सोनभद्र। विकास खण्ड करमा के मदैनिया गाँव में लालजी शुक्ला के घर गाय ने दो बछडों को जन्म दिया है।जिसमें एक बछिया और एक बछड़ा है। आम तौर पर गाय एक ही बच्चे को जन्म देती है इसलिए जब गाय ने दो बच्चे को जन्म दिया तो लोगों के लिए कौतुहल का बिषय बन गया।
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गांव के लोग गाय और बछड़ों को देखने के लिए उतावले हो रहे है जो भी जहां से सुन रहा है वह उन्हें देखे बिना अपने आप को रोक नहीं पा रहा है पशुपालक ने बताया कि गाय व बछड़े दोनों स्वस्थ है और प्रसन्नता भी जाहिर की।
सोनभद्र। समाजवादी लोहिया वाहिनी एवं यू जनसभा के द्वारा आदिवासी बहुमूल्य इलाके मऊ कला में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को दीप जलाकर आदिवासी समाज के लोगों ने याद कर उन्हें श्रद्धांजलिअर्पित किया।
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श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से बबलू धांगर पुर्व जिला पंचायत सदस्य व अध्यक्ष युवजन सभा सोनभद्र, मन्नू पांडे प्रदेश उपाध्यक्ष लोहिया वाहिनी, राम सिंह यादव, जिलाजीत यादव, बुल्लू मौर्या, प्रधान रामबिलास, प्रेम धांगर, जगरनाथ लाल श्रीवास्तव कमला, गोलू, चंदन, भीम के साथ लोग उपस्थित रहे।
समय से नही बनी सड़क तो हजारों छठ व्रती महिलाओं को तालाब से जाने में होगी परेशानी
दुद्धी में धूमधाम से मनाया जाता है आस्था का पर्व छठ
दुद्धी, सोनभद्र। स्थानीय नगर पंचायत स्थित मराठा शिवाजी तालाब जाने वाली सड़क को पीएमजीएसवाई के ठीकेदार ने छठ के पूर्व जेसीबी लगाकर खुदवा दी गयी। जिसे लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
प्रबुद्धजनों का कहना है कि आस्था का पर्व डाला छठ का आयोजन दुद्धी क़स्बे में धूमधाम से होता है हजारों की संख्या में छठ व्रती महिलाएं नंगे पांव तो कुछ दंडवत लेटकर मत्था टेकते हुए शिवाजी मराठा तालाब पहुँचती और और ऐसे में चकाचक सड़क को खुदवाकर नुकीले सोलिंग युक्त करा दी गयी है जिससे व्रती माताओं को सरोवर के घाटों पर जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
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क़स्बावासी सरेन्द्र गुप्ता, मनीष जायसवाल, रूपेश जौहरी, कृष्णा अग्रहरी, जवाहर लाल अग्रहरि एडवोकेट (पूर्व अध्यक्ष, सिविल बार) आदि ने कहा कि ठीकेदार द्वारा हिन्दू आस्था पर चोट पहुँचाने का कुत्सित प्रयास है जिसे हिन्दू समाज बर्दास्त नहीं करेगा अगर छठ से पूर्व उक्त सड़क को नहीं बनवाया गया तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
सोनभद्र। टाऊन क्लब क्रिकेट मैदान में यादव महासभा के द्वारा हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी 12 वी गोवर्धन पूजा समारोह 28 अक्टूबर को रखा गया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद राम किशुन यादव व विशिष्ट अतिथि डा० राम जीत यादव सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष भा०रा०दे०रा० का०दुद्धी होगें।
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वही कलश यात्रा सुबह 8 बजे शुरू होगी तथा दिन में पूजा व प्रसाद वितरण रात्रि में विराट बिरहा दंगल ओमप्रकाश सिंह यादव बक्सर बिहार व गायिका नीतू राज सारनाथ वाराणसी के मध्य होगा। आयोजन समिति ने इस अवसर पर अधिक से अधिक लोगो को उपस्थित होकर कार्यक्रम सफल बनाने की अपील की। उक्त आशय की जानकारी जगत नारायण यादव ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दिया है।
आदिवासी करमा नृत्य के माध्यम से देते हैं पर्यावरण संरक्षण का संदेश
सोनभद्र में दीपावली से शुरू होता है करमा पर्व
ब्रिटिश साहित्यकारों ने किया है करमा नृत्य पर शोध कार्य।
हर्षवर्धन केसरवानी (जिला संवाददाता)
सोनभद्र। आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में दीपावली के दीप उत्सव के साथ शुरू हुआ कर्मा का पर्व। अमावस्या के दिन पढ़ने वाली दीपावली का पर्व पूजा, अनुष्ठान,आराधना, तंत्र मंत्र को जागृत करने का पर्व है। आदिवासी जनपद सोनभद्र में आदिवासी बाहुल्य इलाकों में दीपावली का पर्व दीप उत्सव के साथ- साथ नृत्य, उत्सव, अनुष्ठान, पूजा- पाठ करके आदिवासी मनाते हैं ।
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संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के नामित सदस्य दीपक कुमार केसरवानी के अनुसा-“करमा आदिवासियों का लोकप्रिय नृत्य है और आदिवासी दीपावली के दिन करमा नृत्य के माध्यम से कर्म देवता को प्रसन्न करने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी अपने गीतों के माध्यम से देते हैं।
दीपावली के आगमन के पूर्व आदिवासी इलाकों में करमा पर्व मनाने की तैयारी शुरू हो जाती है और जहां पर इस पर्व के आयोजन का स्थान तय होता है वहां पर आदिवासीजन खुद वहां की सफाई, लिपाई, पुताई करते हैं और दीपावली के दिन आदिवासी युवक- युवतियां मादल की थाप पर गीत गाती हुई जंगल में जाते हैं। और वहां पर आदिवासी युवक हल्दु अथवा कदम के पेड़ पर चढ जाते हैं और एक हरी डाल को काटते हैं। (आदिवासी संस्कृति और समाज में कर्म की उपाधि दी गई है)
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और कदम या हल्दु के पेड़ के नीचे खड़ी आदिवासी युवतियां उस डाल को लोक लेती हैं और पुन: कर्मदेव के गीत गाते हुए युवक- युवती गांव पहुंचते हैं और गांव की चौपाल, किसी खुले स्थान अथवा आंगन में कर्मदेव की डाल की स्थापना आदिवासियों के पुरोहित बैगा तंत्र- मंत्र के साथ करते हैं और पूजा अनुष्ठान तांत्रिक क्रियाओं के पश्चात आदिवासीजन कर्मदेव को रिझाने, मनाने और अपने सुख शांति, समृद्धि के लिए मादल के थाप,पैजनी के झनझन पर करमा लोकनृत्य का आरंभ करते हैं।
आदिवासी लोक कला केंद्र की सचिव एवं साहित्यकार प्रतिभा देवी के अनुसार-“आदिवासी स्त्रियां अपने परंपरागत वस्त्राभूषण अपने केशों की सजावट फूलों पतियों के माध्यम से करती हैं आदिवासी युवक भी अपनी नई वेशभूषा को धारण कर गले में मॉदल लटकाए पुरुष मांदल की थाप पर आदिवासी स्त्रियां नृत्य का आरंभ करती हैं इस नृत्य में सामाजिक मर्यादाओं का ख्याल रखा जाता है,
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ससुर, भसुर मुख्य रूप से भाग नहीं लेते गले में लटके मॉदल पर हाथ की थाप से बजने वाले सुमधुर संगीत, पैरों में बंधी हुई पैरी की छन छन की धुन पर आदिवासी नर्तक आपा खो बैठते हैं ध्वनियों के साथ मिलकर नृत्य को सहज गति प्रदान करते हैं मंडलाकार अथवा अर्ध गोलाकार मे खड़े आदिवासी स्त्री-पुरुष नृत्य करते हुए, गीत गाते हुए कर्मदेव की आराधना में लीन हैं, जनपद के राबर्ट्सगंज, दुद्धी, म्योरपुर, बभनी विकास खंडों के आदिवासी बाहुल्य गांव में इस नृत्य का आयोजन सामूहिक रूप से किया जाता है।
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इसमें ओझा की मुख्य भूमिका होती है और ओझा अपने विभिन्न क्रियाओं के माध्यम से लोगों के जीवन में आने वाली परेशानियों एवं इसके निदान की क्रिया बताता है साथ ही साथ वह अपने शरीर पर गुरुदम, लोहे के सीकड से प्रहार करता है, सांगा गाल में पहन लेता है और भावाविभोर होकर नृत्य करते हुए कर्मदेव का अनुष्ठान, पूजा पाठ करता है, इस पर्व से अनेकों लोक कथाएं जुड़ी हुई हैं।
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कठपुतली कला केंद्र सलखन के संस्थापक रंगकर्मी हरिशंकर शुक्ला का मानना है-“,सोनभद्र जनपद के बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में गरबा नृत्य का आयोजन होता है आयोजन में भाग लेने वाले आदिवासियों की अपनी- अपनी संस्कृति हैऔर नृत्य प्रस्तुत करने का अलग- अलग तरीका होता है। लोक कला विशेषज्ञ डॉक्टर अर्जुन दास केसरी के अनुसार-‘आदिवासी आदिवासी जन अनुष्ठान, पूजा, पाठ के माध्यम से अपने अपने परिवार तथा गांव में निवास करने वाले लोगों का जीवन सुख समृद्धि से भरा रहे इसकी भी प्रार्थना कर्म देव से करते हैं।
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करमा नृत्य के बारे में पाश्चात्य विद्वान विलियम क्रुक,डाल्टन, वैरियर एल्विन आदि पाश्चात्य विद्वानों सहित सोनभद्र जनपद प्रख्यात लोक साहित्यकार डॉक्टर अर्जुनदास केसरी, दीपक कुमार केसरवानी इत्यादि विद्वानों ने अपनी- अपनी कृतियों में कर्मा लोक नृत्य पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला है, गीतों में कर्मदेव को प्रसन्न करने अथवा पूजा अनुष्ठान के गीतों के साथ आदिवासीजन अपने जीवन की तमाम समस्याओं को उजागर करते हैं, प्रकृति उपासना के गीत के साथ साथ आदिवासीजन पूजा अनुष्ठान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं ।
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शिक्षिका तृप्ति केसरवानी के अनुसार-“हम करमा लोकनृत्य के आयोजन का अध्ययन करें तो इनकी हर क्रिया, अनुष्ठान मेप्रकृति संरक्षण का संदेश छिपा हुआ है आदिवासी अपने नृत्य, गीत, संगीत के माध्यम से इसको उजागर करते हैं।” आज सोनभद्र जनपद पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है ऐसे में शहरों के किनारे गांवों में, जंगलों में कठिन, श्रम साध्य सुविधा विहीन जीवन जीते हुए आदिवासी कलाकार न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं बल्कि आगामी पीढ़ी को भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, इस संदेश को सभी समाज सभ्य लोगों, पर्यावरणविदो, विद्वानों को सुनना और गुनना होगा,तभी दीपावली के दिन आदिवासियों जातियों द्वारा मनाए जाने वाले करमा पर्व का उद्देश्य सफल होगा।
राम कालीन स्मृतियों को गीतों में सजोय हुए हैं सोनभद्र के आदिवासी- दीपक कुमार केसरवानी
नगरीय एवं बनवासी सभ्यता का प्रतीक है करमा नृत्य
भगवान श्री राम के प्रति समर्पित रहे हैं आदिकाल से आदिवासी।
हर्षवर्धन केसरवानी (जिला संवाददाता)
सोनभद्र। राम कालीन स्मृतियों को गीतों में सजोये हुए हैं सोनभद्र के आदिवासी जन इसकी झलक भगवान राम के अयोध्या आगमन के शुभ अवसर दीपावली पर्व के पूर्व राम जन्म भूमि अयोध्या मे देखने को मिली। जनपद सोनभद्र के आदिवासी कलाकार भगवान श्री राम की स्मृतियों को अपने हृदय में संजोए कर्मा लोकनृत्य का जलवा बिखेर कर कलयुग में भी भगवान राम के प्रति अपना समर्पण भाव प्रगट किया।
रामायण कल्चर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर/इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-विंध्य पर्वत के उत्तर भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या और इसके दक्षिण आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सोनभद्र में निवास करने वाले नगरीय एवं जंगली जातियों का संबंध में सदियों से रहा है।
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श्रीराम के वनवास काल में आदिवासीयों, बनवासियों ने अयोध्या के राजकुमार भगवान राम को भगवान श्री राम बनाया। वनवास कॉल मे दशरथ नंदन श्री राम विंध्य पर्वत को पार कर सोनभद्र जनपद के घोरावल के शिल्पी गांव से होते हुए संभवतः रामेश्वरम को गए थे और मार्ग में निवास करने वाले आदिवासियों वनवासियों ने उनका मार्गदर्शन किया था, जिसके कारण भगवान श्री राम, भार्या सीता, अनुज लक्ष्मण का वन मार्ग सुगम हो गया था।
साहित्यकार प्रतिभा देवी का मानना है कि-“विंध्य क्षेत्र में आदिवासी जंगलों के राजा रहे हैं और राष्ट्रीय आपदा के समय वे चक्रवर्ती सम्राट, अधीनस्थ राजाओं की युद्ध में सैन्य मदद करते थे और जंगल के रास्ते उन्हें खाद्य- रसद इत्यादि मुहैया कराते थे इसलिए कोई भी राष्ट्रीय सम्राट उन पर न तो कर लगाता था और नहीं उनके राज्यों को अपने राज्यों की सीमाओं में सम्मिलित करता था, वह सदियों से स्वतंत्र जीवन व्यतीत करते रहे।
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आज भी सोनभद्र में रहने वाले आदिवासी जनों के हृदय में भगवान श्री राम बसते है।राष्ट्रीय धार्मिक, सांस्कृतिक त्योहारों पर आदिवासी कलाकार करमा नृत्य के माध्यम से नगरीय, वन्य सभ्यता निवास करने वाले लोगो के मित्रता,सहयोग को अपने गीत- नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं।
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आज भी सोनभद्र जनपद में निवास करने वाली आदिवासी जातियां राम कालीन सभ्यता- संस्कृति को अपने नृत्य, गीत, संगीत के माध्यम से संरक्षित किए हुए हैं।
सोनभद्र। सोमवार को जिले में प्रकाश पर्व दीपावली की धूम रही। इस दौरान रातभर आतिशबाजी का दौर चला और उल्लास व उमंग संग दीप जलाए गए। पूरा जिला दूधिया रोशनी से नहा उठा था। लोगों ने अपने घरों में जहां रंगोली बनाई वही दुकानों व प्रतिष्ठानों को रंग-बिरंगे झालरों की मदद से दुल्हन की तरफ सजाया गया। सुबह से ही दुकानों पर मिष्ठान व दीपावली के उपहार की खरीददारी के लिए लोगो की लम्बी कतारें लगी रही।
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बतादे कि बाजारों में पर्व को लेकर भारी उत्साह नजर आया जिसमे शहरी क्षेत्र के अधिकांश बाजारों में जाम की स्थिति बनी रही वही दूसरी ओर पुलिस भी पर्व को लेकर सतर्क नजर आई। सोनांचल में दीपावली के त्योहार को लेकर चहुंओर खुशी का माहौल रहा। शाम होते ही सोनांचल का हर कोना दूधिया रोशनी से जगमगा उठा। दीपावली के एक सप्ताह पूर्व से ही लोग घरों के रंग-रोगन के साथ ही विद्युत झालरों से सजाने -संवारने का कार्य प्रारंभ कर दिया था। दीपावली पर उनका यह प्रयास पूरी तरह परवान चढ़ता नजर आया।
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जिला मुख्यालय रार्बर्ट्सगंज में शाम को मानो स्वर्ग की इंद्रधनुषी आभा जमीन पर उतर आई। एक से एक बढ़कर एक विद्युत झालरों के दूधिया रोशनी से सजाए गए मकान शहर की शोभा में चार चांद लगा रहे थे। इसके मध्य में दीपों की सजावट आभा को और बढ़ाती नजर आई। आवासों के साथ कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों व मंदिरों को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था। घरों में भक्तिभाव से भगवान श्रीगणेश व मां लक्ष्मी की वेद मंत्रोच्चार के मध्य विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
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शाम होते ही छोटे-बड़े सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों में पूजा-पाठ का दौर चलता रहा। इस बीच पर्व की ग्रामीणों इलाकों में भी जबरदस्त धूम रही। महालक्ष्मी पूजन व दीपावली का पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या में प्रदोष काल, स्थिर लग्न समय में मनाया जाता है। इस दिन लोग धन की देवी महालक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए लक्ष्मी पूजन करते हैं। दीपावली के दिन की विशेषता मां लक्ष्मीजी के पूजन से संबंधित है। इस दिन हर घर, परिवार, कार्यालय में महालक्ष्मीजी का पूजन कर उनका स्वागत किया जाता है। लोग धन की देवी मां लक्ष्मी से समृद्धि व वित्तकोष की कामना करते हैं। पर्व को लेकर बाजार में चहल- पहल दिखाई दे रही थी।
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दीप जलाकर मिटाया अंधियारा दीपोत्सव पर शाम होते ही ज्योति के पर्व का उल्लास व उत्साह लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा। घरों से लेकर व्यापारिक प्रतिष्ठान रंग-बिरंगे झालर व मिट्टी के दीए जगमगा उठे। इस दौरान उजियारा फैलते ही चारों ओर अंधियारा मिट गया।
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फूल व मिठाई की दुकानों पर रही भीड़ दीपावली पर्व पर भगवान गणेश व महालक्ष्मी की पूजा के लिए फूलों की दुकानों पर भीड़ रही। सबसे अधिक कमल के फूल की डिमांड रही। दुकानदार भी मौका देखकर अधिक दामो में कमल के फूल बेचे रहे थे। गेंदा का माला 30 से 60 रुपये तक बिक रहा था। इसके अलावा मिठाई की दुकानों पर लोग मिष्ठान खरीदते रहे। कई दुकानों पर मिठाई खत्म हो गई। लोगों ने एक दूसरे को मिठाई संग सूखे मेवे आदि तोहफे में दिए।
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जमकर हुई आतिशबाजी
प्रकाश पर्व दीपावली पर रविवार को लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। शाम होते हुए संपूर्ण वातावरण पटाखों के धूम-धड़ाके से गुंजायमान हो उठा। वहीं आतिशबाजी को लेकर न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पुलिस सुबह से ही चौकस नजर आई। प्रकाश पर्व पर पटाखों का शोर व फूलझड़ियों की जगमगाहट न हो तो पर्व का उल्लास फीका रहता है। इस वर्ष भी माहौल अपेक्षा के अनुरूप रहा। वैसे तो चार दिन पहले से ही बच्चों द्वारा आतिशबाजी प्रारंभ कर दी गई थी, कितु दीपावली को आतिशबाजी का उमंग देखते ही बना। संपूर्ण वातावरण जहां पटाखों से शोर से गूंज रहा था वहीं पूरा आकाश रंग-बिरंगी रोशनी से मानो चहक रहा था।
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बीजपुर। गुरुवार को दीपो का त्योहार दीपावली क्षेत्र के जरहा, नेमना, पिडारी, बकरिहवा, अंजानी, लीलाढेवा, डोडहर, सिरसोती, बीजपुर में धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पूरे दिन बाजारों में दुकानों पर खरीददारों की भीड़ उमड़ी रही। लोग एक दूसरे को मिठाईयां खिला बधाई देते नजर आए। क्षेत्र के बीजपुर बाजार के सब्जी मंडी में लगी पटाखों की दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई बच्चों ने मनपसंद पटाखे खरीदे। पटाखों की दुकानों पर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन किया गया।
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अनपरा। ऊर्जांचल की औद्योगिक कालोनी समेत ग्रामीण इलाकों में धनधान्य की कामना के साथ लोगों ने दीपावली का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर लोगों की तरफ से मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए एक सप्ताह से तैयारियां की जा रही थी। सभी घरों की साफ-सफाई एवं रंग पोतन कर आकर्षक ढंग से विद्युत झालरों से सजाया गया था। शाम होते ही विद्युत झालर, द्वीप व मोमबत्ती से घरों को सजाकर लक्ष्मी-गणेश व मां काली की विधि-विधान से पूजन कर धनधान्य की कामना की गई। लोगों ने गणेश-लक्षमी की पूजा अर्चना के बाद मिठाईयां बांटकर एक दूसरों को शुभकामनाएं दी।
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बच्चों ने भी उत्साह व उमंग के पटाखे फोड़कर खूब मनोरंजन किया। अनपरा, रेणुसागर, ककरी, बीना, खड़िया, शक्तिनगर समेत अन्य जगहों पर मिठाई व सजावट की दुकानें सजी रही। बाजारों मे काफी चहल-पहल बनी रही। देर रात तक पटाखोंकी दुकानों पर भीड़ उमड़ी रही।
पुलिस अधीक्षक डॉक्टर यशवीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दी जानकारी
अवैध शराब पकड़ने वाली पुलिस टीम को 25 हजार नगद पुरस्कार देकर किया गया पुरस्कृत
बरामद कि गई शराब की कुल कीमत 40 लाख रुपये बताई जा रही है
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सोनभद्र। क्राइम ब्रांच, चोपन पुलिस और सर्विलांस टीम ने पंजाब के अमृतसर से बिहार भूसा लदी 10 चक्का ट्रक में छिपाकर ले जाई जा रही 624 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब चोपन थाना क्षेत्र के सलखन फासिल्स पार्क गेट के पास से बरामद किया गया है। पुलिस अधीक्षक डॉ0 यशवीर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर मामले का खुलासा करते हुए बताया है कि ट्रक में 624 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब के साथ ट्रक चालक पंजाब के पठानकोट निवासी लखविंदर सिंह (45वर्ष) पुत्र हरवेल सिंह को गिरफ्तार किया गया है।
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बतादे कि बरामद कि गई शराब की कुल कीमत 40 लाख रुपये बताई जा रही है। अवैध शराब बरामद करने वाली पुलिस टीम में सर्विलांस प्रभारी निरीक्षक अमित सिंह, क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र प्रताप सिंह, चोपन थाना प्रभारी निरीक्षक लक्ष्मण पर्वत, हेड कांस्टेबल जगदीश मौर्य अमर सिंह अतुल सिंह, प्रताप सिंह कांस्टेबल सतीश सिंह, रितेश, प्रेम प्रकाश चौरसिया,
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एसओजी से कांस्टेबल अमित कुमार सिंह, कांस्टेबल प्रकाश सिंह, सर्विलांस सेल अपराध शाखा से हेड कांस्टेबल सुरेंद्र यादव, कांस्टेबल अजीत कुमार, रामबाबू, इंद्र सोनकर धर्मेंद्र तिवारी रहे। पुलिस अधीक्षक ने पुलिस टीम के इस सराहनीय कार्य के लिए 25 हजार रुपये नकद पुरस्कार देकर पुरस्कृत किया है।
डॉ राम मनोहर लोहिया ने गुलामी के प्रतीक वाले नामों कोई बदलने की सरकार से मांग की थी
आजादी के 75 साल बाद भी कायम है यह परंपरा।
सोनभद्र। आजादी के 75 साल व्यतीत हो जाने के बावजूद आज भी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक प्राकृतिक, कलात्मक रूप से संपन्न सोनभद्र जनपद के निवासी प्रत्येक वर्ष दीपावली के पूजा में कार्य की सिद्धि के लिए अनुष्ठान का उद्देश्य एवं अनुष्ठान कहां किया जा रहा है किसके लिए किया जा रहा है आदि का संकल्प लेते हैं जनपद में दीपावली के दिन जब हम लक्ष्मी पूजन का आयोजन करते हैं, तब जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज, विंढमगंज, म्योरपुर के निवासी (अंग्रेज अधिकारियों द्वारा अपने नाम पर बसाए गए) नगरों का नाम लेकर संकल्प लेते हैं।
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साहित्यकार प्रतिभा देवी के अनुसार-“यह परंपरा ब्रिटिश काल से ही पूर्वर्ती जनपद मिर्जापुर वर्तमान सोनभद्र में कायम है, क्योंकि प्रत्येक पूजा-पाठ व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में पुरोहित द्वारा अपने जजमान को अपने नगर एवं क्षेत्रीय भूगोल से संबंधित संकल्प दिलाते हैं।
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इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“सोनभद्र जनपद का मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज इस नगर की स्थापना मिर्जापुर के उप जिलाधिकारी डब्ल्यूबी रॉबर्ट्स ने सन 1846 ईस्वी में किया था, इस नगर का प्रथम नागरिक जगन्नाथ साहू को बनाया था। कालांतर में शाहगंज में संचालित कुसाचा तहसील को रॉबर्ट्सगंज नगर में स्थापित किया गया। सन 1954 इसवी में इस तहसील का नाम रॉबर्ट्सगंज तहसील हो गया।
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मिर्जापुर के लोकप्रिय जिलाधिकारी पी० बिल्डम (कार्यकाल 1901-1903-1916) ने मिर्जापुर जनपद के दक्षिणांचल के निवासियों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने, ब्रिटिश सरकार की आय बढ़ाने एवं इस क्षेत्र के आदिवासियों को अधिकार दिलाने हेतु इस क्षेत्र में दौरा किया था और मुडीसेमर नामक गांव में जिस स्थान पर उन्होंने विश्राम किया था वह गांव बिल्ढमगंज के नाम से विकसित है। सन 1870-71 ई0 संयुक्त प्रांत आगरा एवं अवध लेफ्टिनेंट गवर्नर मिस्टर डब्लू०म्योर० वर्तमान जनपद सोनभद्र का प्रशासनिक दौरा कर राजस्व विभाग का एक अस्थाई कार्यालय बनाया था शासकीय व्यवस्था पर विचार परामर्श स्थानीय लोगों के साथ किया और यहां के टप्पो के लिए 10 साला भूमि व्यवस्था लागू की गई।
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कैप्टन म्योर जिस स्थान पर अपना अस्थाई कार्यालय स्थापित किया था आज वह स्थान म्योरपुर के नाम से जाना जाता है। वर्तमान समय में यहां पर एयरपोर्ट निर्माणाधीन है भविष्य में यह नगर आधुनिक एवं तकनीकी रूप से विकसित हो जाएगा।
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अंग्रेज अधिकारी जहां कहीं भी सैर- सपाटा, प्रशासनिक कार्य के लिए जाते थे वहां पर आपकी यात्रा अथवा स्मृतियां सजोने के लिए उस स्थान का नामकरण अपने नाम पर कर देते थे, जनपद सोनभद्र का मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज, बिल्डमगंज एवं म्योरपुर इसका उदाहरण है।
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आचार्य संतोष धर द्विवेदी के अनुसार-“प्रत्येक कार्य के सिद्धि के लिए हम धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन करते हैं, इस आयोजन के पूर्व दीप प्रज्वलन कर दीपक को समस्त कर्मों का साक्षी मानकर हम अपने कार्य की सिद्धि, कार्य किस लिए किया जा रहा है, किसके समक्ष किया जा रहा है इत्यादि का संकल्प लेते हैं। इस संकल्प मे हम जिस स्थान पर अनुष्ठान करते हैं उस स्थान का नाम का संकल्प लेने की परंपरा है। हमारी भारतीय संस्कृति एवं धर्म जब हम किसी मांगलिक धार्मिक आयोजन करते हैं तो उस पर हमारे पुरोहित द्वारा अपने जजमान को देश, प्रदेश,नगर, गोत्र के नाम का संकल्प कराते हैं । संकल्प के बिना हमारै कार्य की सिद्धि नहीं हो सकती ऐसा हमारे शास्त्रों में वर्णित है।
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समाजवादी चिंतक एवं विचारक डॉक्टर राम मनोहर लोहिया जब सोनभद्र दौरे पर आए थे तो इन्होंने रावटसगंज ब्लॉक के निसोगी डाक बंगला में एक मीटिंग में कहा था कि-” हमें इन गुलामी के प्रतीक वाले कस्बों, शहरों के नामों से छुटकारा पाना चाहिए और उन्होंने सुझाव दिया था कि म्योरपुर का नाम मयूरपुर, रॉबर्ट्सगंज का नाम रापटगंज सरकार को करना चाहिए। लेकिन आजादी के 75 साल व्यतीत हो जाने के बावजूद अंग्रेजी नाम वाले शहरों का सिक्का कायम है। हमें इन गुलामी के प्रतीक नाम वाले शहरों, कस्बों का नाम बदलने के लिए आंदोलन चलाना चलाना चाहिए। ताकि हम अपने पूजा- अनुष्ठान में अंग्रेजों के नाम वाले शहरों का नाम का संकल्प न दोहराए।
सोनभद्र। पर्यावरण संरक्षण के लिए संकल्पित प्रकृति विधान फाउंडेशन के संस्थापक राजकुमार केसरी द्वारा प्रकृति चली सबके द्वार अभियान का शुभारंभ विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट द्वारा विंध्य रत्न एवं कला सम्राट की उपाधि से सम्मानित सुप्रसिद्ध मिमिक्री आर्टिस्ट अभय शर्मा को एक वृक्ष एवं एक दीप प्रदान कर अभियान का शुभारंभ किया गया।
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इस अवसर पर फाउंडेशन के संस्थापक राजकुमार केसरी ने कहा कि-‘वृक्ष प्रकृति में फैले प्रदूषण रूपी अंधकार को भगाता है और दीपक अज्ञानता रूपी अंधकार को भगाकर ज्ञान का प्रकाश चलाता है। इसलिए आज के दिन हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम प्रकाश पर्व दीपावली के अवसर पर दीप प्रज्वलन के साथ साथ एक पौधा भी अपने घर, आंगन, छत पर लगाए।
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इस अवसर पर समाज सेवा एवं गौरैया संरक्षण के लिए संकल्पित उत्सव ट्रस्ट के संस्थापक आशीष पाठक सहित अन्य ग्रामीणजनो, प्रबुद्धजनो ने एक पेड़ लगाने, दीपक जलाने का संकल्प लिया।