सोनभद्र। कई संगठनों के दायित्व का निर्वहन कर रहे जनपद के वरिष्ठ अधिवक्ता एवम पत्रकार संयुक्त अधिवक्ता महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शरण मिश्र को मीडिया ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने उत्तर प्रदेश का प्रदेश संयोजक मनोनीत किया है।
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मीडिया ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा प्रदेश संयोजक नियुक्त किए जाने पर श्री मिश्र को जनपद सोनभद्र सहित प्रदेश के अन्य जनपदों के अधिवक्ताओं एवम पत्रकारों में अत्यधिक हर्ष व्याप्त है। जनपद सोनभद्र के अलावा प्रदेश के अधिकांश जनपदों से श्री मिश्र को प्रदेश संयोजक नियुक्त किए जाने पर पत्रकारों एवम अधिवक्ताओं ने बधाई एवम शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए उनके मंगलमय भविष्य की कामना की है।
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विदित हो कि श्री मिश्र ने वकालत पेशे के साथ साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक समस्याओं एवम पत्रकारों के हितों के लिए लगातार अपनी आवाज बुलंद किया है। श्री मिश्र ने आमजन की समस्या से लेकर अधिवक्ताओं और पत्रकारों की समस्याओं पर निर्भीकता से अपनी लेखनी चलाकर उचाधिकारियो का ध्यान आकर्षित करने का काम किया है ।
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श्री मिश्र को बधाई देने वालो में मुख्य रूप से मीडिया फोरम।ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी, पत्रकार भोला मिश्रा, पत्रकार किशन पांडेय, पत्रकार सर्वेश श्रीवास्तव सोनभद्र के वरिष्ठ कर अधिवक्ता संयुक्त अधिवक्ता महासंघ के प्रदेश संगठन सचिव उमापति पांडेय दी सोनभद्र टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय, दी सोनभद्र टैक्स बार एसोसिएशन के महामंत्री फैजान अंसारी,
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अधिवक्ता राकेश श्रीवास्तव, अधिवक्ता नवीन पांडेय, अधिवक्ता कृष्ण कांत तिवारी, अधिवक्ता आशुतोष कुमार पाठक,अधिवक्ता धीरज कुमार पांडेय, अधिवक्ता अनिल कुमार पांडेय, अधिवक्ता दिनेश कुमार धर, अधिवक्ता अखिलेश दत्त मिश्र, अधिवक्ता प्रदीप धर दिवेदी, अधिवक्ता जनार्दन पांडेय, अधिवक्ता महेश कुमार पांडेय, अधिवक्ता जे एन चौबे सहित सैकड़ों अधिवक्ताओं और पत्रकारों ने श्री मिश्र को अपनी शुभकामनाएं दी है। श्री मिश्र ने पत्रकार एवम अधिवक्ता साथियों द्वारा दी गई शुभकामनाओं के लिए सभी का हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त किया है
समाज में महिला श्रम के प्रति दृष्टिकोण – डॉ कंचन जैन
महिलाओं का श्रम सदियों से समाज का एक अभिन्न अंग रहा है। हालांकि, उनके काम के प्रति समाज का दृष्टिकोण समय के साथ लगातार बदलता रहा है। विभिन्न कालखंडों में, महिलाओं को उनके कार्य के लिए अलग-अलग तरह की मान्यता और सम्मान मिला है। यह अध्याय विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों में महिला श्रम के प्रति समाज के बदलते हुए दृष्टिकोण का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
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महिला श्रम का इतिहास एक लंबा और जटिल रहा है। समय के साथ, महिलाओं के काम के प्रति समाज का दृष्टिकोण बदलता रहा है। आज, महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। हालांकि, अभी भी कई चुनौतियाँ हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।
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प्राचीन काल कृषि और घरेलू कार्य: प्राचीन काल में, महिलाएं मुख्य रूप से कृषि और घरेलू कार्यों में लिप्त थीं। उन्हें परिवार की देखभाल करने वाली और खेतों में काम करने वाली महिला के रूप में देखा जाता था। धार्मिक भूमिका: कुछ सभ्यताओं में, महिलाओं को धार्मिक अनुष्ठानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली देवियों के रूप में पूजा जाता था।
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समाजिक स्थिति: हालांकि, समाज में महिलाओं की स्थिति पुरुषों की तुलना में कम थी। उन्हें पुरुषों की तुलना में कम अधिकार और स्वतंत्रता प्राप्त थी।
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मध्यकाल शिल्प और व्यापार: मध्यकाल में, महिलाएं शिल्प और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी काम करने लगीं। कुछ महिलाएं अपने पति के साथ व्यापार करती थीं, जबकि कुछ ने स्वतंत्र रूप से व्यापार शुरू किया। समाजिक प्रतिबंध: फिर भी, समाज में महिलाओं के लिए कई प्रतिबंध थे। उन्हें सार्वजनिक रूप से काम करने और संपत्ति रखने के अधिकार सीमित थे। धार्मिक प्रभाव: धर्म ने भी महिलाओं के काम के प्रति दृष्टिकोण को प्रभावित किया। कुछ धर्मों ने महिलाओं को घर के काम तक सीमित रखा, जबकि अन्य ने उन्हें कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में काम करने की अनुमति दी।
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आधुनिक काल औद्योगिक क्रांति: औद्योगिक क्रांति ने महिलाओं के काम करने के तरीके को बदल दिया। कई महिलाएं कारखानों में काम करने लगीं। महिला अधिकार आंदोलन: 19वीं और 20वीं शताब्दी में, महिला अधिकार आंदोलन ने महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया। विभिन्न क्षेत्रों में प्रवेश: महिलाएं अब विभिन्न क्षेत्रों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान और राजनीति में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं।
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भारत में महिला श्रम भारत में, महिलाओं ने सदियों से कृषि, हस्तशिल्प और घरेलू कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वतंत्रता के बाद, भारत सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई नीतियां बनाई हैं। हालाँकि, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति शहरी क्षेत्रों की तुलना में कम विकसित है।
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समकालीन परिदृश्य और चुनौतियाँ आज, महिलाएं दुनिया भर में विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं। हालांकि, उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि लैंगिक भेदभाव, कम वेतन और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न।
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की जयंती के पूर्व संध्या पर अधिवक्ता दिवस मनाया गया
सोनभद्र। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन सोनभद्र द्वारा कचहरी परिसर में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की मूर्ति पर माला अर्पण कर जयंती के अवसर पर डी बी ए के महामंत्री मोहम्मद सलीम कुरैशी एडवोकेट की अध्यक्षता में अधिवक्ता दिवस मनाया गया
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इस अवसर पर डी बी ए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ अतुल प्रताप पटेल एड ने कहा कि डॉ० राजेन्द्र प्रसाद स्वयं एक विद्वान अधिवक्ता थे। वह भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था।
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वे स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। उन्होंने 12 वर्षों तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने के पश्चात वर्ष 1962 में अपने अवकाश की घोषणा की। सम्पूर्ण देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 1962 में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
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पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष पवन कुमार सिंह एडवोकेट ने कहा कि अधिवक्ता दिवस पर एसोसिएशन की तरफ से मांग किया की 18 से 80 साल के सभी अधिवक्ताओं का सामूहिक बीमा कराया जाएगा। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि 10 लाख करने व अधिवक्ताओं का पेंशन देने की मांग भी उठाई गई।
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इस अवसर पर राजेश यादव एड, वी पी सिंह एड, रियाज खान एड, प्रबोध कुमार सिंह एड, सचिन पटेल एड, अभिषेक कुमार मौर्य एड, सत्यम शुक्ला एड, हरि प्रसाद एवं सूरज यादव आदि लोग उपस्थित थे !
ऑल इंडिया स्वच्छ भारत कला प्रतियोगिता में अचिंत्य को ए ग्रेड मिला
सेंट जोसेफ कालेज प्रयागराज में छठवीं का छात्र है अचिंत्य
सोनभद्र। सदर तहसील के बरकरा गांव निवासी पत्रकार प्रदीप चौबे के बेटे अचिंत्य को ऑल इंडिया स्वच्छ भारत कला प्रतियोगिता में ए ग्रेड पाकर जिले का नाम रोशन किया है। उप राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए प्रशस्ति प्रमाण पत्र को सेंट जोसेफ कालेज प्रयागराज परिवार की ओर से अचिंत्य को मुहैया कराया गया है।
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सेंट जोसेफ कालेज प्रयागराज में कक्षा छठवीं के छात्र अचिंत्य का कहना है कि लगन से पढ़ाई कर आईएएस बनकर देश की सेवा करना मेरा उद्देश्य है।
पॉक्सो एक्ट के दोषी कुबेर गोड़ को हुई 3 वर्ष की कैद
10 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी
अर्थदंड की धनराशि में से 8 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी
साढ़े सात वर्ष पूर्व 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुए छेड़छाड़ का मामला
सोनभद्र। साढ़े सात वर्ष पूर्व 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुए छेड़छाड़ के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट सोनभद्र अमित वीर सिंह की अदालत ने शनिवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी कुबेर गोड़ को 3 वर्ष की कैद एवं 10 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 8 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता ने 19 अगस्त 2017 को चोपन थाने में दी तहरीर में अवगत कराया था कि 18 अगस्त 2017 को 6:15 बजे शाम को स्कूल से पढ़कर अपने घर वापस लौट रही थी तभी घर से 500 मीटर दूर रास्ते में चोपन थाना क्षेत्र के कोटा टोला सनायडण्डी गांव निवासी कुबेर गोड़ पुत्र शोभनाथ मिला और उसे गाली देते हुए उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा।
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शोरगुल की आवाज सुनकर कई लोग आ गए तो वह भाग गया। इस तहरीर पर पुलिस ने 19 अगस्त 2017 को एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया। विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर कोर्ट में छेड़छाड़ और पाक्सो एक्ट में चार्जशीट दाखिल किया था।
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मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, 7 गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी कुबेर गोड़ को 3 वर्ष का कारावास एवं 10 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
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वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 8 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्य प्रकाश त्रिपाठी एवं नीरज कुमार सिंह ने बहस की।
ओबरा में आयोजित राष्ट्रीयस्तर की योगासन प्रतियोगिता में बोले उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री
निरोगी काया बनाएं रखनें का सशक्त माध्यम है योगासन: जेल अधीक्षक
धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान ने रचा इतिहास सोनभद्र में पहली बार कराई हजारों की संख्या में राष्ट्रीय स्तर की योगासन प्रतियोगिता – योग गुरु आचार्य अजय कुमार पाठक
सोनभद्र ओबरा में आयोजित हुई उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी योग प्रतियोगिता
योग गुरु आचार्य अजय कुमार पाठक जी के नेतृत्व में संस्थान कर रहा है राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान
विनय कुमार श्रीवास्तव
सोनभद्र। योग का डंका पूरी दुनियां में बज रहा है, देश ही नहीं विदेशों में भी योग के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ा है। योग आज एक जीवन-शैली बन चुकी है, लाखों लाख लोगों के जीवन में योग ने उजाला लाने का काम किया है। उक्त बातें शनिवार को ओबरा विधायक एवं सूबे के समाज कल्याण मंत्री संजीव गौड़ ने बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान के राष्ट्रीय स्तर की भव्य प्रतियोगिता अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए कही है।
ओबरा नगर के क्लब नंबर 4, में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए समाज कल्याण मंत्री संजीव गौड़ ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योग की महत्ता को समझते हुए इसे दुनियां भर में पहुंचाया है। वह देश ही नहीं विश्वमंच पर योग की सराहना करने से नहीं चूकते हैं। उत्तर प्रदेश राज्यमंत्री समाज कल्याण संजीव कुमार गौड़ ने कहा कि योग भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक हिस्सा है।
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ये प्रतियोगिताएं भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद करती हैं। नियमित योगासन करने से शारीरिक फिटनेस में सुधार होता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेल अधीक्षक सोनभद्र सौरभ श्रीवास्तव ने भी योग की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि आदिवासी पिछड़े बाहुल्य सोनभद्र की पहाड़ियों में इस प्रकार का भव्य एवं विशाल आयोजन निश्चित ही जनहितकारी है. कहा कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने से आत्मविश्वास बढ़ता है। योगासन खेल प्रतियोगिता में जय प्रकाश नारायण आश्रम पद्धति विद्यालय रॉबर्ट्सगंज सोनभद्र ने प्रथम स्थान और सेठ एम आर जयपुरिया स्कूल रॉबर्ट्सगंज सोनभद्र ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया |
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जल पुरुष रमेश सिंह यादव ने कहा कि धन्वंतरि पतंजलि योग संस्थान कार्यक्रम के माध्यम से यहां की प्रतिभाशाली प्रतिभागियों को स्वयं की ख़र्च से राष्ट्रीय स्तर पर खेलना का अवसर देती है। विशिष्ठ अतिथि रमेश सिंह ने कहा कि योग तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों उत्तर प्रदेश, मुंबई, दिल्ली, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, हरियाणा से हजारों योग प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से आए योग प्रतिभागियों ने इस महोत्सव को यादगार बना दिया। धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान की प्रदेश महिला प्रभारी लाजवंती कुमारी, गरिमा कुमारी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, प्रतिमा मौर्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, अदिति मिश्रा प्रदेश प्रभारी, पल्लवी फटांगरे प्रभारी मुंबई,
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हरिकेश यादव राष्ट्रीय का सदस्य, सिद्धांत मिश्रा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, विभिन्न राज्यों के योगी देश के विभिन्न राज्यों से आए योगियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान के मुख्य संरक्षक रमेश सिंह ने बताया कि यह उत्तर प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी योग प्रतियोगिता है संस्थान के सभी सदस्यों के लिए गर्व का क्षण है।
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धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान के संस्थापक योग गुरु आचार्य अजय कुमार पाठक के नेतृत्व में यह संस्थान पिछले 5 वर्षों से योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति के साथ साथ अन्य सामाजिक कार्य भी किया जाता है। साथ ही संस्थान समाज सेवा के विभिन्न कार्यों में भी सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। इस महोत्सव के माध्यम से संस्थान ने सोनभद्र के आदिवासी और अति पिछड़े क्षेत्रों में योग के प्रति जागरूकता फैलाई है।
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इस अवसर पर योग गुरु आचार्य अजय कुमार पाठक ने कहा कि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान द्वारा आयोजित योगासन खेल प्रतियोगिता, योग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह प्रतियोगिता न केवल योगासन में प्रतिभाशाली लोगों को प्रदर्शित करने का एक मंच प्रदान करती है, बल्कि योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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साथ ही साथ युवाओं को योग की ओर आकर्षित करती हैं। योगासन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद है। ऐसी प्रतियोगिताएं लोगों को योग के स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूक करती हैं। योगासन में प्रतिभाशाली लोगों को एक मंच प्रदान करके ये प्रतियोगिताएं उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
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बताते चलें योगासन प्रतियोगिताओं में विभिन्न प्रकार के योगासन किए किये जाते है। प्रतिभागियों का मूल्यांकन उनकी मुद्रा, लचीलापन, शक्ति और संतुलन के आधार पर किया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद सोनी ने कहा कि धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान की भूमिका धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान योग के क्षेत्र में एक प्रसिद्ध संस्थान है।
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यह संस्थान योग शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और योग को लोकप्रिय बनाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित करता है। योगासन खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करके, यह संस्थान योग के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अगर आप योगासन में रुचि रखते हैं तो धनवंतरी पतंजलि योग संस्थान की वेबसाइट पर जाकर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस मौके पर हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे हैं। अंत में सभी के प्रति आभार प्रकट योग गुरु आचार्य अजय पाठक ने किया।
लिंग आधारित हिंसा के विरुद्ध जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन
बेटा बेटी एक समान,बेटी है तो कल है – दीपिका सिंह
सोनभद्र। मिशन शक्ति फेज 5.0 के अतंर्गत जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के निर्देश के क्रम में जिला प्रोबेशन अधिकारी पुनीत टंडन के नेतृत्व में वन स्टाफ सेंटर से केंद्र प्रशासक दीपिका सिंह, जिला बाल संरक्षण इकाई संरक्षण अधिकारी रोमी पाठक एवं महिला थाना प्रभारी सविता सरोज के द्वारा विंध्य कन्या पीजी कॉलेज उरमौरा में लिंग आधारित हिंसा के विरुद्ध जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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जिसमें सभी को महिला हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाने, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के लिए जागरूक किया। केन्द्र प्रशासक दीपिका सिंह द्वारा कहा गया कि महिला किसी भी फील्ड में पुरुषों से कम नहीं हैं, बेटा बेटी एक समान, बेटी है तो कल है का नारा लगवाया गया।
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की जानकारी प्रदान की गई। संरक्षण अधिकारी रोमी पाठक द्वारा मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला जिसमे योजना की बढ़ाई गई धनराशि 25000 के बारे मे एवं स्पॉन्सरशिप योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना, बाल सेवा योजना के बारे में विस्तार से बताया गया,
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साथ ही वन स्टाप सेंटर तथा चाइल्ड हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली एवं वहां प्राप्त होने वाली सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। सरकार द्वारा संचालित टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर की जानकारी दिया गया।
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मौके पर पर जिला बाल संरक्षण इकाई सें ओ आर डब्ल्यू शेषमणि दुबे, विंध्य कन्या पीजी कॉलेज से प्रधानाचार्या अंजलि सिंह एवं अन्य अध्यापकगण के साथ बालिकाएं रही उपस्थित।
स्ट्रीट चिल्ड्रेन के चिन्हांकन व पुनर्वासन हेतु चलाया गया विशेष अभियान- रामजी यादव
सोनभद्र। जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह के नेतृत्व में जनपद में मानव तस्करी, बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम हेतु चलाये जा रहे अभियान के क्रम में थाना मानव तस्करी रोधी इकाई, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड हेल्पलाइन के संयुक्त टीम द्वारा थाना ओबरा अन्तर्गत कस्बा,
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सहित विभिन्न स्थानो पर मानव तस्करी एवं बाल भिक्षावृत्ति,रोकथाम हेतु विशेष अभियान चलाया गया जिसमे एक नाबालिक बालक उम्र आठ वर्ष को बाल भिक्षावृत्ति से मुक्त कराते हुए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करते हुए समिति के आदेश से संस्था मे आवासित कराया गया।
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रामजी यादव द्वारा बताया गया कि उक्त अभियान के साथ ही स्ट्रीट चिल्ड्रेन के चिन्हांकन व पुनर्वासन हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है और सड़क / फुटपाथ पर रहने जैसी परिस्थितियों में रहने वाले ऐसे सभी बच्चों की वास्तविक संख्या का डाटा को बाल स्वराज पोर्टल पर अपडेट किया जा रहा है।
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ओ आर डब्ल्यू शेषमणि दुबे द्वारा बताया गया कि बच्चों के सुरक्षा एवं संरक्षण तथा विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में चाईल्ड हेल्पलाइन टोल फ्री नम्बर (1098) पर काल करके जानकारी लिया जा सकता हैं। टीम मे जिला बाल संरक्षण इकाई से ओ डब्ल्यू शेषमणि दुबे, चाइल्ड हेल्पलाइन यूनिट से केसवर्कर रविन्द्र कुमार सिंह थाना मानव तस्करी रोधी इकाई प्रभारी निरीक्षक रामजी यादव, आरक्षी पंकज कुमार उपस्थित रहे।
सोनभद्र। जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह व पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने शनिवार को जिला कारागार का औचक निरीक्षण किये, इस दौरान जिलाधिकारी ने जिला कारागार के कैदियों से मिलकर उनसे वार्ता किये और उनको उपलब्ध करायी जा रही सुविधाओं के बारे में बारी-बारी से जानकारी प्राप्त की।
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इस दौरान उन्होंने कैदियों से सरलता व सुगमता पूर्वक वार्ता कर कारागार द्वारा उपलब्ध करायी जा रही भोजन, नास्ता, स्वास्थ्य चिकित्सा, पीने के पानी आदि की गहनता पूर्वक जायजा लिया।
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इस दौरान जिला कारागार के हातों के बैरकों में बारी-बारी से स्वयं जाकर कैदियों की स्थिति को देखा और वार्ता कर उनके परिवारों को मुलाकात के समय किसी प्रकार की समस्या तो नही होती, के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की, जिस पर कैदियों द्वारा बताया गया कि यहां इस प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है।
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इसी प्रकार से कैदियों को दिये जाने वाले भोजन के किचन का निरीक्षण किया गया, जहां कैदियों हेतु बनाये जा रहे रोटी, सब्जी चावल व दाल के गुणवत्ता को देखा गया और निर्धारित रोस्टर की जानकारी प्राप्त की गयी।
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जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक सौरभ श्रीवास्तव, जेलर जे०पी० दूबे, अपर जिला सूचना अधिकारी विनय कुमार सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहें।
डिजिटल और ऑटोमेटिक मशीनों से होगा वाहनों का टेस्टिंग
सोनभद्र में वाहन फिटनेस सेंटर का निर्माण कार्य शुरू, आठ तरह के टेस्ट से गुजरेंगे वाहन
सोनभद्र। जनपद में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर एक वाहन फिटनेस सेंटर बनकर तैयार हो रहा है। जल्द ही वाहनों के फिटनेस टेस्ट के लिए अब डिजिटल और ऑटो मेटिक मशीनों की टेस्टिंग से गुजरना पड़ेगा। फिटनेस से जुड़े सारे काम अब ऑटो मेटिक तरीके से होंगे।
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इसके लिए एआरटीओ कार्यालय से करीब 15 किमी की दूरी पर वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर पसही में ऑटोमेटिक व्हीकल फिटनेस सेंटर तैयार हो रहा है। इसकी इमारत तैयार हो गई है। हालांकि अभी इसमें कई तरह के तकनीकी और इलेक्टि्रक काम होने हैं। जिसके बाद इसका संचालन दिसम्बर तक कर दिया जाएगा।
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परिवहन विभाग के एआरटीओ प्रशासन धनवीर यादव ने बताया कि दिसंबर माह से फिटनेस सेंटर से ही वाहनों का फिटनेस होगा। यह स्वचालित उपकरणों के माध्यम से वाहनों का फिटनेस परीक्षण की प्रक्रिया होगा। डिजिटल प्रक्रिया से वाहनों की जांच होगी। प्रमाण पत्र ऑनलाइन होगा।
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ऑटोमेटिक व्हीकल फिटनेस सेंटर में जिले के सभी वाहनों की जाँच डिजिटल प्रक्रिया से की जाएगी।शासन की गाइड लाइन के अनुसार टेस्टिंग का काम होगा।मशीनों के जरिए आठ प्रकार की जांचें हो सकेंगी। मशीनों के जरिये जांच होने पर काम में पारदर्शिता तो आएगी साथ ही वाहन खराबी दूर की जा सकेगी।
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फिटनेस सेंटर में टायरों की जांच, लाइटिंग की व्यवस्था, पहियों की गति, इंजन की आवाज, सीटों की जांच, प्रेशर हार्न, हेड लाइट से लेकर इंडिकेटर, बैक लाइट समेत अन्य कई प्रकार की जांचें हो सकेंगी।
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इसके आधार पर प्रणाम पत्र जारी किए जाएंगे। दिसंबर से जिले में भी वाहन स्वामियों को ये सुविधा मिल सकेगी। एआरटीओ ने बताया कि परिवहन विभाग में अभी तक वाहनों की मैनुअल जांच होती थी। इससे विभाग पर आरोप लगते थे। वाहनों में तकनीकी दिक्कतों के कारण दुर्घटनाएं भी हो रही थी
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दोबारा जांच कराने के लिए जमा करनी होगी फीस
सोनभद्र। दिशा निर्देशों में कहा गया है कि यदि कोई वाहन परीक्षण में विफल होता है, तो पंजीकृत मालिक या अधिकृत व्यक्ति पुन:परीक्षण के लिए उचित शुल्क जमा कराकर वाहन की फिर से जांच का अनुरोध कर सकता है. यदि इसके बाद भी वाहन फिटनेस जांच में फेल होता है तो संबंधित वाहन के जीवन चक्र (ईएलवी) को समाप्त घोषित कर दिया जाएगा।