स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी सेनानियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा : दीपक कुमार केसरवानी

▪️जिला प्रशासन द्वारा सेनानी परिजनों की खोज कराई जानी चाहिए

▪️जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक ब्लॉकों में सम्मान का कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए।

▪️सेनानियों के नाम पर गांव सड़कों का नामकरण किया जाना चाहिए

हर्षवर्धन केसरवानी (संवाददाता)

🔸रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र): स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं वर्षगांठ के 75 हफ्ते पूर्व देश- प्रदेश सहित जनपद सोनभद्र में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ हो चुका है।
कार्यक्रम के अंतर्गत सोनभद्र जनपद के जनप्रतिनिधियों द्वारा ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण संवर्धन, पर्यटन विकास एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम से द्वार बनाने की घोषणा की जा चुकी है।
आजादी के पूर्व मिर्जापुर के दक्षिणांचल कहे जाने वाले वर्तमान जनपद सोनभद्र के इतिहास में आदिवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और आदिवासी जन महात्मा गांधी के आवाहन पर कंधे से कंधा मिलाकर स्वतंत्रा आंदोलन में कूद पड़े थे बिना किसी की परवाह किए और ब्रिटिश हुकूमत की प्रताड़ना का शिकार भी हुए, जेल यात्रा, जमीन जायदाद की नीलामी, शारीरिक प्रताड़ना एवं परिजनों को आर्थिक, शारीरिक रूप से प्रताड़ना इत्यादि कष्टों को झेलते रहे, लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के सामने सिर नहीं झुकाया।
रॉबर्ट्सगंज तहसील से हरिवंश धांगर, विष्णु धांगर, शंकर माझी राम हरख खरवार, शिवनाथ प्रसाद गोड।
तहसील घोरावल से झिगई पनिका, मंगल वियार।
तहसील दुद्धी से रामेश्वर खरवार, सुखलाल खरवार, शनिचर राम खरवार, बोधा पनिका, पूरन खरवार, जगन्नाथ खरवार,चिंतामणि खरवार ने महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए सन 1921 से 15 अगस्त 1947 तक ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लिया और प्रताड़ना के शिकार हुए।
सन 1921 में जब महात्मा गांधी ने जब स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल बजाया उसकी क्रांतिकारी ध्वनि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र दुद्धी और रॉबर्ट्सगंज तहसील के लोगों को सुनाई दिया और सभी लोग कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजो के खिलाफ खड़े हो गए थे।
25 दिसंबर 1937 को लोकप्रिय नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू का टाउन एरिया मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में आगमन, मिर्जापुर जनपद की ऐतिहासिक, महत्वपूर्ण घटना थी और संभवत प्रथम बार पंडित जवाहरलाल नेहरु आदिवासी, संस्कृति एवं कला से परिचित हुए थे।
स्वतंत्रता के पश्चात क्षेत्र में होने वाले लोकसभा, विधानसभा एवं स्थानीय निकाय चुनाव में आदिवासी जनप्रतिनिधियों का चुना जाना अपने आप में महत्वपूर्ण एवं इनकी सामाजिक, राजनीति मजबूत स्थिति का द्योतक है।
सोनभद्र जनपद में कुल 111 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सूची सरकारी अभिलेखों, शहीद उद्यान परासी में लगे गौरव स्तंभ पर दर्ज है और शासन द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित स्थलों के विकास एवं स्वतंत्रता आंदोलन में महति भूमिका का निर्वहन करने वाले देशभक्तों, क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मान देने का कार्यक्रम 4 फरवरी 2021 चौरी चौरा आंदोलन की 100 वीं वर्षगांठ के दिन से आरंभ है और यह कार्यक्रम आजादी के अमृत महोत्सव के समापन 4फरवरी 2022 तक चलेगा।
विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक शोधकर्ता दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन सोनभद्र द्वारा वर्तमान रॉबर्ट्सगंज, घोरावल, दुद्धी के 10 ब्लॉकों में निवास करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों की खोज की जानी चाहिए और उन्हें भी इस महोत्सव में सहभागिता का अवसर प्रदान कर अपने पूर्वजों के गौरव पर गर्व महसूस होने का अवसर जिला प्रशासन को देना चाहिए।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गांव एवं सड़कों का नामकरण स्थानीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर कराया जाना चाहिए एवं जनपद के दसो ब्लॉकों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों के सम्मान का कार्यक्रम स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थलों की पहचान एवं जीर्णोद्धार का कार्यक्रम आयोजित कराया जाना चाहिए । तभी आजादी के अमृत महोत्सव का उद्देश्य पूरा होगा।

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