राम अनुज धर द्विवेदी
सोनभद्र। चोपन ब्लाक में खण्डविकास अधिकारी कार्यालय में विकास कार्यों के धन क्षेत्र पंचायत द्वारा संचालित विधान मंडल विकास क्षेत्र निधि विधायक, सांसद निधि, 14 वा 15 वित्त व राज वित्त में जमकर भ्रष्टाचार एवं बन्दरबांट किया जा रहा है जिसकी सूचना सुनील तिवारी द्वारा समय समय पर दिया गया । खण्डविकास अधिकारी उक्त द्वारा तमाम अलग-अलग तिथियों को “5” निविदाएं नियम विरुद्ध एवं भ्रामक निकलवा दी गयी विकास खंड चोपन मे अब तक करीब 4 करोड़ का टेंडर कराया गया परंतु कराये जा रहे टेंडर प्रक्रिया में कही भी प्राक्कलन का जिक्र तक नहीं है कि कौन सा काम कितने रुपये का है श्रम और सामग्री कितने का है कुछ भी पता नही है और तो और टेंडर में ठेकेदारो द्वारा कितने रुपये का एफ.डी.आर. देना है टेंडर में उसका भी कही उल्लेख नही है जो सरासर गलत एवं नियम बिरुद्ध है।

साथ ही खण्डविकास अधिकारी उक्त द्वारा नियम को ताख पर रखते हुए अपने सरकारी आवास को भी ध्वस्त करा दिए और बिना टेंडर निकाले ही उस आवास का निर्माण कार्य भी प्रारंभ करा दिए जिसकी सूचना भी प्रार्थी द्वारा 18-10-2021 व दिनांक 23-10-2021 को दो अलग अलग तिथियों को जिलाधिकारी कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर अपने शिकायती पत्र के माध्यम से व मुख्य विकास अधिकारी सोनभद्र आयुक्त विंध्याचल मण्डल मिर्जापुर आयुक्त ग्रामविकास को रजिस्टर्ड डाक द्वारा अवगत भी करा चुका है। परन्तु चार माह का समय व्यतीत हो जाने के बाद भी न तो जांचे ही कराई गई न तो खण्डविकास अधिकारी चोपन के मनमाने रवैया पर अंकुश ही लगवाया गया।
गौर करने वाला प्रश्न यह है कि प्रार्थी के पत्र का सज्ञान लेते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी महोदय द्वारा अपने पत्रांक संख्या 672/ डीडीओ सोनभद्र को जांच के लिए अंतरित भी कर दिया गया परन्तु उसी दिन जिलाधिकारी महोदय का गैर जनपद स्थानांतरण हो जाने के कारण खण्डविकास अधिकारी उक्त द्वारा जांच को दबवा दिया गया और मेरे ऊपर कुछ लोगो द्वारा दबाव भी बनवाया जाने लगाऔर फर्जी मुकदमों में भी फ़साने की धमकी दी जा रही है
महोदय आपका पत्रांक 672/ डीडीओ को जांच के लिए दिया भी गया परन्तु डीडीओ के द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई जिसपर प्रार्थी द्वारा दिनांक 25/10/2021 को सूचना अधिकार के तहत जिलाविकास अधिकारी से आपके पत्रांक 672 पर सूचना मांगा की आपके द्वारा क्या कार्यवाही की गई जिसके जबाब जिलाविकास अधिकारी द्वारा लगभग ढाई महीने बाद जिलाविकास अधिकारी का पत्रांक 1740/शिकायत 2021-22 दिनांक 21/12/2021 को यह सूचना उपलब्ध कराई गई कि मैं बीमार हूं।
महोदय जो एकदम हास्यास्पद एवं आपत्तिजनक है महोदय व्यक्ति बीमार हो सकता हैं कुर्शिया और कलम बीमार नही होती अगर कलम और कुर्शिया बीमार होती रहती तो 70 वर्षों से तमाम परियोजनाए एवं सरकारी कार्य अभी भी अधर में ही लटके होते महोदय जिलाविकास अधिकारी के द्वारा जांच में अनावश्यक बहाने बाजी कर खण्डविकास अधिकारी चोपन को कही न कही बचाने का पूर्ण प्रयास कर मौका प्रदान किये जाने के उद्देश्य से भी जाँच को अनावश्यक 5 महीने तक अधर में लटकाया गया ताकि खण्डविकास अधिकारी चोपन बचने का रास्ता ढूढ़ सकें।
खण्डविकास अधिकारी चोपन के मनमानी की बानगी निम्नवत है।
1- खण्डविकास अधिकारी द्वारा कराये गए भुगतान पर कोई भी जीएसटी जमा नही कराई गई।
2- ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन में लगे अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी है।
3- खुलेआम 50% कमीशन की कार्यो के जांच से कार्य की गुडवत्ता द्वारा ही पता लग जायेगा।
4- सरकारी आवास ध्वस्तीकरण के बाद बार-बार रँगाई पोताई की निविदाएं निकालना जबकी तमाम खण्डविकास अधिकारियों द्वारा समय-समय पर आवास मरम्मत पर भारी धनराशि खर्च की जा चुकी हैं और वित्तीय वर्ष 2020-21 में लगभग 4 लाख रुपए खर्च कर उक्त आवास की मरम्मत व रँगाई पोताई कराई जा चुकी है। और और पिछले वर्ष में लगभग तीन लाख का भुगतान भी कराया जा चुका है।
5- सपथ ग्रहण के पूर्व ब्लाक प्रमुख आवास की रँगाई पोताई होने के बावजूद ब्लाक प्रमुख आवास की रँगाई पोताई की निविदाएं निकालना पूर्व की फोटोग्राप्स भी मौजूद।
6- बिना स्थलीय निरीक्षक एवं भौतिक सत्यापन के ही परियोजनाओ पर भुगतान कर देना।
7- खण्डविकास अधिकारी आवास के ध्वस्तीकरण के बाद निकले “रा” मैटीरियल ईट, व छड़ द्वारा पुनः उसी आवास का निर्माण कराकर भारी सरकारी धन को हड़पने का प्रयास करना।
8- पूर्व किसी भी खण्डविकास अधिकारीयो द्वारा आवास ध्वस्तीकरण को लेकर अपने उच्चाधिकारियों को एक भी पत्राचार नही किया गया है।
9-क्षेत्र पंचायत में पहली बार ठेकेदारी प्रथा लागू कर दी गयी जिसमें खण्डविकास अधिकारी चोपन द्वारा अपने चुंनिन्दा चहेतों को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियम कायदे को जेब मे रखते हुए कूटरचित तरीके से प्रमाण पत्रों को लगवाकर पंजीयन भी करा दिया गया।

10-क्षेत्र पंचायत के विकास के कार्यों में प्रयुक्त होने वाली सामग्री को पत्थर, गिट्टी, बालू ,को लगवा कर फर्जी एम एम 11व परमिट लगाकर ठेकेदारों व फर्मो को व्यकिगत लाभ पहुचाते हुए सरकारी धन का बन्दरबांट किया गया जिसे टेक्निकल जांच से व स्थानीय ग्रामीणों से सत्यापन किया जा सकता है।
10- खण्डविकास अधिकारी द्वारा सुनियोजित तरीके से निकाली गई निविदा/ विज्ञप्तियों में इस बात का खास ध्यान रखा गया कि कोई भी परियोजना 10 लाख को पार न कर सकें परियोजना को 10 लाख पार करने पर ई टेंडरिंग करनी पड़ती इस उद्देश्य को ध्यान रखते हुए मैन्युअल टेंडर कराया गया कि परियोजना 10 लाख के अंदर सीमित रहें। इनके इस कार गुजारी के चलते कोई भी परियोजना अपने अमुक स्थान से अमुक स्थान को पूर्ण ही नहीं करती।
11-विधान मंडल विकास क्षेत्र निधि, विधायक सांसद निधि समेत उपरोक्त सभी वित्त में श्रमिकों के मजदूरी भुगतान में भी भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार को कराया गया है।जिसकी सोशल आडिट कराया जाना जनहित में जरूरी हैं।साथ ही उक्त समस्त प्रकरण पर गम्भीरता से विचार करते हुए उच्च कमेटी का गठन कराकर जांच कराकर खण्डविकास अधिकारी के मनमाने रवैया पर अंकुश लग सके व सरकारी धन के बन्दर बाट से बचा जा सकें।



