200 करोड़ रुपये है।यहां विश्वस्तरीय सुविधाएं होगीं।
• सरदारधाम फेज-2 छात्रालय के तहत यहां बेहतर नौकरी के इच्छुक ग्रामीण क्षेत्रों के लड़कियों और लड़कों को हॉस्टल की सुविधा प्रदान की जाएगी।
अहमदाबाद, गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अहमदाबाद में सरदारधाम भवन का उद्घाटन किया। इसी दौरान सरदारधाम फेज-2 कन्या छात्रालय का भूमिपूजन भी किया गया। पीएम ने अपने संबोधन की शुरुआत देश में चल रहे गणपति उत्सव और जैन समाज के पर्युषण पर्व की शुभकामाएं देते हुए की।
अहमदाबाद को सौगात पीएम ने आज के कार्यक्रम के जरिये अहमदाबाद को कई सौगातें दी है। वहीं इस धाम के पहले चरण की लागत 200 करोड़ है। इसी तरह सरदारधाम फेज-2 छात्रालय के तहत यहां बेहतर नौकरी के इच्छुक ग्रामीण क्षेत्रों के लड़कियों और लड़कों को हॉस्टल की सुविधा प्रदान की जाएगी। एक सत्र में करीब 1600 छात्र-छात्राओं को फायदा होगा। पाटीदार समाज द्वारा बनवाए गए इस काम्प्लेक्स में बेहद कम खर्च पर ट्रेनिंग और रहने की सुविधा दी जाएगी।
सरदारधाम परियोजना सरदारधाम की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार अहमदाबाद में पहले चरण का निर्माण 200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पूरा किया गया है। यह अहमदाबाद-गांधीनगर सीमा क्षेत्र में वैष्णोदेवी सर्कल के पास 11,672 वर्ग फुट के क्षेत्र में बनाया गया है। विश्व पाटीदार समाज (वीपीएस) ने देश के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास पर ध्यान देते हुए किया था। यहां 1,600 छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा है। इसके अलावा 1000 कंप्यूटर के साथ ई-लाइब्रेरी, पुस्तकालय, डिजीटल क्लासरूम, जिम, ऑडेटोरियम, 50 लक्जरी कमरों का हॉस्टल समेत बिजनेस और पॉलटिकल मीटिंग्स के लिए भी सुविधाएं हैं।
विशेषताएं यहां 450 लोगों की क्षमता वाला ऑडेटोरियम, 1000 लोगों के बैठने के दो बहुउद्देशीय हॉल, इनडोर गेम्स और अन्य कई सुविधाएं मौजूद हैं। इस भवन के सामने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 50 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित है। सरदारधाम परियोजना के दूसरे चरण के अंतर्गत 200 करोड़ रुपये की लागत से अब यहां 2000 छात्राओं के लिए हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा।
ब्यूरो,सोनभद्र। देश की बिडंबना ही कही जाएगी कि आजादी के 74 साल के बाद भी हम अपनी युवा पीढ़ी के लिए स्वामी विवेकानंद को रोल मॉडल के रूप में पेश करने में नाकाम रहे हैं । यह बातें शिक्षाविद एवं हिंदी साहित्य के मर्मज्ञ प्रणेता और वरिष्ठ मंच संचालक भोलानाथ मिश्र ने शनिवार को शिकागो धर्म सम्मेलन के 128 वीं वर्षगांठ पर विशेष संवाददाता से बात चीत करते हुए कही। श्री मिश्र ने बताया कि 11 सितम्बर 1893 को अमेरिका के शिकागो में विवेकानंद ने भारतीय अध्यात्म की जो छवि पेश की थी ,उससे विश्व बिरादरी भारतीय चिंतन की कायल हो गई थी । कभी न भुलाया जा सकने वाला ऐसा युवा संत जिसकी कीर्ति भारत में ही नही दुनियां के अन्य देशों तक फैली उन्हें हम युवाओं के आइकॉन के रूप में प्रस्तुत नही कर सके हैं ।
भारत का एक ऐसा सच्चा संत सपूत जो शरीर से तो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन वे अपने विचारों से भारत के करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बना के बैठे हुए हैं । 128 साल पहले जो उन्होंने कहा था वही विषय आज आज़ादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में भी लोगो तक पहुँचाने के लिए सबसे बेहतरीन प्रेरक चिंतन है जिससे आज की युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सकती है । 11 सितंबर , 1893 को शिकागो में विवेकानंद ने अपने उदबोधन में कहा था साम्प्रदायिकता,असहिष्णुता और उसके भयावह वंशज कट्टरवाद ने लंबे समय से इस खूबसूरत धरती पर कब्जा कर रखा है । उन्होंने धरती को हिंसा से भर दिया है । इसे अक्सर खून से भिगोया , सभ्यता नष्ट की और पूरे राष्ट्र को निराशा में डाला । श्री मिश्र ने यह भी बताया कि स्वामी विवेकानंद ने भारत के समृद्ध इतिहास और मजबूत सांस्कृतिक जड़ो की तरफ समूचे संसार का ध्यान आकर्षित किया । अमेरिका की बहनों और भाईयों का संबोधन कर उनके वैश्विक भाईचारे का संदेश विश्व में गूंजा। श्री मिश्र जी यही नहीं रुके आगे यह अभी बताया कि विवेकानंद के विचार आज भी कितने प्रासंगिक है , इसे उनके इस कथन से समझा जा सकता है ‘मेरी राय में सर्व साधारण जनता की उपेक्षा एक बड़ा राष्ट्रीय पाप है,और यहीं कारण है, जिससे हमारा पतन हुआ है। कितना भी राज करे उस समय तक उपयोगी नही हो सकता,जब तक की भारती जनता फिर से अच्छी तरह सुरक्षित न हो जाय।
मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी (विशेष संवाददाता)
‘स्वामी विवेकानंद और गाजीपुर’ पुस्तक के लेखक विजयशंकर चतुर्वेदी कहते है कि मेरा मानना है देश के जन प्रीतिनिधि भी विवेकानंद के इस कथन से दिशा प्राप्त कर सकते हैं। हिन्दू धर्म की विश्व में पताका फहराने वाले ध्वज संवाहक स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ‘वह शिक्षा किसी काम की नही जिससे किसी व्यक्ति को दो वक़्त की रोटी न मिल सके’।चाहे गरीब को रोटी या रोजगार देना हो या बात राष्ट्रवाद की करनी हो, स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रासंगिक हैं । भोलानाथ मिश्र ने यह भी बताया कि विवेकानंद एक बार यह भी कहे थे ‘मनुष्य ही देश का निर्माण करते हैं । केवल भूखंड में क्या रखा है ? सामाजिक व राजनीतिक विषयों में जब तुम जापानियों के समान सच्चे होंगे, तब तुम भी जापानियों की तरह बड़े हो जाओगे । जापानी लोग अपने देश के लिए सब कुछ निछावर करने को तैयार रहते हैं। इसलिए वे बड़े हो गए हैं । 2021 की युवा पीढ़ी स्वामी विवेकानंद को आईकॉन मानने लगे इसके लिए भारत सरकार को स्वामी जी के आदर्शो को उनके समक्ष उदाहरण बनाकर प्रस्तुत करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में जब हम 2022 को 15 अगस्त के दिन आज़ादी के 75 वें साल में अमृत महोत्सव मनाएंगे तो अमृत की एक बूंद के रूप में किया गया यह प्रयास भी अमृत के रूप में साबित होगा!
भोलानाथ मिश्र ( शिक्षाविद, समालोचक एवं वरिष्ठ पत्रकार)
रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र। सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक स्थलों से भरपूर सोनभद्र जनपद के मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज मे जन्मे हिंदी- उर्दू भाषा के महान साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद “खादिम” का नाम हिंदी- उर्दू साहित्यकाश में सूर्य की तरह दीप्तिमान है। पराधीन भारत में भारत माता की हथकड़ी एवं बेड़ियों को तोड़ने के लिए अपनी हिंदी- उर्दू कविताओं, ग़ज़लों के माध्यम से अंग्रेजो के खिलाफ मोर्चा लेने के लिए जज्बा जगाने वाले,स्वाधीनता आंदोलन में तन मन धन न्योछावर करने की प्रेरणा देने वाली विश्वनाथ प्रसाद “खादिम”( बीएन बाबू) का नाम आजादी के 74 वर्ष व्यतीत होने के बाद भी साहित्य प्रेमियों के दिलों दिमाग पर छाया हुआ है। आज जब पूरे देश में आजादी के 75 वी वर्षगांठ के 75 हफ्ते पूर्व आजादी के अमृत महोत्सव पर्व का शुभारंभ हो चुका है ऐसे में प्रख्यात शायर, साहित्य, कला प्रेमी, विश्वनाथ प्रसाद “खादिम” द्वारा रचित रचनाओं के माध्यम से उनके साहित्यिक जीवन को जानना आवश्यक हो जाता है। जिन्होंने हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता दिलाने के लिए देश के जाने माने साहित्यकार काका कालेकर, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविंद दास, व्यवहार राजेंद्र सिंह के आंदोलन को समर्थन देते हुए मिर्जापुर जनपद के साहित्यकारों के साथ मिलकर आंदोलन चलाया और इस आंदोलन के परिणाम स्वरूप हिंदी भाषा को भारतीय संविधान में राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता मिली।
हिंदी- उर्दू भाषा के महान साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद “खादिम” (फाइल फोटो)
14 सितंबर 1949 को मूर्धन्य साहित्यकार व्यवहार राजेंद्र सिंह के 50 वें जन्मदिन को हिंदी दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। हिंदी को भारत के प्रत्येक भाग में प्रसारित करने के लिए 14 सितंबर 1953 से हिंदी दिवस मनाए जाने की परंपरा की शुरुआत हुई। हिंदी दिवस के अवसर पर साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद खादिम विचार गोष्ठियों का आयोजन आजीवन करते रहे। वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार- “इनका जन्म 27 दिसंबर सन 1910 ईस्वी को नगर के संभ्रांत वैश्य परिवार के कांग्रेसी नेता एवं रॉबर्ट्सगंज टाउन एरिया के प्रथम चेयरमैन बद्रीनारायण के घर में हुआ था। घर के सभी सदस्य स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े हुए थे। इनकी शिक्षा हिंदी और उर्दू भाषा में रॉबर्ट्सगंज में संचालित एवं सन 1906 में स्थापित मिडिल स्कूल में हुआ था। इनको अपने परिवार से देश सेवा, समाज सेवा और साहित्य सेवा की शिक्षा प्राप्त हुई थी, बचपन से ही इन्होंने देश भक्ति कविताओं को लिखना शुरू कर दिया था, युवा होने पर इन्होंने अपने व्यवसाय के साथ- साथ हिंदी और उर्दू भाषा में कविताएं एवं गजल लिखना शुरु कर दिया। उस समय देश पर अंग्रेजों का राज था और नगर में स्वतंत्रता आंदोलन की धूम मची हुई थी खादिम साहब युवाओं में उत्साह जगाने के मकसद से काव्य लेखन किया करते थे, इनकी कुछ गजलें, कविताएं आज भी लोगों के जुबान पर हैं-
राजा दौड़े पुलुर पुलुर, नेता दौड़े डुगुर डुगुर।
किंग को चर्चिल मुबारक, ऐमरी को इंडिया। हम गरीबों को मुबारक, वाई डी गुंडेबिया।
सर हथेली पर लेकर आगे बढ़े, कौन जाने यह सिर रहे ना रहे। अन्न माता का खाते हो खाते रहो, पर समय पड़े तो सर कटाते रहो।
मुसाफिर अगर हिम्मत ना हारे, ताजुब नहीं उसको मंजिल पुकारे।
देशभक्ति उत्साह उत्तेजना से भरी हुई कविताओं लेखन एवं खुले मंच पर काव्य पाठ के कारण यह कई बार ब्रिटिश पुलिस के आक्रोश एवं प्रताड़ना की शिकार भी हुए। अंग्रेजों की प्रताड़ना एवं आक्रोश से बचने के लिए इनके संचालन में रामलीला मंच पर देश भक्ति एवं समाज को शिक्षा देने वाले नाटकों का प्रदर्शन आरंभ हुआ इसमें यह खुद अभिनय करते थे और खजडी पर देशभक्ति से ओतप्रोत कजरी का गायन कर समाज को स्वतंत्रता आंदोलन में सहभागिता के लिए प्रेरित करते थे। खादिम साहब ने देश के नामचीन शायरों, कवियों के साथ मंच पर काव्य पाठ किया है जिसमें फिराक गोरखपुरी, सूफी चुनारवी, अनवर मिर्जापुरी, दिल लखनवी, राज इलाहाबादी, साहिबा बानो, भज्जी, शिवनाथ बनारसी, तेज बनारसी आदि कवियों का नाम प्रमुख रूप से सम्मिलित है। इनकी एक कविता की चंद लाइने- जब भी छेडा दर्द ने दिल को, अश्क पलकों पर मुस्कुराए हैं। जब भी आवाज दी तूफा नै, हम किनारे से लौट आए।
भारत चीन युद्ध के अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय चेतना से भरपूर कविताएं लिखी- जाग जा तू अरे हिंद के नौजवा, तुझको आवाज देकर बुलाती है मां। देख लिया गया सर पर तेरे अदू, फिर भी गफलत में मे सोया है। तू लूट न जाए कहीं मुल्क की आबरू, खौलता क्यों नहीं अब भी तेरा लहू। याद कर याद कर अपनी कुर्बानियां, तुझको आवाज देकर बुलाती है मां। विश्वनाथ प्रसाद “खादिम” एक साहित्यकार होने के साथ-साथ समाजसेवी भी थे,साहित्यिक कार्यक्रम के आयोजन क्रम में प्रतिवर्ष होने वाले जन्माष्टमी, शंकर मंदिर पर होने वाली झांकी मे इनके परम सहयोगी शिव शंकर प्रसाद केसरवानी मुख्य भूमिका होती थी और कवि सम्मेलन, मुशायरा, कजली, बिरहा आदि सांस्कृतिक कार्यक्रम में इनकी मुख्य भूमिका रहती थी। आजीवन “नेकी कर दरिया में डाल वाले” पथ पर चलते रहें और कभी अपनी रचनाओं का संकलन इन्होंने नहीं किया। इनकी मृत्यु कैंसर जैसे असाध्य रोग के कारण 11 फरवरी 1967 ईस्वी को पैतृक आवास रॉबर्ट्सगंज में हुई। इनके देहावसान के पश्चात देश के नामी-गिरामी साहित्यकारों, कवियों ने पत्र के माध्यम से अपनी शोक संवेदना व्यक्त किया था। वर्ष 2011 में जिला प्रशासन सोनभद्र द्वारा आयोजित सोन महोत्सव के अवसर पर प्रकाशित स्मारिका के लिए जब इनकी रचनाओं की खोज की जाने लगी तो बमुश्किल से एक क्षतिग्रस्त डायरी प्राप्त हुई और उस डायरी में लिखित कविता का प्रकाशन स्मारिका में हुआ। शोधकर्ता, साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी प्रयासों से लोकवार्ता शोध संस्थान के सचिव डॉक्टर अर्जुनदास केसरी के संपादन में उनकी कविताओं, गजलो पर आधारित लघु कृति “खादिम एक खुशबू” का प्रकाशन किया गया। जिसका विमोचन विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के कार्यालय में आयोजित हुआ इस विमोचन समारोह में जनपद के नामी-गिरामी साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी उपस्थित रहे।
• नगर के स्वर्ण जयंती चौक पर चेतक कंपनी के खिलाफ व्यापारियों ने पुतला दहन करकियाप्रदर्शन।
• व्यापारियों में है अक्रोश, 6 शाल फ्लाईओवर बने हो गए लेकिन अभी तक स्ट्रीट लाइट और सी. सी. टीवी कैमरे नही लगाए गए।
• व्यापारियों ने चेतावनी दी अगर 1 माह के अंदर ओवर ब्रिज पर लाइटिंग एवं कैमरे की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई तो आंदोलन को ओर उग्र किया जाएगा ।
हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)
रॉबर्ट्सगंज,सोनभद्र। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल रॉबर्ट्सगंज द्वारा शुक्रवार को नगर के स्वर्ण जयंती चौक पर चेतक कंपनी के खिलाफ पुतला दहन कर प्रदर्शन किया गया। नगर अध्यक्ष कौशल शर्मा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि-” नगरवासी छोटी-छोटी समस्याओं से जूझ रहे है परंतु समस्याओं का निदान नहीं किया जा रहा है। ए.सी.पी का फ्लाईओवर बने लगभग 6 वर्ष हो गए कई घटनाएं ऐसी घटी जिसका आज तक पर्दाफाश नहीं हो सका। 6 वर्षों से लगातार व्यापार मंडल फ्लाईओवर एवं हाईवे पर लाइटिंग एवं सी. सी. टीवी कैमरे की मांग करता चला आ रहा है जगह जगह शटरिंग किए हुए पुल पर पत्थर लटक रहे हैं कभी भी यदि यह पत्थर गिरा तो राहगीर की जान भी जा सकती जनपद की एकमात्र नगर पालिका परिषद नगरपालिका रॉबर्ट्सगंज के कार्यालय से खतौनी रजिस्टर गायब हुए वर्षों बीत गए F.I.R भी हुआ परंतु आज तक कार्यवाही नहीं हो सकी। पूरा नगर नजूल की समस्या से जूझ रहा है परंतु पता नहीं किस कारणों से फ्री होल्ड की कार्यवाही रोक दी गई है नगर के नई बस्ती एवं धर्मशाला पर जरा सी बारिश होने पर पूरा जलभराव हो जाता है जिसके कारण जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। व्यापारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 1 माह के अंदर ओवर ब्रिज पर लाइटिंग एवं कैमरे की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई तो आंदोलन को ओर उग्र किया जाएगा । प्रदर्शन में विमल अग्रवाल, चंदन केसरी, जसकीरत सिंह, राधेश्याम बंका, कृष्णा सोनी, आसिफ वारसी, सूर्या जायसवाल, दीप सिंह, अजय बहादुर सिंह, बलकार सिंह, प्रशांत, सिद्धार्थ सहित अन्य व्यापारीगण उपस्थित रहे।
• समारोह मेंदेश के कई राज्यों से आए साहित्यकारों ने अपना वक्तव्य दिया।
• समारोह में संगीत के कलाकारों ने मोहा सबका मन, मंत्रमुग्ध कर देने वाली दी प्रस्तुति।
• मुख्य वक्ता ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा भौतिकता के विकास में हम न भूल पर्वों की जड़ें।
ब्यूरो, प्रयागराज। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान की ओर से शनिवार को दो दिवसीय रजत जयंती समारोह का शुभारंभ हिंदुस्तानी एकेडेमी में हुआ। समारोह का उद्घाटन अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस अवसर पर काव्य सम्राट प्रतियोगिता, पुस्तक विमोचन और भारतीय त्योहारों की वैज्ञानिकता विषय पर संगोष्ठी एवं उपाधि एवं सम्मान समारोह आयोजित की गई।
उद्घाटन सत्र में सरस्वती वंदना श्रीमती नुपूर मालवीय ने प्रस्तुत की। सर्वप्रथम काव्य सम्राट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। उसके बाद ‘भारतीय त्योहार एवं उनकी वैज्ञानिकता’ विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया। उ0प्र0 के सोनभद्र जिले से आए हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ओमप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि भारत का अतीत गौरवशाली रहा है। यहां का प्रत्येक दिन किसी न किसी पर्व, त्योहार से पूर्ण है। यहां की प्रकृति एवं प्राकृतिक वस्तुएं मानव जीवन के लिये संजीवनी है। यहां के समस्त पर्व न केवल पूरी धरा को कुछ नवीन स्वरुप देते है वरन मानव और प्रकृति के बीच अन्योन्याश्रित सम्बन्ध के द्वारा पूरी धरा को अनुपम वरदान स्वरुप आबद्ध किए है। बिहार के पटना जिले से आई प्रो0 सुधा सिन्हा ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय त्योहार अपनी वैज्ञानिकता की सिघूफा के साथ जनमानस में सौहाद्र की भावना निर्माण करती है। वे हमें आध्यात्मिक बनाते है। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ0 विनय कुमार पाठक ने कहा कि भारतीय त्योहार वैज्ञानिकता से युक्त है, जो प्रकृति से परिपूक्तता बनाए हुए जीवन दर्शन को पुष्ट करते है। वहीं छत्तीसगढ़ से आई हुई डॉ0 अनूसूया अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि युगों से भारत के पर्वोत्सव राष्ट्रीय चेतना और एकता के प्रतीक, यहाँ के सांस्कृतिक चेतना के आध्यात्मिक रुप रहे है। भारत के जनमानस ने प्रकृति से अपना सीधा और सगा नाता जोड़े रखा है और यहां के प्राकृतिक उपादानों सूर्य, चंद्र, नदी, पहाड़, पेड़-पौधों की निरंतर पूजा पर्वोत्सव के उपलक्ष्य में होती है। ये पर्वोत्सव हमारी बौद्धिक चेतना व आंतरिक उर्जा को परिपुष्ट करते है। परिचर्चा की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य, डॉ0 शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख, पुणे ने कि भारतीय त्योहार पूरे विश्व में मनाए जाते है। इन त्योहारों के उपलक्ष्य में पारस्परिक रूप से जुड़ते हुए हम हर्षोल्लास के साथ त्योहार मनाने के साथ भारतीय संस्कृति का पालन भी करते है। प्रारंभ में संस्थान के सचिव डॉ0 गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने प्रस्तावना में विषय के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
समारोह का दूसरा दिन देवनागरी लिपि लिप्यंतरण की दृष्टि से अत्यंत सरल व व्यवस्थित होने के बावजूद देवनागरी लिपि में लिप्यंतरण तो नहीं, बल्कि उसका व्यापकस्तर पर लोकातंरण हो रहा है। यह बड़े आश्चर्य की बात है। इस आशय का प्रतिपादन हिंदुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज के अध्यक्ष डा. उदय प्रताप सिंह, राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त, उ.प्र.सरकार ने किया। वे विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के रजत महोत्सव के भौतिक समारोह में अध्यक्ष के रूप में अपना मंतव्य दे रहे थे। डा. सिंह ने आगे कहा कि, पच्चीस वर्ष का यह संस्थान युवावस्था में पहुंचा है, जिससे संस्थान में नए उमंग व उल्लास का भाव दिखाई देता है। देश की स्वैच्छिक हिंदी संस्थाएं ऐसा प्रयास करें कि हिंदी के माध्यम से देश व संस्कृति मजबूत हो जाये हैं। ‘हिन्दी प्रेम की भाषा है। भाईचारे की भाषा है। सद्भाव की भाषा है। हिन्दी लोकजन की भाषा बनेगी तब और समृद्ध होगी। देवनागरी लिपि वैज्ञानिक लिपि है। लेकिन वास्तव में देवनागरी की बजाय रोमन का प्रयोग किया जा रहा है। उक्त उद्गार आयोजन की अध्यक्षता कर रहे डा0 उदय प्रताप सिंह ने कहीं।
आयोजन के दूसरे सत्र का शुभारंभ निशा ज्योति संस्कार भारती विद्यालय के छात्राओं दीपिका गुप्ता, दिव्यांशी साहू, शिवांशी मिश्रा और रिया मौर्या द्वारा सुमधुर स्वरों में सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि राजभाषा आयोग, छ.ग. के पूर्व अध्यक्ष डा. विनय कुमार पाठक, विशिष्ट अतिथि किशोर न्यायालय के सदस्य ओमप्रकाश त्रिपाठी तथा अध्यक्षता कर रहे हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) डा. उदय प्रताप सिंह ने की। मंच पर संस्थान के अध्यक्ष डॉ0 शहाबुद्दीन नियाज़ शेख भी मंचासीन रहे। द्वितीय सत्र में संस्थान के कुलगीत का लोकार्पण अध्यक्ष डॉ0 उदय प्रताप सिंह ने किया।
वही संस्थान के रजत स्मारिका का विमोचन डॉ0 उदय प्रताप सिंह, डॉ0 विनय कुमार पाठक, ओम प्रकाश त्रिपाठी, डॉ0 शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख, डॉ0 गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी एवं डॉ0 मुक्ता कान्हा कौशिक द्वारा किया गया। इस अवसर पर राकेश मिश्रा की पुस्तक ‘मुक्तक माला’ का लोकार्पण भी किया गया। समारोह में काव्य सम्राट प्रतियोगिता का भी अयोजन किया गया। प्रतियोगिता कई प्रतिभागियों ने भाग लिया। जिसमे की पुष्पा श्रीवास्तव प्रथम स्थान प्राप्त कर शैली काव्य सम्राट की विजेता बनी और दूसरे स्थान पर डा. वन्दना श्रीवास्तव वान्या-लखनऊ, तीसरे स्थान पर अर्चना कृष्ण पांडेय रहीं। काव्य सम्राट प्रतियोगिता प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली पुष्पा श्रीवास्तव को अतिथियों द्वारा सम्राट की पगड़ी, 11000/रुपये नगद, स्मृति चिह्न, अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया।
वही लघुकथा प्रतियोगिता में संयुक्त स्थान पाने वाली संतोष शर्मा ‘शान’-हाथरस, उ.प्र तथा पूनम रानी शर्मा-कैथल, हरियाणा को दो हजार पांच सौ रुपये देकर लघु कथा सम्राट से सम्मानित किया गया।
आयोजित समारोह में साहित्यिक विभूतियों को सम्मानित किया गया जिसमें डॉ0 चन्द्र देव कवडे़-औरगाबाद, महाराष्ट्र, डॉ0 विनय कुमार पाठक-रायपुर, छ0ग0, नागरी लिपि परिषद-नई दिल्ली, डॉ0शांति चौधरी-प्रयागराज को रजत पदक, साहित्य रत्न- कुशलेन्द्र श्रीवास्तव-नरसिंहपुर, म.प्र., साहित्य श्री, डॉo सीमा वर्मा-लखनऊ, उ0प्र0, शिक्षकश्री-डॉoसिकन्दर लाल- प्रतापगढ़, उ.प्र., डा0 अन्नपूर्णा श्रीवास्तव-पटना, बिहार, डॉ0 राम नरेश सिंह ‘मंजूल’ -बस्ती, उ0प्र0, विजय कृष्ण त्रिपाठी-प्रयागराज, उ0प्र0, दीप्ति मिश्रा- प्रयागराज, उ0प्र0 को तथा कलाश्री जयराम पटेल-छ.ग. रहे।
समारोह में रामचंद्र-पुणे, महाराष्ट्र, कुसुम वर्मा-लखनऊ, वेदांग उदय कुलकर्णी-औरंगाबाद, महाराष्ट्र, सुधांशु अनंत परलीकर-औरंगाबाद, महाराष्ट्र, प्रमोद वसल-समाजश्री, डॉ0 सुनीता सिंह को शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया और आभासीनृत्य प्रतियोगिता में प्रथम आने पर समृद्धि तिवारी, प्रयागराज को प्रथम तथा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रथम आने पर शुभ द्विवेदी-प्रयागराज को सम्मानित किया गया। पवहारी शरण द्विवेदी स्मृति न्यास द्वारा नरेन्द्र भूषण, लखनऊ-कैलाश गौतम सम्मान-2020, डॉ0 प्रभाषु कुमार, प्रयागराज-राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान, वंदना श्रीवास्तव, लखनऊ-महादेवी वर्मा सम्मान, मीडिया फोरम ऑफ इंडिया तथा आनंदराम साहू, छ0ग0, को पत्रकारश्री से सम्मानित किया गया। आयोजन में प्रसिद्ध लोक गायिका कुसुम वर्मा द्वारा लोकगीत, फिल्म संगीतकार आदि रामचंद्र-पुणे एवं उनके सहयोगी बांसुरी पर वेदांग कुलकर्णी एवं तबला पर सुधांशु परलीकर द्वारा गीत एवं ग़ज़ल प्रस्तुति की गई।
प्रारंभ में संस्थान के सचिव एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ0 गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने संस्थान के 25 वर्ष की विजयगाथा को विस्तार से रखते प्रकाश डाला। एक तरफ उन्होंने अपने सभी पूराने सहयोगियों को उनके योगदान के लिए स्मरण किया तथा वर्तमान पदाधिकारियों के योगदान की भी चर्चा की। इस यात्रा के अपने खट्टे-मीठे अनुभवों का साझा करते हुए कहा किसी भी व्यक्ति या संस्थान को सफल होने में दो तरह के लोगों का हाथ व साथ महत्वपूर्ण होता है पहला वे हाथ जो पैर खींचने के लिए प्रयोग किए जाते है तथा दूसरा वे हाथ जो सर पर पगड़ी पहनाने में प्रयोग किए जाते है। उन्होंने इन पंक्तियों से अपनी वाणी को विराम दिया कली कली महक रही गुलों पे भी निखार है, ये मौसम-ए-बहार है ये मौसम ए बहार है।
अतिथियों का स्वागत डॉ0 पूर्णिमा मालवीय और धन्यवाद ज्ञापन डॉ0 सीमा वर्मा ने किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ0 मधु शंखधर एवं डॉ0 वंदना श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर नुपुर मालवीय- प्रयागराज, पुष्पा श्रीवास्तव ‘शैली’ रायबरेली, सदाशिव विश्वकर्मा, निगम प्रकाश कश्यप-मिर्जापुर, उ.प्र., ईश्वर शरण शुक्ला, पूर्णिमा कौशिक-रायपुर, छ0ग0, डॉ0 उषा श्रीवास्तव मुजफ्फरपुर, बिहार, डॉ0 मुक्ता कान्हा कौशिक-रायपुर, छ0ग0,मु0 तारिक जिया-जौनपुर, शिखा भारती, डॉ0पूर्णिमा मालवीय, मोहित गोस्वामी, डॉ0 रेवा नन्दन द्विवेदी, आलोक चतुर्वेदी, दिव्यांशी श्रीवास्तव, पूर्णिमा मालवीय, अनिल गर्ग, विजय मालवीय, डीo वंसत कुमार साव, एम.एस.खान, शरत चन्द्र श्रीवास्तव, सतीश कुमार मिश्र, अनुकूल नितीन वारखेड़े, राकेश शरण मिश्र, राजीव कुमार शर्मा, गुलाम सरवर, सन्तोष यादव, कृष्ण कान्त गुप्ता सहित आदि उपस्थित रहे।
• अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के यूनियन हॉल में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी है जिसे हटाने की मांग फिर से शुरू हो गई है।
• आने वाले यूपी चुनाव में ये मुद्दा महत्वपूर्ण हो सकता है।
अलीगढ़: उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में जिन्ना की तस्वीर को लेकर एक बार फिर से विवाद शुरू हो गया है। अलीगढ़ के बीजेपी कार्यकर्ताओं ने खून से चिट्ठी लिखकर ये मांग की है कि एएमयू से जिन्ना की तस्वीर हटाई जाए। ये चिट्ठी पीएम मोदी के नाम लिखी गई है और इस चिट्ठी को उन्होंने जिला प्रशासन को भी सौंपा है।
एएमयू से जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग तेज आपको बता दें कि AMU के यूनियन हॉल में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी हुई है, जिसको लेकर कई बार विवाद हो चुका है। अब जबकि 14 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अलीगढ़ जाने वाले हैं, ऐसे में एक बार फिर जिन्ना की तस्वीर पर विवाद शुरू हो गया है।
देश की यूनिवर्सिटी में जिन्ना का क्या काम? एक बार फिर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जंग शुरू हो गई है। मुद्दा वही है आखिर देश की यूनिवर्सिटी में देश के टुकड़े करने वाले मोहम्मद अली जिन्ना का क्या काम है? वही जिन्ना जिसने पाकिस्तान बनाकर हिंदुस्तान के दो टुकड़े करवाए। जिन्ना मजहब के नाम पर अपना मुल्क तो ले गए लेकिन अपनी मौजूदगी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के यूनियन हॉल में छोड़ गए। दरअसल यूनिवर्सिटी के यूनियन हॉल में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी है जिसे हटाने की मांग फिर से शुरू हो गई है।
बीजेपी कार्यकर्ताओं ने की ये मांग बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी को खून से चिट्ठी लिखी है और AMU से जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग की है।बीजेपी कार्यकर्ता ने साफ कहा है कि अगर प्रशासन जिन्ना की तस्वीर AMU से नहीं हटाता है तो वो खुद ही ये काम कर देंगे।
जान लें कि इससे पहले भी जिन्ना की तस्वीर पर सियासी बवाल हो चुका है। अलीगढ़ से बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने तस्वीर हटाने की मुहिम शुरू की थी लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण की सियासी रोटी पर टिकी पार्टियों ने झंडा बुलंद कर लिया।लेकिन अब खून की चिट्ठी बता रही है कि यूपी चुनाव से पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी फिर से सियासत का अड्डा बनने जा रही है। बीजेपी कार्यकर्ता शिवांग तिवारी ने खून से खत लिखकर पीएम मोदी से मांग की है कि जिन्ना की तस्वीर हटवाई जाए।
आपको बता दें कि 14 सितंबर को प्रधानमंत्री अलीगढ़ के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वो जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का उद्घाटन करेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से ठीक पहले AMU से जिन्ना की तस्वीर हटाने का मुद्दा फिर से गरमाया है। ऐसे में देखना होगा कि क्या इस बार देश की एकता को तोड़ने वाले खलनायक को फिर से कुछ तथाकथित सेक्युलर पार्टी नायक बना पाएंगी या सरकार AMU से जिन्ना की तस्वीर हटाने का फैसला ले लेगी।
• हरितालिका तीज के अवसर पर बाजारों और मंदिरों में दिखी रौनक।
• महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और घर में सुख समृद्धि के लिए रखा तीज का व्रत।
हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)
रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र। जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में बृहस्पतिवार को हरितालिका तीज के अवसर पर नगर की बाजारों एवं मंदिरों में रौनक देखने को मिली। इस अवसर पर महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु, स्वस्थ सुखद दांपत्य जीवन एवं सुख समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखकर घरों और मंदिरों में माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ का विधि विधान से पूजन- अर्चन किया।
हरतालिका तीज की पूजा करती महिलाएं
महिलाओं ने दिन भर निर्जला व्रत रखकर हरितालिका तीज पूजा की तैयारी किया और शाम को पारंपरिक परिधान में सज धज कर भगवान भोलेनाथ के मंदिरों में पूजन- अर्चन कर घर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर महिलाओं ने घरों, मंदिरो, सर्वजनिक स्थानों पर तीज व्रत से जुड़ी लोककथाओ का वाचन एवं लोक गीतों का गायन किया।
हरतालिका तीज की पूजा करती महिलाएं
वही साहित्यकार प्रतिभा देवी ने बताया कि भादव मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। यह दो शब्दों के मेल से बना है हरत एवं आलिका। हरत का मतलब हरण से है और आलिका का मतलब सखियों से हैं।
हरतालिका तीज की पूजा करती महिलाएं
मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती की सहेलियां उनका हरण कर उन्हें जंगल में ले गई थीं। जहां पर माता पार्वती ने भगवान शिव को वर रूप में पाने के लिये कठोर तप किया था। जब जंगल में स्थित गुफा में माता पार्वती भगवान शिव की कठोर आराधना कर रही थी तो उन्होंने रेत के शिवलिंग को स्थापित किया था।
मान्यता है कि यह शिवलिंग माता पार्वती द्वारा हस्त नक्षत्र में भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि को स्थापित किया था इसी कारण इस दिन को हरतालिका तीज के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। और उन्हे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ये व्रत कुंवारी कन्याओं द्वारा भी योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
रॉबर्ट्सगंज के शिव मंदिर में पूजन- अर्चन करती महिलाए