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- पं0 दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि कार्यक्रम का हुआ आयोजन

सोनभद्र। राष्ट्रचिन्तक एवं एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पं0 दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि भारतीय जनता पार्टी सोनभद्र के जिला कार्यालय पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि व श्रद्धासुमन अर्पित किया इस मौके पर बतौर मुख्यअतिथि पूर्व संगठन मंत्री व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नागेश्वर देव पाण्डेय,

विशिष्ट अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष रुबी प्रसाद, भाजपा जिलाध्यक्ष नन्द लाल मौजूद रहे व कार्यकर्ताओं ने भी उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हे श्रद्धांजली दी और जनपद सोनभद्र के सभी बूथों पर पं0दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने समर्पण दिवस के रुप में मनाया।

इस मौके पर मुख्यअतिथि नागेश्वर देव पाण्डेय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक प्रमुख राजनीतिक चिंतक, अर्थशास्त्री और भारतीय जनसंघ के प्रमुख नेताओं में से थे। वे अपने दार्शनिक सिद्धांत एकात्म मानव दर्शन के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।

एमएम उनकी विचारधारा का मूल आधार यह था कि विकास केवल भौतिक प्रगति तक सीमित न रहकर भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन और सामंजस्य पर जोर दिया। उनके अनुसार, आर्थिक नीतियों का लक्ष्य केवल उत्पादन और उपभोग बढ़ाना नहीं, बल्कि मानव के समग्र विकास को सुनिश्चित करनाहोना चाहिए। वे 1968 में अपने असामयिक निधन तक भारतीय जनसंघ का नेतृत्व करते रहे। समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास ही राष्ट्र का विकास है दीनदयाल जी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

इस मौके पर विशिष्ट अतिथि रुबी प्रसाद ने कहा कि पं0 दीनदयाल उपाध्याय जी को निस्वार्थ कर्मयोगी और महान विचारक बताते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से दिया गया अंत्योदय का मंत्र समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना आज भी विकसित भारत के निर्माण की बुनियाद है।

राष्ट्र सेवा और समर्पण के उनके1 आदर्श सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे।
इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष नन्द लाल ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी का जीवन भारत राष्ट्र को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। वे एक ऐसे ऋषि राजनेता थे जो समाज, संस्कृति और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए समर्पित रहे।

उन्होंने राजनीति को राष्ट्रधर्म की साधना का माध्यम माना। उनका स्पष्ट मत था कि स्वतंत्र भारत की यात्रा भारतीय दर्शन, संस्कृति और परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए। 7पंडित दीनदयाल जी ने राजनीतिक चिंतन को भारतीय मूल्यों से जोड़ते हुए एकात्म मानव दर्शन का सूत्र दिया। इसमें व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और सृष्टि के बीच समन्वय और संतुलन समाहित है, यह जीवन और संपूर्ण सृष्टि को एक सूत्र में पिरोता है।

इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष ओमप्रकाश दूबे, उदयनाथ मौर्या, जिला महामंत्री रामसुन्दर निषाद, कृष्णमुरारी गुप्ता, सरजू बैसवार, नागेश्वर गोंड, सत्येन्द्र आर्य, रजनीश रघुवंशी, बलराम सोनी, अमरेश चेरो, महेश्वर चन्द्रवंशी, बृजेश श्रीवास्तव, प्रसन्न पटेल सहित आदि कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद रहे।

































