लखनऊ: यूपी असेंबली चुनाव (UP Assembly Election 2022) से पहले नेताओं के दल बदलने का खेल जारी है. अब एक और बीजेपी (BJP) विधायक दारा सिंह चौहान (Dara Singh Chauhan) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने एसपी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की है. इस्तीफे के बाद दारा सिंह चौहान ने कहा कि वे जल्द ही अपने समर्थकों के साथ मुलाकात कर आगे की रणनीति बनाएंगे.
फिलहाल मऊ से विधायक हैं दारा सिंह चौहान
दारा सिंह चौहान ओबीसी में आने वाले नोनिया चौहान समाज से हैं. वे 2 बार राज्यसभा और 1 बार लोकसभा के सांसद रह चुके हैं. वे फ़िलहाल मऊ ज़िले की मघुबन सीट से विधायक हैं. बीजेपी छोड़ने पर दारा सिंह चौहान ने कहा, ‘लोग सवाल खड़ा करेंगे, आप मलाई खाते रहे. लेकिन सच्चाई ये है कि 5 साल तक दलित वंचित पिछड़ों के लिए इस सरकार में कुछ नहीं किया गया. मैं पूरे समाज से चर्चा करने के बाद आगे के बारे में निर्णय लूंगा. जो भी समाज कहेगा, मैं उस पर निर्णय लूंगा.’
केशव प्रसाद मौर्य की पुनर्विचार की अपील
दारा सिंह चौहान (Dara Singh Chauhan) के पार्टी से इस्तीफे के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. हालांकि चौहान ने इस पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट करके कहा, ‘परिवार का कोई सदस्य भटक जाये तो दुख होता है. जाने वाले आदरणीय महानुभावों को मैं बस यही आग्रह करूंगा कि डूबती हुई नांव पर सवार होने से नुकसान उनका ही होगा. बड़े भाई श्री दारा सिंह जी आप अपने फैसले पर पुनर्विचार करिए.’
परिवार का कोई सदस्य भटक जाये तो दुख होता है जाने वाले आदरणीय महानुभावों को मैं बस यही आग्रह करूँगा कि डूबती हुई नांव पर सवार होनें से नुकसान उनका ही होगा
बड़े भाई श्री दारा सिंह जी आप अपने फैसले पर पुनर्विचार करिये
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) January 12, 2022
स्वामी प्रसाद मौर्य भी छोड़ चुके हैं पार्टी
बता दें कि इससे पहले बीएसपी से बीजेपी (BJP) में आए और 5 साल तक योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य भी बीजेपी छोड़ने का ऐलान कर चुके हैं. पार्टी से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की, जिसकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. हालांकि उन्होंने अभी औपचारिक रूप से एसपी ज्वॉइन करने की घोषणा नहीं की है.
कुछ और विधायकों ने भी किया ऐलान
स्वामी प्रसाद मौर्य के ऐलान के बाद उनके समर्थक तीन और विधायकों ने भी बीजेपी छोड़ने की घोषणा कर दी. इस मुद्दे पर बीजेपी (BJP) के शीर्ष नेता फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं. हालांकि कुछ नेताओं का कहना है कि काम की परफॉर्मेंस के आधार पर इस बार कुछ विधायकों के टिकट काटे जाने हैं. ऐसे में जिन्होंने पूरे 5 साल कोई काम नहीं किया, अब उन नेताओं में भगदड़ मची है. उन्होंने दावा कि इस भगदड़ से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा बल्कि वह और मजबूत होकर उभरेगी.
विवेकानंद जी की मनाई गई जयंती
सुकृत, सोनभद्र। जनपद सोनभद्र के कर्मा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा सुकृत में स्थित “सोनभद्र मानव सेवा आश्रम ट्रस्ट” के केंद्रीय कार्यालय पर बुधवार को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम विश्वकर्मा नें स्वामी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर पूजन किये तत्पश्चात उपस्थित पदाधिकारियों व सदस्यों ने भी स्वामी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर याद किये।

ट्रस्ट के संस्थापक गौतम विश्वकर्मा नें स्वामी विवेकानंद जी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा देश अनेक महान विभूतियों से सदियों से भरा पड़ा है, जिनसे हम अनवरत प्रेरणा पाते आ रहे हैं। सीखते आ रहे हैं। यही नहीं यदि हम उन्हें अपने जीवन में आत्मसात कर लेतें है तो हमारी निराशा से भरी जिंदगी में प्रकाश और उसके अंदर इतना आत्मविश्वास भर जाता है कि उसकी जिंदगी में नव उत्साह का संचार हो जाता है।
ऐसे ही महापुरुष हैं स्वामी विवेकानंद जी। कायस्थ कुल में 12 जनवरी 1863 को माँ भुवनेश्वरी देवी की कोख से कोलकाता (तब कलकत्ता) में जन्में विवेकानंद जी के बचपन का नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था।
पाश्चात्य सभ्यता में भरोसा रखने वाले उनके पिता विश्वनाथ दत्त जी अंग्रेजी पढ़ाकर उन्हें भी उसी राह पर ले जाना चाहते थे। परंतु बचपन से ही तीव्र बुद्धि वाले नरेन्द्र परमात्मा को पाने के इच्छुक रहे।जिसकी खातिर पहले वे ब्रह्म समाज गये, मगर संतुष्ट नहीं हुए।
उनके पिता विश्वनाथदत्त जी की 1884 ई. में मृत्यु के बाद घर का भार नरेन्द्र पर आ गया। घर की दशा दयनीय और गरीबी होने के बाद भी अतिथि सेवी रहे। नरेन्द्र का विवाह भी नहीं हुआ था। खुद भूखे रहते मगर मेहमान की आवभगत का पूरा ख्याल रखते। वर्षा में खुद भीगते रात गुजार देते, मगर मेहमान को बिस्तर पर सुलाते।
रामकृष्ण परमहंस की प्रशंसा सुनकर प्रथम तो तर्क के उद्देश्य से उनके पास गये थे, परंतु परमहंस जी उन्हें देखकर ही पहचान गये कि जिसकी उन्हें प्रतीक्षा थी वो यही शिष्य है। परमहंस जी की कृपा प्रसाद से नरेन्द्र को न केवल आत्म साक्षात्कार हुआ बल्कि वे उनके प्रमुख शिष्यों में भी एक हो गये। स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी ने ही उन्हें यह नाम दिया। अपने गुरु को अपना जीवन समर्पित कर चुके स्वामी विवेकानंद परिवार और कुटुंब की परवाह किए बिना ही उनके अंतिम दिनों में गुरुसेवा में समर्पित रहे। कैंसर पीड़ित गुरु के थूक, कफ, रक्त आदि की साफ- सफाई का वे पूरा ध्यान रखते और खुद करते।

गुरु के प्रति निष्ठा और भक्ति का ही प्रताप था कि वे अपने गुरु के न केवल तन की अपितु उनके दिव्य, अलौकिक आदर्शों की सेवा करने में सफल हुए।
उन्होंने अपने गुरुदेव को न केवल समझा बल्कि अपने अस्तित्व तक को उनके स्वरूप में विलीन और समाहित भी कर लिया।
संन्यास के बाद ही इनका नाम स्वामी विवेकानंद हुआ।जो उन्हें अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी ने दिया था।
मात्र 25 वर्ष की अवस्था में ही नरेन्द्र ने सन्यासियों जैसे गेरुआ वस्त्र पहन लिया और पूरे भारत का पैदल भ्रमण किया।
स्वामी जी ने वर्ष 1883 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व भारत की ओर से किया । यह वो समय था जब यूरोपीय और अमेरिकन लोग भारतवासियों को बहुत ही हेय और नीच दृष्टि से देखने थे। वहां लोगों ने बहुतेरे प्रयत्न किए कि स्वामी विवेकानंद जी को सर्वधर्म सम्मेलन में बोलने का अवसर ही न मिल सके।लेकिन अमेरिका के ही एक प्रोफेसर के प्रयास से स्वामी जी को थोड़े समय बोलने का मौका मिला। उस थोड़े से समय में ही उनके विचार सुनकर सभी विद्वतजन चकित रह गए। फिर तो अमेरिका में स्वागत ही स्वागत हुआ। तीन वर्षों तक अमेरिका में रहे स्वामी विवेकानंद जी ने वहां के लोगों को भारतीय तत्वज्ञान की अलौकिकता का अद्भुत ज्ञान दिया। वहां इनके अनुयायियों का बड़ा समूह हो गया।विवेकानंद जी का मानना ही नहीं दृढ़ विश्वास भी था कि भारतीय दर्शन और अध्यात्म के बिना संसार अनाथ होकर रह जाएगा। संसार भर में प्रचार प्रसार करने के उद्देय से उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना सामाजिक कार्यों और समाज सेवा के लिए किया। अमेरिका में भी उन्होंने मिशन की शाखाएं खोलीं। बहुत से अमेरिकी विद्वानों ने स्वामी विवेकानंद जी का शिष्य होना स्वीकार किया।
स्वामी जी कहते थे कि जिस पल मुझे मालूम हुआ कि हर व्यक्ति में ईश्वर है, तभी से मैं हर व्यक्ति से न केवल ईश्वर की छवि देखता हूँ, बल्कि उसी क्षण से बंधन मुक्त भी हो गया हूँ। उनका मानना था कि जो चीज बंद रहती है वो धूमिल पड़ जाती है, इसीलिए मैं आजाद हूँ। उन्होंने अल्पायु में ही अपने ज्ञान के प्रकाश और विचारों को जन मानस तक पहुँचाने का प्रयास का किया है।
स्वामी विवेकानंद जी खुद को गरीबों का सेवक मानते थे। उन्होंने संसार भर में भारत के गौरव को बढ़ाने का जीवन भर प्रयत्न जारी रखा।
39 वर्ष की अवस्था में बेलूर मठ बंगाल रियासत (ब्रिटिश राज) में 04 जनवरी 1902 में स्वामी विवेकानंद जी ने अंतिम साँस लेकर अपने प्राण त्याग दिए। जिनकी स्मृति में इस दिवस को स्मृति दिवस के रुप में मनाया जाता है।
उनके अनमोल विचार हमें हौसला और आत्मविश्वास देने वाले हैं।हमारे जीवन को बदलने वाले हैंं।
आइए उनके विचारों को जानते हैं और जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं।
1. उठो, जागो और जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाय ,तब तक न रुको।
2. दुनिया, संसार में सबसे बड़ा पाप खुद को कमजोर समझना है।
3. तुम्हें खुद से अंदर से सीखना है क्योंकि आत्मा से बड़ा कोई शिक्षक नहीं है। न तो तुम्हें कोई पढ़ा सकता है न ही आध्यात्मिक बना सकता है।
4. सत्य हमेशा एक ही रहेगी, बस उसके बताने के तरीक़े बहुतेरे हो सकते हैं।
5. अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रुप भर है बाहरी स्वभाव।
6. हम स्वयं अपनी आँँखों को बंद कर लेते है और अंधकार का विलाप करते हैं
जबकि समस्त ब्रह्मांड की सारी शक्तियां हमारे भीतर पहले से ही मौजूद हैं।
7. विश्व एक व्यायामशाला है,जहाँ हम सब अपने को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।
8. जब भी दिल और दिमाग का टकराव हो तो हमेशा दिल की सुनो।
9. प्रेम जीवन है,द्वेष मृत्यु है, विस्तार जीवन और संकुचन मृत्यु है।शक्ति जीवन तो निर्बलता मृत्यु है।
10. जिस किसी दिन आपके सामने समस्या न आये तो आप सुनिश्चित हो सकते है कि आप गलत राह पर हैं।
स्वामी जी को हमारी श्रद्धांजलि तभी सार्थक और औचित्यपूर्ण है जब हम उनके विचारों को आत्मसात करें, जीवन में उतारें और निरंतर अनुसरण करें।
इस मौके पर ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम विश्वकर्मा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता, सदस्य गण सरवरे अख्तर, श्याम बिहारी आदि मौजूद रहे।
हत्या के दोषी रामस्वरूप को उम्रकैद
- 70 हजार रुपये अर्थदंड, न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद
- 4 वर्ष पूर्व कुल्हाड़ी से गला काटकर श्री किसुन की हुई थी हत्या
- दो महिलाओं पर भी जान मारने की नियत से कुल्हाड़ी से किया था प्रहार
- अर्थदंड की आधी धनराशि मृतक की पत्नी को मिलेगा
राजेश पाठक
सोनभद्र। चार वर्ष पूर्व कुल्हाड़ी से गला काटकर श्री किसुन की हुई नृसंश हत्या के मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम खलीकुज्ज्मा की अदालत ने दोषसिद्ध पाकर दोषी रामस्वरूप को उम्रकैद एवं 70 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं मृतक की पत्नी को अर्थदंड की आधी धनराशि दी जाएगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 20 अक्तूबर 2017 को दुद्धी कोतवाली में दी तहरीर में कोरगी निवासी देवी किसुन ने आरोप लगाया था कि उसका भाई श्री किसुन 18 अक्तूबर 2017 को अपनी लड़की के घर आरंगपानी गांव छठी में गया था। 20 अक्तूबर 2017 को अपनी मौसेरी सास फुलवासी देवी के घर गोहड़ा सुबह 8 बजे चला गया। वहां पर खाना खाकर छप्पर में सो रहा था। गोहड़ा गांव निवासी रामस्वरूप पुत्र नान्हू राम अपनी लड़की की शादी की बात को लेकर फुलवासी देवी से रंजिश रखता था। उसी रंजिश के कारण दोपहर 12:30 बजे जब भाई श्री किसुन चारपाई पर सो रहा था कुल्हाड़ी लेकर आए रामस्वरूप ने भाई के गर्दन पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इतना ही नहीं घर मे मौजूद उषा देवी एवं इनकुंवर को भी जान से मारने की नीयत से कुल्हाड़ी से गले पर वार कर दिया। जिनका इलाज दुद्धी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। इस घटना को घर पर मौजूद फुलवासी देवी व उनका लड़का जीत नारायण ने देखा। लेकिन भयवश कुछ नहीं बोला, बल्कि छिप गया था। भाई का शव पड़ा है आवश्यक कार्रवाई करें।

इस तहरीर पर रामस्वरूप के विरुद्ध हत्या एवं हत्या का प्रयास की एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने मामले की विवेचना किया और पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने न्यायालय में रामस्वरूप के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी रामस्वरूप को उम्रकैद एवं 70 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी वहीं अर्थदंड की आधी धनराशि मृतक की पत्नी को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता कुंवर वीर प्रताप सिंह ने की।

स्वामी विवेकानंद की मनाई गई जयंती
हर्षवर्धन केसरवानी
रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र। पतंजलि योगपीठ सोनभद्र व युवा भारत के जिला महामंत्री एवम् सोशल मीडिया प्रभारी योगी संकटमोचन द्वारा बुधवार को राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर लॉर्ड बुद्धा इंस्टीट्यूट में एक क्रायक्रम का आयोजन किया गया। इंस्टीट्यूट में निरंतर चल रहे कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर में योगा की प्रशिक्षण ले रहे बच्चों को ट्रेनर योगी संकटमोचन और सरिता सिंह द्वारा स्वामी विवेकानंद के बारे में बताया गया और उन्हें योग करके अपने आप को आत्मनिर्भर और सुदृढ़ और शक्तिशाली बनाने के लिए प्रेरणा दिया गया।

वही ट्रेनर योगी संकट मोचन ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि युवा का उल्टा वायु होता है और वायु जिस तेज गति से चलता है उसी प्रकार से युवा भी चलते हैं। ऐसा कहकर उन्होने वहा उपस्थित युवाओं का उत्साहवर्धन किया। और प्रतिदिन योग करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने आगे कहा की महापुरुष स्वामी विवेकानंद जी द्वारा विनम्र बनो साहसी बनो और शक्तिशाली बनो का नारा दिया गया था।

आयोजित कार्यक्रम में विश्व में भारतीय संस्कृति को स्थापित करने वाले युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन किया गया। वही कार्यक्रम में छात्रा ज्योति के द्वारा प्राणायाम का चित्र बनाया गया। जिसे देख कर पतंजलि योगपीठ सोनभद्र युवा भारत के ट्रेनर योगी संकट मोचन द्वारा एक योग पुस्तक देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर पूनम, ज्योति, चम्पा, संजू, प्रतिमा,स्वेता, कविता, मोनी, बिंदु , रूकसार परवीन, सबाना परवीन, मिदहत बानो, हसन, सौरभ, शुभम, प्रिया, सुप्रिया सहित आदि लोग उपस्थित रहे।

क्रिकेट प्रतियोगिता में राँची बना विजेता
शाहगंज, सोनभद्र। जंग बहादुर सिंह इण्टर कालेज के ग्राउंड में चल रहे स्वर्गीय गौरीशंकर सिंह स्मृति क्रिकेट प्रतियोगिता का बुधवार को फाइनल मैच चोपन एवम रांची के बीच खेला गया। रांची ने पहले टाँस जितने के बाद बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया और निर्धारित 18 ओवरों में 109 रन 9 विकेट के नुकसान पर बनाए और चोपन को 18 ओवरो में 110 रन का लक्ष्य दिया।

मैच में सर्वाधिक रन मनीष ने 27 गेंदों का सामना करते हुए शानदार 32 रन बनाए जिसमें 1 छक्का एवम 3 चौका लगाया। जबाब में उतरी चोपन की टीम प्रतियोगिता के रोमांचक मुकाबले में 18 ओवर में मात्र 108 रन ही बना पाई और यह मैच रांची ने 1 रनों से जीत लिया। इस मैच के मैन ऑफ द मैच आलोक शर्मा और प्रतियोगिता के मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार चोपन के आकाश को दिया गया। इस मैच के अंपायर अमित सिंह एवं खुर्शीद हाशमी, स्कोरर कृष्णा एवम काशिम हासमी, कमेंटेटर की भूमिका में अमृत गुप्ता व अरविंद पटेल रहे। इस दौरान कमेटी के पदाधिकारी सुरेश सिंह, आलोक पटवा, राजू ,अल्ली, विशाल केशरी, कुलदीप पटेल सहित आदि पदाधिकारी एवम दर्शकगण मौजूद रहे।

नगर में स्वामी विवेकानंद जयंती मनाने की परंपरा विश्वनाथ प्रसाद केडिया ने शुरू किया था
- प्रत्येक 12 जनवरी को मनाई जाती थी जयंती।नगर में होता था स्वामी बाल विवेकानंद बाल विद्यालय का संचालन।न
- गर पालिका अध्यक्ष अजय शेखर के कार्यकाल में हुआ था स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह का निर्माण।
- युवा चेयरमैन कृष्ण मुरारी गुप्ता के कार्यकाल में स्थापित हुई थी प्रेक्षागृह में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति।
- भव्य कार्यक्रम में मूर्ति का अनावरण किया था बीएचयू के कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने।
हर्षवर्धन केसरवानी
सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज नगर इतिहास, संस्कृति, साहित्य, कला, से समृद्धशाली रहा है। इस परंपरा का आरम्भ किया नगर में निवास करने वाले साहित्यकारों, पत्रकारों, समाजसेवियों ने।
विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-” समाजसेवी, शिक्षा, संस्कृति के प्रति जागरूक व्यवसायी विश्वनाथ प्रसाद केडिया द्वारा सन 1925 में स्थापित संस्कृत महाविद्यालय में प्रतिवर्ष तुलसीदास जयंती कालिदास जयंती आदि महापुरुषों की जयंती पर तमाम प्रकार के सांस्कृतिक साहित्यिक एवं खेलकूद वाद-विवाद अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन कराया जाता था।

विश्वनाथ प्रसाद केडिया ने स्वामी विवेकानंद की जन्मभूमि, कर्मभूमि और उनसे संबंधित तीर्थ स्थलों की यात्रा कर चुके थे और उनके आचार- विचार- व्यवहार, शिक्षा से काफी प्रभावित थे। नगर में सर्वप्रथम स्वामी जी की जयंती मनाने की परंपरा कायम किया। शिक्षा के प्रति अभिरुचि के कारण केडिया जी ने स्वामी विवेकानंद बाल विद्यालय की स्थापना किया, इस विद्यालय की स्थापना का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में स्वामी विवेकानंद के शिक्षा, विचारों एवं भारतीय संस्कृति, गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस आदि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित विचारों का प्रचार-प्रसार था। इस स्कूल ने कई स्थानों पर अपना सफरनामा तय किया। तमाम परेशानियों के बावजूद यह स्कूल संचालित होता रहा अंततः विद्यालय के संस्थापक विश्वनाथ प्रसाद केडिया ने इस स्कूल को अपने भवन (ब्रह्मा बाबा की गली) में स्थानांतरित किया।
प्रधानाचार्य त्रिवेणी राम मिश्र, मंजू लता मनिक के कुशल नेतृत्व एवं संचालन में विद्यालय संचालित होता था। प्रतिदिन प्रार्थना के बाद सुंदरकांड कक्षाओं की छात्र छात्राएं एवं अध्यापक अध्यापिका सुंदरकांड का सस्वर पाठ बिना किसी भेदभाव के करते थे। और महीने में 1 दिन गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस का पाठ चंद्रकला श्रीवास्तव बहनजी किया करती थी।

धार्मिक एकता का संदेशवाहक इस विद्यालय में प्रत्येक 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती बड़े ही धूमधाम के साथ मनाई जाती थी और इस कार्यक्रम में नगर के सभी लोग भाग लेते थे, और स्वामी जी के विचारों को हम छात्र- छात्राओं को अवगत मैं जाता था। तभी से हम लोगों ने स्वामी विवेकानंद के बारे में जानना शुरू कर दिया था। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद जी के चित्र वाले कैलेंडर का भी वितरण किया जाता था ताकि स्वामी विवेकानंद का चित्र प्रत्येक घर में हो और घर के सभी सदस्य, छात्र-छात्राएं इनसे प्रेरणा प्राप्त कर सके।
स्वामी विवेकानंद जी के आचार- विचार, व्यवहार, शिक्षा का प्रचार- प्रसार इस विद्यालय के माध्यम से जन-जन में हुआ।
स्कूल में शिक्षा प्राप्त छात्र स्वामी जी के विचारों से प्रेरित थे और उनके बताए हुए मार्ग पर चलने का प्रयास किया किया करते थे।
मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक मधुरमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक साहित्यकार कवि अजय शेखर के अनुसार-“स्वामी विवेकानंद जी भारतीय संस्कृति के अग्रदूत थे, संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति, धर्म, अध्यात्म का प्रचार- प्रसार किया था, इसीलिए नगर में निर्मित प्रथम प्रेक्षागृह का नामकरण स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह किया गया।
विवेकानंद बाल विद्यालय के छात्र रहे पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष कृष्ण मुरारी गुप्ता के कार्यकाल में आयोजित भव्य कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद की मूर्ति का अनावरण बीएचयू के कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी द्वारा किया गया था।
आज रॉबर्ट्सगंज नगर में पूर्वजों द्वारा जिन स्वामी जी की स्मृतियों को सजाया गया है वाह आगामी पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है।
समय के साथ- साथ स्वामी विवेकानंद बाल विद्यालय, संस्थापक विश्वनाथ प्रसाद केडिया भले काल कवलित हो गए हो लेकिन नगर के प्रेक्षागृह में स्थापित स्वामी विवेकानंद की मूर्ति नगर वासियों को धर्म, संस्कृति, सभ्यता की रक्षा का संदेश देती रहेगी।

सोनभद्र मानव सेवा आश्रम ट्रस्ट” की जनवरी माह की मासिक बैठक हुई संपन्न
सुकृत, सोनभद्र। जनपद सोनभद्र के करमा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा सुकृत में स्थित “सोनभद्र मानव सेवा आश्रम ट्रस्ट” के केंद्रीय कार्यालय पर ट्रस्ट की मासिक बैठक आज दिनांक 11 जनवरी 2022 को ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम विश्वकर्मा के अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में पिछले माह के कार्यों की समीक्षा की गई।

बैठक को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने निम्नलिखित प्रस्ताव रखा-
1. दिनांक 12 जनवरी 2022 को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती को युवा दिवस के रुप में मनाने,
2. मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर बच्चों में पतंग व मिष्ठान्न वितरित करने
3. कोविड- 19 के टीकाकरण कराने।
4. ठण्ड से बचने के लिए गरीबों में कंबल वितरित करने आदि।
इस प्रस्ताव पर सभी उपस्थित पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा सर्व सम्मति से पारित किया गया।
अंत में ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष/ प्रधान ट्रस्टी गौतम विश्वकर्मा के द्वारा बैठक के समापन की घोषणा की गई।
इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम विश्वकर्मा, जिला सचिव सोनभद्र दिनेश कुमार, सदस्य गण मदन लाल यादव, सूरज मणि, पंकज कुमार तथा सरवरे अख्तर मौजूद रहे।

हत्या के दोषी पिता-पुत्रों को 10-10 वर्ष की कैद
- 33-33 हजार रुपये अर्थदंड, न देने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कैद
- साढ़े नौ वर्ष पूर्व हुए तहरुन निशा हत्याकांड का मामला
राजेश पाठक
सोनभद्र। साढ़े नौ वर्ष पूर्व हुए तहरुन निशा हत्याकांड के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय राहुल मिश्रा की अदालत ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी पिता-पुत्रों को 10-10 वर्ष की कैद एवं 33-33 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक राबर्ट्सगंज कोतवाली में 21 जुलाई 2012 को दी तहरीर में राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के देवरी गांव निवासी मुमताज पुत्र स्वर्गीय रफीक ने आरोप लगाया था कि 19 जुलाई 2012 को 3 बजे दिन में गांव के बब्लू, दिलीप पुत्रगण शिवनाथ व शिवनाथ पुत्र सीताराम एकराय होकर उसकी जमीन पर चढ़ आए और बांस-बल्ली गाड़कर कब्जा करने लगे।

जब इसका विरोध जताया गया तो पिता-पुत्रों ने भद्दी-भद्दी गाली देने लगे तथा यह धमकी दिया कि आज जो भी हमलोगों के बीच में आएगा उसको जान से मार दिया जाएगा। इसीबीच बब्लू ने उसकी पत्नी के सिर पर लोहे की रॉड से प्रहार करके गंभीर चोट पहुंचा दिया और उसे भी दिलीप ने लाठी से मारा तो बायां हाथ टूट गया। उधर गम्भीर चोट लगने की वजह से पत्नी वेहोश हो गई। शोरगुल की आवाज सुनकर कई लोग आ गए और बीच बचाव किया। पत्नी को दवा-इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया जहां प्राथमिक इलाज के बाद गम्भीर हालत को देखते हुए बीएचयू वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया।

जहां इलाज के दौरान पत्नी की मौत हो गई। इस तहरीर पर पुलिस ने बब्लू, दिलीप व शिवनाथ के विरुद्ध एफआईआर दर्ज किया था। पुलिस विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत पाए जाने पर विवेचक ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषियों बब्लू, दिलीप व शिवनाथ को 10-10 वर्ष की कैद एवं 33-33 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी विजय यादव ने बहस की।
पूर्व कद्दावर श्रमिक नेता जनार्दन प्रसाद पाण्डेय से मुलाकात और चुनावी चर्चा
राम अनुज धर द्विवेदी
सोनभद्र। मीडिया फोरम ऑफ इंडिया न्यास के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी और पत्रकार राजेश द्विवेदी के साथ सोमवार को रॉबर्ट्सगंज से महुआंव पांडेय गांव तक की यात्रा कई मायने मेंऐतिहासिक तो साबित हुई हीसाथ ही एक ऐसी मुलाकात की साक्षी भी बनी जिसमेंविधान सभा चुनाव समेत सनातन संस्कृति व धर्म पर सार्थक चर्चा भी हुई।
बोनस के मुद्दे को लेकर 1974 में उत्तर प्रदेश राज्य सीमेंट निगम की यूनिट डाला सीमेंट फैक्ट्री की चिमनियों का धुंआ एक आवाज में ठप करा देने वाले मजदूर नेता जनार्दन प्रसाद पाण्डेय अब 75 वर्ष के हो गए हैं लेकिन उनकी युवा सोच की जोश आज के हालात पर सटीक टिप्पणी 2024 की तस्वीर की झलक प्रस्तुत कर रही थी।
सार्वजनिक क्षेत्र में संचालित हो रही डाला सीमेंट फैक्ट्री को 1991 में तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा निजीकरण किए जाने को लेकर किए जा रहे श्रमिकों के आंदोलन के नेतृत्वकर्ता डाला गोलीकांड के भुक्त भोगी व कद्दावर नेता रहे कामरेड जनार्दन प्रसाद पांडेय ने सनातन धर्म व संस्कृति की आध्यात्मिक व्याख्या व उसके दार्शनिक पहलू पर श्रीरामचरितमानस के एक श्लोक से शिव के स्वरूप के आधार पर सनातन और ब्राह्मण की विशद, रोचक व तथ्यात्मक व्याख्या से सोचने पर विवष कर दिया।

पांच विंधानसभा चुनावो में यूपी के चुनाव के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने सवाल पूछा कि सत्ता बदलने से क्या होगा! यदि योगी हारते है तो जीतने वाला कौन है ? इससे आम जनता को क्या हासिल होने वाला है ? क्या लोगों को रोजगार मिलने की संभावना के लिए कोई ब्लू प्रिंट किसी दल के पास है, नही है । सभी दल केवल देने की बात तो करते है लेकिन ये नही बताते की देने के लिए धन का स्रोत क्या होगा!
आगे कहते हैं कि सार्वजनिक उपक्रमों से रोजगार सृजित होता है । आज बीजेपी सब कुछ निजी क्षेत्रों के लिए कर रही है जिससे लोगो को रोजगार मिलने की कोई सम्भावना नही दिखती। अपने जमाने के कद्दावर श्रमिक नेता ने पूछा कि बीजेपी किसानों की आय दुगुनी करने की बात कर रही है लेकिन दोगुनी आय कैसे होगी यह नही बताती । धर्म की गलत व्याख्या करने वाले लोगों को गुमराह करते हैं । सभी राजनीतिक दलों की कार्य पद्धति तकरीबन एक ही तरह की है । यहाँ चुनाव में केवल सत्ता ही स्थानांतरित होती है। इससे लोगो की माली स्थिति में कोई खास परिवर्तन परिलक्षित नही होता। प्रेरित धर द्विवेदी,प्रज्ज्वल धर, अर्जुन पाण्डेय, भार्गव पाण्डेय , राम अनुज धर द्विवेदी , चन्द्र शेखर पाण्डेय आदि के साथ चाय पर चुनावी चर्चा लगभग दो घण्टे चली। इस दौरान राज नीतिक दलों और उनके नेताओं के चाल चलन , नीति और नियति तथा भावी कार्यक्रमो आदि पर ग्रामीणों ने खुलकर विचार व्यक्त किए । देशज स्वल्पाहार के साथ एडवोकेट एवं पत्रकार राम अनुज धर द्विवेदी के घर हुई चर्चा का विषय भी विंधानसभा 2022 का चुनाव ही था। महुआंव पांडेय गांव के मूल निवासी वयोवृद्ध श्रमिक नेता जनार्दन प्रसाद पाण्डेय के ऐतिहासिक आंदोलन
ही ऐसे है कि उन्हें यूं ही भुलाया नही जा सकता !
UP: स्वामी प्रसाद मौर्या का योगी कैबिनेट से इस्तीफा, 2 और मंत्री सपा में हो सकते हैं शामिल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव (UP Assembly Election) से पहले योगी कैबिनेट से स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने इस्तीफा दे दिया है और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ज्वाइन कर ली है. स्वामी प्रसाद मौर्य का कैबिनेट से इस्तीफा देना बीजेपी के लिए बड़ा झटका है. स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी से पहले बहुजन समाज पार्टी में थे. उन्हें बीएसपी सुप्रीमो मायावती का दाहिना हाथ कहा जाता था.
इस्तीफा देने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने क्या कहा?
इस्तीफा देने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि बीजेपी पिछड़ा विरोधी, दलित विरोधी, किसान विरोधी और लघु एवं मध्यम वर्गीय व्यापारियों की विरोधी है. इसी से क्षुब्ध होकर मैंने योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया है.
बीजेपी के दो और मंत्री छोड़ सकते हैं
पार्टीबताया जा रहा है कि बीजेपी के 2 और मंत्री सपा में शामिल हो सकते हैं. इस बीच शाहजहांपुर के तिलहर से विधायक रोशल लाल ने भी बीजेपी से इस्तीफा दे दिया. विधायक रोशन लाल ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य जहां जाएंगे वहीं मैं भी जाऊंगा.
स्वामी प्रसाद मौर्य का ट्वीट
स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस्तीफा देने की जानकारी खुद ट्वीट करके दी. स्वामी प्रसाद मौर्य ने ट्वीट किया, ‘दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों और छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं.’
स्वामी प्रसाद मौर्य ने लेटर में क्या लिखा?
यूपी की गवर्नर को भेजे लेटर में स्वामी प्रसाद मौर्य ने लिखा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में श्रम एवं सेवायोजन व समन्वय मंत्री के रूप में विपरीत परिस्थितियों व विचारधारा में रहकर भी बहुत ही मनोयोग के साथ उत्तरदायित्व का निर्वहन किया है किंतु दलितों, पिछड़ों, किसानों बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे- लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से मैं इस्तीफा देता हूं.
अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य को सपा में किया शामिल
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा ज्वाइन करने पर ट्वीट किया कि सामाजिक न्याय और समता-समानता की लड़ाई लड़ने वाले लोकप्रिय नेता स्वामी प्रसाद मौर्या और उनके साथ आने वाले अन्य सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का सपा में ससम्मान हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन! सामाजिक न्याय का इंकलाब होगा- बाइस में बदलाव होगा.
स्वामी प्रसाद मौर्य के बीजेपी छोड़ने के संभावित कारण बता दें कि काफी दिनों से स्वामी प्रसाद मौर्य पार्टी से नाराज चल रहे थे. वो अपने, अपने बेटे और अपने कई समर्थकों के लिए टिकट मांग रहे थे. खबर है कि स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद कई और विधायक भी बीजेपी का साथ छोड़ सकते हैं.
बीजेपी का टिकटों को लेकर मंथन जान लें कि उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण के लिए उम्मीदवारों के नाम पर आज दिल्ली में बैठक जारी है. बीजेपी मुख्यालय में यूपी कोर ग्रुप के नेताओं की बैठक केंद्रीय नेताओं के साथ चल रही है. इस बैठक में लगभग 140 सीटों पर चर्चा हो रही है.
