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- सोनभद्र के किसानों के लिए बड़ी राहत: नाम संशोधन की प्रक्रिया होगी बेहद आसान, DM ने लेखपालों और राजस्व कर्मियों की सुस्ती पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिए समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

सोनभद्र। जनपद के अन्नदाताओं और किसानों को अपनी ही जमीनों के अभिलेखों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब तहसीलों के अंतहीन चक्कर काटने से पूरी तरह मुक्ति मिलने जा रही है। किसान हितों को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन ने किसान रजिस्ट्रेशन एवं किसान आईडी में नाम संशोधन की जटिल प्रक्रिया को बेहद सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है।
सोनभद्र के जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने जनपद के समस्त उप जिलाधिकारियों (एसडीएम) को कड़े दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कहा है कि किसानों को अनावश्यक रूप से तहसीलों और सरकारी दफ्तरों की खाक छानने के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने राजस्व विभाग को अल्टीमेटम दिया है कि नाम संशोधन से जुड़े सभी लंबित मामलों का एक निश्चित समय सीमा के भीतर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और इसमें किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही पर सीधे संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

दरअसल, वर्तमान समय में सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न लाभकारी योजनाओं, रियायती दरों पर उर्वरक, कीटनाशक, बीज और अन्य कृषि इनपुट संबंधी सब्सिडी का सीधा लाभ उठाने के लिए प्रत्येक किसान के पास किसान रजिस्ट्रेशन एवं एक विशिष्ट किसान आईडी का होना अनिवार्य कर दिया गया है।

लेकिन जनपद के हजारों किसानों के सामने एक व्यावहारिक और बड़ी समस्या यह आ रही थी कि उनके वास्तविक नाम एवं पते राजस्व अभिलेखों की मूल खसरा-खतौनी में कुछ और दर्ज हैं, जबकि अन्य दस्तावेजों में अलग हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत सिंह, कुमार, देवी, रानी, कुमारी जैसे उपनामों (सरनेम) में स्पेलिंग या भिन्नता होने के कारण आ रही थी।

इस मामूली मानवीय त्रुटि की वजह से कृषि विभाग के पोर्टल पर किसानों के डेटा का मिलान नहीं हो पा रहा था और सीधे-साधे ग्रामीण किसानों को नाम ठीक कराने के लिए महीनों तक लेखपालों, कानूनगो और नायब तहसीलदारों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। इस गंभीर समस्या और राजस्व कर्मियों के उदासीन रवैये को लेकर जिला मुख्यालय और तहसील दिवसों में किसानों द्वारा लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं।

इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता और संवेदनशीलता से लेते हुए जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने राजस्व अधिकारियों के पेंच कसे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में निर्देश दिया कि किसान हित प्रशासन के लिए सर्वोपरि है और नाम संशोधन की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुगम बनाया जाए। जिलाधिकारी ने कड़े लहजे में कहा कि किसी भी किसान को एक छोटे से नाम सुधार के लिए अनावश्यक रूप से परेशान करने या राजस्व कर्मियों द्वारा उन्हें बार-बार दौड़ाने की पुरानी प्रवृत्ति पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगाई जाए।

प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए डीएम ने निर्देशित किया कि किसान द्वारा आवेदन प्राप्त होने की तिथि से लेकर नाम संशोधन का कार्य पूर्ण होने तक की एक सख्त समय सीमा (डेडलाइन) तय की जाए और इसका कड़ाई से शत-प्रतिशत पालन कराया जाए।

इसके साथ ही उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने स्तर पर लेखपाल, कानूनगो एवं नायब तहसीलदार स्तर पर लंबित पड़े ऐसे सभी पुराने व नए प्रकरणों की हर सप्ताह नियमित समीक्षा (रिव्यू) करें।

यदि किसी भी स्तर पर बेवजह फाइल रोकने या किसान को टरकाने की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल कठोर अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिलाधिकारी ने अंत में दोहराया कि प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप किसानों को त्वरित, सुलभ और सुगम डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना सोनभद्र प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा जनता के कार्यों में किसी भी स्तर पर शिथिलता या सुस्ती को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

































