अब 5 हजार रुपये के स्टाम्प शुल्क में अपनों को कर सकेंगे प्रॉपर्टी ट्रांसफर- मंत्री रविन्द्र जायसवाल

HIGHLIGHTS

  • स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने की प्रेसवार्ता

सोनभद्र। योगी सरकार ने पारिवारिक सदस्यों के बीच व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए स्टाम्प शुल्क पांच हजार कर दिया है। इस निर्णय से अब पारिवारिक सदस्यों के बीच व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी स्टाम्प शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी।

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अभी तक भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में दान विलेखों पर संपत्ति के मूल्य के अनुसार हस्तांतरण पत्र (कन्वेयंस डीड) की भांति स्टाम्प शुल्क देय होता है, जबकि रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के प्रावधानों के अनुसार अचल संपत्ति के दान विलेख का पंजीकरण अनिवार्य है। उक्त बातें आज सुबह सोनभद्र दौरे पर सोनभद्र स्थित सर्किट हाउस पहुँचे स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल प्रेसवार्ता में कहीं।

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5,000 तक सीमित है स्टाम्प शुल्क –

उन्होंने बताया कि “स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन अनुभाग-2 की 3 अगस्त 2023 की अधिसूचना के माध्यम से यह व्यवस्था की गई थी कि यदि अचल संपत्ति का दान परिवार के सदस्यों के पक्ष में किया जाता है तो स्टाम्प शुल्क में छूट देते हुए अधिकतम ₹5,000 ही लिया जाएगा।

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यह छूट अब तक केवल कृष्य एवं आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी। योगी कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव के तहत इस छूट को पारिवारिक सदस्यों के मध्य व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे परिवारों के बीच संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और कम खर्चीली हो जाएगी।”

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शहरी और ग्रामीण सभी कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर मिलेगी राहत
प्रदेश के स्टांप तथा पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि “2022 से पहले तक परिवार के रिश्ते में यदि कोई प्रॉपर्टी देता था तो पूरे सर्किल रेट के बराबर स्टाम्प शुक्ल देना पड़ता था। 2022 में मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में तय हुआ कि पारिवारिक रिश्तों में यदि कोई प्रॉपर्टी दान की जाती है

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तो उस पर फिक्स्ड 5 हजार रुपए स्टांप लगेगा लेकिन यह दान केवल आवासीय और कृषि पर लागू था, लेकिन अब यह नियम कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर भी लागू कर दिया गया है। शहर के अंदर अब तक यह 7 प्रतिशत और गांवों में 5 प्रतिशत था, लेकिन अब गांव या शहर कहीं भी आपको केवल 5 हजार रुपए ही भुगतान करना है।”

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प्रावधानों में और स्पष्टता –

प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि “कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, पूर्व में जारी अधिसूचना में उल्लिखित संबंधियों की परिभाषा एवं अन्य प्रावधानों को भी और अधिक स्पष्ट किया गया है, जिससे नियमों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

यह छूट संबंधित अधिसूचना के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होने की तिथि से तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी। सरकार के इस फैसले को आम जनता के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे पारिवारिक संपत्ति के वैधानिक हस्तांतरण को प्रोत्साहन मिलेगा और विवादों में भी कमी आएगी।”

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