नहीं रहीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर, 92 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

बॉलीवुड में आज सन्नाटा पसरा हुआ है. जिसकी वजह स्वर कोकिला लता मंगेशकर का यू अचानकर इस दुनिया को अलविदा कहकर चले जाना है. स्वर कोकिला के निधन से आम हो या फिर खास हर किसी की आंख नम है.
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HIGHLIGHTS

  • स्वर कोकिला का निधन
  • ब्रीच कैंडी अस्पताल में थीं भर्ती
  • हो गया था कोविड

नई दिल्ली: सिनेमाजगत के लिए बेहद दुखद खबर है. कई दशकों से अपनी मधुर आवाज से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का निधन हो गया है. लता जी ने सुबह 8:12 मिनट पर अंतिम सांस ली. ब्रीच कैंडी अस्पताल के अनुसार लता दीदी का निधन मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की वजह से हुआ.

27 दिनों से थीं अस्पताल में भर्ती
भारत रत्न लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) बीते 8 जनवरी से मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में कोविड संक्रमित होने के बाद से भर्ती थीं. लता जी लगातार आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में थीं. हालांकि उनकी सेहत में सुधार भी हो रहा था. यहां तक कि उन्हें वेंटिलेटर पर कुछ दिनों के लिए रखा गया था और फिर बाद में वेंटिलेटर से हटा दिया गया था. लेकिन अचानक तबीयत फिर बिगड़ी और वेंटिलेटर पर दोबारा रखा गया. लेकिन अचानक आज उनके निधन की खबर आई जिसने सभी को हिलाकर रख दिया.

इलाज में जुटी थी पांच डॉक्टरों की टीम
लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की देखभाल के लिए अस्पताल में पांच डॉक्टरों की टीम जुटी हुई थी. एक निजी चैनल से बात करते डॉक्टर प्रतीत समदानी ने कहा कि लता मंगेशकर को कोरोना के साथ-साथ निमोनिया भी हो गया था.

16 जनवरी को किया था अच्छे से डिनर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लता दीदी ने अस्पताल में भर्ती होने के बाद 16 जनवरी की रात को पहली बार ठीक तरह से डिनर भी किया. इसके बाद अगले दिन अच्छे से नाश्ता भी किया.

5,000 से ज्यादा गाए गाने
लता मंगेशकर ने एक हजार से ज्यादा हिंदी फिल्मों और 36 क्षेत्रीय फिल्मों में गाना गाया है. कुछ मिलाकर वो 5,000 से अधिक गानों में अपना आवाज दे चुकी हैं. इतने साल में लता दीदी ने मधुबाला से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक के लिए अपनी आवाज दी है.

पिता के निधन के बाद परिवार को संभाला
लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) के पिता का निधन साल 1942 में हो गया था. बड़ी संतान होने के कारण परिवार का सारा भार लता जी के कंधों पर आया. जिसके बाद लता जी ने पिता के दोस्त मास्टर विनायक ने उन्हें बड़ी मां फिल्म में रोल ऑफर किया, जिसके लिए वो मुंबई आईं. इसके साथ ही लता जी ने उस्ताद अमन अली खान से हिंदुस्तानी म्यूजिक सीखा. लता दीदी ने अपने करियर में कई लिजेंड्री म्यूजिक डाटरेक्टर के संग काम किया है. जिसमें मदन मोहन, आर.डी बर्मन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और एआर रहमान शामिल हैं.

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की मनाई गई जयंती

HIGHLIGHTS

  • भोजपुरी के गीतकार जगदीश पंथी हुए सम्मानित
  • निराला जयंती को पकौड़ी दिवस मनाने की परंपरा
  • मधुरिमा साहित्य गोष्ठी द्वारा किया गया आयोजन
  • वर्षों से चली आ रही है
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सोनभद्र। बसन्तोत्सव के पावन पर्व पर मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के तत्वावधान में विख्यात कवि व चिन्तक अजय शेखर के अध्यक्षता में उनके निज आवास पर महाप्राण पं० सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयन्ती परम्परागत रूप से मनायी गयी जिसका संचालन गजलकार अशोक तिवारी ने किया।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक अजय शेखर ने कहा कि-” भूखण्ड किसी राष्ट्र की पहचान नही है भौगोलिक सीमाएं बदलती रहती हैं संस्कृति देश की आत्मा होती है यदि वह मिट जाए तो देश अपना अस्तित्व खो देता है महाप्राण निराला एक ऐसे युग द्रष्टा कवि थे जिनके भीतर युग चेतना समाहित थी।
वरिष्ठ साहित्यकार अर्जुन दास केसरी ने कहा कि-” निराला का साहित्य व अंदाज निराला था उनका सम्पूर्ण जीवन देश जन की सेवा के लिए समर्पित था।

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विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-“साहित्यकार अजय शेखर की खुले आंगन में ईटों को जोड़कर बनाया गया परंपरागत चूल्हा, चूल्हे में जलती हुई लकड़िया, चूल्हे पर रखे कढ़ाई में उबलते हुए सरसों के तेल में बेसन से सनी हुई गोभी, पालक, प्याज की हरे, पीले रंग की उछलती, कूदती, नाचती, बुदबुदाती पकौड़ियां, चूल्हे की आग पर डेकची उबलता हुआ चाय, मौनवार्ता करते, चूल्हे की आग को धीमा- तेज,खर- सेवर पकौड़ी, ठंडी चाय, गरम चाय की जांच करते बगुले की पर की तरह सफेद दाढ़ी- मूछ वाले मुस्कुराते,कविता गुनगुनाते पाक शास्त्री गीतकार जगदीश पंथी

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बसंत पंचमी की गुनगुनी धूप में लाल कुर्सी पर बिन बुलाए परंपरागत साहित्यकारों को बड़े विनीत, स्नेह, प्रेम भाव से पकौड़ी का दोना पकड़ाते आशुतोष पांडे (मुन्ना)। गरमा- गरम चाय के साथ पकौड़ी के साथ काव्य संतो के काव्य रस का आनंद उठाते, बसंती बयार में डूबते- उतराते मंत्रमुग्ध श्रोता। यह दृश्य प्रतिवर्ष साहित्य प्रेमियों के सामने बसंत पंचमी यानी फक्कड़ मिजाज, काव्य सर्जक, कवि महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती के अवसर पर होता है, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का पकौड़ी प्रेम, पकौड़ी पर लिखी कविता उनकी जयंती पर वर्षों से चली आ रही परंपरा अनुसार बसंत पंचमी के दिन काव्य प्रेमियों के मध्य रॉबर्ट्सगंज नगर की साहित्यिक धरा आंगन में सार्थक सिद्ध होती हैं। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की गरम पकौड़ी कविता-“ऐ गर्म पकौड़ी,
तेल की भुनी
नमक मिर्च की मिली,
ऐ गर्म पकौड़ी !
मेरी जीभ जल गयी
सिसकियां निकल रहीं,
लार की बूंदें कितनी टपकीं,
पर दाढ़ तले दबा ही रक्‍खा मैंने।”

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उक्त अवसर पर कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र, मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी,जगदीश पंथी,शुशील राही, कृपा शंकर द्विवेदी सोनभद्र बार एसोशिएशन के अध्यक्ष महेन्द्र शुक्ला, रमेश देव पाण्डेय, कार्यवाहक अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी फरीद अहमद राकेश शरण मिश्र, प्रदुम्न त्रिपाठी ‘पद्म’, प्रभात सिंह चन्देल, सुनील तिवारी, विकास वर्मा, सरोज सिंह, दिलीप सिंह ‘दीपक’, धर्मेश चौहान, अरविंद सिंह स्वामी, कन्हैया पाण्डेय, जितेन्द्र पासवान, सन्तोष सिंह चन्देल,गोपाल स्वरूप पाठक, इमरान बख्सी, मोइनुद्दीन ‘मिन्टू’, प्रेम प्रकाश राय, विपिन पाण्डेय, बच्चा व अन्य उपस्थित थे।

उक्त अवसर पर भोजपुरी के गीतकार जगदीश पंथी को मधुरमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक अजय शेखर, मीडिया फोरम ऑफ इंडिया के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी, विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी, साहित्य संगम के संयोजक राकेश मिश्र, उपाध्यक्ष सुशील राही ने अंगवस्त्रम, लेखनी आदि प्रदान कर सम्मानित किया।

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यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

HIGHLIGHTS

  • संतजनों के शंखनाद एवं जयकारे से समूचा नगर गुंजायमान रहा
  • राबर्ट्सगंज के अम्बेडकर नगर स्थित कड़े शीतला माता मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का लगा रहा तांता
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सोनभद्र। राबर्ट्सगंज के अंबेडकर नगर स्थित कड़े शीतला माता मंदिर प्रांगण में चल रहे विराट रुद्र महायज्ञ में पांचवें दिन शनिवार को यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान संतजनों के शंखनाद एवं जयकारे से समूचा यज्ञ स्थल गुंजायमान रहा।

आचार्य हरेराम शास्त्री के आचार्यत्व में विधि-विधान से वैदिक मंत्रोच्चार से बाबा वैद्यनाथ एवं श्री राम चूड़ामणि वीर हनुमानजी महाराज की पूजा-अर्चना एवं भव्य आरती हुई। इस दौरान शंखनाद एवं घण्टा- घड़ियाल की ध्वनि के साथ ही जयकारे से समूचा पांडाल गुंजायमान रहा।

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विराट रुद्र महायज्ञ शुरू होते ही यज्ञ मंडप की परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने विशाल भंडारे में प्रसाद भी ग्रहण किया। कार्यक्रम के आयोजक भिक्षु भिखारी बाबा जंगली दास महाराज ने बताया कि राबर्ट्सगंज के अम्बेडकर नगर स्थित कड़े शीतला माता मंदिर प्रांगण में आचार्य हरेराम मिश्र के आचार्यत्व में पंडित कृपा शंकर पांडेय समेत 11 पंडितों द्वारा रुद्र महायज्ञ शुरू कराया गया।

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इस दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिदिन शाम को आचार्य दिल्ली से आए कृष्ण गोपाल जी, भदोही से संतराम रघुराई एवं सोनभद्र से चन्द्रबली जी महाराज द्वारा बारी-बारी से कथा सुनाई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि श्री राम जन्मभूमि शिलान्यास उत्तराधिकारी कमल नयन दास जी महाराज का संतजनों, भक्तगण एवं श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया।

बाबा जंगली दास जी महाराज ने यह भी बताया कि कमल नयन दास जी महाराज ने मार्च माह में नक्सल प्रभावित जंगली क्षेत्र में एक सप्ताह तक आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का आश्वासन दिया है। कार्यक्रम के संयोजक बृजलाल सरोज(बिरजू दास), यजमान रेवती नाथ तिवारी, बच्चालाल, विजय, रंजीत, रामबाबू (अभिषेक), श्यामबाबू, संगम, राज के अलावा रंजीत लाल, कन्हैया, गुलाब दास, परमानन्द महाराज एवं अजय कुमार मौजूद रहे।

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स्वाधीनता आंदोलन का गवाह है बसंत पंचमी मेला

HIGHLIGHTS

  • गौरी शंकर मंदिर से असहयोग आंदोलन हुआ था शुभारंभ।
  • पंडित महादेव प्रसाद चौबे की अध्यक्षता में हुई थी विशाल जनसभा
  • क्रांतिकारी बलराम दास केसरवानी ने दिया था। ओजस्वी भाषण।
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सोनभद्र। आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर संपूर्ण देश सहित जनपद सोनभद्र में मनाए जाने वाला अमृत महोत्सव वर्ष के अंतर्गत सोनभद्र जनपद के नाम- अनाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा देश के स्वतंत्रता आंदोलन में तन- मन- धन न्योछावर करने वाले सेनानियों पर आज पूरा देश गर्व कर रहा है।

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विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“सन 1918 में मिर्जापुर तहसील सहित चुनार, रॉबर्ट्सगंज, दुद्धी में कांग्रेस कमेटी का गठन हो चुका था और इसके माध्यम से सोनभद्र जैसे दुरुह आदिवासी अंचल में स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाने के लिए कांग्रेसी नेता तत्पर थे।
सन 1921 में कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में असहयोग आंदोलन की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद मिर्जापुर जनपद के कांग्रेसी नेता हनुमान प्रसाद पांडे, डॉ उपेंद्र नाथ बनर्जी, मास्टर गंगा प्रसाद, पंडित शालिग्राम पांडे,परमानंद पंजाबी, सरस्वती देवी, महादेव शरण आदि नेताओं ने सोनभद्र जनपद के रॉबर्ट्सगंज एवं दुद्धी तहसील का दौरा किया और असहयोग आंदोलन के की नीतियों और उद्देश्यों का प्रचार किया इससे सोनभद्र जनपद की जनता बहुत ही प्रभावित हुई थी।

रॉबर्ट्सगंज नगर सहित आसपास के गांवो में असहयोग आंदोलन के प्रचार- प्रसार हेतु ग्राम मुठेर के पंडित तारक नाथ त्रिपाठी द्वारा अन्य नौजवान साथियों के सहयोग से आम जनमानस को असहयोग आंदोलन के कार्यक्रमों से अवगत कराया और कांग्रेस कमेटी का सदस्य, स्वयंसेवक बनाया।
वर्तमान जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में असहयोग आंदोलन की नीतियों के प्रचार के लिए सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी कांग्रेसी नेता बलराम दास केसरवानी की अध्यक्षता में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया जिसमें दुद्धी, रॉबर्ट्सगंज, मिर्जापुर के देशभक्तों, क्रांतिकारियों ने भाग लिया था। इसके साथ ही साथ स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों के स्वयंसेवकों, नेताओं द्वारा छोटी-छोटी सभाओं के माध्यम से देशभक्ति का पाठ पढ़ाया गया।
असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम अंतर्गत सोनभद्र जनपद के देशभक्तों, क्रांतिकारियों द्वारा एक संस्कृत राष्ट्रीय विद्यालय की स्थापना किया गया। इस पाठशाला के प्रथम प्रधानाध्यापक सेनानी पंडित महादेव प्रसाद चौबे बनाए गए।

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आंदोलन के प्रचार- प्रसार के लिए 12 फरवरी 1921, शनिवार (बसंत पंचमी) का दिन निश्चित किया गया।सोनभद्र जनपद के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में इस महान,ऐतिहासिक दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित महादेव प्रसाद चौबे की अध्यक्षता में जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज से 7 किलोमीटर दूर पर बरहरदा गांव के गौरी शंकर मंदिर पर आयोजित बसंत पंचमी के मेला मे आयोजित आयोजित हुआ। जिसमें पंडित महादेव प्रसाद चौबे, बलराम दास केसरवानी, केसरी प्रसाद द्विवेदी मिर्जापुर जनपद से अतिथि के रुप में पधारे सक्रिय, उत्साही, नेता गंगा प्रसाद जायसवाल, कृष्ण द्विवेदी का ओजस्वी भाषण देते विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, नशा उन्मूलन, सरकारी उपाधियों और अवैधानिक पदों का त्याग, सरकारी एवं गैर सरकारी उत्सव का बहिष्कार, सरकारी स्कूलों से बच्चों को हटाना, राष्ट्रीय स्कूलों की स्थापना, अंग्रेजी अदालतों का बहिष्कार, झगड़ों का राष्ट्रीय पंचायत द्वारा निर्णय, सरकारी कर न देना, अपने गांव घर के लोगों को मजदूर के रुप में मेसोपोटामिया न भेजना, सरकार द्वारा आयोजित चुनाव का बहिष्कार आदि का संदेश दिया।

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आंदोलनकारियों ने विदेशी वस्त्रों की होली जलाकर रॉबर्ट्सगंज तहसील में असहयोग आंदोलन का शुभारंभ किया और पंपलेट भी वितरित किया गया था। असहयोग आंदोलन का शंखनाद दुद्धी तहसील में मिर्जापुर के कांग्रेसी नेता बाबू पुरुषोत्तम सिंह, बेनी माधव पांडे सहित अन्य उत्साही नेताओं ने अपार कष्ट झेलते हुए दुद्धी के सेनानी यीशु मसीह, सदानंद पांडे, सुखन अली, सखावत हुसैन, सुखलाल खरवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस आंदोलन का शुभारंभ किया और आंदोलन की नीतियों का आम जनता में प्रचार किया और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार लगान बंदी, नशाबंदी आदि कार्यक्रम को पूरा किया गया। इस जुर्म में सेनानियों को पुलिस द्वारा घोर कष्ट दिया गया और जेल में बंद कर उन पर जुर्माना लगाया गया।

इतिहास के स्वर्णिम पन्नों पर दर्ज सोनभद्र जनपद के देशभक्त, क्रांतिकारियों, भारत माता की सपूतों ने स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान को पुनः स्मरण किया गया आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर चौरी चौरा कांड के 100 वर्ष पूरा होने के उपलक्ष में पंडित महादेव प्रसाद चौबे की कर्मभूमि शहीद उद्यान में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित कार्यक्रम मे। इस कार्यक्रम में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण का सीधा प्रसारण उपस्थित जनता को दिखाया गया ।
यह आयोजन सोनभद्र के इतिहास में एक ऐतिहासिक पहल थी, इस कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों द्वारा सोनभद्र जनपद के स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास पर प्रकाश डाला गया।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित भी किया गया था। इस कार्यक्रम से सोनभद्र जनपद के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। जिसके शोध और अध्ययन से प्रेरित होकर भावी पीढ़ियां जहां एक ओर देश के प्रति अपने पूर्वजों के त्याग, तपस्या, बलिदान परिचित होंगे वहीं दूसरी ओर स्वतंत्रता के प्रति निरंतर जागरूक रहेंगे।

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39 मोतियाबिंद मरीजों का किया गया निःशुल्क ऑपरेशन

विंढमगंज, सोनभद्र। विकासखंड दुद्धी के अंतर्गत ग्राम पंचायत घिवही में स्थित हिंडालको के सौजन्य से परिवार कल्याण केंद्र पर आज दर्जनों गांव के ग्रामीणों का मोतियाबिंद चेकअप करने के पश्चात 39 मोतियाबिंद मरीजों का निःशुल्क सफल ऑपरेशन डॉ0 अजीत मिश्रा के द्वारा किया गया।

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रांची रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित घिवही ग्राम पंचायत में हिंडालको जन सेवा ट्रस्ट के सौजन्य से निर्मित परिवार कल्याण केंद्र पर आज पूर्व सूचना के आधार पर केंद्र से लगे ग्राम पंचायत घिवही ,जोरूखाड, केवाल, कोलिनडूबा, हरनाकछार, मूडिसेमर, सलैयाडिह, बुटबेढवा, धरतीडोलवा, धूमा, मेदनीखाण, सुखडा सहित कई गांव के ग्रामीणों का आज निःशुल्क मोतियाबिंद का ऑपरेशन हिंडालको जन सेवा ट्रस्ट के सौजन्य से होना था। जिसमें आज 75 मरीजों ने पंजीकरण कराया।

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मौके पर आए डॉ0 अजीत मिश्रा, डॉ0 मनोज तिवारी ने पंजीकृत 75 मरीजों का मोतियाबिंद चेकअप किया। जिसमें उन 39 मरीजों का मोतियाबिंद होना पाया गया तथा इनका निःशुल्क सफल ऑपरेशन किया गया। मौके पर मौजूद ग्रामीण विकास विभाग हिंडाल्को के मुख्य ब्लॉक संयोजक व प्रधान संघ दुद्धी के अध्यक्ष दिनेश यादव ने कहा कि समय-समय पर हिंडालको जन सेवा ट्रस्ट के सौजन्य से ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले गरीब जनता का उनके बीमारियों का निःशुल्क इलाज व ऑपरेशन कराया जाता है।

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इसी कड़ी में आज 39 मोतियाबिंद मरीजों का सफल ऑपरेशन हिंडालको से आए कुशल डॉ0 अजीत मिश्रा, मनोज तिवारी के द्वारा किया गया। इस मौके पर लैब टेक्नीशियन संजय रुनथला हिंडाल्को के आरडीओ राजेश सिंह कार्यकर्ता सोमारू गोंड, विजय गोंड, विजय शंकर यादव, संजय चौरसिया इत्यादि लोग मौजूद थे।

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लाईन के अर्थिंग के तार के चपेट में आने से 4 वर्षीय बालक की मौत

दुद्धी, सोनभद्र। दुद्धी कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम खजूरी में लाइन के लटके अर्थिंग के तार के चपेट में आने से 4 वर्षीय मासूम की मौत हो गई।प्राप्त जानकारी के अनुसार हसनैन खान (4वर्ष) पिता अताउल्लाह खान निवासी ग्राम खजूरी मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार मृतक घर के नजदीक बिजली विभाग के लगे पोल से अर्थिंग का तार लटका हुआ था।

जब मृतक बिजली के पोल के पास गया तो अर्थिंग के तार दाहिने हाथ में सट गया। परिवार के लोगों ने जब देखा तो किसी तरह से तार छोड़ाकर दुद्धी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया। जहां डॉ0 संजीव कुमार द्वारा मृत घोषित कर दिया। मृतक के परिजनों ने बिजली विभाग पर आरोप लगाते हुए घोर लापरवाही बताया हैं।

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आस पास के लोगों ने बिजली विभाग के सम्बन्धित अधिकारियों को कई बार शिकायत दर्ज किया था। लेकिन विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई।जिसे लेकर खजूरी गांव के लोग आक्रोशित दिखे।

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युवा पत्रकार हर्षवर्धन हुए सम्मानित

सोनभद्र। साहित्य, कला, संस्कृति के क्षेत्र में अनवरत रूप से कार्यरत विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी एवं युवा पत्रकार हर्षवर्धन केसरवानी को मीडिया फोरम आफ इंडिया के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी द्वारा हिंदी पत्रकारिता एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में उत्कृष्ट समाचार लेखन, सांस्कृतिक, साहित्यिक, आध्यात्मिक कार्यक्रमों के लाइव प्रसारण के लिए अंगवस्त्रम, प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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ज्ञातव्य हो कि श्री केसरवानी द्वारा जिले में होने वाले सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण दिखाया जा रहा है। जिसके लिए इन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं। बताते चलें कि कोविड-19 संक्रमण काल में जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में विगत 27 वर्षों से आयोजित श्री रामचरितमानस नवाह पाठ महायज्ञ का प्रथम बार लाइव प्रसारण देश- विदेश में रहने वाले रामकथा प्रेमियों को विगत 2 वर्षों से दिखाया जा रहा है। जिसे अब तक 15 लाख लोगों ने देखा है। श्री केसरवानी के सम्मानित होने पर सांस्कृतिक, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा हर्ष व्यक्त किया गया है।

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वाराणसी : चौरी चौरा शताब्दी समारोह समापन के अवसर पर हुआ भव्य कार्यक्रम का आयोजन

HIGHLIGHTS

  • कार्यक्रम में स्कूली बच्चों व अध्यापकों द्वारा वंदेमातरम का गायन किया गया
  • दीपांजलि कार्यक्रम में बच्चों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया

वाराणसी। आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष के अंतर्गत “चौरी चौरा शताब्दी समारोह” के समापन के अवसर पर शुक्रवार को संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश एवं जिला प्रशासन, वाराणसी द्वारा रानी लक्ष्मीबाई स्मारक, भदैनी- अस्सी एवं भारत माता मंदिर, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इसके अंतर्गत रानी लक्ष्मीबाई स्मारक, भदैनी- अस्सी पर अपराह्न 4:00 बजे से लिटिल फ्लावर हाउस नगवां, कबीरनगर एवं ककरमत्ता स्कूल के बच्चों व अध्यापकों द्वारा वन्देमातरम का गायन व देशभक्ति पर आधारित गीत प्रस्तुत किया गया तथा रंगोली बनाई गयी।

इसके बाद शाम 5:30 बजे से लक्ष्मीबाई स्मारक, भदैनी- अस्सी तथा भारत माता मंदिर, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में दीपांजलि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ बच्चों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। वही वेदश्री उद्दव, साहिबा खातून, चिन्मोय चतुर्वेदी, इशिता श्रीवास्तव द्वारा वन्देमातरम का गायन व देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए आर्निका जयसवाल, धवनी शंदियल, श्रीनिका पाण्डेय, रविका मौर्या ने “सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा…” गीत प्रस्तुत किया। बच्चों के आलावा अकोजामा मनोरमा देवी व आनन्द कुमार चौबे ने भी गीत प्रस्तुत किया, सांस्कृतिक कार्यक्रम में अजीत कुमार श्रीवास्तव एवं विजय शंकर मिश्र ने तबले पर, आशीष श्रीवास्तव ने कीबोर्ड पर संगत किया तथा भावना सिन्हा ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के संयोजन में सहयोग प्रदान किया। श्रेया साहू, वंशिका मौर्या, आँचल श्रीवास्तव ने रंगोली बनाया।

कार्यक्रम का संयोजन एवं अतिथियों का स्वागत प्रभारी, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, वाराणसी डॉ० सुभाष चन्द्र यादव ने किया सहयोग डॉ० हरेन्द्र नारायण सिंह तथा संचालन डॉ० सुजीत कुमार चौबे ने किया। इस अवसर पर अदिति गुलाटी, प्रशांत राय, मनोज कुमार, अनिल केशरी, तापस दास, साधना मौर्य आनंद कुमार पाल, पंचबहादुर, सोहन राम मौर्या, प्रदीप कुमार, राहुल सैनी, श्रीकृष्ण सहित आदि लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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परंपरा पकौड़ी दिवस मनाने की

HIGHLIGHTS

  • निराला जयंती को पकौड़ी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • बसंत पंचमी को मनाया जाता है निराला जयंती
  • आज भी कायम है यह अनोखी परंपरा

हर्षवर्धन केसरवानी

सोनभद्र। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती अनोखे ढंग से मनाने की परंपरा सोनभद्र जनपद के मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में आज भी कायम है। वर्ष 2007 में निराला जयंती के अवसर पर मधुरिमा साहित्यिक गोष्ठी की ओर से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“साहित्यकार अजय शेखर की खुले आंगन में ईटों को जोड़कर बनाया गया परंपरागत चूल्हा, चूल्हे में जलती हुई लकड़िया, चूल्हे पर रखे कढ़ाई में उबलते हुए सरसों के तेल में बेसन से सनी हुई गोभी, पालक, प्याज की हरे, पीले रंग की उछलती, कूदती, नाचती, बुदबुदाती पकौड़ियां, चूल्हे की आग पर डेकची उबलता हुआ चाय, मौनवार्ता करते, चूल्हे की आग को धीमा- तेज,खर- सेवर पकौड़ी, ठंडी चाय, गरम चाय की जांच करते बगुले की पर की तरह सफेद दाढ़ी- मूछ वाले मुस्कुराते,कविता गुनगुनाते पाक शास्त्री गीतकार जगदीश पंथी
बसंत पंचमी की गुनगुनी धूप में लाल कुर्सी पर बिन बुलाए परंपरागत साहित्यकारों को बड़े विनीत, स्नेह, प्रेम भाव से पकौड़ी का दोना पकड़ाते आशुतोष पांडे (मुन्ना)

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गरमा- गरम चाय के साथ पकौड़ी के साथ काव्य संतो के काव्य रस का आनंद उठाते, बसंती बयार में डूबते- उतराते मंत्रमुग्ध श्रोता। यह दृश्य प्रतिवर्ष साहित्य प्रेमियों के सामने बसंत पंचमी यानी फक्कड़ मिजाज, काव्य सर्जक, कवि महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती के अवसर पर होता है।” आयोजक मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक अजय शेखर के अनुसार-मां सरस्वती के वरद पुत्र महाकवि निराला की जयंती परंपरागत, निराले ढंग से पकौड़ी दिवस के रूप में मनाने की परंपरा वर्षों से कायम है।
मेरे एक कवि मित्र की रचना है-

इसीलिए मैंने तुम्हें निमंत्रण नहीं दिया है,
बिना बुलाने आने को कौन रहेगा।
बुलवाने पर अक्सर तो आते हैं,
यह भी अफवाह बहुत है।
बिन बुलाए बेमन आते हैं,
यही सोच कर मैंने बंद किए हर खिड़की दरवाजा।
साकल खटखटाने को कौन रहेगा।

कवि महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

निराला जयंती (पकौड़ी दिवस) के अवसर किसी को आमंत्रण प्रेषित नहीं किया जाता सभी साहित्यकार परंपरागत रूप आते हैं, गरमा- गरम चाय, पकौड़ी, चटनी का आनंद उठाते हुए काव्य रचना सुनते और सुनाते हैं।
यह अनोखी परंपरा आगे भी कायम रहेगी।
संत कीनाराम पीजी कॉलेज कैमूर पीठ के प्राचार्य डॉक्टर गोपाल सिंह के अनुसार-“महाप्राण निराला ने‌ अपनी कविताओं में भारतीय संस्कृति, साहित्य, कला की देवी सरस्वती के मुखमंडल को करुणा के आँसुओं से धुला कहा, सरस्वती को मंदिरों, पूजा-पाठ के कर्मकांड से बाहर लाकर खेतों-खलिहानों में श्रमजीवी किसानों के सुख-दुख भरे जीवन क्षेत्र में स्थापित किया

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कथाकार रामनाथ शिवेंद्र के अनुसार-“सरस्वती भाषा, वाणी, सिद्धि की देवी हैं।
वसंत पंचमी विद्या की देवी सरस्वती का जन्म उत्सव है, जब फूलों में बहार आ जाती, खेतों मे सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आम बौरा जाता हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ फूलों का मकरंद चूसने के लिए मँडराने लगतीं। तब आभास होता है बसंत ऋतु के आगमन का।
साहित्यकार प्रतिभा देवी का मानना है की बसंत पंचमी और महाकवि निराला का संबंध दो शरीर एक आत्मा का है।

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निराला ने ‘हिंदी के सुमनों’ को संबोधित करते हुए जो कविता लिखी है, उसमें अपने को ‘वसंत दूत’ मानते हुए श्रेष्ठ कविताओं की रचना किया है।
अभाव रस के सागर में डूबे निराला जी की आत्मा में वसंत की खुशबू रची-बसी रही। इसीलिए हिंदी जगत उन्हें ‘महाप्राण’ मानता है। इनके जीवन काल में ही समकालीन साहित्यकारों ने यह मान लिया था कि वसंत-पंचमी के दिन सरस्वती की पूजा होती है निराला सरस्वती के वरद पुत्र,सरस्वती साधक, खड़ी-बोली हिंदी में सरस्वती पर अधिक काव्य लेखन करने वाले निराला जी की जयंती बसंत पंचमी ही माना गया।

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यह मान्यता चिर काल तक कायम रहेगी। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का पकौड़ी प्रेम, पकौड़ी पर लिखी कविता उनकी जयंती पर वर्षों से चली आ रही परंपरा अनुसार बसंत पंचमी के दिन काव्य प्रेमियों के मध्य रॉबर्ट्सगंज नगर की साहित्यिक धरा आंगन में सार्थक सिद्ध होती हैं।

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शिव परिवार व हनुमान जी की मूर्ति का हुआ भव्य श्रृंगार

HIGHLIGHTS

  • संतजनों के शंखनाद एवं जयकारे से समूचा नगर गुंजायमान रहा
  • राबर्ट्सगंज के अम्बेडकर नगर स्थित कड़े शीतला माता मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का लगा रहा तांता
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सोनभद्र। राबर्ट्सगंज के अंबेडकर नगर स्थित कड़े शीतला माता मंदिर प्रांगण में चल रहे विराट रुद्र महायज्ञ में चौथे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
शुक्रवार को शिव परिवार एवं हनुमानजी की मूर्ति का भव्य श्रृंगार किया गया। श्री राम जन्मभूमि शिलान्यास उत्तराधिकारी कमल नयन दास जी महाराज की मौजूदगी में आचार्य हरेराम शास्त्री ने विधि-विधान से वैदिक मंत्रोच्चार से शिव परिवार एवं हनुमानजी की मूर्ति का श्रृंगार कराया। बाबा वैद्यनाथ एवं श्री राम चूड़ामणि वीर हनुमानजी महाराज की पूजा-अर्चना एवं भव्य आरती हुई।

इस दौरान शंखनाद एवं घण्टा- घड़ियाल की ध्वनि के साथ ही जयकारे से समूचा पांडाल गुंजायमान रहा। उसके बाद विराट रुद्र महायज्ञ शुरू हो गया। जहां पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने विशाल भंडारे में प्रसाद भी ग्रहण किया।
कार्यक्रम के आयोजक भिक्षु भिखारी बाबा जंगली दास महाराज ने बताया कि राबर्ट्सगंज के अम्बेडकर नगर स्थित कड़े शीतला माता मंदिर प्रांगण में आचार्य हरेराम मिश्र के आचार्यत्व में पंडित कृपा शंकर पांडेय समेत 11 पंडितों द्वारा रुद्र महायज्ञ शुरू कराया गया।

इस दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने यह भी बताया कि सायं 6 बजे से आचार्य दिल्ली से आए कृष्ण गोपाल जी, भदोही से संतराम रघुराई एवं सोनभद्र से चन्द्रबली जी महाराज द्वारा बारी-बारी से कथा सुनाई गई। जिसे श्रद्धालुओं ने श्रवण किया। उन्होंने यह भी बताया कि श्री राम जन्मभूमि शिलान्यास उत्तराधिकारी कमल नयन दास जी महाराज का संतजनों, भक्तगण एवं श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया।

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बाबा जंगली दास जी महाराज ने यह भी बताया कि कार्यक्रम के संयोजक बृजलाल सरोज(बिरजू दास) हैं। वहीं यजमान के रूप में रेवती नाथ तिवारी, बच्चालाल, विजय, रंजीत, रामबाबू (अभिषेक), श्यामबाबू, संगम, राज आदि शामिल रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए रंजीत लाल, कन्हैया, गुलाब दास, परमानन्द महाराज एवं अजय कुमार के साथ ही अम्बेडकर नगर राबर्ट्सगंज के लोग तथा दान दाता एवं श्रद्धालु शामिल रहे।

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