हिंदू सम्मेलन का हुआ आयोजन

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  • हिंदू सम्मेलन का हुआ आयोजन

सोनभद्र। सकल हिंदू समाज हनुमान बस्ती सोनभद्र नगर द्वारा अकड़हवा पोखरा श्री हनुमान मंदिर पर हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पवन मिश्रा एडवोकेट,विशिष्ट अतिथि शिवभगत जी,संत समाज से निरजानन्द शास्त्री ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि,

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अपने 4 रोटी खाने से पहले बगल के पड़ोसी से पूछ लो कि तेरे घर में आज बच्चे आप कुछ खाए? तब उन 4 रोटियों को खाओ नहीं तो रोटियों को दो दो हिस्सों में बांट दो। और एक हो जाओ। एक किताब में भी विखंडन न हो। जाति का भेदभाव न हो केवल हिंदू हिंदी हिंदुस्तान की बात करो।

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यह भारत की भूमि है जहाँ पशु पक्षी पर्वत व अविरल गंगा प्रवाहित होती है जिनमें स्नान कर पापी भी पुण्यात्मा बन जाता है। आज विश्व के पटल पर सर्वश्रेष्ठ देश में एक ही नाम चलता है भारत । जिनको माता के नाम से संबोधन किया जाता है।

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मुख्य अतिथि/ मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक हर्ष अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदू सम्मेलन करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? यह हम सभी लोगों के मन में अवश्य आ रहा होगा कि इस समय हिंदू सम्मेलन की क्या आवश्यकता पड़ रही है। हिन्दू शब्द संकुचित होता जा रहा है।

नकारात्मक सोच वाले बंधुओं ने हिंदू समाज की हिंदू शब्द को संकुचित कर दिया। हिंदू शब्द का अर्थ बहुत विशाल है लेकिन आज के समाज में हिंदू समाज हिंदू शब्द की अनेक परिभाषाएं दी जा रही है। उस शब्द को अनेक रूप से दर्शाया जा रहा है कोई कहता है कि हिंदू सावरकर का हिंदुत्व है कोई कहता है गांधी का हिंदुत्व है कोई कहता है जय श्री राम वालों का हिंदुत्व है ।

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हिन्दू किसी व्यक्ति का नहीं हो सकता हिंदू किसी समाज का नहीं हो सकता हिंदू। इन चीजों से ऊपर उठ के नकारात्मक अफवाह फैलाई जाती है समाज में कि हिंदू बहुत संकुचित विचारधारा का है। यह महिला विरोधी है यह दलित विरोधी है। यह जाति विरोधी है। अनेक तरीके से हिंदू शब्द को परिभाषित किया जा रहा है।

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लेकिन वास्तव में हिंदू व्यक्ति के अंतरात्मा में पनप रहे विचारों का एक समूह है। हिंदू समुदाय है। हिंदू जीवन जीने की एक शैली है। हिंदू जीवन की एक वृत्ति है। हिंदू अकेला नहीं हिंदू समुदाय है जिसमें अनेक पंत अनेक समाज के लोग समाहित हैं। हिंदू की अपनी कोई जीवन पद्धति नहीं है। हिंदू व्यक्तियों के जीवन पद्धति के अनुसार है।

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अनेक संप्रदाय के लोग हिन्दु,हिंदुत्व की बात करते हैं सबकी अलग-अलग जीवनशैली है सबकी अलग पूजा शैली है। सबकी अलग प्रार्थना की पद्धति है कोई घंटा घड़ियाल बजाकर पूजा करता है।

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कोई निरंकारी रह के पूजा करता है कोई चंदन पर विश्वास करता है कोई इस पर विश्वास नहीं करता है लेकिन कुल मिलाकर यह बता देना जरूरी है कि हिंदू वही है जो इस भारत भू को इस भारत माता को अपना मानता है जो इस भारत भूमि को केवल भूमि का टुकड़ा मानता है वह हिंदू नहीं हो सकता ।

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क्योंकि यह भारत भूमि का टुकड़ा नहीं भारत हमारी
माता है। हिंदू न कभी सोया था ना कभी सोएगा अगर हम अतीत में जाए तो अनेक देशों पर आक्रमण हुए और देश गुलाम भी हुए अपना देश भी गुलाम हुआ लेकिन आप सभी को पता है।

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अगर हम इतिहास पढ़े तो मानचित्र से खत्म हो गया। इतिहास के पन्नों में समाहित होकर रह गया उसका भूगोल समाप्त हो गया लेकिन भारत एक ऐसा देश था जो 500 वर्षों से अधिक समय तक गुलाम रहने के बाद भी स्वतंत्र हुआ। उसके पीछे मूल कारण यह था कि हमारे हिंदू समाज ने अपनी संस्कृति को जीवित रखा,

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अपनी सभ्यता को जीवित रखा। अपने समाज में दो तरीके के लोग थे एक ऐसा समाज था जो युद्ध लड़ा और दूसरा ऐसा समाज था जिन्होंने संस्कृति को जीवित रखा और जिसका परिणाम हुआ कि 500 वर्षों से अधिक गुलाम रहने के पश्चात भी अपना देश पुन स्वतंत्र हुआ।

यानी हमें संगठित होना चाहिए शांत रहते हुए संगठित होना चाहिए और जब संगठित होकर समाज काम करेगा सामने वाला ललकारेगा। उसकी ललकार से जब वो शांत होना शुरू हो तब उसे दबोच दे। और भारत माता को परम वैभव पर ले जाने का कार्य करें। हिंदू समाज जो जागृत समाज है उसे जागृत और संगठित होकर इस देश और धर्म के लिए कार्य करना चाहिए।

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जिससे हम जिस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक लंबे समय से लगे हुए हैं वह लक्ष्य प्राप्त हो और हमारा उद्देश्य पूर्ण हो। कार्यक्रम का सफल संचालन संतोष चौबे ने किया। कार्यक्रम में संगम गुप्ता, नीरज सिंह एडवोकेट,महेश शुक्ल कीर्तन सिंह, मनोज जलान,संयोजक आर्यन पाण्डेय,बस्ती प्रमुख रामचंद्र पांडेय,विनय शुक्ला नवीन पांडे ,सुरेश पाठक,अनिल, बिश्वनाथ मनोज सिंह, अमित पांडेय जी आदि उपस्थित रहे।

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