लौटोगे तुम इसीलिए तो सांकल नहीं लगाई है : डॉ रचना तिवारी

• गीत कस्तूरी साहित्यिक संस्थान ने आयोजित की काव्य गोष्ठी

• रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाकर लोगों की बटोरी तालियां

मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी

सोनभद्र। जनपद की ‘गीत कस्तूरी’ साहित्यिक संस्थान के तत्वाधान में रविवार को उरमौरा स्थित ‘गीत गंगा’ सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार पंडित पारस नाथ मिश्र की अध्यक्षता में एक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई । माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण तथा वीणा वादिनी की वंदना से गोष्ठी की शुरुआत की गई।

इस दौरान जाने वाले साल 2021 को सलाम करते हुए जनपद के स्थापित और युवा रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं पढ़कर गोष्ठी को भव्यता प्रदान की । संस्थान की अध्यक्ष गीतकार कवयित्री डॉ रचना तिवारी ने सभी कवियों-साहित्यकारों एवं पत्रकारों को अंगवस्त्रम ओढा कर स्वागत किया । गजलकार शिव नारायण ‘शिव’ ने गरीबों के घर मे निवाला नहीं है–कविता सुना कर लोगों की तालियां बटोरी, वही शायर अब्दुल हई ने जब तलक आपके एहसास के पहरे होंगे — पढ़ कर सबका मन मोहा, दिवाकर द्विवेदी ‘मेघ’ ने जागो हिंदुस्तान अपनी तरुणाई से– पढ़कर देश प्रेम के भाव जगाया ,अमरनाथ अजेय ने वही पनघट वही पोखर– गीत पढ़कर वातावरण शांत कर दिया । गीतकार सुशील राही ने अस्वस्थता में भी भाव विभोर कर देने वाला काव्य पाठ किया ..युवा रचनाकार जयश्री राय ने ओज की रचना और अलका केसरी ने ज़िंदगी एक रंगमंच है बस किरदार निभाना है ,सरोज कुमार सिंह ने सब बीमार हैं दवा नहीं है पढ़ी तो लोग आत्म विभोर हो उठे।

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गोष्ठी के मुख्य अतिथि पत्रकार एवं साहित्यकार मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी ने ठंड से तन कांपता है और मन भी कांपता … सुना कर कविता प्रेमियों को ठंड के मौसम का एहसास कराया। विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक तीरथ राज ,अति विशिष्ट अतिथि चंद्रकांत शर्मा ने भी रचनाएं पढ़ी और वाहवाही लूटी । काव्य गोष्ठी का सफल संचालन कवि अशोक तिवारी ने किया।

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इस मौके पर कविता के प्रति अनुराग रखने वाले नीतीश चतुर्वेदी अमरनाथ सिंह ,अरुण सिंह ,अरविंद तिवारी ,दिनेश तिवारी ,निशा रॉय, सुनील केसरी ,आशा देवी ,मेघना त्रिपाठी ,गोपाल त्रिपाठी ,राकेश राय और रामानुज धर द्विवेदी सहित दर्जनों लोग अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर इस सफल काव्य गोष्ठी के साक्षी बने। संस्था की अध्यक्ष डॉ रचना तिवारी ने ‘दरवाज़ा है बंद हमारा खिड़की भी भीड़काई है, लौटोगे तुम इसीलिए तो सांकल नहीं लगाई है’ जैसे मनमोहक गीतों को पढ़कर जहां सबको आत्म विभोर कर दिया वहीं गोष्ठी को सफल बनाने के लिए सबके प्रति आभार व्यक्त किया ।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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