HIGHLIGHTS
- शक्तिनगर में भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना पर हुआ मंथन
- हिंदू संस्कृति हमारी आत्मा है : पं विजय लक्ष्मी शुक्ला
- भारत माता की पूजन और भव्य महाआरती के लिए उमड़ा हिंदू समाज
शक्तिनगर, सोनभद्र। समस्त हिन्दू समाज के तत्वावधान में शुक्रवार को माँ दुर्गा पंडाल, अंबेडकर नगर शक्तिनगर में भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित करना, सांस्कृतिक चेतना को जागृत करना तथा सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना रहा।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मंत्री अंबरीश जी रहे। उन्होंने अपने ओजस्वी संबोधन में हिन्दू एकता, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा पर विस्तार से प्रकाश डाला। हिन्दू समाज की पहचान केवल एक धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभ्यता, दर्शन, जीवन-पद्धति और मूल्यों का समग्र स्वरूप है।

वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, योग, आयुर्वेद, गुरु-शिष्य परंपरा-ये सभी हमारी सांस्कृतिक जड़ों के प्रतीक हैं। आज वैश्वीकरण और भौतिकवाद के दौर में जब हमारी पीढ़ी अपनी जड़ों से कटती जा रही है, तब यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि हम अपने संस्कार, परंपरा और नैतिक मूल्यों को पुनः समझें और आत्मसात करें। इतिहास साक्षी है कि जब भी हिन्दू समाज संगठित हुआ है, उसने राष्ट्र को नई दिशा दी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, एनटीपीसी परिसर के प्रोफेसर डॉ. दिनेश कुमार सोनकर कहा कि हिन्दू सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में विचार, संस्कार और समरसता के संचार का माध्यम है। शिक्षा और संस्कृति के समन्वय से ही समाज आगे बढ़ेगा।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में एनसीएल खड़िया क्षेत्र परियोजना अधिकारी राकेश अवस्थी ने कहा कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना से ही समृद्ध समाज का निर्माण संभव है। ऐसे आयोजनों से सकारात्मक सोच और आपसी सहयोग को बल मिलता है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं भागवत मर्मज्ञ पं. विजय लक्ष्मी शुक्ला (संवेदना दीदी) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृति हमारी आत्मा है। जब समाज अपनी परंपराओं से जुड़ता है, तभी उसकी पहचान और अस्मिता सुरक्षित रहती है।

संस्कृति केवल पर्व-त्योहार, वेश-भूषा या रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह समाज की सोच, व्यवहार, मूल्यबोध और जीवन-दृष्टि का समग्र रूप है। जैसे शरीर बिना आत्मा के निर्जीव होता है, वैसे ही समाज बिना संस्कृति के दिशाहीन हो जाता है।

वहीं कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति के रूप में ज्वालामुखी मंदिर मुख्य पुजारी श्लोकी प्रसाद मिश्रा, समाजसेवी विश्वजीत सिंह, नगर संघचालक खुशहाल सिंह और नगर कार्यवाह चंद्रशेखर जी की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।

सम्मेलन के उपरांत महाप्रसाद एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं नागरिकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन रंजीत राय और धन्यवाद ज्ञापन विश्वजीत सिंह ने किया। आयोजन शांतिपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से सत्याप्रताप सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, प्रमोद तिवारी, यश बंसल, राधेमोहन कुशवाहा, राजू ठाकुर, शशांक अग्रहरि, अमरेश पांडेय, आशीष कुमार, राजेश कुमार, गोपाल तिवारी, नरेंद्र शुक्ला, शत्रुघन तिवारी, छठु सिंह, हीरा सिंह, संजय गुप्ता, रितेश शर्मा सहित हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।
































