पत्रकारों को कोरोना वारियर्स घोषित किया जाए : कृपाशंकर सिंह

• पत्रकारों को कोरोना वारियर्स घोषित किया जाए : कृपाशंकर सिंह।

• महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री ने पत्रकार सुरक्षा कानून की वकालत की।

ब्यूरो,लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित यूपी प्रेस क्लब में बृहस्पतिवार को लखनऊ वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन द्वारा आयोजित ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ आज के परिदृश्य में क्यों अनिवार्य, विषय पर आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह रहे। सर्वप्रथम आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि को यूनियन के उच्च पदाधिकारियों द्वारा माल्यार्पण कर अंगवस्त्रम और बुके भेंट कर सम्मानित किया गया

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे महाराष्ट्र के पूर्व राज्य गृह मंत्री कृपाशंकर सिंह ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारों को कोरोना वारियर्स घोषित किया जाये। किसी भी इमर्जेन्सी की स्थिति में जान की परवाह किये बिना चौथे स्तम्भ के ये पत्रकार हर जगह सबसे पहले पहुंचते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान सम्भव है, लेकिन शर्त यह है कि गुटों में बंटकर काम करने की जगह पत्रकारों की एक समन्वय समिति बनाकर अपनी बात को सरकार के सामने उठायें और गुट बनाना मनुष्य का स्वभाव है, लेकिन जब बात बड़ी हो तो एक मंच पर आकर मांग उठायें ताकि समस्या का समाधान निश्चित रूप से निकल सके। उन्होंने अपने संबोधन में आगे बढ़ते हुए कहा कि मान्यता और गैरमान्यता पत्रकारिता का मानक नहीं है। पत्रकार की मान्यता उसकी लेखनी के जोर से ही मानी जाती है। उसी से पत्रकार को लोक और समाज मे प्रतिष्ठा और नैतिक मान्यता प्राप्त होती है। संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की असली आवाज है कि- मुझे सूली पर चढ़ाने की जरूरत क्या है, कलम छीन लो मर जाऊंगा, लेकिन आज विभिन्न कारणों से इसमे काफी फर्क आया है। साथ ही जो फर्क पत्रकारिता के इस सिद्धांत में आया है उतना ही फर्क पत्रकारिता के सम्मान और महत्व में भी आया है। ऐसे में यदि पत्रकारिता जैसे पेशे को लोभ और लालच का जरिया बनाया जाएगा तो फिर पत्रकारिता का अहित ही होना है।

गोष्ठी में पत्रकारों को संबोधित करते महाराष्ट्र के पूर्व राज्य गृह मंत्री कृपाशंकर सिंह

वही यूपी वर्किग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून की आज बहुत बड़ी जरूरत है। इस कानून में उन सभी विषयों पर प्राविधान बनाये जाने चाहिए जो पत्रकारिता की शुचिता और पत्रकारों की जानमाल की सुरक्षा के साथ उसके रोजगार को भी संरक्षण प्रदान कर सकें।
पत्रकार गोविन्द पंत राजू ने कहा कि आज की पत्रकारिता में संवाददाताओं के लिए खतरा बढ़ा है। इसका मुख्य कारण सामाजिक व्यवस्था में आया बदलाव है। अब माफिया-भ्रष्टाचारी, पत्रकार को अपना व्यक्तिगत दुश्मन मान लेते हैं। इस कारण से भी पत्रकार सुरक्षा कानून और पत्रकारिता की परिभाषा को पुनः परिभाषित किये जाने की जरूरत है। उन्होंने पत्रकारों की मान्यता के नियमो में भी बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया। इसलिए पत्रकार सुरक्षा कानून में यह भी तय किये जाने की जरूरत है कि पत्रकारिता सरकारी मान्यता की मोहताज नहीं है।
पत्रकार नवलकान्त सिन्हा ने कहा कि 1990 से अब तक ही लगभग डेढ़ हजार पत्रकारों की हत्या हुई है। जिनमें से अनेक मामलों में कुछ भी नहीं हो सका। इस प्रकार से पत्रकारिता में आज तमाम तरह की चुनौतियां है। पत्रकारों को सुरक्षा देने वाले एक कानून की बड़ी आवश्यकता है।

वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद अपना विचार व्यक्त करते हुए ने कहा कि कभी किसी शायर ने कहा था कि
जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो-
परन्तु आज सच्ची खबर लिखे जाने पर तलवारों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में चीजों को पूरे तौर पर समझे जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक बड़ी आवश्यकता पत्रकारों को अपने में एक और अनुशासित होने की भी है।
वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह ने कहा अपने वक्तव्य में कहा कि आज बात जब पत्रकार सुरक्षा कानून की हो रही है, तो यह कहना भी जरूरी होगा कि यह कानून बने परन्तु सुरक्षा सिर्फ पत्रकारों-खबर लिखने वालों की होनी चाहिए। सम्मान पाने के लिए, सम्मान देना होगा। हमें पत्रकारिता की सुरक्षा के साथ-साथ शुचिता की भी निहायत जरूरत है।
वही लखनऊ वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष शिवशरण सिंह ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कहा कि वर्तमान सरकार की इस बात के लिए तारीफ की जा सकती है कि उसने कोरोना काल मे दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को मान्यता-ग़ैरमान्यता का भेदभाव किये बिना आर्थिक मदद की है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि 60 वर्ष से ऊपर के पत्रकारों को पेंशन दी जाये।


भाजपा यूपी के प्रवक्ता ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि इस गोष्ठी में तीन मुख्य बातें निकल कर आई हैं। पत्रकारो में शुचिता की बात, उनकी सुरक्षा की आवश्यकता और उनके रोजगार की सुरक्षा। यहां पर मैने एक बात समझी है कि आज पत्रकारो को जन विश्वसनीयता एवं एकजुटता की बड़ी आवश्यकता है। गुटों में भले बंटे रहें परन्तु आम पत्रकार के हित में पत्रकारों को एक साथ रहना जरूरी ही नहीं अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त नवल कान्त सिन्हा, परवेज अहमद, विश्व देव राव सहित आदि ने अपने-अपने विचार रखे। गोष्ठी का सफल संचालन प्रेमकान्त तिवारी ने किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे महाराष्ट्र के पूर्व राज्य गृह मंत्री कृपाशंकर सिंह को पत्रकारो द्वारा पत्रकार सुरक्षा कानून बनवाने लिए प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को सम्बोधित दो ज्ञापन भी सौंपे गये।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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