• संघर्षों ने प्रिया के हौसले को फौलादी बनाया।
• उo प्रo सरकार के रानी लक्ष्मीबाई सम्मान से विभूषित हो चुकी है प्रिया
हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)
सोनभद्र। चोपन निवासी पर्वतारोही प्रिया इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में है। क्योंकि वह इस समय विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर चढ़ने की तैयारी कर रही है।
प्रिया के जीवन के तमाम झंझावात मुश्किलो ने उसके फौलादी इरादों के सामने घुटने टेक चुके हैं।

प्रिया की कहानी दूसरों को प्रेरणा देने वाली है।
चोपन की समाजसेवी, पूर्व नगर पंचायत चेयरमैन माधुरी देवी की दत्तक पुत्री प्रिया की प्राथमिक शिक्षा दीक्षा चोपन में ही हुई। उसकी इच्छा एक पर्वतारोही बनने की थी और इसी ख्वाब को दिल में सजोये वह दिल्ली पहुंची। वहां उसको कोई जानने वाला नहीं था ,न ही कोई रिश्तेदार जो उसे शरण देता,जब वह दिल्ली पहुंची तब उसके पास मात्र 20 रुपये बचे थे , इसके अलावा उसके साथ था उसका एवरेस्ट फतह का सपना जो उसके जीने का आधार बन गया था, वह सोनभद्र के मस्तक पर तिलक लगाना चाहती थी।
परिस्थितियां उसकी रोज परीक्षा ले रही थी, पहले वह पेट भरने की व्यवस्था बनाये, यह चुनौती भी उसके सामने विकराल रूप धारण कर चुकी थी । प्रिया ने भी हिम्मत नहीं हारी और धीरे- धीरे सामान्य जीवन में लौटने लगी। कुछ सुधी लोगों के सहयोग से उसने देहरादून में पर्वतारोही प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लिया। कुछ और चोटियों पर भी उसने तिरँगा लहराया, लेकिन उसका ख्वाब अभी भी दूर था। अपने सपने को साकार करने में जुट गई। स्वतंत्र साहनी उसका मनोबल बढाते रहे।

वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसे रानी लक्ष्मीबाई वीरता सम्मान से नवाजते हुए कहा कि-” प्रिया एक नजीर बनेगी उन लड़कियों के लिए जो कुछ करना चाहती हैं। अभावों के बीच कैसे बढ़ा जा सकता है? यह उदाहरण प्रिया ने प्रस्तुत कर दिया है।
प्रिया को कड़ी और महंगी ट्रेनिंग की जरूरत है, तभी वह एवरेस्ट पर तिरँगा फहरा पाएगी । उसे जनपदवासियों के आशीर्वाद जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश शासन का सहयोग की जरूरत है, ताकि वह एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा कर अपने जनपद का नाम रोशन कर सकें।













