HIGHLIGHTS
- मेडिकल कालेज में महिला मरीज की सन्दिग्ध परिस्थितियों में मौत, परिजनो व स्टाफ नर्स में हुआ विवाद
- मिर्जापुर जनपद के राजगढ़ सीएचसी के चिकित्सकों ने रेफर किया गया था महिला मरीज को
सोनभद्र। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रत्येक जिले में मेडिकल कालेज के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की सोच को जनपद में मेडिकल कालेज के स्टाफ कालिख पोतने का काम कर रहे है। ताजा मामला स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय का है जहाँ एक महिला मरीज की मौत के बाद वाराणसी रेफर करने पर परिजनों द्वारा हंगामा करने पर सामने आया।

इस मामले पर मृतक महिला के परिजनों ने बताया कि मिर्जापुर के राजगढ़ सीएचसी के चिकित्सकों द्वारा महिला मरीज को मेडिकल कालेज सोनभद्र के लिए रेफर किया गया जहाँ बेहतर इलाज चिकित्सको द्वारा नहीं किया गया जिसके कारण उसकी मौत हो गयी।

वही मेडिकल कालेज के स्टाफ द्वारा मृत मरीज को रेफर करने की तब सामने आया जब एम्बुलेंस स्टाफ ने बताया कि आपके मरीज की मौत हो चुकी है। मेडिकल कालेज में मरीज की मौत पर परिजनों ने हंगामा शुरु कर दिया जिस पर स्टाफ नर्स के बीच वाद-विवाद हो गया। जिसकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनो पक्षो से जानकारी लिया।
जनपद में सदर कोतवाली क्षेत्र के राजकीय मेडिकल कालेज में बुद्धवार को महिला मरीज सरोजा पत्नी लवकुश 20 वर्ष निवासी खोराडीह थाना राजगढ़ को उसके परिजन सीएचसी राजगढ़ के चिकित्सकों द्वारा रेफर किये जाने पर मेडिकल कालेज में भर्ती कराया।


मृतक महिला की ननद ने बताया कि प्रसव के लिए भाभी को सीएचसी राजगढ़ में भर्ती कराया गया जहां रात में डिलेवरी के दौरान मृत नवजात पैदा हुआ जिसके बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए राजकीय मेडिकल कालेज सोनभद्र के लिए रेफर कर दिया।

मेडिकल कालेज में आज सुबह 6 बजे भर्ती कराया गया जहां चिकित्सकों ने दोपहर बारह बजे वाराणसी के लिए रेफर किया। मेडिकल कालेज के चिकित्सको ने इलाज के दौरान किसी को मिलने तक नहीं दिया। मेडिकल कालेज का स्टाफ स्वयं मरीज को ऐम्बुलेंश में बैठाने लगा तो ऐम्बुलेंश का स्टाफ में बताया कि आपके मरीज की मौत हो चुकी है।

इस सम्बंध में सीएमएस डॉ बी. सागर ने कहा कि मिर्जापुर के राजगढ़ सीएचसी से रेफर महिला मरीज आज सुबह 6 बजे यहां भर्ती कराया गया था जिसकी खून की कमी कक वजह से हालत गम्भीर थी लेकिन चिकित्सको के द्वारा उपचार करने पर उसकी हालत में सुधार हुआ

लेकिन बेहतर इलाज के लिए वाराणसी रेफर कर दिया गया था जिसकी मौत कालेज के बाहर जाते ही हो गई। जिस पर मृतक मरीज के परिजनों ने स्टाफ नर्स के वाद-विवाद किया, जिसमे नर्स प्रियंका और निशा पाल को चोट आयी है।

सूबे की बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भले ही लाख दावे करती हो लेकिन धरातल पर स्थित कुछ और ही है, नीति आयोग द्वारा चयनित अति पिछड़े जिले सोनभद्र में यह स्थित और भी भयावह है।


























