साटिका रोग की उत्पत्ति- साइटिका नसों में होने वाला ऐसा दर्द है जो कमर के निचले हिस्से से शुरू होकर पैरों के नीचे तक जाता है। यह कोई रोग नहीं बल्कि सैक्रोलाइटिस, डिस्कप्रोलेप्स, स्पाइनल इंफेक्शन आदि रोगों का लक्षण हो सकता है।
कारण- अधिक मेहनत करने या भारी वजन उठाने से यह समस्या होती है। खराब जीवनशैली व खानपान, उठने-बैठने के गलत मुद्रा से भी दर्द हो सकता है।
रोग के लक्षण-
1- दर्द मध्यम तथा अत्यधिक तलवार के काटने जैसा भी होता है।
2- दर्द एक टांग और टांग के बाहरी तरफ होता है
3- प्रतिदिन के कार्य जैसे उठना,बैठना, चलना, सोना इत्यादि।
4- चलने में कठिनाई तेज दर्द, छींकते, खांसते समय श्वास लेने में दर्द, पैर भारी वह सुन प्रतीत होते हैं
योग चिकित्सा-
इसमें आप भुजंगासन, अर्ध शलभासन, सर पासन, सरल धनुरासन,वज्रासन, उष्ट्रासन, वक्रासन, त्रिकोणासन,गरुड़ासन, गोमुखासन।
प्राणायाम कौन-कौन सा करें –
अनुलोम विलोम, सूर्यभेदन और भ्रष्ट इका प्राणायाम ध्यान में अफजा जब ओम का उच्चारण और शर्ट क्रिया कपालभाति,अग्निसार बस्ती,शंख प्रक्षालन इत्यादि।
विशेष सावधानी बरतने वाली बात-
इसमें कुर्सी पर बैठकर अत्यधिक कार्य न करें आगे झुकना भी वर्जित है।
एक्यूप्रेशर द्वारा हल-
तलवे में जहां से एड़ी का भाग प्रारंभ होता है वहां दबाव डालें एड़ियों के मध्य भाग अंगूठे से या किसी उपकरण से दबाव देना बहुत ही लाभकारी होता है अंगूठे के समीप वाली दो अंगुलियों पर दबाव दें हथेलियों रखने के बिल्कुल नीचे कुछ सेकेंड तक दबाते रहे।

(जिला महामंत्री एवम् सोशल मीडिया प्रभारी पतंजलि योगपीठ सोनभद्र युवा भारत)
साइटिका रोग में आहार कौन-कौन सा लेना चाहिए-
सात सब्जियों का रस, खिचड़ी का सेवन करना चाहिए और रोग में सुधार आने पर चावल दाल रोटी का सेवन करना चाहिए तथा कब्ज वर्धक भोजन लेना चाहिए।
और मांस, पनीर, तेल तथा प्रोटीन वर्धक जैसे अंडा, दूध, घी इत्यादि का सेवन नही करना चाहिए।
Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
