HIGHLIGHTS
- सह नोडल अधिकारी और पटल सहायक पर मनमानी का लगाया आरोप
- सोनभद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था हुई बेपटरी, तरह तरह की चर्चाएं तेज को
- कई निजी अस्पताल संचालक कर रहे मरीजों का शोषण
- सोनभद्र के स्वास्थ्य महकमे में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा

सोनभद्र। यूपी सरकार के लाख प्रयास के बावजूद सोनभद्र में कई निजी अस्पताल/क्लिनिक संचालक मरीजों का शोषण करना बंद नहीं कर रहे हैं। इन अस्पताल संचालकों की विभाग में पैठ इतनी तगड़ी है कि अगर कोई अधिकारी उनके खिलाफ कार्रवाई करने की सोचता है, तो ऐसा कर दिया जाता है कि वह कुछ कर ही न सकें।

इस नाते जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बेपटरी होने लगी है। वहीं सह नोडल अधिकारी और पटल सहायक के मनमानी से तंग आकर नोडल अधिकारी/डिप्टी सीएमओ डॉक्टर कीर्ति आजाद बिंद ने निजी अस्पताल के पद से इस्तीफा दे दिया है, इससे महकमे में हड़कप मच गया है।
बतादें कि डिप्टी सीएमओ डॉक्टर कीर्ति आजाद बिंद 30 अक्टूबर 2025 से नोडल अधिकारी निजी अस्पताल का कार्यभार देख रहे थे। सूत्रों की मानें तो नोडल अधिकारी ने कई अवैध रूप से संचालित निजी अस्पताल, क्लीनिक व पैथोलॉजी सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की। यह बात स्वास्थ्य विभाग में तैनात कुछ कर्मियों को नागवार लगी और उनका मनोबल तोड़ने का कार्य शुरू कर दिया गया।

इतना ही नहीं नोडल अधिकारी को इगनोर कर कार्य करना शुरू कर दिया। सह नोडल अधिकारी और पटल सहायक के मनमानी से तंग आकर नोडल अधिकारी/डिप्टी सीएमओ डॉक्टर कीर्ति आजाद बिंद ने निजी अस्पताल के पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों की मानें तो डाक्टर कृति आजाद बिंद ने सीएमओ को दिए इस्तीफा में लिखा है

कि सह-नोडल अधिकारी तथा पटल सहायक द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के मनमाने ढंग से छापेमारी / कार्यवाही किया जा रहा है। छापेमारी व कार्यवाही की सूचना से भी न तो अवगत कराया जाता है न ही मेरे बुलाने पर मुझसे मुलाकात करते हैं।

पत्रकारों द्वारा मुझसे लगातार कार्यवाही के बारे में पूछे जाने पर में जवाब देने पर असमर्थ रहता हूँ। इसके अलावा और भी यहुत सी समस्याएं है जिसके कारण में इस पद पर रहना अपने आपको उचित नहीं समझता हूँ, इसलिए निवेदन है, कि उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए मुझे नोडल अधिकारी निजी अस्पताल के पद से कार्यमुक्त करने की कृपा करें।

उन्होंने आगे लिखा है कि शेष कार्य अपने पूरी क्षमता से कार्य करता रहूँगा। उधर नोडल अधिकारी के इस्तीफा देने से स्वास्थ्य महकमें में खलबली मच गई है। आमजन में भी तरह तरह की चर्चाएं तेज हो गई है। लोगों की बातों पर गौर करें तो स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से तैनात कुछ कर्मी महकमे को अपने हिसाब से चला रहे हैं,

इसकी जांच होने पर सच्चाई खुलकर सामने आ जाएगी। हिंदी समाचार न्यूज के पास कुछ कर्मियों के कई निजी अस्पताल/क्लिनिक संचालक से अवैध धन उगाही के साक्ष्य मौजूद हैं, जो आगे प्रकाशित किया जाएगा। लेटेस्ट खबरों के लिए हिंदी समाचार न्यूज के साथ जुड़े रहे। उधर डिप्टी सीएमओ डॉक्टर कीर्ति आजाद बिंद ने भी इस्तीफा देने की पुष्टि की है।

झोलाछाप डॉक्टर कर रहे आदिवासियों का शोषण
सोनभद्र। जिले में अवैध पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड सेंटर से कमीशनखोरी का खेल जारी है। ग्रामीण इलाकों में अवैध रूप से मेडिकल प्रैक्टिस करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों का जाल फैला हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की कथित अनदेखी के कारण गरीब और सीधे-सादे आदिवासी मरीज इनके शोषण का शिकार हो रहे हैं।

बभनी, बीजपुर, म्योरपुर, दुद्धी, करमा, घोरावल, नगवा, चतरा सहित आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों में दर्जनों बिना डिग्री वाले डॉक्टर अपनी दुकानें चला रहे हैं। ये डॉक्टर मामूली सर्दी-जुकाम या बुखार होने पर भी मरीजों को गंभीर बीमारियों का डर दिखाकर किस्तों में मोटी रकम वसूलते हैं।

अवैध पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर बना कमाई का जरिया
सोनभद्र। ग्रामीण क्षेत्र में चल रहे अवैध पैचोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर इन झोलाछाप डॉक्टरों के लिए कमाई का जरिया बन गए हैं। यह एक सुनियोजित सिंडिकेट की तरह काम करता है, जहां डॉक्टर जानबूझकर मरीजों को ऐसे लैब या डायग्नोस्टिक सेंटर में भेजते हैं जिनके पास न तो वैध लाइसेंस है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ है। खून या पेशाब की जांच पर इन डॉक्टरों का मोटा कमीशन बंधा होता है, जिसके बलते बिना जरूरत के भी दर्जनों जांचें लिख दी जाती हैं।

पूर्व में कई मरीजों की हो चुकी है मौत
सोनभद्र। जिले के इस वनांचल क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का फायदा अवैध संचालक उठा रहे हैं। कई बार गलत इंजेक्शन और गलत इलाज के कारण मरीजों की हालत बिगड़ जाती है, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में अन्यत्र रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई गरीब मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी इन अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।






























