आदिवासियों को सिर्फ पर्यटन का केंद्र न बनाया जाय : अर्चना सिंह

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र): आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र मे निवास करने वाली अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जातियो के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, एवं इनके चतुर्मुखी विकास हेतु इस क्षेत्र में कार्य करने वाले समाजसेवियों, स्वयंसेवी संगठनों को आगे आना चाहिए।
उपरोक्त विचार शमशेर बहादुर सिंह मेमोरियल ट्रस्ट की सदस्य एवं हाईकोर्ट इलाहाबाद की वरिष्ठ अधिवक्ता अर्चना सिंह ने जनपद मुख्यालय स्थित अपने आवास पर आयोजित बैठक में व्यक्त किया।

उन्होंने निकट भविष्य में ट्रस्ट की आगामी योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि-“उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में निवास करने वाली आदिवासी जातियों को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में रखा गया है, सरकार द्वारा
इनके सामाजिक आर्थिक उत्थान हेतु आरक्षण भी प्रदान किया गया है, लेकिन शिक्षा, जागृति, जानकारी के अभाव में ये लोग सरकार द्वारा दिए जा रहे आरक्षण का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं जिसके कारण यह आज भी पिछड़े हुए हैं और बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए पर्यटन का केंद्र बने बने हुए हैं। इन्हें शिक्षा प्रदान कर समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का कार्य किया जाना चाहिए।
जब अनुसूचित जनजाति कोटे में में शिक्षित अभ्यर्थी नौकरी के लिए नहीं मिलते हैं तो उसका आरक्षण अनुसूचित जाति के कोटे में स्थानांतरित कर दिया जाता है, इस प्रकार शिक्षा के अभाव में आदिवासी जाति के लोग सरकारी आरक्षण का लाभ नहीं उठा पाते हैं।
हमारे सोनभद्र जनपद के आदिवासी युवक और युवतियां कद- काठी से मजबूत, निर्भीक, बहादुर होने के बावजूद भी शिक्षा के अभाव में फौज और पुलिस की नौकरी में नहीं जा पाते है और अभाव का जीवन जी रहे हैं।
आदिवासी जातियों में जन जागृति के लिए ट्रस्ट द्वारा सुदूर जंगली इलाकों में शिविर का आयोजन कर इनको शिक्षा, स्वास्थ्य के प्रति जागृत किया जाएगा एवं इनके शिक्षा के लिए कोटेश्वर धाम बहुआर के निकट एक आदिवासी इंटर कॉलेज, छात्रावास एवं इनको रोजगार परक बनाने के लिए प्रशिक्षण इत्यादि की व्यवस्था किया जाएगा।
संस्कृति, साहित्य, कला, पर्यटन के क्षेत्र में अनवरत दो दशकों से कार्यरत विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-“सोनभद्र में निवास करने वाली आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार- प्रसार समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, आदि सरकारी विभागों के माध्यम से होना चाहिए, ताकि इस क्षेत्र में निवास करने वाले आदिवासी एवं अन्य जातियों के लोगों को जानकारी प्राप्त हो सके और इसका इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।

सोनभद्र कानूनी परामर्श केंद्र के सचिव जितेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि-“केंद्र सरकार की सूची में हमारा सोनभद्र जनपद पिछड़े जनपद के रूप में सूचीबद्ध है और इस जनपद निवास करने वाले लोगों को कानून से संबंधित जानकारी प्रदान करने की आवश्यकता है। सामाजिक संगठनों द्वारा विधि विशेषज्ञों के माध्यम से शिविर, सेमिनार आदि के माध्यम से इनको विधिक जानकारी प्रदान किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता अर्चना सिंह को विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक दीपक कुमार केसरवानी द्वारा आदिवासी जीवन पुस्तक, सोन घाटी पत्रिका के यादगार अंक एवं ऑक्सीजन प्लांट प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी हर्षवर्धन केसरवानी ने किया।
इस अवसर पर अधिवक्ता ज्ञानेंद्र शरण राय, रविकांत सिंह, प्रेम प्रकाश राय, सहिय अन्य विशिष्ट जन उपस्थित रहे।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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