बिना अनुमति खेतों में टावर लगाए जाने से नाराज किसानों ने किया विरोध प्रदर्शन
सोनभद्र। जिले में किसानों की जमीन पर बिना पूर्व अनुमति और उचित मुआवजा दिए टावर लगाए जाने के खिलाफ गुरुवार को भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।
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किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला अध्यक्ष राम बहादुर सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
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जिला अध्यक्ष राम बहादुर सिंह ने बताया कि एम प्लस तुमभद्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा किसानों की खेती योग्य भूमि में जबरन पावर गेट का टावर लगाया जा रहा है। यह कार्य न तो किसानों की सहमति से किया गया है और न ही कोई पूर्व सूचना या समुचित मुआवजा दिया गया है।
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उल्टा, कंपनी के कर्मचारी किसानों को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं, जिससे किसान वर्ग में गहरा रोष व्याप्त है।
उन्होंने कहा कि नियमानुसार किसानों को प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी देना, उनकी सहमति लेना और वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, लेकिन कंपनी ने इन सभी नियमों की अनदेखी की है। इससे पहले भी 13 मई को प्रशासन को ज्ञापन देकर अवगत कराया गया था, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे किसानों का धैर्य टूटता नजर आ रहा है।
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विरोध प्रदर्शन में प्रभुपाल मौर्य, चंद्रप्रकाश सिंह, सदानंद मौर्य, अमित कुमार सिंह, गुड्डू, बृजेश, जयप्रकाश, अनीश, राजेश, मिथिलेश सहित कई किसान शामिल रहे, जिन्होंने एक स्वर में कंपनी की मनमानी पर कड़ा ऐतराज जताया और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई।
चकबन्दी प्रक्रिया को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीण, धरना स्थल पर पहुंच अधिकारियो ने की वार्ता
घोरावल, सोनभद्र। जनपद में घोरावल तहसील के ग्राम भैसवार में चकबन्दी प्रक्रिया का विरोध प्रदर्शन के परिक्षेप में उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी व एसओसी चकबन्दी ने विरोध प्रदर्शन करने वालो से सीधा संवाद किया। इस दौरान अधिकारियों ने लोगो को आश्वस्त किया कि चकबन्दी प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण किया जाना शासन की शीर्ष प्राथमिकता है। चकबन्दी प्रक्रिया में यदि किसी प्रकार की समस्या हो तो सक्षम स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते है।
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ग्राम भैसवार में चकबन्दी प्रक्रिया के सम्बन्ध किये जा रहे विरोध प्रदर्शन के परिपेक्ष में उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी एवं चकबन्दी विभाग के अधिकारी द्वारा धरना स्थल पर सम्बन्धित पक्षों से मुलाकात कर जानकारी प्राप्त कर, उन्हें चकबन्दी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गयी।
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इस दौरान उप जिलाधिकारी ने कहा कि न्यायालय अथवा शासन से चकबन्दी प्रक्रिया रोके जाने का कोई भी आदेश नहीं और जहाँ तक अनियमितता का प्रश्न है, यदि कोई भी व्यक्ति इस सम्बन्ध में अपनी शिकायत करना चाहता है तो सक्षम स्तर पर जिलाधिकारी डीडीसी चकबन्दी बन्दोबस्त अधिकारी एवं चकबन्दी विभाग के अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते है।
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चकबन्दी विभाग द्वारा ग्राम भैसवार में सन 1986 से चकबन्दी प्रक्रिया प्रारम्भ है। चकबन्दी प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किये जाने का आदेश चकबन्दी आयुक्त द्वारा दिया गया। इस दौरान ग्राम भैंसवार परगना बड़हर, तहसील घोरावल स्थित बछनार बीर बाबा नामक स्थल पर चकबन्दी प्रकिया से असंतुष्ट धरना पर बैठे ग्राम के कृषकों से वार्ता के लिए उपस्थित हुये।
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भारतीय किसान (लोक शक्ति) के जिलाध्यक्ष बिरजू कुशवाहा के नेतृत्व में ग्राम के कृषक धरने पर हैं। धरना में शामिल कृषको की मांग यह है कि जिलाधिकारी द्वारा 31 मार्च 1992 को चकबन्दी प्रक्रिया निरस्त कर सारे नियमो में चकबन्दी प्रक्रिया शुरु किये जाने के आदेश की अवहेलना किया गया चकबन्दी में बटा तरमीम एवं जोत कोड़, कब्जा के आधार पर भूचित्र अंकित नही किया गया तथा यह भी मांग है कि 450 बीघा फर्जी खतौनी के सम्बन्ध में चकबन्दी अधिकारी संजीव राय के अनिमियत आदेश को निरस्त किया जाय।
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जिलाध्यक्ष बिरजू कुशवाहा व संजय कुमार यादव पूर्व प्रधान को विस्तार से सुना गया। उपजिलाधिकारी द्वारा ग्राम के कृषको की समस्याओं को सुनने के बाद विचारोपरान्त कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में पारित आदेश से असंतुष्ट कृषकगण सक्षम न्यायालय मे वाद योजित कर अनुतोष प्राप्त कर सकते हैं।
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इससें पूर्व दिनांक 05 जुलाई को तहसील में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष रूप से ग्राम भैंसवार के कृषको को सुना गया था और कृषको को यह अवगत कराया गया था कि समस्याओं के समाधान हेतु चकबन्दी अधिकारी, बन्दोबस्त अधिकारी चकबन्दी व उप संचालक चकबन्दी के न्यायालय ग्रामवासियों के लिए उपलब्ध है। कृषकगण अपनी समस्या का निस्तारण न्यायालयों के माध्यम से प्राप्त कर सकते है।
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इस दौरान एसओसी चकबन्दी द्वारा बताया गया कि ग्राम भैंसवार वर्ष 1986 से चकबन्दी प्रक्रिया में है। इस ग्राम की चकबन्दी प्रक्रिया में धारा 10 के तक की कार्यवाही को 31 मार्च 1992 को जिलाधिकारी द्वारा निरस्त कर दिया गया था, जो पुनः प्रारम्भिक स्थिति से शुरु होकर वर्तमान में गतिमान है। ग्राम की चकबन्दी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा रिट सं0 471/2020 में 18.02.2020 को आदेश पारित किया गया है।
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यह भी स्पष्ट करना है कि बिरजू कुशवाहा की पत्नी तथा संजय कुमार यादव स्वयं चकबन्दी समिति के अध्यक्ष रहे है, चकबन्दी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में ग्राम प्रधान का महत्वपूर्ण योगदान होता है, इनके द्वारा तत्समय चकबन्दी का विरोध नहीं किया गया।
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वही धरना पर बैठे कृषकों को सुनने के उपरान्त उन्हें अवगत कराया गया कि उनकी जो भी समस्याएं है उनका नियमानुसार निराकरण न्यायिक प्रक्रिया के अन्तर्गत संभव है। कृषक न्यायालय की शरण लेकर अनुतोष प्राप्त कर सकते है।
खाद की आपूर्ति व वितरण के सम्बन्ध में सदर विधायक व DM ने की अधिकारियों के साथ बैठक
सोनभद्र। सदर विधायक विधायक भूपेश चौबे व जिलाधिकारी बी०एन० सिंह ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट के जन सुनवाई कक्ष में कृषि विभाग व सहकारिता विभाग के अधिकारियों से समितियों पर खाद की आपूर्ति ओवर रेटिंग पर रोक लगाने के सम्बन्ध में ए०डी०सी०ओ० कॉपरेटिव व जिला कृषि अधिकारी से जानकारी प्राप्त किया।
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इस दौरान जिलाधिकारी ने ए०डी०सी०ओ० कॉपरेटिव को निर्देशित करते हुए कहा कि जिन समितियों के लिए खाद का आवंटन किया जा रहा है वहां पर खाद की आपूर्ति समय से कर दी जाये, इसमें किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाये,
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इस दौरान जिलाधिकारी ने जिला कृषि अधिकरी को निर्देशित करते हुए कहा कि खाद व दवा की बिक्री के दुकानों का नियमित रूप से निरीक्षण सुनिश्चित किया जाये।
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खाद बिक्री में यदि कही पर ओवर रेटिंग की शिकायत प्राप्त होती है तो सम्बन्धित दुकानदार के विरूद्ध प्राथामिकी दर्ज की कार्यवाही सुनिश्चित की जाये, उन्होनें कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप खाद के वितरण की कार्यवाही की जाये।
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ए०डी०सी०ओ० कॉपरेटिव ने बताया कि इफको पारादीप सयंत्र (उड़ीसा) से विंध्याचल मण्डल मिर्जापुर के लिए 2500 मैं0 टन फास्फेटिक उर्वरक का आवंटन हुआ है। मिर्जापुर रैंक पॉइंट पर दिनांक 26. जुलाई 2025 तक आने की संभावना है।
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जनपद सोनभद्र को फास्फेटिक उर्वरक प्राप्त होते ही समितिवार उर्वरक आवंटन कर प्रेषित किये जाएंगे। जनपद में कुल 5 मैं0 टन से कम स्टॉक वाली 29 समितियों में उर्वरक प्रेषित किया जा रहा है।
असिटेन्ट कमिश्नर जी एस टी को उद्योग व्यापार मंडल ने सौंपा ज्ञापन
सोनभद्र। प्रान्तीय नेतृत्व के आह्वान पर उ प्र उद्योग व्यापार मण्डल ने असिटेन्ट कमिश्नर जी एस टी को मुख्यमंत्री जी को सम्बोधित ज्ञापन सौपा और माग कि प्रदेश भर में जी एस टी विभाग के द्वारा व्यापारियों के हो रहे उत्पीडन शोषण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाया जाए।
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इस दौरान जिलाध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों को ई मेल के द्वारा नोटिस भेजा जा रहा है जिसे व्यापारी देख नही पाते और व्यापारियों के खाते सीज किये जा रहे है जिसके कारण व्यापारी ग्रेड -1 के यहा अपील नही कर पाते घोषणा होने के बाद भी अभी तक ट्रिब्यूनल की स्थापना न होने के कारण दूसरी अपील भी नही कर पा रहे है।
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बरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष संदीप सिहं चन्देल जिला महामंत्री राजेश बसल ने कहा कि झाँसी के व्यापारी के यहा दिनांक 10-7-25 को बकाया वसूली 5000 के लिए स्कूटी जब्त किया गया इसी तरह 10000 की वसूली के लिए पुराना सोफा जब्त किया गया जो अत्यन्त अशोभनीय है।
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जिला कोषाध्यक्ष अजीत जायसवाल व युवा व्यापार मण्डल के जिला अध्यक्ष रमेश जायसवाल ने कहा कि अपील के द्वारा रिफड़ की बात की जाती है जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा अधिकारियों के द्वारा धारा 79 का दुरूपयोग कल गुडवर्क दिखाने के लिये किया जा रहा है जिससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है0pppppppppgv।
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नगर अध्यक्ष आन्नद जायसवाल ने कहा कि सर्वे छापे के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न शोषण हो रहा है सचल दल सभी परिपत्र होने के बाद भी छोटी छोटी मानवीय भूल पर पेनाल्टी लगाई जा रही है व्यापार मण्डल ने एक स्वर से माग किया इस तरह की कार्यवाही पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए तथा आनलाईन ट्रेडिंग पर रोक लगाई जाए,
जिससे स्थानीय व्यापार बच सके राज्य कर विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए जाय कि बिभाग व्यापारी के कर सलाहाकार को सूचि जारी करे जिससे बकाये कर का समाधान हो सके तथा सरकार की छवि धूमिल न हो।
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ज्ञापन देने के दौरान जिला उपाध्यक्ष प्रकाश केशरी जिला, संगठन मंत्री राजेश सोनी, नगर महामंत्री राजेश जायसवाल, फल सब्जी मण्डी अध्यक्ष श्याम बाबू, किराना अध्यक्ष श्यामलाल केशरी, किराना महामंत्री नन्दलाल कुशवाहा, इलेक्ट्रॉनिक अध्यक्ष दिनेश गुप्ता, अजय केशरी अध्यक्ष आई टी सेल, अभिषेक केशरी नगर कोषाध्यक्ष, सजय जायसवाल, रितु अग्रहरी नगर अध्यक्ष महिला सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
आजाद तिलक जयंती पर वृक्षारोपण माल्यार्पण कविगोष्ठी
सोनभद्र। शहीद स्थल प्रवंधन ट्रस्ट करारी सोनभद्र के तत्वावधान में आजाद तिलक जयंती के उपलक्ष्य में शहीद स्मारक पर बुधवार को दिन में सदर विधायक भूपेश चौबे वरिष्ठ साहित्य कार अजय शेखर वरिष्ठ कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र हाजी फरीद अहमद शहर कांग्रेस अध्यक्ष ओज कवि प्रभात सिंह चंदेल प्रधान संगीता तिवारी द्वारा वृक्षारोपण व शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण तिरंगा झंडा रोहण राष्ट्र गान के आयोजन पश्चात विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
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अध्यक्षता करते हुये वरिष्ठ साहित्य कार चिंतक अजय शेखर ने तिलक को तत्वदर्शी साधक व आजादी में अहं भूमिका व्यक्तित्व कृतित्व का विशद निरूपण किया साथ ही आजाद के बलिदान को नतमस्तक हो नमन किया।
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विशिष्ट अतिथि कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र ने स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा, तिलक व जीते जी मुझे दुश्मन मुझे छू नहीं सकता, आजाद के वक्तव्य को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि विधायक भूपेश चौबे ने अपने वक्तव्य में वीर शहीदों के त्याग बलिदान की चर्चा किये। ओज कवि प्रभात सिंह चंदेल ने,, आजाद तिलक के बेटे हम बलिदान हमारी थाती है, वीरों की परिपाटी है सुनाकर मन मोह लिया।
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शहर कांग्रेस अध्यक्ष हाजी फरीद अहमद ने वृक्षारोपण प्राण वायु पर्यावरण पर विशद वर्णन से लोगों में उत्साह भरा स्वागत निदेशक प्रदुम्न त्रिपाठी एडवोकेट ने किया आभार जताते हुये सभी अतिथियों कवियों को अंग वस्त्र लेखनी पुस्तिका देकर अभिनंदन किया।
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प्रधान संगीता तिवारी ने व्यक्त किया। शाम को बार एसोसिएशन सभागार कचहरी में कविगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता राष्ट्र पति सम्मान से सम्मानित पूर्व किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य ओमप्रकाश त्रिपाठी ने किया सफल संचालन अशोक तिवारी ने किया जहाँ बार अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्र एडवोकेट महामंत्री अखिलेश पांडेय एड, नरेंद्र कुमार पाठक एड, के गरिमामयी उपस्थिति में आयोजन में वाणी वंदना ईश्वर विरागी ने किया और पावस को समर्पित रचना सुनाकर चार चांद लगाये।
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कौशल्या कुमारी चौहान ने, उठो देश के नौजवानों पिघला दो चट्टान को, धर्मेश चौहान ने जान से बढ़कर प्यारा मुझको अपना भारत देश,आयोजक प्रदुम्न त्रिपाठी ने आग में नित बैठकर अनुराग राष्ट्र राग का,, जाग करते रहे साधक भारती के भाग का सुनाकर शमां बांध दिया।
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विकास वर्मा दयानंद दयालू जयराम सोनी दिव्या राय अजय चतुर्वेदी कक्का शायर अब्दुल हई दिवाकर दिवेदी मेघ मदन चौबे अमित सिंह दिलीप सिंह दीपक राकेश शरण मिश्र नोटरी अधिवक्ता, राधेश्याम पाल गोपाल कुशवाहा अरुण तिवारी सुनील चौचक ने एक से बढ़कर एक हास्य व्यंग्य गजल गीत छंद मुक्तक सवैया विभिन्न रसों में सुनाकर माहौल को ऊंचाई दिये सराहे गए।
अंत में अध्यक्षता करते हुये ओमप्रकाश त्रिपाठी ने आजाद तिलक को समर्पित भावांजलि देकर आयोजन को विराम दिये। इस अवसर पर आत्म प्रकाश त्रिपाठी जयशंकर त्रिपाठी बृज किशोर देव ठाकुर कुशवाहा पुरुषोत्तम प्रधान फारुक अली हाश्मी देवानंद पांडेय राकेश दूबे एड, सोमारू आदि रहे। आयोजन देर शाम तक चलता रहा।
जिला खनिज फाउण्डेशन निधि के माध्यम से होने वाले निर्माण कार्य ससमय व गुणवत्तापूर्ण तरीके पूरा किया जाए- DM
गहरे व पानी भरी खदानों पर लगाया जाय साइन बोर्ड
सोनभद्र। जिलाधिकारी बीएन सिंह की अध्यक्षता बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला खनिज फाउण्डेशन निधि के माध्यम से जनपद में हो रहे विकास कार्यों की समीक्षा किया। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने ज्येष्ठ खान अधिकारी से बालू खनन पट्टे के सम्बन्ध में जानकारी ली तो ज्येष्ठ खान अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में 14 बालू स्वनन के पट्टे स्वीकृत है।
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जिस पर जिलाधिकारी ने ज्येष्ठ खान अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि जनपद में मोरम के पट्टों की संख्या कम है, जिसे बढ़ाने की दिशा में कार्य करना चाहिए, जो नियम के अनुसार पात्र हों, उन्हें पट्टे आवंटित किये जाये। उन्होंने कहा कि खनन के माध्यम से राजस्व वसूली में वृद्धि की जाये।
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इस दौरान उन्होंने अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०) को निर्देशित करते हुए कहा कि एमएम-11 का दुरुपयोग न होने पाये और इसकी बेहतर ढंग से निगरानी सुनिश्चित की जाये। जिला खनिज निधि के माध्यम से ड्रोन कैमरा खरीदने की कार्यवाही की जाये। ड्रोन कैमरे का उपयोग निर्धारित क्षेत्र में ही किया जाये। जिन खनन क्षेत्रों में गहरे गड्ढे हैं और पानी भरा है,
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वहां की खनन पट्टा धारकों को निर्देशित किया जाये कि ऐसे स्थान जिसमें पानी भरा हो और गहरायी अधिक हों, उससे सम्बन्धित बोर्ड लगाये जाये, जिससे कि होने वाली किसी भी दुर्घटना से बचा जा सकें।
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उन्होंने कहा कि जिला खनिज फाण्डेशन न्यास की तरफ से जो प्रस्ताव विकास से सम्बन्धित पहले से स्वीकृत हैं और कार्य प्रारंभ है, उन कार्यों की जाँच कर अग्रिम किश्त के भुगतान की कार्यवाही की जाये। उन्होंने कहा जिला खनिज निधि के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी केन्द्र का निर्माण,
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स्कूल कक्ष का निर्माण, विद्यालय के ऊपर से गये हाई टेंशन तार को हटाने की कार्यवाही व सड़कों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर की जाये। उन्होंने कहा कि जिला खनिज फाउण्डेशन न्यास के माध्यम से होने वाले निर्माण कार्यों से सम्बन्धित बोर्ड भी लगाये जायें।
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बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, अपर जिलाधिकारी वागीश कुमार शुक्ला, ज्येष्ठ खान अधिकारी शैलेन्द्र सिंह, अपर जिला सूचना अधिकारी विनय कुमार सिंह, खनन विभाग के अधिकारी व कर्मचारीगण उपस्थित रहें।
भलुवा माइंस की हैवी ब्लास्टिंग से कांप रहा ओबरा, मकानों में दरारें और जनजीवन भयभीत
प्रशासनिक लापरवाही पर फूटा जनता का गुस्सा, निरीक्षण के दौरान खनन अधिकारी मौन
सोनभद जनपद की आदर्श नगर पंचायत ओबरा के वार्ड संख्या 14 में स्थित अल्ट्राटेक भलुवा माईस में हो रही अनियंत्रित और अत्यधिक हैवी ब्लास्टिंग से स्थानीय नागरिकों का जीवन नारकीय हो गया है। मकानों में जल टंकियों में रिसाय, नौंव कमजोर होने की स्थिति और हर दोपहर भूकंप जैसे झटकों का डर यह सब अथ ओबरा के बाशिंदों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है ब्लास्टिंग से उड़ते पत्थरों, तेज ध्वनि और कंपन से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मानसिक तनाव में जीने को मजबूर हैं।
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दोपहर 1 से 2 बजे के बीच ब्लास्टिंग का समय लोगों के लिए सबसे डरावना होता है, जब वे अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस करते हैं।
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शिकायतों पर कागजी कार्रवाई, ज़मीनी हकीकत से मुंह मोड़ता प्रशासन
इस गम्भीर विषय को लेकर छात्र नेता अभिषेक अग्रहरी ने 03 अप्रैल व 28 अप्रैल 2025 को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कीं (शिकायत सं. 40020025005439 और 40020025008766), लेकिन अधिकारियों ने इन शिकायतों पर बिना मौके पर आए ही कागज़ी रिपोर्ट बनाकर औपचारिकता पूरी कर दी।
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कई रिमाइंडर भेजे जाने के बाद खनन निरीक्षक मनोज पाल 22 जुलाई को निरीक्षण के लिए ओबरा पहुंचे, लेकिन निरीक्षण से पहले वह सीधे अल्ट्राटेक के कार्यालय में चले गए। शिकायतकर्ता के फोन के बाद ये मौके पर पहुंचे, जहां पहले से ही भारी संख्या में स्थानीय लोग अपनी पीड़ा साझा करने के लिए मौजूद थे।
जनता ने अधिकारियों को बताया कि उनके घरों पर पत्थर गिरते हैं, बच्चे डर के मारे रोते हैं, और कई घरों में दरारें साफ देखी जा सकती हैं। सड़कें ओवरलोड गाड़ियों के आवागमन से टूट चुकी हैं और कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
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निरीक्षण अधूरा, जवाब नदारद
जैसे ही जनता ने खनन निरीक्षक से सवाल पूछने शुरू किए, उन्होंने मौके से बिना जवाब दिए चुपचाप निकल जाना बेहतर समझा। पत्रकारों ने जब उनकी प्रतिक्रिया जाननी बाहीं तो उन्होंने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया. जिससे लोगों में गहरी नाराजगी फैल गई।
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लोकतंत्र की असफलता का प्रतीक बनता एक मामला
यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक निष्क्रियता और जनविरोधी रवैये का उदाहरण बन चुका है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई और प्रभावित परिवारों को मुआवजा व राहत नहीं मिली, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रभाव में दबी आवाजें अब शांत नहीं रहेंगी।
एक बीएलओ को तीन हजार मतदाताओ के पुनरीक्षण का कार्य दिया जाय- जिला निर्वाचन अधिकारी
सोनभद्र। मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए बीएलओ तथा पर्यवेक्षको की नियुक्ति के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बुधवार को की गयी बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि बीएलओ तथा पर्यवेक्षक की नियुक्ति सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
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बैठक के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि कार्मिको की नियुक्ति के लिए उप जिलाधिकारीगण को आईडी तथा पासवर्ड पूर्व में ही आवंटित किये जा चुके है। नियुक्ति सम्बन्धित कार्यवाही 18 अगस्त तक घर-घर जाकर गणना एवं सर्वे का कार्य 19 अगस्त से 29 सितम्बर तक आनलाईन आवेदन 19 अगस्त से 22 सितम्बर तक, प्राप्त आवेदनों की जाँच 23 सितम्बर से 29 सितम्बर तक, संशोधन एवं विलोपन की कार्यवाही 30 सितम्बर से 06 अक्टूबर तक, अननन्तिम मतदाता सूची का प्रकाशन 05 दिसम्बर को किया जाना निर्धािरित है।
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वृहद पुनरीक्षण कार्य के लिए बीएलओ के रूप में कर्मियों को नियुक्त किया जा सकता हैं, लेखपाल, जूनियर बेसिक स्कूलों के अध्यापक, शिक्षा मित्र, अन्य राजकीय कर्मचारी, उप्र सरकार के नियन्त्रणाधीन सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, निकायों के उपयुक्त कर्मचारी, अन्य ग्राम स्तरीय कार्मिक जिन्हें उपयुक्त समझा जाए, यथासम्भव भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा कराये गए पुनरीक्षण कार्य में लगे बीएलओ को ही पंचायत के पुनरीक्षण कार्य हेतु लगाया जाए।
एक बीएलओ को अधिकतम 3000 मतदाताओं के पुनरीक्षण का कार्य आवंटित किया जाए, एक मतदान केन्द्र पर यथासम्भव 01 बीएलओ की नियुक्ति की जाए, परन्तु उस मतदान केन्द्र पर 3000 से अधिक मतदाता न हो। एक मतदान केन्द्र पर 3000 से अधिक मतदाता होने पर 01 से अधिक बीएलओ की नियुक्ति की जाए एवं सभी नियुक्त किए जाने वाले बीएलओ को यथा सम्भव बराबर-बराबर मतदान स्थल आवंटित किए जाएं।
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किसी भी दशा में 01 बीएलओ को 01 से अधिक मतदान केन्द्र आवंटित न किया जाए, भले ही उस मतदान केन्द्र पर मतदाताओं की संख्या मानक से कम ही हो, ताकि दावा आपत्ति प्राप्त करने हेतु बीएलओ मतदान केन्द्र पर उपस्थित रह सके।
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यह ध्यान रखा जाय कि अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर किसी बी०एल०ओ० को मतदाताओं की संख्या इस प्रकार आवंटित की जाए कि कोई वार्ड/मतदान स्थल टूटकर दो बी०एल०ओ० के मध्य न बॅट जाए। बी०एल०ओ० के कार्य का पर्यवेक्षण करने हेतु कर्मियों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, जिसमें राजस्व निरीक्षक, सहायक विकास अधिकारी, कृषि निरीक्षक, सीनियर बेसिक स्कूलों के अध्यापक, जनपद में उपलब्ध अन्य पर्यवेक्षक स्तर के कार्मिक होंगें,
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यह कार्मिक राजकीय कर्मचारी तथा उ0प्र0 सरकार के नियंत्रणाधीन सार्वजनिक उपक्रम/निगम / निकाय आदि के हो सकते हैं। प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर 01 पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाएगा, यदि काई न्याय पंचायत अधिक बड़ी है और उसमें मतदान स्थलों की संख्या 20 से अधिक है तो उस न्याय पंचायत में अधिकतम 20 से मतदान स्थलों तक 01 पर्यवेक्षक एवं 20 अधिक मतदान स्थल होने की स्थिति में 01 से अधिक पर्यवेक्षक नियुक्त किए जा सकते हैं।
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ऐसी स्थिति में उनके कार्य क्षेत्र का विभाजन इस प्रकार किया जाए कि प्रत्येक पर्यवेक्षक को बराबर-बराबर मतदान स्थल आवंटित हो। पर्यवेक्षक को कार्य आवंटित करते समय यह ध्यान रखा जाए कि एक मतदान केन्द्र एक पर्यवेक्षक को ही आवंटित हो, अर्थात् किसी भी स्थिति में एक मतदान केन्द्र को दो पर्यवेक्षकों को आवंटित न किया जाए।
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निर्वाचक नामावली वृहद पुनरीक्षण के दौरान बीएलओ द्वारा किये जा रहे कार्यों की मॉनिटरिंग हेतु ई-बीएलओ मोबाइल ऐप विकासित किया गया है, जिसको इन्स्टाल किया जा सकता है, साथ ही बीएलओ ड्यूटी आर्डर में भी मोबाइल ऐप का क्यूआर कोड दिया गया है। क्यूआर कोड को स्कैन करके भी मोबाइल ऐप इन्स्टाल किया जा सकता है।
बरसात में नहीं भीगेंगे सफाई कर्मी, नगर पालिका अध्यक्ष रूबी प्रसाद ने वितरित की सेफ्टी किट
200 कर्मियों को मिलेगा रेनकोट, ग्लव्स व अन्य सुरक्षा सामग्री
वोिनय कुमार श्रीवास्तव
सोनभद्र। बरसात के मौसम में सफाई कर्मियों को होने वाली दिक्कतों को देखते हुए नगर पालिका परिषद ने सराहनीय पहल करते हुए बुधवार को 28 सफाई कर्मियों को सेफ्टी किट, रेनकोट, हैंड ग्लव्स समेत जरूरी सामग्री वितरित की। यह वितरण नगर पालिका अध्यक्ष रुबी प्रसाद और अधिशासी अधिकारी मनोज कुमार की अगुवाई में किया गया।
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अध्यक्ष रुबी प्रसाद ने बताया कि वर्षा के दौरान नालियों की सफाई या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर काम करते वक्त कर्मचारियों को तमाम कठिनाइयों से जूझना पड़ता है। इस स्थिति को देखते हुए नगर पालिका ने लगभग 200 कर्मचारियों को आवश्यक सेफ्टी किट वितरित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ कर्मियों को सुविधा होगी, बल्कि स्वास्थ्यगत जोखिमों से भी सुरक्षा मिलेगी।
इस पूरी योजना की जिम्मेदारी सफाई नायक आकाश रावत को सौंपी गई है, जो सूची के अनुसार सामग्री का वितरण सुनिश्चित करेंगे। अधिशासी अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि अभी 28 कर्मचारियों को किट दी गई है और आने वाले एक-दो दिनों में शेष सभी कर्मियों को भी सामग्री प्रदान कर दी जाएगी।
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वितरण समारोह में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अजय शेखर, अवर अभियंता राज कुमार, सभासद अनवर अली, अजीत सिंह, विमलेश कुमार, संत सोनी, अमित दुबे समेत नगर के अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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यह पहल न केवल कर्मचारियों के हित में है, बल्कि नगर पालिका की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी दर्शाती है। अब उम्मीद की जा रही है कि बाकी सभी कर्मचारियों को भी जल्द ही यह सुविधा मिल जाएगी, जिससे वे सुरक्षित और निर्बाध रूप से अपना कार्य कर सकें।
नलराजा मंदिर बनेगा सोनभद्र की नई धार्मिक-ऐतिहासिक पहचान : बद्री नाथ सिंह जिलाधिकारी
राजा नल और रानी दमयंती की अमर प्रेमगाथा का साक्षी नलराजा मंदिर
सोनभद्र। शिवरात्रि के पावन अवसर पर जिलाधिकारी बद्री नाथ सिंह ने सोनभद्र के प्राचीन और चमत्कारी नलराजा मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन कर जनकल्याण की कामना की। यह मंदिर केवल एक शिवस्थल नहीं, बल्कि महाभारत काल की अमर प्रेमगाथा राजा नल और रानी दमयंती के तप, प्रेम, संघर्ष और भक्ति की जीवंत स्मृति है।
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कर्मनाशा नदी के किनारे बसा यह शिवधाम, वर्षों से उपेक्षित रहा, परंतु अब इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को पुनर्जीवित करने की दिशा में प्रशासन ने ठोस कदम उठाया है। जिलाधिकारी ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना प्रस्तुत की, जिसमें सुगम मार्ग, रोशनी, पेयजल, विश्राम शेड और ऐतिहासिक संग्रहालय की व्यवस्था की जाएगी
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राजा नल और रानी दमयंती का इतिहास, प्रेम, परीक्षा और भक्ति की गाथा
राजा नल, निषध देश के यशस्वी, धर्मनिष्ठ और अत्यंत सुंदर राजा थे। उनकी ख्याति दूर-दूर तक थी। वहीं दमयंती, विदर्भ नरेश की पुत्री, अनुपम सौंदर्य और बुद्धिमत्ता की प्रतीक थीं। जब दमयंती ने राजा नल का नाम सुना, तो बिना देखे ही उन्हें अपने हृदय में स्थान दे दिया। नल भी दमयंती की बातों और गुणों से आकर्षित हो चुके थे।
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स्वयंवर के समय स्वर्ग के देवता भी दमयंती से विवाह की इच्छा लेकर पहुंचे, परंतु दमयंती ने सभी देवताओं को अस्वीकार कर राजा नल को ही अपना वर चुना। यह निर्णय स्वर्गिक शक्तियों को भी चुनौती देता था।
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उनके विवाह के बाद एक समय ऐसा भी आया जब कलि नामक असुर ने राजा नल के भाग्य को प्रभावित किया। द्यूत (जुए) में धोखा खाकर नल ने अपना सब कुछ खो दिया और पत्नी सहित वन में कष्ट झेलने लगे। भूख, प्यास, दारिद्र्य और विपत्तियों के बीच दमयंती ने भी अपने पति का साथ नहीं छोड़ा।
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यही वह वन क्षेत्र था, जहाँ राजा नल ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। यह मंदिर उसी तपोभूमि की स्मृति है। कहते हैं कि शिवजी ने प्रसत्र होकर राजा नल को मार्गदर्शन और शक्ति दी, जिससे वह पुनः अपना राज्य प्राप्त कर सके।
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मंदिर का चमत्कार और आस्था
स्थानीय लोगों के अनुसार, नलराजा मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू है, और यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं। सावन मास में विशेषकर शिवरात्रि पर यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं। यहां कई श्रद्धालुओं को असाध्य रोगों से मुक्ति, संतान प्राप्ति, मानसिक शांति और जीवन संकटों से उबारने जैसे चमत्कारी अनुभव हुए हैं।
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पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में होगा विकास
जिलाधिकारी बद्री नाथ सिंह ने कहा कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रेम, संघर्ष और भक्ति की ऐतिहासिक गाथा का प्रतीक है। अब इस स्थल का समग्र विकास कर इसे राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल में बदला जाएगा।
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राजा नल और रानी दमयंती की कथा को संग्रहालय और डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत कर युवाओं को उनके जीवन मूल्यों, निष्ठा और विश्वास से जोड़ने का प्रयास होगा। मंदिर परिसर में सांस्कृतिक, धार्मिक और शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
यह प्रयास केवल एक मंदिर के पुनरुद्धार का नहीं, बल्कि एक अद्वितीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का बीज है, जिसमें सोनभद्र न केवल आध्यात्मिक केंद्र बनेगा बल्कि ऐतिहासिक पर्यटन मानचित्र पर भी एक नई पहचान पाएगा।