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- सोनभद्र में 17 हजार स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का स्वतः बढ़ा बिजली लोड, बिल में अतिरिक्त शुल्क जुड़ने से आम जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ
सोनभद्र। जिले के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बिजली निगम की नई व्यवस्था का असर अब अपने बिजली बिलों में सीधे तौर पर देखने को मिल रहा है। रॉबर्ट्सगंज डिवीजन के 17 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन का स्वीकृत लोड सॉफ्टवेयर द्वारा स्वतः बढ़ा दिया गया है। अचानक स्वीकृत लोड बढ़ने के कारण बिजली बिल में मासिक फिक्स चार्ज के साथ-साथ प्रोसेसिंग शुल्क और अतिरिक्त सिक्योरिटी राशि का भी भारी बोझ बढ़ गया है। अधिकांश उपभोक्ताओं को इस बदलाव की जानकारी तब मिली, जब उनके पास अप्रत्याशित रूप से बढ़े हुए बिजली बिल पहुंचे, जिससे उपभोक्ताओं में गहरा आक्रोश और हैरानी देखने को मिल रही है।
सोनभद्र जिले में विद्युत वितरण निगम के रॉबर्ट्सगंज और पिपरी दो प्रमुख वितरण खंड हैं, जिनके अंतर्गत तीन लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता आते हैं। बिजली निगम द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता लगातार तीन महीनों तक अपने स्वीकृत लोड से अधिक बिजली की खपत करता है, तो सॉफ्टवेयर स्वतः ही उसके कनेक्शन का लोड अगली श्रेणी में बढ़ा देता है।

इसी माह से लागू हुई इस व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि लोड बढ़ाने से पूर्व उन्हें न तो कोई पूर्व सूचना या नोटिस दिया गया और न ही अपनी बात रखने का कोई अवसर मिला। इसके अतिरिक्त कई उपभोक्ता मीटर की सटीक रीडिंग और दर्ज खपत की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

लोड स्वतः बढ़ने का सबसे बड़ा और सीधा असर मध्यम व निम्न आय वर्ग के घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ा है। उदाहरण स्वरूप, कनेक्शन का स्वीकृत लोड एक किलोवाट से बढ़कर दो किलोवाट होते ही फिक्स चार्ज में प्रति माह लगभग 110 रुपये की वृद्धि हो जाती है। साथ ही प्रति यूनिट दर श्रेणी बदलने से कुल बिल की राशि भी काफी बढ़ जाती है।

इतना ही नहीं, लोड बढ़ने के साथ ही उपभोक्ताओं के बिल में एकमुश्त प्रोसेसिंग फीस और अतिरिक्त सिक्योरिटी डिपॉजिट की रकम भी जोड़कर भेजी जा रही है। कई गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार दो किलोवाट श्रेणी में आ जाने के कारण शासन द्वारा मिलने वाली बिजली सब्सिडी के दायरे से भी बाहर हो गए हैं।

इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए पिपरी उपखंड के एसडीओ धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि नया सिस्टम और सॉफ्टवेयर पिछले तीन महीनों की वास्तविक बिजली खपत के आंकड़ों का विश्लेषण कर स्वतः लोड बढ़ाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक बार सिस्टम में लोड बढ़ जाने के बाद वह स्थायी रूप से दर्ज हो जाता है।

यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि उसका लोड गलत बढ़ा है या वह इसे वापस कम कराना चाहता है, तो उसे बिजली निगम के विभागीय कार्यालय में जाकर औपचारिक आवेदन देना होगा। वहीं रॉबर्ट्सगंज डिवीजन के अधिशासी अभियंता इं. ओपी गुप्ता ने बताया कि यदि खपत तय सीमा से अधिक पाई जाती है तो नियमतः सिस्टम स्वतः लोड अपडेट करता है और रॉबर्ट्सगंज डिवीजन में अब तक ऐसे 17,615 उपभोक्ताओं का लोड बढ़ा है। पिपरी डिवीजन में भी हजारों उपभोक्ता इससे प्रभावित हुए हैं।




































