HIGHLIGHTS
- सोनभद्र में औद्योगिक निवेश को रफ्तार देने के लिए जिलाधिकारी की बड़ी पहल, अडानी, जेएसडब्ल्यू और ग्रीनको परियोजनाओं की अड़चनें होंगी दूर
सोनभद्र। जनपद में प्रस्तावित और संचालित बड़ी औद्योगिक एवं ऊर्जा परियोजनाओं की प्रगति को रफ्तार देने के लिए जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में देश की प्रतिष्ठित कंपनियों जैसे अडानी, जेएसडब्ल्यू (JSW), अबाडा और ग्रीनको की परियोजनाओं की स्थापना व संचालन में आ रही विभिन्न प्रशासनिक, राजस्व एवं वन भूमि से जुड़ी जटिलताओं पर बिंदुवार विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) ओबरा व राबर्ट्सगंज, उप जिलाधिकारी (एसडीएम) ओबरा व राबर्ट्सगंज, जीएम डीआईसी तथा डीएलआरसी सहित संबंधित विभागों के आला अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने सभी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की गहन पड़ताल की और धरातल पर आ रही व्यावहारिक दिक्कतों के बारे में अधिकारियों से एक-एक कर जानकारी ली।

उन्होंने कड़े लहजे में स्पष्ट निर्देश दिए कि औद्योगिक निवेश और विकास से जुड़ी इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में किसी भी स्तर पर अनावश्यक लेटलतीफी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए हर समस्या का समयबद्ध और त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।

जिलाधिकारी ने बैठक में मौजूद अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र में हो रहे इस भारी-भरकम निवेश से न केवल सोनभद्र में रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी, जिससे पूरे जनपद के विकास को एक नई गति प्राप्त होगी। उन्होंने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप निवेशकों के लिए एक सकारात्मक, सुरक्षित और पूरी तरह पारदर्शी वातावरण तैयार करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

इसी क्रम में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि भूमि आवंटन से जुड़े प्रकरण, वन विभाग की अनापत्ति व स्वीकृतियां, राजस्व अभिलेखों के संशोधन से जुड़े मुद्दे और अन्य तमाम कागजी व प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अविलंब पूरा कराया जाए, ताकि कंपनियां बिना किसी बाधा के अपना कार्य समय पर आगे बढ़ा सकें।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी ताकीद की कि वे केवल इस बैठक तक ही सीमित न रहें, बल्कि सभी संबंधित विभाग नियमित रूप से आपस में समन्वय बैठकें आयोजित कर इन मामलों की सतत मॉनिटरिंग करें और लंबित फाइलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करें। बैठक के अंत में विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े तकनीकी, प्रशासनिक एवं विकासात्मक पहलुओं पर गहन मंथन करते हुए धरातल पर कार्य शुरू कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।




































