HIGHLIGHTS
- पर्यावरण संरक्षण के साथ कुपोषण मिटाएंगे ‘पोषण वृक्ष’, अति कुपोषित बच्चों के घरों में रोपे गए सहजन के पौधे
सोनभद्र। जिले में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘सोनभद्र विकास समिति’ (एसवीएसएस) द्वारा प्रकृति और मानव स्वास्थ्य को जोड़ती हुई एक बेहद सराहनीय और अनूठी पहल सामने आई है। संस्था ने अपने कार्य क्षेत्र की ग्राम पंचायत करमाव के भितरी गांव सहित लौवा, पखरौध, नन्दना, विरनचुआ, रैपुरा, महुअरिया, बढौना और भूईरान गाँवों में एक साथ वृहद पौधारोपण अभियान चलाया है।
इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों से कुपोषण के खात्मे को भी एक साथ जोड़ा गया। ‘पोषण वृक्ष’ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां एक ओर प्रकृति की रक्षा का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक मजबूत संकल्प भी लिया गया, जो आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा।

इस महा-अभियान के तहत सभी लक्षित गाँवों में एक विशेष रणनीति अपनाई गई, जिसके अंतर्गत गांव के चिन्हित अति कुपोषित (एसएएम) और मध्यम कुपोषित (एमएएम) बच्चों के घरों के पीछे खाली पड़ी जमीन पर अनिवार्य रूप से सहजन (ड्रमस्टिक) के पौधे लगाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि सहजन की पत्तियों और उसकी फलियों में प्रचुर मात्रा में विटामिन, प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो कुपोषित बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए किसी रामबाण से कम नहीं हैं।

इसके साथ ही, संस्था के कार्यकर्ताओं ने संबंधित ग्राम पंचायतों से बेहतर तालमेल बिठाकर गर्भवती और धात्री माताओं के आंगन में फलदार पौधों का रोपण कराया। इन महिलाओं को विटामिन-सी और अन्य जरूरी पोषक तत्व घर पर ही आसानी से मिल सकें, इसके लिए अमरूद, पपीता, नींबू और आंवला के औषधीय व फलदार पौधे वितरित कर लगवाए गए।

पौधारोपण के इस पावन उत्सव में स्थानीय स्तर पर सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के लिए ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के नेतृत्व में भव्य जागरूकता रैलियां भी निकाली गईं। इस दौरान “एक पेड़, माँ के नाम” का गगनभेदी नारा गूंजा, जिसने पूरे माहौल को पर्यावरण के प्रति जागरूक कर दिया। रैलियों के समापन पर ग्रामीणों को न केवल पौधा लगाने, बल्कि उनके बड़े होने और फल देने तक उनकी पूरी जिम्मेदारी व सुरक्षा करने की भावुक शपथ दिलाई गई। इस दौरान आयोजित एक परिचर्चा में वक्ताओं ने यह संदेश दिया कि पेड़ केवल छाया या लकड़ी नहीं देते, बल्कि हमारे बच्चों की सेहत सुधारने की प्राकृतिक चाबी भी हैं।

इस पूरे अभियान को सफल बनाने में स्थानीय ग्राम प्रधानों और सामाजिक अगुआ नेताओं ने बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया। इस मौके पर एएनएम सुरशरी, आशा कार्यकर्ता चन्दा मौर्या, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कल्पना यादव और संस्था की तरफ से काउन्सलर साधना सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता रीना शर्मा, सुनीता तथा अमरजीत सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

संस्था के इस भगीरथ प्रयास से एक ही दिन में सैकड़ों परिवारों को सीधे तौर पर प्रकृति और स्वास्थ्य के इस महा-अभियान से जोड़ दिया गया। उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में इन पौधों के बड़े होने पर स्थानीय परिवारों को घर बैठे ही मुफ्त व रसायन मुक्त ताजी सब्जियां और फल मिलेंगे, जिससे बाजार पर उनकी निर्भरता कम होगी और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में भी भारी कमी आएगी।





































