पत्नी समेत दो बेटों का गला रेत कर उतारा मौत के घाट

कुशीनगर। यूपी के कुशीनगर से बड़ी ही दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। जहां पर एक पति ने अपनी पत्नी और दो बेटों की गला रेत कर निर्मम हत्या कर दी। यही नहीं इन हत्याओं की वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारा राजेश खुद थाने पहुंच गया. एक साथ तीन हत्याओं से इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

यहां की है वारदात
हत्या करने के बाद खुद पहुंचा थाना
ये वारदात तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के किसुनदासपट्टी भलुही गांव की है। जहां पर पति ने अपनी पत्नी और दो बेटों की गला रेतकर हत्या कर दी। हत्या करने के बाद आरोपी खुद थाने में सरेंडर करने पहुंचा। जानकारी के मुताबिक राजेश ने रात में खाना खा कर सोने के बाद देर रात घटना को दिया अंजाम। हत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है पर कहा जा रहा है कि अवैध संबंधों के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया है।

आरोपी पर लगे अवैध संबंध का आरोप
मृतक महिला के परिवार वालों ने आरोपी पति पर अपनी भाभी के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया है।पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है

यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर दो दिवसीय लखनऊ दौरे पर केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल

• पार्टी पदाधिकारियों के साथ विधानसभा चुनाव को लेकर बैठक करेंगी।

अलग-अलग बैठकों में पार्टी के विधायक, राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारी और ज़िलाध्यक्ष समेत फ्रंटल संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री विधानसभा चुनाव 2022 के तहत आवश्यक दिशा-निर्देश भी देंगी।

लखनऊ। अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल आज से दो दिन तक लखनऊ में रहेंगी। अनुप्रिया पटेल, पार्टी पदाधिकारियों के साथ विधानसभा चुनाव को लेकर बैठक करेंगी। वही अलग-अलग बैठकों में पार्टी के विधायक, राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारी और जिलाध्यक्ष समेत फ्रंटल संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे।इस दौरान केंद्रीय मंत्री विधानसभा चुनाव 2022 के तहत आवश्यक दिशा-निर्देश भी देंगी।

अनुप्रिया पटेल को सौंपी जायेगी रिपोर्ट
अपना दल के मध्य यूपी प्रभारी केके पटेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश को चार भागों को बांटा गया था, जिसमें 4 टीमें बनाई गई थीं। यूपी के सभी जनपद के पदाधिकारियों की गहन समीक्षा कर ली गई है। रिपोर्ट अनुप्रिया पटेल को सौंपी जायेगी, जिस पर आज वो समीक्षा बैठक करेंगी।

निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा
यूपी प्रभारी केके पटेल ने बताया कि हम चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।साल 2014 से अब तक तीन चुनाव एनडीए के साथ मिलकर लड़े। सीटों की संख्या का निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व का है यह राष्ट्रीय नेतृत्व ही तय करेगा।सब प्रबुद्ध सम्मेलन कर रहे हैं। हमारी पार्टी में एक बौद्धिक मंच है। हमारा बौद्धिक मंच प्रत्येक जिले में है और मंच लगातार लोगों के संपर्क में रहता है।

यूपी में आज वैक्सीनेशन का महा अभियान, लखनऊ में एक लाख लोगों को वैक्सीनेट करने का लक्ष्य


हर बूथ पर लगभग 250 लाभार्थियों को टीका लगाया जाएगा और इसके साथ ही लोगों की सहूलियत के लिए मौके पर पंजीकरण कर टीका लगाया जाएगा।

टीका लगवाने के लिए राजधानी के तमाम केंद्रों पर सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।

इन केंद्रों पर कोविडशील्ड और कोवैक्सीन की डोज लगाई जा रही है

लखनऊ में एक लाख लोगों को वैक्सीनेट करने का लक्ष्य।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आज से कोविड 19 टीकाकरण दिवस का आयोजन किया जा रहा है। राजधानी लखनऊ में वैक्सीनेशन के लिए मेगा कैंप का आयोजन किया गया। वैक्सीनेशन मेगा कैंप में 1 लाख लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। जिसके तहत 160 केंद्रों पर 461 बूथ पर वहीं टीका लगाया जाएगा।
हर बूथ पर लगभग 250 लाभार्थियों को टीका लगाने का लक्ष्य
हर बूथ पर लगभग 250 लाभार्थियों को टीका लगाया जाएगा और इसके साथ ही लोगों की सहूलियत के लिए मौके पर पंजीकरण कर टीका लगाया जाएगा। टीका लगवाने के लिए राजधानी के तमाम केंद्रों पर सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।इन केंद्रों पर कोविडशील्ड और कोवैक्सीन की डोज लगाई जा रही है।

1 लाख से ज्यादा लाभार्थियों का टीकाकरण किये जाने का लक्ष्य
6 सितम्बर को जनपद लखनऊ के 160 सत्र स्थलों के कुल 461 बूथों पर टीकाकरण किया जाएगा। राजधानी में लगभग 1 लाख से ज्यादा लाभार्थियों का टीकाकरण किये जाने का लक्ष्य है। इस अभियान में कोविशिल्ड एवं कोवैक्सिन दोनों प्रकार की वैक्सीन का प्रयोग करते हुए लाभार्थियों को पहली और दूसरी डोज दी जाएगी।

इस अभियान के लिए ऑनलाइन स्लाट बुकिंग के अलावा 104 वर्क प्लेस सीवीसी भी बनाई गई है। जिसमे लाभार्थी को केवल आईडी कार्ड लेकर चिन्हित सत्र स्थलों पर जाना होगा जहां लाभार्थी को को-कोविन पोर्टल पर पंजीकृत करते हुए वैक्सीनेट किया जाएगा।

अंग्रेजों के जुल्म का गवाह बंगलापुरा की नील फैक्ट्री

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

घोरावल ,सोनभद्र।आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के उद्घाटन के पश्चात स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े स्थल, सेनानियों की जुड़ी गौरव गाथा पर आधारित दूरदर्शन केंद्र वाराणसी द्वारा निर्मित फिल्म के प्रदर्शन के पश्चात सोनभद्र जनपद के घोरावल तहसील का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा गांव तिलौली कला का बंगलापुरा आजकल सुर्खियों में है।
यहीं पर अंग्रेजों के जोर-ए- जुल्म का गवाह नील गोदाम,चिमनिया, हौज, पेराई मशीन, अंग्रेज अधिकारियों के रहने के लिए डाक बंगला आदि का खंडहर जीरात (नील खेती के लिए उपजाऊ भूमि) अवस्थित है। कहीं-कहीं पर नीम के पौधे भी देखने को मिल जाएंगे। यहां पर आसामीया पद्धति के अंतर्गत शिकमी और तिनकठिया नील की खेती की जाती थी।

बगलापुरा में अंग्रेजों द्वारा स्थानीय किसानों से दलहन, तिलहन, अनाज की खेती के बजाए जबदस्ती नील की खेती दो आना, ढाई आना प्रतिदिन मजदूरी देकर कराया जाता था, नकद मजदूरी को भी फैक्ट्री के कारिंदे नेग, दस्तूरी नाम से वसूल लेते थे और कभी- कभी इन्हें नकद मजदूरी के बदले अनाज दिया जाता था।जो किसानों के परिवार के लिए अपर्याप्त था।नील की खेती बहुत परेशानी बदबू भरा काम था। इस कार्य के लिए घोरावल सहित दुद्धी, रॉबर्ट्सगंज के गरीब,दलित, आदिवासियों को मजदूरो खेती कराया जाता था।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी काशीनाथ सिंह की वयोवृद्ध पत्नी कस्तूरा सिंह के अनुसार-“नील की कोठी में नीलहे अंग्रेज रहते थे जो घोड़ों से आते- जाते थे, महिलाओं का अपहरण,बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम देते थे, इसलिए इस क्षेत्र में महिलाओं का आना- जाना वर्जित हो गया था।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी काशीनाथ सिंह की वयोवृद्ध पत्नी कस्तूरा सिंह।

इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“नील का पौधा दो-तीन हाथ ऊँचा, पत्तियाँ चमेली की तरह टहनी के दोनों ओर पंक्ति में छोटी-छोटी लगती थी, फूल मंजरिया, लंबी लंबी बबूल की तरह फलियाँ लगती हैं। इसको फागुन- चैत के महीने में बोया जाता था, बरसात में टहनियाँ और पत्तियाँ निकलती और बढ़ती और आषाढ़ में पहला कलम हो जाता था, टहनियाँ आदि कारखाने भेज दी जाती थी, कटे हुए हरे पौधों को हौज में दबाकर ऊपर से पानी भर देते थे। बारह- चौदह घंटे पानी में रहने के बाद उसका रस पानी में उतर आता था और पानी का रंग धानी हो जाता था। इसके बाद पानी दूसरी हौज में जाता था जहाँ डेढ़ दो घंटे तक इसे मशीन से पेरा जाता था, पेराई के बाद पानी थिराने के लिये छोड़ दिया जाता था, जिससे कुछ देर में माल नीचे बैठ जाता है।

दीपक कुमार केसरवानी (इतिहासकार)

फिर नीचे बैठा हुआ यह नील साफ पानी में मिलाकर उबाला जाता है। उबल जाने पर यह बाँस की फट्टियों के सहारे तानकर फैलाए हुए मोटे कपड़े (या कनवस) की चाँदनी पर ढाल दिया जाता था, यह चाँदनी छननी काम करती थी, पानी के निथरने के बाद साफ नील लेई के रूप में लगा रह जाता है। यह गीला नील छोटे छोटे छिद्रों से युक्त एक संदूक में, जिसमें गीला कपड़ा मढ़ा रहता था रखकर खूब दबाया जाता था

नील फैक्ट्री का हौज

जिससे उसके सात- आठ अंगुल मोटी तह जमकर हो जाती है। इसकै कतरे काटकर घोरे धीरे सूखने के लिये रख दिए जाते था सूखने पर इन कतरों पर एक पपड़ी सी जम जाती था जिसे साफ कर देते थे, तैयार नील को इंग्लैंड भेज कर उस पर इंग्लैंड का मुहर दाम अंकित कर भारतीय मूल्य की तुलना में 50 गुना दामों पर भारत सहित अन्य देशों को निर्यात किया जाता था।

नील फैक्ट्री‌ की चिमनी

इस क्षेत्र में अंग्रेजों का अत्याचार इतना बढ़ गया था कि खेती में लगे थकावट मिटाने के लिए बैठे मजदूरों को देखकर अंग्रेज अधिकारी फैक्टरी के पास के पीपल के वृक्ष में बांधकर मारते- पीटते थे। नील फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों के लिए न तो कोई स्कूल था और न कोई दवाखाना।
मुट्ठी भर नीलहे अंग्रेज तिलौली कला गांव सहित आसपास के अन्य गांव के निवासियों की सारी खेती, सारा जीवन बुरी तरह अपनी मुट्ठी में जकड़कर सब कुछ तहस-नहस कर रखा था मजदूरों को भूखे रखकर वह अपनी झोली भर रहे थे।

इसी बरगद के वृक्ष में मजदूरों को बांध कर अंग्रेज मारा- पीटा करते थे।

सन 1859 में बंगाल के कृषकों ने नील विद्रोह कर दिया था इसके बाद गठित आयोग ने नील की खेती पर पूर्णता रोक लगा दिया था, बावजूद इसके अंग्रेज नील की खेती करते रहें और 1917-18 में महात्मा गांधी द्वारा बिहार के चंपारण में नीलहे गोरे किसानों के खिलाफ आंदोलन किया था।
लेकिन घोरावल के बंगलापुरा क्षेत्र में इन आंदोलनों का नील खेती पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और नीलहे गोरे अंग्रेज मनमाने ढंग से स्थानीय लोगों पर अत्याचार करते रहे और नील की खेती कराते रहे।

तिलौली के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सामूहिक फोटो (फाइल फोटो)

सन 1941 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए सत्याग्रह आंदोलन से क्षेत्र के नौजवानों में नीलहे अंग्रेजों के खिलाफ जोश और जुनून पैदा हुआ और इन्होंने स्थानीय नागरिकों के सहयोग से आंदोलन किया, इस आंदोलन में यहां के निवासी काशी प्रसाद सिंह, शिव चरण सिंह, भूलन सिंह, ननकू राम हज्जाम, झगड़ मियां के नेतृत्व में सैकड़ों नौजवानों ने नीलहे अंग्रेजो के खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन किया गया अंग्रेज पुलिस की प्रताड़ना, उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और जेल यात्राएं भी करनी पड़ी।
आजादी के बाद ब्रिटिश कालीन नील फैक्ट्री, चिमनी,हौज, डाक बंगला आदि के अवशेष आज भी इस क्षेत्र के लोगों पर अंग्रेजों द्वारा किए जा रहे जोर जुल्म के साक्षी हैं।
आज तिलौली कला बंगलापुरा की नील फैक्ट्री ग्राम पंचायत के अधीन है और वर्षों पूर्व इस क्षेत्र में एक तालाब की खुदाई भी कराई गई थी जिसके कारण ब्रिटिश कालीन नील गोदाम के अवशेष ध्वस्त हो गए थे।
वर्तमान समय में ग्राम पंचायत की लगभग 3 बीघा भूमि पर नील फैक्ट्री का खंडहर आज भी अवस्थित है, फैक्ट्री के अन्य अवशेष नष्ट हो चुके हैं, लोहे की मशीनें गायब हो चुकी हैं बचे हुए अवशेषों का संरक्षण किया जाना सोनभद्र के इतिहास के लिए आवश्यक है।

सोनभद्र के स्वतंत्रता आंदोलन का साक्षी घोरावल तहसील का तिलौली कला गांव का बंगलापुरा नील फैक्ट्री को जिला प्रशासन द्वारा संग्रहालय के रूप में तब्दील किया जाना चाहिए और स्थानीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों जुड़े इतिहास को यहां पर संग्रहित किया जाना चाहिए। ताकि आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक स्थल एवं पूर्वजों के त्याग, तपस्या, देशसेवा से परिचित हो सकें।

श्रम आयुक्त के आगमन पर सफाई अभियान से संबंधित अधिकारियों को सफाई कर्मचारियों के बाँह पकड़कर कराना पड़ रहा है सड़को के सफाई का कार्य

सर्वेश श्रीवास्तव

सोनभद्र। शासन के मंशा के अनुरूप जनपद मे ग्रामीण अंचलों की जाँच हेतु भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत नोडल अधिकारी मोहम्मद मुस्तफा (आईएएस) श्रम आयुक्त लखनऊ रविवार को विकास खण्ड घोरावल के अंतर्गत ग्राम पंचायत मराची मे काफिला पहुचने के बाद रास्ते में पड़े ग्राम पंचायत ओडहथा मंडी परिसर के समीप सड़क के दोनों पटरियों पर गंदगी के लगे अंबार को हटाने के लिए संबंधित अधिकारियों एवं ग्राम प्रधान को सफाई कर्मियों के साथ कड़ी मस्कत करनी पड़ी। इस दौरान गंदगी को साफ करवाने के लिए जहाँ जिले के संबंधित विभाग के आलाअधिकारियों को सफाई कर्मीयों का हाथ पकड़कर सफाई कराते हुए देखा गया।

तो वही मौके पर पहुंचे मिडिया कर्मियों ने इस बात को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों से जब सवाल किया कि अचानक आज अधिकारियों को वर्षों से पढ़ें गंदगी के अंबार को हटाने के लिए स्वयं चिलचिलाती धूप में खडे होकर सफाई कार्य कराने को विवश क्यों होना पड़ रहा‌‌ है ? तो अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छता अभियान के तहत कराया जा रहा है और जब मीडिया कर्मियों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से परिचय जानना चाहा तो परिचय देने से कतराते रहे। इस दौरान ग्रामीणों ने आपस मे गुप्तगु करते हुए सुने गए कि काश गाँवों मे इसी तरह प्रतिमाह आयुक्तो का दौरा होता रहे तो गांव की तस्वीर कुछ और होगी।

विश्वकर्मा महासभा ने बड़े ही धूम-धाम से मनाया शिक्षक दिवस

पड़ाव-दुल्हीपुर, वाराणसी। ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में दुल्हीपुर स्थित केंद्रीय कार्यालय पर शिक्षक दिवस के अवसर पर सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन जी का जन्मदिन केक काटकर हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान करने वाले शिक्षकों को माल्यार्पण कर व तिलक लगाकर तथा अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आरंभ सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने डॉक्टर राधाकृष्णन के जीवन कृतित्व और आदर्शों की चर्चा करते हुए कहा कि वह भारतीय संस्कृति के संवाहक शिक्षाविद दार्शनिक और महान विचारक थे।उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित कर सम्मानित किया गया।वह शिक्षकों के प्रेरणा स्रोत तथा गौरव और स्वाभिमान के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा शिक्षक छात्रों को नया आयाम दे कर उनके जीवन को संवारते हैं। वह हमें सिर्फ शिक्षित ही नहीं करते वरन जीवन की राह भी दिखाते हैं। तथा जीवन को आकार और प्रेरणा देकर अच्छा नागरिक बनाते हैं। वास्तव में शिक्षक मानवता का निर्माण करने वाला एक कुशल शिल्पी है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विवेक कुमार विश्वकर्मा,प्रेम नाथ शर्मा ,राजेश कुमार विश्वकर्मा ,संतोष कुमार मौर्य, आनंद कुमार विश्वकर्मा, विनोद कुमार ,छबीले विश्वकर्मा ,मनोज कुमार, मदन सिंह, राजाराम कुशवाहा, हेमंत विश्वकर्मा सहित आदि शिक्षको को सम्मानित किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से वाराणसी जिला अध्यक्ष नंद लाल विश्वकर्मा, चंदौली जिला अध्यक्ष श्रीकांत विश्वकर्मा, विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा, एडवोकेट रामलोचन विश्वकर्मा, सुरेश विश्वकर्मा,महेंद्र विश्वकर्मा, शमीम अख्तर अंसारी, कन्हैया यादव,अमित विश्वकर्मा दीपक विश्वकर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।

हिंदी सेवी रजत सम्मान से अलंकृत हुए विजय कृष्ण त्रिपाठी

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

सोनभद्र। शिक्षाविद एवं हिंदी साहित्यकार डॉo विजय कृष्ण त्रिपाठी को हिंदी के उत्तरोत्तर विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान’ प्रयागराज द्वारा हिंदी सेवी रजत सम्मान से सम्मानित किया गया। बताते चलें कि डॉo त्रिपाठी पूर्व में उत्तर प्रदेश राज्य सीमेंट निगम द्वारा संचालित डाला इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद पर सेवारत रहते हुए शिक्षा के साथ ही हिंदी भाषा के समुन्नति के लिए कार्य करते रहे और प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त होने के बाद साहित्य में अपनी गहरी पैठ रखने के कारण पूर्वांचल में काफी लोकप्रिय हुए। उन्होंने ‘जीवन कब तक’ और ‘कृष्णा अभी जीवित है’ नामक दो पुस्तकों की रचना करके यह साबित कर दिया कि हिंदी देश ही नहीं अपितु विश्व की सर्वाधिक लोकप्रिय भाषा का स्वरूप है।
ज्ञातव्य हो कि डां त्रिपाठी जी की कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन है, इससे यह प्रतीत होता है कि हिंदी साहित्य में उनकी गहरी पैठ हैं। उनके इसी योगदान को ध्यान में रखकर अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में हिंदी के लिए काम करने वाली संस्था ‘विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान’ प्रयागराज ने अपने रजत जयंती समारोह में हिंदी सेवी सम्मान से समलंकृत करने का निर्णय लिया और उसे शनिवार को रजत जयंती समारोह में क्रियान्वित किया है। डॉo त्रिपाठी को समारोह मुख्य अतिथि हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री डॉ उदय प्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ के प्रख्यात हिंदी विद्वान डॉ विनय कुमार पाठक, महाराष्ट्र के जाने-माने शिक्षाविद एवं हिंदी के पुरोधा शहाबुद्दीन शेख, राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा पुरस्कृत सेवानिवृत्त शिक्षक एवं साहित्यकार ओम प्रकाश त्रिपाठी तथा संस्थान के सचिव डॉ गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी द्वारा रजत जयंती समारोह पर गांधी सभागार में लगभग 14 प्रांतों के हिंदी सेवियो की उपस्थिति में रजत स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र और पुस्तकें भेंट कर तथा अंगवस्त्रम ओढां कर सम्मानित किया गया।
विजय कृष्ण त्रिपाठी को विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित किए जाने से हर्षित वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी ने शिक्षक दिवस पर शिक्षाविद एवं हिंदी साहित्य के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रहे श्री त्रिपाठी जी को बहुत-बहुत बधाई दी है।

सोनांचल नव निर्माण समिति ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन को किया याद

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

रॉबर्ट्सगंज,सोनभद्र। शिक्षक दिवस के अवसर पर सोनांचल नव निर्माण समिति के कार्यालय पर संस्था के सदस्यों द्वारा पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णनन की जयंती बड़े ही उत्साह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर सोन साहित्य संगम सोंनभद्र के संयोजक व सँयुक्त अधिवक्ता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शरण मिश्र द्वारा उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनको भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजेश शरण मिश्र ने कहा कि शिक्षक ना केवल बच्चो को शिक्षित करते है बल्कि उनको ज्ञानवान और आत्मनिर्भर बनाते है तथा राष्ट्रनिर्माण में भी अहम भूमिका का निर्वहन करते है। डॉo राधाकृष्णनन का जीवन चरित्र हमे यही संदेश देता है। अंत में उन्होने कहा कि आज समय की मांग है कि हमारे आदरणीय शिक्षक चाणक्य और सर्वपल्ली राधाकृष्णनन की भूमिका का निर्वहन करते हुए समाज व राष्टनिर्माण हेतु अपने शिष्यों को चन्द्रगुप्त मौर्य जैसा बनाने का काम करे। अयोजित कार्यक्रम में संस्था के कोषाध्यक्ष हिमांशु मिश्रा, राहुल मिश्र आकाश मिश्र सचिव अनुराग मिश्रा, अभय सिंह, विकास केशरी, प्रदीप धर, अनिल कुमार मिश्र ,हिमांशु मिश्र ,उमापति पांडेय, धर्मेंद्र कुमार सहित आदि ने पूर्व राष्ट्रपति राधा कृष्णनन को श्रद्धा सुमन अर्पित कर अपना- अपना विचार किया।

शिक्षक दिवस पर सुशील “राही” हुए सम्मानित

रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र। सोनभद्र बार एसोसिएशन सभागार में रविवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर नगर के राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज के पूर्व प्रवक्ता सुशील ‘राही” को सोनभद्र बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश द्विवेदी और संयुक्त अधिवक्ता महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शरण मिश्र द्वारा सुशील राही को माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित अधिवक्ताओं द्वारा उनके व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डाला गया।

शिक्षक दिवस के अवसर पर अर्थशास्त्री शिवधारी शरण राय हुए सम्मानित

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

रॉबर्ट्सगंज,सोनभद्र। साहित्य,कला, संस्कृति, पर्यावरण के क्षेत्र में अनवरत दो दशकों से कार्यरत विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के तत्वाधान में जनपद के प्रख्यात अर्थशास्त्री, राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य शिवधारी शरण राय को ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी द्वारा माल्यार्पण कर, अंगवस्त्रम, उपहार प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।

अर्थशास्त्री शिवधारी शरण राय को सम्मानित करते हुए विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी

इस अवसर पर अपना विचार करते हुए ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी ने कहा कि–
गुरुजनों का आदिकाल से भारतीय समाज,, संस्कृति, धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रहा है, बिना गुरु का ज्ञान संभव नहीं है, माता अगर बालक की प्रथम शिक्षिका है तो गुरु बालक के चतुर्मुखी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है, कबीर दास जी ने गुरु की महत्ता का बखान करते हुए कहां है-

अर्थशास्त्री शिवधारी शरण राय को हरि छाया वाटिका के संचालक सुमित शाह पौधा भेंट कर सम्मानित करते हुए

गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट।
अन्तर हाथ सहार दै,
बाहर बाहै चोट॥

सब धरती कागज करूँ,
लिखनी सब बनराय।
सात समुद्र की मसि करूँ,
गुरु गुण लिखा न जाय॥

अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत करते ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी हर्षवर्धन

डॉ आनंद नारायण ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-गुरु ज्ञान सर्वोपरि है और हमें अपने गुरुजनों का आदर करना चाहिए और अगली पीढ़ी को भी संस्कारित करना चाहिए।

ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी हर्षवर्धन ने उपस्थित सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया और कार्यक्रम का संचालन किया।
पर्यावरण के क्षेत्र में कार्यरत हरी छाया के संचालक सुमित शाह ने उपस्थित अतिथियों को एक- एक वृक्ष प्रदान कर सम्मानित किया।

आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी

इस अवसर पर सहायक आयुक्त निबंधन सोनभद्र टी एन सिंह , विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष ज्ञानेंद्र शरण रॉय, डॉक्टर आनंद नारायण, जिला प्रबंधन (पी सी एफ) रवि प्रताप सिंह, राकेश कुमार जायसवाल (पी सी एफ) सहित आदि लोगो ने गुरु महिमा पर अपना- अपना विचार व्यक्त किया।

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