हिंदी दिवस पर दीपक केसरवानी हुए सम्मानित

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र। विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक एवं वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी को सोनभद्र बार एसोसिएशन एवं सोन साहित्य संगम के संयुक्त तत्वाधान में कचहरी परिसर में स्थित डीबीए के सभागार में आयोजित साप्ताहिक दिवस कार्यक्रम/विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह में जनपद एवं सत्र न्यायाधीश रजत कुमार जैन द्वारा माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सोनभद्र बार एसोसिएशन, सोन साहित्य संगम के सदस्य, पदाधिकारी एवं अधिवक्तागण उपस्थित रहे।

हिंदी के उत्थान में सोनभद्र जनपद का महत्वपूर्ण योगदान: जिला जज सोनभद्र

• जिला जज रजत कुमार जैन ने माल्यार्पण कर साहित्यकारों का किया सम्मान।

• कार्यक्रम मे श्रुति लेखन प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित।

• सोनभद्र बार एसोसिएशन एवं सोन साहित्य संगम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुआ कार्यक्रम।


हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र। हम आज के दिन संकल्प लेते हैं कि हम हिंदी को प्रोत्साहित करेंगे एवं घर, कार्यालय में हिंदी भाषा का प्रयोग बहुलता करेंगे। संपूर्ण देश में हिंदी के उत्थान के क्षेत्र में जनपद सोनभद्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । उपन्यासकार देवकीनंदन खत्री ने जनपद सोनभद्र के विजयगढ़, मिर्जापुर जनपद के चुनार, चकिया स्थित नौगढ़ आदि स्थानों पर अवस्थित किला, दुर्ग, एय्यारी पर आधारित चंद्रकांता, चंद्रकांता संतति की रचना कर गैर हिंदी भाषियों को हिंदी सीखने और अपनी कृति पढ़ने के लिए मजबूर कर दिया था, गोस्वामी तुलसीदास, कबीर दास, रहीमदास, रसखान की भाषा हिंदी थी, हिंदी को रोजगार की भाषा बनाने के लिए हिंदी भाषी लोगों को आगे आना चाहिए और आर्थिक, शारीरिक, मानसिक रूप से इसके उत्थान के लिए तैयार रहना चाहिए तभी हमारी मातृभाषा हिंदी का उत्थान होगा।
उपरोक्त विचार जनपद एवं सत्र न्यायाधीश रजत कुमार जैन ने 14 सितंबर (हिंदी दिवस) के अवसर पर कचहरी स्थित सोनभद्र बार एसोसिएशन के सभागार में सोनभद्र बार एसोसिएशन एवं सोन साहित्य संगम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित साप्ताहिक दिवस कार्यक्रम/ विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह ने व्यक्त किया।

कार्यक्रम सोनभद्र बार एसोसिएशन एवं सोन साहित्य संगम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किया।
कार्यक्रम में उपस्थित विंध्य संस्कृति समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/वरिष्ठ साहित्यकार दीपक कुमार केसरवानी, सोन साहित्य संगम के संयोजक राकेश शरण मिश्र, राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत शिक्षक /साहित्यकार ओम प्रकाश त्रिपाठी, वरिष्ठ कवि पारसनाथ मिश्रा, जगदीश पंथी, सुशील “राही,”सरोज सिंह,प्रदुमन त्रिपाठी, दिवाकर द्विवेदी “मेघ विजयगढ़ी”, अशोक तिवारी, दयानंद दयालु, धर्मेश चौहान,राधेश्याम पाल, दिलीप सिंह “दीपक,”कवित्री डॉक्टर रचना तिवारी, कौशल्या कुमारी चौहान सहित उपस्थित साहित्यकारों एवं कवियों को माल्यार्पण कर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश ने सम्मानित करते हुए हिंदी दिवस की बधाई एवं शुभकामना दिया।

इस अवसर पर पूर्व में आयोजित त्रिस्तरीय श्रुत लेखन प्रतियोगिता में लिपिक संवर्ग में डॉo अनुराग श्रीवास्तव को प्रथम स्थान , शशांक शुक्ला को द्वितीय स्थान तथा शुभम श्रीवास्तव को तृतीय स्थान मिला। आशु लिपिक संवर्ग में प्रथम स्थान सुफियान अंसारी, द्वितीय स्थान राजकरन, तृतीय स्थान परषोत्तम चौधरी को मिला। वहीं चतुर्थ श्रेणी संवर्ग में प्रथम स्थान अविनाश पटेल, द्वितीय स्थान चंद्र प्रकाश शुक्ल को एवं तृतीय स्थान बृजेश कुमार विश्वकर्मा को मिला।, विजेता कर्मचारियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र जनपद एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सोनभद्र बार एसोसिएशन के परिसर में स्थापित मां सरस्वती के प्रतिमा पर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश सहित अन्य अतिथियों द्वारा माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर, कवि दिवाकर द्विवेदी “मेंघ विजयगढी” द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ।
गोष्ठी की अध्यक्षता सोनभद्र बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश द्विवेदी अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि-“हिंदी भाषा हमारी मातृभाषा है और हमें इस भाषा के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए और सबसे पहले अपने घर से इसकी इसकी शुरुआत करनी चाहिए।”
कार्यक्रम में उपस्थित न्यायाधीशगण, वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण प्रताप सिंह, गजेंद्र नाथ दीक्षित सहित अन्य विद्वानों ने अपना-अपना विचार व्यक्त किया और उपस्थित कवियों ने अपनी काव्य रचना सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता रामचंद्र मिश्र ने किया।

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती महंगाई से मिलेगी राहत, सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

• लंबे समय से पेट्रोल-डीजल की बढ़ती महंगाई से आम जनता को राहत मिल सकती है।

• 45वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में किया जाएगा विचार।
• वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होगी बैठक।


नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती महंगाई से आम जनता को राहत मिल सकती है। मंत्रियों का एक पैनल गुड्स एंड सर्विस टैक्स पर सिंगल नेशनल रेट के तहत पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स लगाने को लेकर विचार किया जाएगा। मामले की जानकारी रखने वालों के अनुसार, कंज्यूमर प्राइस और सरकारी राजस्व में संभावित बड़े बदलाव के लिए अहम कदम को उठाया जा सकता है।

शुक्रवार को लखनऊ में होने वाली 45वीं जीएसटी काउंसिल (GST Council) के बैठक में इस पर फैसला लिया जा सकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाला पैनल इस पर विचार करेगा।

कैसे होता है जीएसटी सिस्टम में बदलाव?

दरअसल, जीएसटी सिस्टम में अगर कोई भी बदलाव करना हो तो उसमें पैनल के तीन-चौथाई से अप्रूवल की जरूरत होती है। इसमें सभी राज्यों और क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हालांकि इस प्रस्ताव में से कुछ ने फ्यूल को जीएसटी में शामिल करने का विरोध किया है क्योंकि उनका कहना है कि ऐसे में केंद्र सरकार को एक प्रमुख राजस्व जुटाने वाला टूल सौंप देंगे।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें तोड़ रही कमर

गौरतलब है कि देश भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं जिससे आम जनता बेहाल है। हालांकि इसी बीच आपको बता दें कि मंगलवार 14 सितंबर, 2021 को लगातार नौवें दिन इनके दाम स्थिर हैं। बावजूद इसके राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 101.19 पैसे प्रति लीटर की दर पर है। वहीं, डीजल 88.62 रुपये प्रति लीटर है. मुंबई में पेट्रोल 107.26 रुपये प्रति लीटर है। वहीं, डीजल 96.19 पैसे प्रति लीटर है।

महंगे पेट्रोलियम उत्पादों से भरा सरकारी खजाना

दरअसल, सरकार का पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क कलेक्शन चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में 48 प्रतिशत बढ़ा है। यानी बढ़ती कीमत के बीच पेट्रोल-डीजल ने सरकार के खजाने को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। अप्रैल से जुलाई 2021 के दौरान उत्पाद शुल्क कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 67,895 करोड़ रुपये था। वहीं, वित्त वर्ष 2020-21 में पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार की तरफ से वसूले जाने वाले टैक्स में 88 फीसदी का उछाल आया है और यह रकम 3.35 लाख करोड़ रही।

हिंदी दिवस पर लायंस क्लब ने शिक्षकों को किया सम्मानित

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

रॉबर्ट्सगंज, सोनभद। 14 सितंबर हिन्दी दिवस के अवसर पर लायंस क्लब द्वारा अशोक नगर में सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लायंस क्लब रॉबर्ट्सगंज के अध्यक्ष किशोरी सिंह, सचिव विमल अग्रवाल व जोन चेयरपर्सन दया सिंह द्वारा आरo एसo एमo इंटर कॉलेज के पूर्व प्रवक्ता पारसनाथ मिश्र भैया लाल सिंह को माल्यार्पण व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर अध्यक्ष किशोरी सिंह ने कहा कि-” हिंदी दिवस पर गुरुजनों का सम्मान करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।”
सचिव विमल अग्रवाल ने कहा कि हिंदी को अपनाए। हिंदी में बोल चाल करें। हिंदी का सम्मान करें। कार्यक्रम का सफल संचालन जोन चेयर पर्सन दया सिंह ने किया।

संत नहीं चाहते फिल्मी हस्तियां बने रामलीला का पात्र, संतो ने कहा- भद्दा प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं

• 17 सितंबर को संत समाज का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर फिल्मी हस्तियों की रामलीला पर विरोध दर्ज कराएगा।

फिल्मी हस्तियों की रामलीला का 3 महीने से संतो द्वारा विरोध किया जा रहा है।

80% संत नहीं चाहते फिल्मी हस्तियां बने रामलीला का पात्र।

संस्कृति लाइव संवाददाता, अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में 6 अक्टूबर से होने वाली फिल्मी हस्तियों की रामलीला का संत समाज विरोध कर रहा है। संत समाज का कहना है कि अयोध्या में रामलीला के नाम पर भद्दा प्रदर्शन, कलाकारों द्वारा शराब और मांस खाने और मुगलिया वेशभूषा में मंचन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अयोध्या की रामलीला में फिल्मी हस्तियों के शामिल होने पर संत समाज को नाराजगी है। उनका कहना है कि अगर सरकार इस पर ध्यान नहीं देगी, तो 17 सितंबर को संत समाज का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर फिल्मी हस्तियों की रामलीला पर विरोध दर्ज कराएगा।

नारद मुनि के साथ कई देवी-देवताओं की वेशभूषा खराब की
अयोध्या में मंदिर के अंदर संतों की एक बैठक फिल्मी हस्तियों की रामलीला के विरोध में की गई। इस बैठक में संत समाज के महंत धर्माचार्य शामिल हुए। बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश दास का कहना है कि अयोध्या की रामलीला के नाम पर भद्दा प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शराब और मांस खाने वाले कलाकारों का विरोध हो रहा है। महंत अवधेश दास ने कहा कि पिछले साल अयोध्या की रामलीला में मंच पर नारद ने मुगलिया शेरवानी व नागरिया जूता पहन रखा था। जो नारद की वेशभूषा रही ही नहीं है। अयोध्या मर्यादित नगरी है। यहां अमर्यादित वेशभूषा, अमर्यादित साहित्य की रामलीला नहीं चलेगी। इसका विरोध होगा। अयोध्या में उपासना, साधना, मर्यादा, सनातन की रामलीला होनी चाहिए। ना की फिल्मी हस्तियों की रामलीला. क्योंकि फिल्मी दुनिया के लोग धर्म का सत्यानाश कर रहे हैं।

“रामलीला का स्वरूप नहीं बिगाड़ा जाना चाहिए”
वहीं, व्याख्या कथा व्यास पवन शास्त्री का कहना है कि संत समाज रामलीला का विरोध नहीं कर रहा। अयोध्या राम, रामलीला, रामचरितमानस की भी जन्मभूमि है। श्री राम के चरित के बारे में खुद रावण ने कहा कि राम जी का मुखौटा लगा लेने से सारे विश्व की संपदा तुक्ष लगती है। वर्चुअल रामलीला होते हुए संदेश एक्चुअल देना अयोध्या के रामलीला की परंपरा वास्तविकता है। रामलीला का स्वरूप नहीं बिगाड़ा जाए।

भ्रष्ट लोगों को रामलीला का पात्र बनाये जाने का विरोध
बता दें, फिल्मी हस्तियों की रामलीला का 3 महीने से विरोध किया जा रहा है। 80 प्रतिशत संत विरोध कर रहे हैं। सरकार अगर आराध्य के चरित्र की परिभाषा तय करे, यह उचित नहीं है। संत इसको पसंद नहीं करेंगे। फिल्मी हस्तियों के खिलाफ पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलना होगा मिलेंगे। राशिकपीठाधिस्वर महंत जनमेजय शरण ने भी फिल्मी हस्तियों की वर्चुअल रामलीला का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि रामलीला का विरोध नहीं है। रामलीला के उपहास का विरोध है। राम ने 5 लीला की हैं. पांचों लीलाओं को दिखाना चाहिए। रामानंद सागर की रामलीला को आज भी पसंद किया जा रहा है। भ्रष्ट लोगों को रामलीला का पात्र बनाये जाने का विरोध है। संतों की बैठक में नागा रामलखन दास, संत कविराज कबीर सहित कई संत महंत शामिल हुए।

विश्व के सर्वाधिक लोगों द्वारा बोली जाती है हिंदी

दीपक कुमार केसरवानी (साहित्यकार)

आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हिंदी दिवस के अवसर पर मनाया जाने वाला साहित्य उत्सव अपने आप में महत्वपूर्ण है।
रॉबर्ट्सगंज नगर के प्रख्यात साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद खादिम का मानना था कि भाषा वही जीवित रहती है जिसका प्रयोग जनता करती है।
यही कारण था कि आजादी के बाद भारत में बहु प्रचलित भाषा हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता दिलाने के लिए देश के जाने माने साहित्यकार काका कालेकर, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविंद दास, व्यवहार राजेंद्र सिंह के आंदोलन को समर्थन देते हुए मिर्जापुर जनपद के साहित्यकारों के साथ मिलकर आंदोलन चलाया और इस आंदोलन के परिणाम स्वरूप हिंदी भाषा को भारतीय संविधान में राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता मिली।
साहित्यकार प्रतिभा देवी के अनुसार-“14 सितंबर 1949 को मूर्धन्य साहित्यकार व्यवहार राजेंद्र सिंह के 50 वें जन्मदिन को हिंदी दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।
14 सितंबर सन 1950 को भारतीय संविधान ने इसे अंगीकार किया और 26 जनवरी 1950 को देश के संविधान द्वारा आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल करने के विचार को मंजूरी दे दी गई।
भारत के प्रत्येक भाग में हिंदी भाषा को प्रचारित एवं प्रसारित करने के लिए 14 सितंबर 1953 से हिंदी दिवस मनाए जाने की परंपरा की शुरुआत हुई।
हिंदी दिवस के अवसर पर साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद खादिम विचार गोष्ठियों का आयोजन आजीवन करते रहे।
हिंदी भाषा के उत्थान में रॉबर्ट्सगंज नगर में संचालित राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रुद्र प्रसाद श्रीवास्तव, हिंदी के विद्वान डॉक्टर पशुपति नाथ दुबे, कमला प्रसाद श्रीवास्तव (कवि जी) पत्रकार निरंजन लाल जालान, महावीर जालान, सत्यनारायण जालान,चंद्रशेखर शुक्ला,तेज बहादुर सिंह, हंस नाथ पांडेय, एम० ए०खान, रघुवीर चंद जिंदल आदि दिवंगत विद्वानों का योगदान रहा। “
अधिवक्ता ज्ञानेंद्र शरण राय का मत है कि-“मातृभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए उत्तर भारत में अंग्रेजी हटाओ आंदोलन चलाया गया जो काफी हद तक सफल रहा।
हिंदी साहित्य के इतिहास के आईने में झांक कर देखा जाए तो
स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी भाषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महात्मा गांधी गुजराती थे, सी. राजगोपालाचारी मद्रासी थे, राजा राम मोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर व देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय जैसे महान दार्शनिक व क्रांतिकारी बंगाली थे, ऐसे ही देश के अलग-अलग प्रांतों के क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता आंदोलन का माध्यम हिंदी भाषा को बनाया। और स्वाधीनता का संदेश देशभर में जन-जन तक पहुंचाया।
क्रांतिकारी, देशभक्त, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हिंदी के गीत गाते हुए फांसी के फंदे को चूम लिया और वंदे मातरम, भारत माता की जय, इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते हुए देश पर कुर्बान हो गए थे, यह ताकत थी हमारी हिंदी भाषा की।
हिंदी भाषा में प्रकाशित समाचार पत्र और साहित्य स्वतंत्रता आंदोलन का संबल बनी।
हिंदी के महत्त्व को गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का विचार था कि-” ‘भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी’।
महात्मा गांधी ने कहा था कि-” राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की उन्नति के लिए आवश्यक है।
स्वतंत्रता आन्दोलन में हिंदी पत्रकारिता ने अहम भूमिका अदा किया।
सोनघाटी पत्रिका के विधिक सलाहकार-“ हिन्दी जन-जन की भाषा, देश की प्रभावशाली विरासत,सरलता, बोधगम्य और शैली की दृष्टि से विश्व की भाषाओं में हिन्दी महानतम स्थान रखती है। हिंदी हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक है। बहुत सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली वैज्ञानिक भाषा है, जो हमारे पारम्‍परिक ज्ञान,प्राचीन सभ्‍यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु करती है। हिंदी भारत संघ की राजभाषा होने के साथ ही ग्यारह राज्यों और तीन संघ शासित क्षेत्रों की भी प्रमुख राजभाषा है। संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य इक्कीस भाषाओं के साथ-साथ हिंदी का एक विशेष स्थान है।
हिंदी विदेश मंत्रालय द्वारा ‘‘विश्व हिंदी सम्मेलन’’ और अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के माध्यम से हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा प्रत्येक वर्ष सरकार द्वारा ‘‘प्रवासी भारतीय दिवस’’ मनाया जाता है जिसमें विश्व भर में रहने वाले प्रवासी भारतीय भाग लेते हैं। विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों की उपलब्धियों के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम से भारतीय मूल्यों का विश्व में और अधिक विस्तार हो रहा है। विश्‍वभर में करोड़ों की संख्‍या में भारतीय समुदाय के लोग एक संपर्क भाषा के रूप में हिन्‍दी का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। इससे अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर हिन्‍दी को एक नई पहचान मिली है। यूनेस्‍को की सात भाषाओं में हिंदी को भी मान्‍यता मिली है।
भारतीय विचार और संस्‍कृति का वाहक होने का श्रेय हिन्‍दी को है। आज संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं में भी हिंदी की गूंज सुनाई देने लगी है। हिंदी के इसी महत्व को देखते हुए तकनीकी कंपनियां इस भाषा को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं। सूचना प्रौद्योगिकी में हिन्‍दी का इस्‍तेमाल बढ़ रहा है। आज वैश्वीकरण के दौर में हिंदी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है।यह उन सात भाषाओं में से एक है जो वेब एड्रेस बनाने के लिए उपयोग की जाती हैं।आज पूरी दुनिया में 175 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा पढ़ाई जा रही है। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकें बड़े पैमाने पर हिंदी में लिखी जा रही है। सोशल मीडिया और संचार माध्यमों में हिंदी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है।
हिंदी भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा बनकर उभरी है। विदेशी शक्तियां भारत में व्यापार करने के लिए अपने लोगों को हिंदी सिखा रही हैं। देश में करीब 50 करोड़ से ज्यादा लोग हिंदी बोलते हैं।
हिंदी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और झारखंड सहित कई भारतीय राज्यों की आधिकारिक भाषा है। बिहार देश का पहला राज्य था जिसने अपनी एकमात्र आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को अपनाया है।दुनिया भर में लोग हिंदी गीतों और हिंदी फिल्मों को प्यार करते हैं।
दुनिया में हर ध्वनि हिंदी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जा सकती है।
मॉरीशस की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री गायिका फिल्म कलाकार हौसिला देवी रिशोल ने दूरभाष पर अपना विचार प्रकट करते हुए कहा कि-
हिंदी भाषा का प्रयोग सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर के अन्य देशों में भी किया जाता है जिनमें पाकिस्तान, फिजी, नेपाल, मॉरीशस, श्रीलंका, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड अरब एमिरेट्स और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।”
हर साल 14 सितंबर को मनाया जाने वाला हिंदी दिवस भारतीय संस्कृति को संजोने, सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने, समृद्धि का जश्न मनाने का दिन है।
जिस प्रकार हम धार्मिक सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय पर्व मनाते हैं उसी प्रकार हमें 14 सितंबर हिंदी दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाना चाहिए। हिंदी भाषा हमारे देश की आन बान शान है विश्व में भारत की पहचान है।

14 सितंबर को ही क्‍यों मनाया जाता है हिंदी दिवस? जानें इतिहास और महत्व


आजादी के बाद देश में हिंदी के उत्थान के लिए 14 सितम्बर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। ये दिन देश में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। राजभाषा के दर्जे में अंग्रेजी को हटाकर हिंदी को चुने जाने पर देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रर्दशन शुरू हो गया था।

लखनऊ: 14 सितम्बर को पूरे देश में राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है. आजादी के बाद देश में हिंदी के उत्थान के लिए 14 सितम्बर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। ये दिन देश में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। हालांकि 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस तरह से भारत में दो बार हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिन्दी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। हमारे देश में करीब 77 फीसदी लोग हिन्दी बोलते, समझते और पढ़ते हैं।

विविधता से परिपूर्ण देश में राष्ट्रीय एकता की प्रतीक हिंदी भाषा हमारी पहचान एवं संस्कृति का अभिन्न अंग है।

आइए, राष्ट्रभाषा व विश्वभाषा के रूप में स्थापित करने हेतु हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प धारण करें।

14 सितंबर 1949 को हिंदी राजभाषा घोषित संविधान के अनुच्छेद 343 (1) में इसका उल्लेख है। इसके अनुसार भारत की राजभाषा ‘हिन्दी’ और लिपि देवनागरी है. साल 1953 से हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाने की शुरुआत हुई. इस दिन संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा घोषित किया। वहीं राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की सिफारिश के बाद से 14 सितंबर 1953 से हिंदी दिवस मनाया जाने लगा।

एक हफ्ते तक चलता है हिन्दी पखवाड़ा

हिन्दी भाषा के उत्थान और भारत में राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलाने के लिए ही हिन्दी दिवस मनाया जाता है। हिन्दी दिवस को पूरे एक हफ्ते तक सेलिब्रेट किया जाता है, जिसे हिन्दी पखवाड़ा के नाम से जानते हैं। हिन्दी दुनिया में बोली जाने वाली भाषाओं में तीसरे नंबर पर है. इस दिन को स्कूलों से लेकर ऑफिसों तक में सेलिब्रेट किया जाता है। जिसके तहत निबंध प्रतियोगिता, भाषण, काव्य गोष्ठी, वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताएं कराए जाते हैं।

शुरू हुआ हिंदी विरोधी आंदोलन

हिंदी को राजभाषा बनाए जाने पर देश के हिस्सों में विरोध शुरू हो गया है। 26 जनवरी 1965 को जब हिंदी देश की आधिकारिक राजभाषा बन गई तो दक्षिण भारत के राज्यों में रहने वाले लोगों को डर सताने लगा कि हिंदी के आने से वे उत्तर भारतीयों की तुलना में विभिन्न क्षेत्रों में पिछड़ जाएंगे। इसके बाद हिंदी विरोधी आंदोलन शुरू हो गया। उस समय मद्रास (वर्तमान में तमिलनाडु ) में आंदोलन और हिंसा का एक जबरदस्त दौर चला। तमिलनाडु समेत दक्षिणी भारत के राज्यों में हिंदी की प्रतियां भी जलाई जानें लगी और दंगे भड़के।

जानें क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस

हिंदी का बढ़ावा देने के लिए देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। इसी उद्देश्य के साथ के सभी सरकारी कार्यालयों को भी हिंदी का प्रयोग करने के लिए कहा जाता है। इस दिन लोगों को प्रेरित करने के लिए हिंदी भाषा अवॉर्ड भी दिया जाता है। इस दिन साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हिंदी दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति उन सभी लोगों को सम्मानित करते हैं जिन्होंने हिंदी भाषा के किसी क्षेत्र में उपलब्धि हासिल की है।

विश्व हिंदी दिवस और राष्ट्रीय हिंदी दिवस में अंतर
विश्व हिंदी दिवस दुनिया भर में 10 जनवरी को मनाया जाता है।इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर हिंदी का प्रचार प्रसार करना है। वहीं इसके कुछ महीने बाद ही राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय हिंदी दिवस उस दिन मनाया जाता है, जिस दिन संविधाव सभा ने हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा घोषित किया जबकि विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर हिंदी को बढ़ावा देना है।

विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक हिंदी

आज हिंदी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदी का दबदबा बढ़ा है। आज हिन्दी भाषा को पूरे विश्व भर में सम्मान के नजरों से देखा जाता है। यहां तक की टेक्नोलॉजी के जमाने में आज विश्व की सबसे बड़ी कंपनियां जैसे गूगल, फेसबुक भी हिंदी को बढ़ावा दे रही हैं।

संजय विद्यार्थी सविता के जनपद में प्रथम आगमन पर समाजवादियों ने किया भव्य स्वागत

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

सोनभद्र। जनपद में समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री संजय विद्यार्थी सविता के प्रथम आगमन पर सोमवार को जिला पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भव्य स्वागत कर जन चौपाल लगाया गया जिसकी अध्यक्षता समाजवादी पार्टी जिला अध्यक्ष विजय यादव ने किया और संचालन जिला महासचिव मोहम्मद सईद कुरैशी ने किया। जन चौपाल को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री संजय विद्यार्थी संगीता ने कहा कि भाजपा सत्ता का दुरुपयोग कर अपना राजनीतिक एजेंडा लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही भाजपा ने फिर से अपना असली रूप दिखाना शुरू कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि कल्याणकारी राज्य की अवधारणा में जनता के साथ न्याय होना चाहिए। लेकिन भाजपा राज में अराजकता का समराज है। श्री सविता ने कार्यकर्ताओं का आवाहन करते हुऐ कहा कि लोकतंत्र के इस उत्सव की कविता को बचाने के क्रम में पूरी निष्ठा से लगे और साथ ही साथ भाजपा के तांत्रिक इरादों से सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि सपा इस संबंध में पुख्ता रणनीति बना रही है। ताकि भाजपा जनता को धोखा ना दे सके।

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में मुस्तैदी से जुड़ जाएं।मतदाता सूची में नाम बढ़ाने पर ध्यान दें सबका सहयोग ले और 2022 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाएं। जिससे हर वर्ग का विकास हो सके नाइ एवं सविता समाज का यदि किसी पार्टी में भला है तो वह समाजवादी पार्टी है।

वही जन चौपाल को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी जिला अध्यक्ष विजय यादव,पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा व पूर्व विधायक रमेश चंद्र दुबे ने कहा कि समाजवादी ही एक ऐसी पार्टी है जो हर समाज को जोड़ने का काम करती है इसलिए आप लोगों से अनुरोध है कि आप लोग आज से ही समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने में लग जाएं और आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को भारी मतों से विजय बनाने का काम करें। समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने में चंदन शर्मा,रामचरण शर्मा, दुर्गा प्रसाद शर्मा, अखिलेश शर्मा, वीरेंद्र शर्मा,बृजेश कुमार शर्मा, मनोज कुमार शर्मा, चंद्र लाल ठाकुर, नागपुर ठाकुर, अवनीश ठाकुर, बलराम ठाकुर, संजय शर्मा, सत्येंद्र शर्मा, नंदलाल ठाकुर, बलराम ठाकुर, नंदू ठाकुर, जालम शर्मा, डॉo मृत्युंजय शर्मा,राजकुमार शर्मा, विजय शर्मा, जटायु शर्मा, सुनील शर्मा, सोनू शर्मा और मौर्य समाज से दिनेश मौर्य, राम भजन मौर्य, बीरबल मौर्य, मंगरु मौर्य, विजय कुमार मौर्या, उमाशंकर मौर्या, रमेश कुमार मौर्या, नंदलाल मोर्य, शिवपूजन मौर्या, दयाशंकर मौर्य, महेंद्र कुशवाहा, धीरज कुशवाहा, संतोष कुशवाहा, विनय कुशवाहा, जितेंद्र कुशवाहा,विनोद कुशवाहा, नमन कुशवाहा, मुकेश कुशवाहा, हीरामन भारती,पवन कुमार कोल, आर्यन कुमार कनौजिया, सुभाष कुशवाहा,छोटू कुशवाहा, अनिल कुशवाहा के साथजे साथ- साथ आदि भाजपा एवं बसपा छोड़ समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। सदस्यता ग्रहण करने वाले को पूर्व मंत्री संजय विद्यार्थी सविता ने माला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से राम निहोर यादव, रमेश वर्मा, ओम प्रकाश त्रिपाठी, रामप्यारे सिंह पटेल, अशोक पटेल, अनिल प्रधान एवं जिला पदाधिकारी, विधानसभा पदाधिकारी,जिला प्रकोष्ठ पदाधिकारी, नगर पदाधिकारी, सेक्टर पदाधिकारी, ब्लॉक पदाधिकारी सहित आदि वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहें।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के करमा ब्लाक अध्यक्ष बने धनंजय मिश्रा

• राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के करमा ब्लॉक कार्यकारिणी का हुआ गठन।

संस्कृति लाइव संवाददाता, करमा, सोनभद्र। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, सोनभद्र द्वारा संगठन की नींव मजबूत करने हेतु जनपद के सभी विकास खण्डों में शैक्षिक उन्नयन कार्यक्रम एवं कार्यकारिणी का विस्तार अभियान चल रहा है।
इसी तत्क्रम में जिला कार्यकारिणी द्वारा नवसृजित विकास खण्ड करमा में न्यायपंचायत केंद्र एवं कंपोजिट विद्यालय पापी करमा के प्रांगण में शैक्षिक उन्नयन कार्यक्रम एवं कार्यकारिणी विस्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे मण्डल अध्यक्ष अखिलेश मिश्र ‘वत्स’ एवं जिला संयोजक अशोक कुमार त्रिपाठी तथा सहसंयोजक इन्दु प्रकाश सिंह द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
वही विस्तार कार्यक्रम में सम्मिलित होने शिक्षकों की बड़ी संख्या संगठन में शिक्षकों के भरोसे की गवाही दे रही थी। जिसमें महिला शिक्षिकाओं की अच्छी-खासी उपस्थिति जनपद के शैक्षिक संगठन में नए बदलाव के बयार का संकेत दे रही है।
ब्लॉक कार्यकारिणी के सर्वसम्मति से धनन्जय मिश्र को ब्लॉक अध्यक्ष,अनवर हुसैन को ब्लॉक महामंत्री, कृष्णानंद व भैया लाल मौर्य को ब्लॉक कार्यकारणी सदस्य चुने गए तथा महिला संवर्ग में डॉ कल्याणिका सिंह ब्लॉक अध्यक्ष व मृदुला श्रीवास्तव तथा सीमा सिंह ब्लॉक कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित हुई।

मण्डल अध्यक्ष वत्स ने सन्गठन के रीति- नीति व सन्गठन के सभी संवर्गों व उनके कार्य दायित्व को बताया। महासंघ द्वारा शिक्षक व शिक्षा हित में प्रदेश व राष्ट्र स्तर पर किये जा रहे कार्य को रखा गया।
जनपद संयोजक अशोक कुमार त्रिपाठी द्वारा नवनिर्वाचित कार्यकारिणी की घोषणा को गयी। साथ ही सदस्य व संगठन के महत्व को बताया।
वही जनपद सहसंयोजक इन्दूप्रकाश सिंह द्वारा निर्वाचित कार्यकारिणी को महासंघ की शपथ दिलाकर संगठन विस्तार व सदस्यता अभियान के चलाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन दिनेश त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम में सौरभ कार्तिकेय श्रीवास्तव, गणेश पाण्डेय, हिमांशु मिश्रा, संदीप तिवारी, अनिल द्विवेदी, नीलू सिंह, अनुपम सिंह, अर्चना गुप्ता,साधना तिवारी, फूलकुंवारी, पूनम सिंह, गरुणा, वर्षा, सहित आदि शिक्षकगण उपस्थित रहे।

समाजवादी छात्रसभा ने राज्यपाल के नाम सम्बोधित पत्र जिलाधिकारी को दिया

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

सोनभद्र। समाजवादी छात्रसभा के जिला अध्यक्ष पवन पटेल के नेतृत्व व प्रदेश सचिव शिव नारायण सिंह की उपस्थिती में महामहिम राज्यपाल के नाम सम्बोधित पत्र सोमवार को जिलाधिकारी को दिया। छात्रों की बुनियादी समस्याओं का हल कराए जाने की मांग पत्र देते समय छात्रसभा के जिलाध्यक्ष पवन पटेल व प्रदेश सचिव शिवनारायण सिंह “अम्बुज” ने संयुक्त रूप से कहा कि वर्तमान सरकार छात्रों का उत्पीड़न कर रही है और कोरोना की वैश्विक महामारी में छात्रों की शैक्षिक व्यवस्था में व्यवधान उत्तपन्न होने के साथ अभिभावकों की आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वर्तमान परिवेश में आमजन का जीवनयापन अव्यवस्थित है। ऐसे समय मे सरकार द्वारा जीरो फीस की सुविधा समाप्त करना दलितों व कमजोर वर्ग के छात्रों पर कुठाराघात है।

वही दूसरी तरफ पिछड़े व गरीब सामान्य वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति रोके जाने के वजह से छात्रों का पढ़ाई जारी रखना दुर्लभ हो गया है। जिस कारण से दलित , पिछड़े, अल्पसंख्यक व गरीब सामान्य वर्ग के छात्र पढ़ाई छोड़ने को मजबूर है। इसी दौरान समाजवादी छात्र सभा के महासचिव अंकित सिंह राठौर व छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हिमांशु यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि वर्तमान सरकार की मंशा छात्र-छात्राओं के प्रति एकदम सही नहीं है छात्र छात्राओं को अनपढ़ बनाना चाहती है नौजवान साथियों को रोजगार भी नहीं दे रही है साथ ही साथ एसएसटी छात्र-छात्राओं को जीरो फीस शिक्षा को भी बंद कर दिया है उनको हॉस्टल की सुविधा भी नहीं दी जा रही है। अगर सरकार द्वारा छात्र-छात्राओं को उचित व्यवस्था नहीं मिली तो हम सब आंदोलन के रास्ते छात्रों के हक , अधिकार व न्याय की लड़ाई लड़ने का काम करेंगे। इस दौरान जिला उपाध्यक्ष अंकित सिंह, सर्वजीत यादव,ओम प्रकाश सिंह, अखिलेश यादव, आयुष सिंह, बलवंत सिंह, महेश यादव, लक्ष्मी नारायण, उपाध्याय राहुल जायसवाल आलोक,राजेश यादव व हिमांशु सेठ सहित आदि छात्र सभा के नौजवान उपस्थित रहे।

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