शरद चंद्रिकोत्सव की रजत जयंती पर शास्त्रीय संगीत समारोह का हुआ भव्य आयोजन

HIGHLIGHTS

  • संगीतकारों ने गायन, वादन, नृत्य के माध्यम से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध।
  • आयोजन समिति के संस्थापक को किया गया सम्मानित।
  • शिव की आरती एवं खीर के वितरण से कार्यक्रम का हुआ समापन।
हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। अश्वनी मांह शरद पूर्णिमा के अवसर पर शक्ति संगीत कला परिषद शक्तिनगर सोनभद्र के तत्वाधान में शरद चंद्रिकोत्सव कार्यक्रम की रजत जयंती पर शक्तेवर महादेव मंदिर परिसर में रविवार की देर रात भव्य शास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि भोला सिंह (सह प्रबंधक नार्दन कोलफील्ड्स सिंगरौली) व अध्यक्ष वसुराज गोस्वामी (मुख्य महाप्रबंधक) एनटीपीसी सिंगरौली, द्वारा दीप प्रज्वलन से किया गया।

वही समारोह का प्रारम्भ गौतम कॉले इंदौर, मध्य प्रदेश के शास्त्रीय संगीत के से हुआ। इनके साथ तबला पर इंदौर के अंशुल प्रताप सिंह ने व पर हारमोनियम वाराणसी के पंडित धर्मनाथ मिश्र ने संगत किया। सितार जुगलबंदी वाराणसी संगीत घराने की पदमश्री पंडित शिवनाथ मिश्र एवं देवव्रत मिश्र, (वादन संगत) कृष्णा मिश्रा (सितार) वाराणसी, प्रशांत मिश्र (तबला) वाराणसी द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति कोलकाता से आई सुलगना बनर्जी के कथक नृत्य से हुआ। इसमें दीनानाथ मिश्र (तबला वादक) नीरज मिश्रा (सितार) गायन-पंडित धर्मनाथ मिश्रा संगत किया।

वही एक ओर चंद्रमा आसमान से अमृत की वर्षा कर रहा था और संगीतकार अपने गायन वादन नर्तन के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रहे थे।
इस अवसर पर आयोजन समिति के अशोक कुमार दुबे, आलोक त्रिपाठी, सत्यनारायण बंसल, अजीत तिवारी, चंद्रशेखर जोशी एस० के० सिंह, विदुषी परिहार ने मंच पर उपस्थित कलाकारों को बुके, अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।
आयोजन समिति के संस्थापक सत्य नारायण पांडे (दाढ़ी बाबा) को रामायण कल्चर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर एवं संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के नामित सदस्य दीपक कुमार केसरवानी ने पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का समापन आरती एवं खीर वितरण के साथ हुआ।

Advertisement (विज्ञापन)
Advertisement (विज्ञापन)
  • Advertisement

श्री राम चरित मानस नवाह पाठ महायज्ञ समिति की हुई बैठक

HIGHLIGHTS

  • सत्यपाल जैन बनाए गए समिति के नए अध्यक्ष
  • 24 दिसंबर से नगर में गूंजेगी रामायण की चौपाइयां
  • 111 भूदेव महायज्ञ में होंगे सम्मिलित।
  • पूर्व की भांति संपूर्ण नगर में लगाए जाएंगे ध्वनि विस्तारक यंत्र
  • 23 दिसंबर की रात होगी श्री राम दरबार की मूर्ति की स्थापना
हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। श्री राम चरित मानस नवाह पाठ महायज्ञ समिति की बैठक रविवार की देर रात को राबर्ट्सगंज नगर स्थित रामलीला मैदान के सभागार में समिति के संरक्षक अजय शेखर की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस अवसर पर समिति के उपस्थित पदाधिकारियों व सदस्यों के सर्वसम्मति से वरिष्ठ समाज सेवी सत्यपाल जैन को समिति का नया अध्यक्ष चुना गया। इस अवसर पर श्री राम चरित मानस नवाह पाठ महायज्ञ समिति के महामंत्री सुशील पाठक ने बताया कि- इस वर्ष नवाह पाठ महायज्ञ का 28 वर्ष पूर्ण होने वाला है उन्होंने कहा कि 23 दिसंबर 2022 की रात श्री राम दरबार की मूर्ति की स्थापना की जाएगी और महायज्ञ 24 दिसंबर 2022 से प्रारंभ होगा और 01 जनवरी 2023 को सम्पन्न होगी। उन्होंने आगे बताया कि पूर्व वर्षों की तरह ही अबकी बार भी 111 भूदेव महायज्ञ में शामिल होंगे, ध्वनि विस्तारक यंत्र राबर्ट्सगंज शहर में लगाए जाएंगे, ताकि मानस की चौपाइयों का अनुश्रवण संपूर्ण नगरवासी कर सकें और आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति कर सकें।

वही बैठक में समिति के पदाधिकारी राकेश त्रिपाठी (शिशु तिवारी) द्वारा गत वर्ष का आय-व्यय का लेखा-जोखा समिति के उपस्थित सदस्यों, पदाधिकारियों के समक्ष रखा गया। बैठक में मुख्य रूप से नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन कृष्ण मुरारी गुप्ता, समिति के संरक्षक इंद्रदेव सिंह, डॉक्टर जेएस चतुर्वेदी, हरीश अग्रवाल, कृपा नारायण मिश्रा, मिठाई लाल सोनी, श्यामसुंदर चौबे, राजेश्वर नाथ शुक्ला, सुधाकर पांडेय, सदस्य रमेश थर्ड, अजित सिंह भंडारी, अजय कुमार शुक्ला, विमलेश सिंह, पवन जैन, रविंद्र पाठक, चंद्रभान अग्रवाल, राजेश जायसवाल, संगम गुप्ता, संजय अग्रवाल, शुशील पाठक (लोढ़ी), प्रमोद गुप्ता, सुधीर शरण राय, परमेश जैन, कृपा शंकर जयसवाल, राजेश बंसल, दिनेश बंसल, रामविलास सोनी,

Advertisement (विज्ञापन)

अनिल रविन्द्र केशरी, डॉक्टर चंद्रभूषण पांडेय, सुधाकर दुबे, चंदन चौबे, ठाकुर अग्रहरि, राजू सोनी, बबलु सिंह, अशोक गुप्ता, कैलाश अग्रहरी, चन्दन केशरी, कल्ला चौबे, आशीष अग्रवाल, महेश चंद्र द्विवेदी, सुंदर केशरी, विनय जायसवाल, संजय अग्रवाल, मनीष सोनी, रामनारायन सर्राफ, चंचल थर्ड, सुंदर केशरी, अनिकेत चौधरी, अनिल चौबे सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। उक्त आशय की जानकारी समिति के मीडिया प्रभारी हर्षवर्धन केसरवानी ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी है।

Advertisement (विज्ञापन)
  • Advertisement

मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि व दीपांजलि कार्यक्रम का हुआ आयोजन

वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को उनकी जन्मस्थली लमही में क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा पुष्पांजलि व दीपांजलि का आयोजन किया गया। नगर के प्रसिद्ध साहित्यकार व गणमान्य लोगों ने उपन्यास सम्राट की जन्मस्थली पर निर्मित स्मारक परिसर में स्थापित प्रतिमा पर पुष्पांजलि कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इस क्रम में सुनो मैं प्रेमचंद के रेडियो प्रसारण कार्यक्रम के अन्तर्गत इनकी जीवनी और कहानी का प्रसारण प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा किया गया। शायंकाल स्मारक परिसर श्रद्धा के दीप से आलोकित हो उठा। बेहद सादगी और श्रद्धा के साथ पुण्यतिथि का आयोजन किया गया।

इस क्रम में सुनो मैं प्रेमचंद के रेडियो प्रसारण कार्यक्रम के अन्तर्गत इनकी जीवनी और कहानी का प्रसारण प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा किया गया। शायंकाल स्मारक परिसर श्रद्धा के दीप से आलोकित हो उठा। बेहद सादगी और श्रद्धा के साथ पुण्यतिथि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन प्रभारी, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र, वाराणसी, डा० सुभाष चन्द्र यादव ने तथा अतिथियों का स्वागत डा० हरेन्द्र नारायण सिंह ने किया। राजीव गौड़ और सुरेश चंद दुबे ने इस आयोजन में बहुविध सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर प्रमुख रुप से प्रो श्रद्धानंद, डॉ रचना शर्मा, कंचन सिंह परिहार, संतोष कुमार प्रीत, प्रसन्ना बदन चतुर्वेदी, केशव शरण, विपिन, राहुल कुमार, अरविंद कुमार, हिमांशु वर्मा, शिवानंद प्रजापति, हर्षित प्रजापति, राकेश कुमार, अरुण कुमार, कृष्ण कुमार, अभिनव यादव, आदित्य यादव, रूद्र कुमार, अभिषेक कुमार सिंह, नमन पंडित, रितिक राय, अमन सेठ, अंकित गोंड, नितेश तिवारी, राहुल श्रीवास्तव, पीयूष श्रीवास्तव, इंद्रसेन पटेल सहित लमही के निवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

शरद चंद्रिकोत्सव की रजत जयंती का आयोजन कल

हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। शक्ति संगीत कला परिषद शक्तिनगर सोनभद्र द्वारा मानव संसाधन अनुभाग एनटीपीसी एवं नार्दन कोलफील्ड्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से शरद पूर्णिमा 9 अक्टूबर 2022 दिन रविवार रात्रि 8:00 बजे शक्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर, विद्युत बिहार कॉलोनी, एनटीपीसी शक्तिनगर में शास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया गया है।

आयोजक संस्थान के संस्थापक सत्य नारायण पांडे (दाढ़ी बाबा) बताया कि-” इस कार्यक्रम की प्रेरणा मुझे संकट मोचन संगीत समारोह वाराणसी से मिली और सन 1995 में विधिवत इस कार्यक्रम की शुरुआत वाराणसी के प्रख्यात शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खा की शहनाई वादन से हुई थी। सन 1996 से प्रत्येक शरद पूर्णिमा के अवसर पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, आयोजन के 25 वर्षों में पंडित राजन- साजन मिश्र, पंडित जसराज, पंडित शिवकुमार शर्मा, गिरजा देवी, पंडित छन्नूलाल मिश्र, किशन महाराज, पंडित वीजी जोग, उस्ताद शाहिद परवेज़, उस्ताद शराफत अली, पंडित अजय कुकर, शोभना नारायण सहित देश के नामी-गिरामी संगीतकार, नर्तक, वादक कार्यक्रम में प्रतिभाग कर चुके हैं।

Advertisement (विज्ञापन)

इस बार रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष में गायन- गौतम कॉले इंदौर, मध्य प्रदेश,(संगत) अंशुल प्रताप सिंह (तबला) इंदौर, पंडित धर्मनाथ मिश्र (हारमोनियम) वाराणसी, सितार जुगलबंदी- पदमश्री पंडित शिवनाथ मिश्र एवं देवव्रत मिश्र, (वादन संगत) कृष्णा मिश्रा (सितार) वाराणसी, प्रशांत मिश्र (तबला) वाराणसी, (कथक नृत्य) सुलगना बनर्जी (कोलकाता) दीनानाथ मिश्र (तबला वादक) नीरज मिश्रा (सितार) वाराणसी, गायन-पंडित धर्मनाथ मिश्रा वाराणसी, दीनानाथ मिश्रा (तबला वादक) नीरज मिश्रा (सितार) वाराणसी होंगे।

Advertisement (विज्ञापन)

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भोला सिंह (सह प्रबंधक नार्दन कोलफील्ड्स सिंगरौली) अध्यक्ष वसुराज गोस्वामी (मुख्य महाप्रबंधक) एनटीपीसी सिंगरौली, शक्तिनगर, विशिष्ट अतिथि रामायण कल्चर मैपिंग योजना डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर एवं संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के नामित सदस्य दीपक कुमार केसरवानी होंगे।
आयोजन समिति के अशोक कुमार दुबे (अध्यक्ष ) आलोक त्रिपाठी, सत्यनारायण बंसल, अजीत तिवारी,(उपाध्यक्ष) चंद्रशेखर जोशी (सचिव) एस के सिंह (व्यवस्थापक) विदुषी परिहार (कार्यक्रम संयोजक) उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम का समापन आरती एवं खीर हां वितरण के साथ होगा।

  • Advertisement

173 वर्ष प्राचीन है राबर्ट्सगंज की रामलीला

HIGHLIGHTS

  • श्री राम वनवास काल में सोनभद्र से ही रामेश्वरम गए थे।
  • रॉबर्ट्सगंज टाउन एरिया की प्रथम चेयरमैन
  • बद्रीनारायण ने कराई थी इसकी शुरुआत।
  • रामलीला का मंचन करते थे स्थानीय लोग।
  • रॉबर्ट्सगंज नगर के रामलीला मैदान में रामलीला का मंचन देखने के लिए आते हैं राम भक्त।
हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। गुप्तकाशी के नाम से सुप्रसिद्ध सोनभद्र जनपद में रामलीला का मंचन प्राचीन है।
इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“जनपद मुख्यालय रावटसगंज की स्थापना 1846 हुई थी, इसकी स्थापना का श्रेय मिर्जापुर के उप जिलाधिकारी डब्लू बी रॉबर्ट्स जाता है स्थापना काल मे यह क्षेत्र जंगल था और रॉबर्ट्सगंज नगर के समीप बरकरा गांव
(अदल गंज ) आबाद था और यहां पर बाजार विकसित था, यहां पर केशरवानी वंश के लोग सर्वप्रथम आकर बसे तत्पश्चात अन्य प्रदेशों से यथा मारवाड़ से मारवाड़ी हरियाणा से हरियाणवी आदि जातियों के लोग व्यवसाय करने के लिए रावटसगंज नगर में बसे और यहां पर संस्कृति का विकास हुआ और मिर्जापुर के तर्ज पर नगर में रामलीला का शुभारंभ टाउन एरिया के प्रथम अध्यक्ष बद्रीनारायण द्वारा कराया गया”

Advertisement (विज्ञापन)

साहित्यकार प्रतिभा देवी के अनुसार-” उस समय आजकल की तरह व्यवस्था नहीं थी नगर के लोग ही एक कमेटी बनाई थी और रामलीला स्वयं करते थे जिसमें बड़े ही उत्साह पूर्वक युवा और बच्चे भाग लेते थे और वर्तमान रामलीला मैदान उस समय कंपनी बाग के नाम से जाना जाता था और यही रामलीला का आयोजन होता था”
लोक साहित्यकार अर्जुन दास केसरी के अनुसार-” बद्री प्रसाद के बाद उनके भतीजे बलराम दास, भोला सेठ, परमेश्वर जालान, डॉक्टर कन्हैयालाल, श्यामसुंदर झुनझुनवाला, शंभू सेठ, विश्वनाथ प्रसाद केडिया,, आदि नगर के नागरिक, व्यापारीगणों के सहयोग से रामलीला का मंचन रामलीला मैदान में रावण के पुतले का दहन कार्यक्रम आयोजित होता रहा।’

भगवान राम की लीला भूमि उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थल हैं और राम जन्म भूमि अयोध्या रही है और वनवास काल में भगवान राम के सहयोगी आदिवासीजन रहे हैं, राम कथा का महत्व आदिवासी अंचलों में व्याप्त है रामकथा की रचना करने वाले महर्षि बाल्मीकि आश्रम उत्तर प्रदेश में ही संचालित था और रामकथा को जन-जन तक पहुंचाने वाले गोस्वामी तुलसीदास काशी में राम कथा लिखकर अमर हो गए। काशी से सटे विंध्य पर्वत पर अवस्थित गुप्तकाशी का धार्मिक, संस्कृति दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है इसके साक्षी यहां पर अवस्थित शिवालय, देवालय हैं ।

वनवास के बाद भगवान राम गुप्तकाशी(सोनभद्र) से होकर ही रामेश्वरम गए थे और गुप्तकाशी संप्रति सोनभद्र जनपद में रामकथा आदिवासी जातियों में लोकप्रिय है।
नगर पालिका परिषद पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र सिंह द्वारा रामलीला समिति के अध्यक्ष पद का निर्वहन करते हुए रामलीला और दशहरे के मेले का आयोजन कराया जाता रहा।
वर्तमान समय में रामलीला समिति के अध्यक्ष पवन कुमार जैन है जिनके नेतृत्व में रामलीला का मंचन, दशहरे मेले का आयोजन होता है। इस मेले का मुख्य आकर्षण अहरौरा एवं चुनार के बने हुए मिट्टी के खिलौने बनारसी रेवड़ी चुरा आदि होते हैं, दशहरे के मेले की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक आदमी शेर का रूप धारण कर मिले भर घूमता था और मेला समाप्त होने के बाद बाजार से बाजार में घूम कर लोगों से पैसा लेता था अब यह परंपरा खत्म हो चुकी है।रामलीला के मंचन के समय भीड़ को नियंत्रित करने के लिए और व्यवस्था को कायम रखने के लिए स्थानीय जन स्वयंसेवक के रूप में कार्य करते थे अब रामलीला में इक्के दुक्के लोगी इस व्यवस्था को नियंत्रित करते नजर आते हैं।

रॉबर्ट्सगंज की स्थापना को लगभग 173 वर्ष हो चुके हैं यहां की एक अलग सांस्कृतिक , धार्मिक परंपरा है। आज भी नगर के हर वर्ग के लोग रामलीला मंचन का आनंद लेने के लिए रामलीला मैदान जुटते हैं और रामकथा का भरपूर रसास्वादन करते हैं, मनोरंजन करते हैं और ज्ञान प्राप्त करते हैं।
आज इस आदमी की ब लोग टीवी, नेट, कंप्यूटर, मोबाइल में व्यस्त हो,सारे ज्ञान का माध्यम ज्यादातर लोग नेट को ही मानते हैं, ऐसे संक्रमण के काल में भी भारतीय धर्म, संस्कृति, साहित्य, कला, अध्यात्म की शिक्षा प्रदान करने वाली रामकथा पर आधारित रामलीला भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में लोकप्रिय है ।

  • Advertisement

सातों शीतला मंदिर पर दर्शन के लिए आते हैं पूर्वांचल के श्रद्धालु

HIGHLIGHTS

  • वैश्य परिवार दिन कराया था इस मंदिर का निर्माण
  • नगर में एकमात्र मंदिर है सातों शीतला का
  • नवरात्र में विशेष प्रकार से होती है पूजा अर्चना
हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के पूरब मोहाल में स्थित सातो शीतला माता के मंदिर का धार्मिक महत्व है, इस मंदिर पर सोनभद्र जनपद के साथ-साथ पूर्वांचल एवं सोनभद्र जनपद के सीमावर्ती राज्य बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि इलाकों से भक्तजन अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आते हैं और मां सातों शीतला का विशेष प्रकार से पूजा अनुष्ठान संपन्न कराते हैं इस मंदिर पर नवरात्र में काफी संख्या में भक्तजन दर्शन, पूजन, अर्चन के लिए आते हैं और नवरात्रि की सप्तमी, अष्टमी, नवमी को यहां विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।

Advertisement (विज्ञापन)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सातो शीतला को मां शीतला का स्वरूप अथवा शीतला माता की बहन माना जाता है सातों शीतला मंदिर संपूर्ण नगर में एक ही है। इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-” इस मंदिर का निर्माण सन 1974 में लल्लू साहू कोयला वाले के पुत्र मोहनलाल गुप्ता एवं दुलारी देवी की पुत्र वधू स्वर्गीय सुखदेई देवी द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया निर्माणकर्ता की हार्दिक इच्छा थी कि मंदिर में सभी देवी- देवताओं का वास हो इसके तहत पहले सातो शीतला देवी की स्थापना मुख्य मूर्ति के रूप में कराई गई तत्पश्चात मंदिर परिसर में नंदी बाबा, शिवशंकर पार्वती, श्री लक्ष्मी नारायण, श्री राधा कृष्ण महाकाली, शिव, दुर्गा जी, सरस्वती जी, संतोषी माता, हनुमान जी इत्यादि देवी- देवताओं की मूर्ति स्थापित कराई गई है, एक मंदिर पर इतनी देवी देवताओं की मूर्तियों की स्थापना अपने आप में मंदिर के निर्माता का अनूठा प्रयास था, इस मंदिर परिसर में अवस्थित नीम के पेड़ का अत्यधिक महत्व है, भक्त मंदिर पर पूजा अर्चना के पूर्व नीम के पेड़ की पूजा करते हैं और नीम के पेड़ में मां शीतला का वास माना जाता है और नवरात्र में पूजा पाठ के साथ- साथ खटोला, सिंगार की सामग्री इत्यादि चढ़ाकर मां को प्रसन्न करते हैं।”
‌ ‌ भक्त रूबी गुप्ता के अनुसार-“सातों शीतला माता के पूजा, पाठ, सिंगार के साथ-साथ स्थानीय महिलाओं द्वारा ढोलक की थाप पर मां का पचरा, भक्ति गीत इत्यादि गाती है।”
कलाकार मां के दरबार में अपनी कलात्मक प्रस्तुति देकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Advertisement (विज्ञापन)
  • Advertisement

नम आंखों से श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की प्रतिमा को किया विसर्जित

हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। जिले भर में बृहस्पतिवार को मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। पूजा पंडालों से जब माता रानी की प्रतिमाओं को विर्सजन के लिए उठाया गया तो भक्तों में खासा उत्साह रहा। बैंड-बाजे के साथ भक्तगण प्रतिमाओं के साथ नाचते-गाते चले। लेकिन, जब तालाब में प्रतिमा का विसर्जन करने लगे तो भक्तों की आंखों में नमी आ गई। जिले भर में 300 से अधिक स्थानों पर सजी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। विसर्जन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।

जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज के पंडालो में स्थापित मूर्तियों का विसर्जन का जुलूस बड़े ही धूमधाम से निकाला गया इस दौरान श्रद्धालु डीजे के धुन पर नाचते गाते हुए विसर्जन के लिए गए। बतादे कि 150 मूर्तियों का विसर्जन धन्धरौल बांध में किया गया।
बभनी प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा को शुक्रवार को बाजे गाजे के साथ नम आंखों से तालाब में विसर्जित किया गया। नौ दिनों तक मां की पूजा अर्चना के बाद विसर्जित करने के लिए मां की प्रतिमा को जैसे ही उठाया गया सभी भक्तों की आंखों में आंसू आ गए। नम आंखों से मां को विदा किया गया। सभी स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। इसके साथ चौना, चपकी बडहोर, करमघट्टी गांव में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जित किया।
दुद्धी प्रतिनिधि के अनुसार शुक्रवार को विसर्जन से पहले माँ दुर्गा की प्रतिमा के साथ अन्य डी

Advertisement (विज्ञापन)

देवी-देवताओं की शोभायात्रा नगर में निकाली गई। उसके बाद शिवाजी तालाब में विसर्जन किया गया। बीजपुर प्रतिनिधि के अनुसार न्याय पंचायत जरहा में सोमवार को मां दुर्गा की प्रतिमा को शांतिपूर्ण माहौल में गाजे बाजे के साथ विसर्जित किया गया। बीजपुर दुदहिया मंदिर,बीजपुर बाजार, एनटीपीसी आवासीय परिसर, सिरसोती शिव मंदिर,कांट्रेक्टर कालोनी,शांतिनगर,नेमना जरहा,सेवकाडाड़, बकरिहवा की प्रतिमा शांतिपूर्ण माहौल में विसर्जित हुई।
केकराही प्रतिनिधि के अनुसार करमा थाना क्षेत्र के केकराही बाजार में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा को शनिवार को बाजे गाजे के साथ नम आंखों से तालाब में विसर्जित किया गया। करमा, खैरपुर, इमलीपुर गांव में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा को डोगिया जलाशय में विसर्जित किया गया।
करमा प्रतिनिधि के अुनसार स्थानीय थाना क्षेत्र के करमा बाजार ,पगिया तिराहा ,धौरहरा, करकोली, विसहार आदि गांवों में स्थापित मूर्तियों का विसर्जन किया गया।

Advertisement (विज्ञापन)

घोरावल नगर में बृहस्पतिवार को ढोल, ताशा, नगाड़ा की धुन पर भक्तों ने मां दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन किया।
ऊर्जांचल क्षेत्र के दर्जनों स्थानों से आई मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन शनिवार को कोहरौलिया प्राचीन शिव मंदिर के निकट रिहंद जलाशय में किया गया। खड़िया, शक्तिनगर बीना, अनपरा, लैंको, औड़ी मोड़, आदि जगहों की दर्जनों मां की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान भक्तों ने अबीर और गुलाल की होली खेली।

  • Advertisement

विजयादशमी पर आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने की शस्त्र पूजन

हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक विजयादशमी के पावन पर्व पर बुधवार की सुबह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने नगर स्थित स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में विजयादशमी उत्सव मनाया। उत्सव की शुरुआत प्रभु श्री राम, भारतमाता, डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार और श्रीगुरु जी के प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर जिला संघचालक हर्ष अग्रवाल व सह जिला कार्यवाह पंकज पाण्डेय ने किया, जिसके बाद शस्त्र पूजन किया गया।
इस अवसर पर हर्ष अग्रवाल ने कहा कि जिस तरीके से प्रभु श्री रामचंद्र जी ने 14 वर्ष के वनवास के दौरान सारे समाज को संगठित करके अधर्म पर धर्म की विजय प्राप्त की।

Advertisement (विज्ञापन)

ऐसे ही हम भी इस समाज को संगठित कर और पुनः अपने परम वैभव पर पहुंचने के लिए आज को संगठित करने का एक प्रयास करेंगे। आज का पर्व समरसता के रूप में भी मनाया जाता है समाज के टूटे हुए लोगों को इकट्ठा करने के लिए दबे, कुचले समाज को इकट्ठा करने के लिए सारे पर्व को मनाने के लिए जिस शक्ति की आवश्यकता होती है। उस शक्ति को प्राप्त करने के लिए आज के दिन हम विजयदशमी का उत्सव मनाते हैं। 9 दिन की उपासना के बाद आज हमें एक सकारात्मक शक्ति प्राप्त होती है।

Advertisement (विज्ञापन)

ताकि हम उसका सकारात्मक उपयोग कर सकें और अपने आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का जय-जयकार करते है। आज के दिन हम शस्त्र का पूजन करते हैं। आज के दिन सभी हिंदू समाज, सेना के जवान शस्त्र का पूजन करते है, क्योंकि 9 दिन शक्ति की उपासना के बाद जया व विजया को मां का आर्शीवाद प्राप्त था कि जो 9 दिन शक्ति की पूजा के बाद शस्त्र पूजन करेगा उसको जया व विजया का आशीर्वाद प्राप्त होगा। उसकी जय होगी व विजय होगी। अंत में संघ प्रार्थना की गई।
उत्सव में सुरेश केशरी सह नगर संघ चालक, महेश शुक्ला नगर कार्यवाह, नीरज सिंह, कीर्तन, संतोष, शशांक, संगम, अखिलेश, नितेश, गौतम बरनवाल, जे0बी0सिंह आदि उपस्थित रहे।

  • Advertisement

बिजली गिरने से मोबाइल टावर के जले सारे उपकरण

ओबरा, सोनभद्र। ओबरा बिल्ली स्टेशन के पास कोठा टोला गांव मे मंगलवार की रात गरज के साथ तेज बारिश हुई जिससे एटीसी टावर पर बिजली गिर जाने के कारण सारे एक्यूमेंट जल गए। जिससे कि उस क्षेत्र का नेटवर्क बाधित रहा।

इसकी जानकारी वहां के टेक्निशियन पंकज वर्मा ने बताया कि बारिश होने के कारण सारे उपकरण जल गए हैं जिसमें IMPS के कार्ड, 2मॉडल बैटरी बैंक और DG का चार्जिंग भी जलकर खाक हो गया है जिसके कारण काफी देर तक नेटवर्क ना होने से दूरसंचार बाधित रहा।

Advertisement (विज्ञापन)
  • Advertisement

रावण का पुतला जलते ही जय श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान हो गया जनपद सोनभद्र

HIGHLIGHTS

  • जिले में बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयदशमी बड़े ही धूमधाम से मनाया गया
  • जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज के रामलीला मैदान में 45 फीट ऊंचे रावण के पुतले का किया गया दहन
  • चोपन के रामलीला मैदान में 85 फीट ऊंचे रावण के पुतले का हुआ दहन
हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य के जीत का पर्व विजयादशमी जिले में धूमधाम से मनाई गई। रावण का पुतला जलते ही पूरा क्षेत्र जयश्री राम के नारों से गूंज उठा। दशहरा मेले पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम रहें।जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज के रामलीला मैदान में दशहरे पर रावण वध की लीला का मंचन किया गया। रथ पर सवार होकर भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध की शुरूआत हुई। राम और रावण के बीच युद्ध का मंचन लगभग एक घंटे चला। राम के बाण छोड़ने पर बुराई रूपी रावण का पुतला धू धू कर जल गया। रावण के वध के बाद भगवान श्रीराम ने अपने वचन के अनुसार विभीषण को लंका का राज्य सौंप दिया।

इस मौके पर सदर विधायक भूपेश चौबे, एडिशनल एसपी, सदर एसडीएम रमेश कुमार, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पवन जैन, कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र सिंह, कृष्ण मुरारी गुप्ता, प्रमोद गुप्ता, रविंद्र केसरी, हर्ष अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
वहीं दूसरी ओर‌ नगर के विभिन्न जगहों पर स्थापित दुर्गापूजा पंडालों में भक्तों की काफी भीड़ देखी गई जिसमें श्रद्धालुओं ने भारी संख्या में मां दुर्गा की विभिन्न स्वरूपों के दर्शन पूजन किया।
कोन: क्षेत्र में असत्य रुपी रावण का पुतला दहन किया गया। रामलीला देखने के लिए आस-पास के दर्जनों गांवों के बच्चों समेत ग्रामीण कोन रामलीला स्थल पहुंचे। शांति व्यवस्था, सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहीं। रामगढ़: पन्नूगंज थाना क्षेत्र के विभिन्न जगहों पर विजयदशमी पर रावण का पुतला जलाया गया।

Advertisement (विज्ञापन)

रामगढ़, मझटढ़, बेलखुरी व गुरौटी में रावण दहन हुआ। हजारों की संख्या में भीड़ रावण दहन देखने के लिए पहुंची।
बभनी: क्षेत्र में विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बुराई के प्रतीक रावण का वध होते ही जय श्रीराम के जयकारे लगने लगे। रावण का दहन होते ही आतिशबाजी होने लगी। क्षेत्र के बभनी, असनहर, चौना, पोखरा, आसनडीह, भंवर, चपकी, बडहोर, घघरी, मचबंधवा, चकसानी सहित कई गांवों में रावण का पुतला दहन किया गया।
विंढमगंज: विजयादशमी के अवसर पर रावण के पुतले का दहन किया गया। इससे पहले राम व रावण के बीच युद्घ की लीला मंचित की गई। इस दौरान पूरा ग्राउंड दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था।थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह, पीएसी व सिपाही सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रहे।

चोपन: नगर के चोपन बैरियर रामलीला मैदान में रावण का पुतला जलाया गया। वहीं रामलीला मंचन में भगवान राम व रावण की सेना मे जमकर युद्ध हुआ। अंत में विशालकाय रावण के 85 फीट ऊंचे पुतले में आग लगाई गई पुतला धू धू कर जलने लगा और पूरा वातावरण जयश्री राम के नारें से गुंजायमान हो गया। इसके पूर्व की गई आकर्षक आतिशबाजी ने लोगों का मन मोह लिया।

Advertisement (विज्ञापन)
  • Advertisement
Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें