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- RSS की विभिन्न शाखाओं पर उत्साहपूर्वक मनाया गया रक्षाबंधन उत्सव: वक्ताओं ने दिया सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित का संदेश

सोनभद्र। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सोनभद्र नगर द्वारा रक्षाबंधन पर्व के पावन अवसर पर नगर की विभिन्न शाखाओं पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन अत्यंत उत्साह, आत्मीयता एवं भक्तिमय वातावरण में किया गया। इस उत्सव के माध्यम से स्वयंसेवकों ने समाज में परस्पर प्रेम, भाईचारा, सामाजिक समरसता, आत्मीयता एवं राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

नगर की विभिन्न शाखाओं पर संघ के वरिष्ठ एवं दायित्ववान कार्यकर्ताओं का प्रवास रहा, जहाँ ओजस्वी बौद्धिक सत्रों के माध्यम से रक्षाबंधन पर्व के सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

केशव शाखा पर नगर कार्यवाह विश्वनाथ जी के प्रवास के दौरान स्वयंसेवक राधाकांत जी ने बौद्धिक प्रदान करते हुए रक्षाबंधन की भारतीय परंपरा और उसके व्यापक सामाजिक संदेश को रेखांकित किया। वीर सावरकर शाखा पर जिला प्रचार प्रमुख नीरज जी ने बौद्धिक सत्र में कहा कि रक्षाबंधन समाज को जोड़ने, आपसी विश्वास बढ़ाने और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराने का पर्व है।

हनुमान शाखा पर सह नगर संचालक संतोष जी भाई साहब ने कहा कि भारतीय संस्कृति के पर्व समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करते हैं। वहीं विवेकानंद शाखा पर सह नगर कार्यवाह अनिल जी ने समाज के हर वर्ग के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करने पर जोर दिया।

शिवाजी शाखा पर नगर कुटुंब प्रबोधन प्रमुख अजय जी ने कहा कि मजबूत और संस्कारयुक्त परिवार ही सशक्त समाज की आधारशिला हैं। इसी क्रम में प्रताप शाखा पर जिला संघचालक हर्ष जी भाई साहब की उपस्थिति में विभाग अभिलेख प्रमुख नीरज जी भाई साहब ने रक्षाबंधन को परस्पर संरक्षण और सामाजिक दायित्व का प्रतीक बताया।
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के पवित्र प्रेम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण समाज को एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी बनने और राष्ट्र रक्षा के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।

संघ द्वारा रक्षाबंधन उत्सव सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकात्मता के भाव को जागृत करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। कार्यक्रमों के दौरान स्वयंसेवकों में भारी उत्साह देखने को मिला, जहाँ सभी ने एक-दूसरे को रक्षासूत्र बांधकर सामाजिक एकता, आत्मीयता और राष्ट्रहित के प्रति अपने संकल्प को दोहराया।
































