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- मुंबई में गूंजी सोनभद्र के फ्लोराइड और प्रदूषण का दर्द, सुभाष घई थिएटर में डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘हर घर शुद्ध जल’ का भव्य प्रमोशन
संतोष दयाल
म्योरपुर/सोनभद्र। जिले के दक्षिणांचल में दशकों से प्रदूषण और फ्लोराइड की विभीषिका झेल रहे ग्रामीणों की मर्मस्पर्शी दुर्दशा तथा केंद्र सरकार की ‘हर घर नल जल’ योजना के माध्यम से लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के भगीरथ प्रयास पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘हर घर शुद्ध जल’ का मंगलवार की देर शाम मुंबई में भव्य प्रमोशन किया गया। जाने-माने दिग्गज फिल्म निर्माता सुभाष घई के ब्लफ थिएटर में आयोजित इस विशेष स्क्रीनिंग के दौरान सोनभद्र की जमीनी हकीकत को देखकर वहां मौजूद सिनेमा जगत के तमाम दिग्गजों की आंखें नम हो गईं।
फिल्म दुनिया के प्रख्यात निर्माताओं, निर्देशकों, कलाकारों और लेखकों ने इस वृत्तचित्र की भूरि-भूरि सराहना की। इसके साथ ही सोनभद्र की इस ज्वलंत और संवेदनशील समस्या को वैश्विक पटल पर लाने वाले फिल्म निर्माता सुरेंद्र सिंह, निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता बंटी श्रीवास्तव और निर्देशक देवेंद्र शिवाजी जाधव के मानवीय प्रयासों की जमकर प्रशंसा की गई।

डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के अवसर पर मौजूद प्रसिद्ध धारावाहिक ‘महाभारत’ में युधिष्ठिर की कालजयी भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान, तीन सौ से अधिक फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुके अभिनेता अली खान, छोटे सचिन, रमेश गोयल, कृष्ण वंशल तथा ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बॉर्डर’ के सहायक निर्देशक योगेश भारद्वाज ने एक सुर में कहा कि यह फिल्म सोनभद्र की वास्तविक और मर्मस्पर्शी जमीनी हकीकत से जुड़ी है, जो सीधे दिल को छूती है। कार्यक्रम के दौरान फिल्म निर्देशक योगेश भारद्वाज ने सोनभद्र के जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता जगत नारायण विश्वकर्मा से लंबी और विस्तृत वार्ता की।

उन्होंने इस दौरान सोनभद्र के इतिहास के पन्नों में दबी मंजरी और लेरिक की अनकही व ऐतिहासिक प्रेम कहानी के साथ-साथ फ्लोराइड के डंक से टूटती हड्डियों और बिखरते रिश्तों के मानवीय दर्द पर एक बड़ी फीचर फिल्म बनाने की आधिकारिक घोषणा की। मुंबई के अन्य कई शीर्ष निर्माता-निर्देशकों ने भी इस त्रासदी को करीब से समझने, नई पटकथा लिखने और इस मुद्दे पर प्रोजेक्ट्स तैयार करने के लिए जल्द ही सोनभद्र आने की इच्छा प्रकट की है।

स्क्रीनिंग के दौरान मौजूद मानवाधिकार कार्यकर्ता बंटी श्रीवास्तव ने फिल्म की यात्रा के बारे में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि सोनभद्र के दर्द को बयां करती यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म अब तक दुनिया के 27 अलग-अलग देशों के फिल्म फेस्टिवल्स में प्रदर्शित की जा चुकी है, जहाँ इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद सराहना मिली है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फिल्म के माध्यम से वैश्विक ध्यान आकर्षित होने के बाद सरकार और प्रशासन इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए धरातल पर और भी अधिक ठोस व प्रभावी कदम उठाएंगे।

इस प्रभावशाली फिल्म में सोनभद्र की नदियों में बहता हुआ जहरीला राखड़ (फ्लाई एश), बलिया नाला में बहता कोयला युक्त काला पानी, रेणुका नदी की बदहाली और फ्लोराइड के कारण असमय दिव्यांग व कुबड़े हो रहे मासूम बच्चों और बुजुर्गों की दैनिक परेशानियों को बेहद संजीदगी के साथ फिल्माया गया है। फिल्म के सफल निर्माण और अंत में इस मानवीय मुद्दे को सहयोग देने के लिए अश्वनी सिंह, प्रभात कुमार और कौशलेंद्र पाण्डेय आदि के प्रति विशेष आभार प्रकट किया गया है।





































