खनन हादसा: मानक 30 फीट की गहराई, खनन हो रहा था 150 फिट…

HIGHLIGHTS

  • बिल्ली मारकुंडी खदान में हुए हादसे ने प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है।

सोनभद्र। जिले के ओबरा क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी खदान में हुए हादसे ने प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है। खदान में जहां नियमों के तहत अधिकतम 30 फीट से गहराई में खोदाई की अनुमति ही नहीं थी,

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वहां हैरतअंगेज तरीके से 150 फीट से अधिक गहराई तक खोद डाला गया। प्रशासनिक तंत्र की निगरानी के बीच इतने बड़े पैमाने पर खनन का चलना खुद इस बात का सबूत है कि यहां नियमों को ताक पर रखा गया।

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15 नवंबर को दिन में करीब तीन बजे मजदूर रोज की तरह काम कर रहे थे। कई घंटे से मशीनें बिना रुके चल रही थीं। गहराई बढ़ चुकी थी और दीवारों पर दरारें दिखने लगी थीं, लेकिन मजदूरों की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया गया। इसी बीच अचानक जोरदार धमाके के साथ खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया।

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पल भर में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। ऊपर की जमीन पर खड़े लोगों को सिर्फ धूल का गुबार और चीखों की आवाजें सुनाई दीं। करीब 16 मजदूरों के दबे होने की आशंका व्यक्त की गई है, जिसमें से अब तक प्रशासन की तरफ से रेस्क्यू करके पांच शव को बाहर निकाला गया है।

रेस्क्यू का हाल यह रहा कि सोमवार की दोपहर तीन बजे तककरीब 45 घंटे बीत जाने के बाद भी मलबे से पांच शव ही निकाले जा सके थे। अभी भी मलबे हटाने काम पूरा नहीं हो सका। मौके पर मौजूद ग्रामीणों का आरोप है कि अगर रेस्क्यू की तैयारी समय पर होती तो शायद कुछ मजदूरों को जिंदा निकाला जा सकता था।

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सूत्रों के अनुसार खदान में लगातार मानक से कई गुना ज्यादा गहराई तक खोदाई कराई गई है। हैरानी की बात यह है कि खनन विभाग की नियमित जांच रिपोर्टों में किसी भी तरह की गड़बड़ी का जिक्र नहीं है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या निरीक्षण सिर्फ कागजों में होता था? अगर हां, तो फिर ऐसी, औपचारिकता’ की कीमत मजदूर क्यों चुकाएं?

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परिवारों का दर्द और गुस्सा चरम पर

खदान के बाहर खड़े हर व्यक्ति की आंखों में एक ही सवाल है कि अगर प्रशासन समय पर निगरानी करता, कुछ जाने बच सकती थीं। प्रशासन की तरफ से जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन ग्रामीणों में भरोसा कम है।

लोगों का कहना है कि इस हादसे ने सिर्फ मिट्टी नहीं खोली-बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। मलबे में दबे बाकी मजदूरों के लिए इंतजार जारी है और ऊपर जमीन पर उनके परिवारों के लिए यह हादसा सिर्फ एक त्रासदी नहीं, बल्कि एक सिस्टम की नाकामी का सबूत बनकर खड़ा है।

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खनन के यह तय किए गए हैं मानक

पारेषण लाइन के टॉवर से 50 मीटर के दायरे में खनन नहीं होना चाहिए।

रात में नहीं हो सकता खनन। बस्ती के सौ मीटर दायरे में नहीं हो सकता खनन।

गहराई में नहीं समानांतर खनन ही है वैध।

खदान में एक साथ दो वाहनों के आने-जाने का हो संपर्क मार्ग।

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खनन क्षेत्र में पेयजल, चिकित्सा का हो पर्याप्त इंतजाम ।

धूल से बचाव के लिए खदान में होता रहे पानी का छिड़काव।

10 मीटर गहरी खदानों में खनन प्रतिबंधित ।

एक खदान में 20 मजदूर से अधिक नहीं कर सकते काम।

दो टीपर से अधिक वाहनों से ढुलाई नहीं।

एक खदान में 80 होल से अधिक की ब्लास्टिंग नहीं।

मजदूरों की सुरक्षा के लिए हेलमेट व सेफ्टी बेल्ट जरूरी।

श्रम अधिनियम के तहत मजदूरों का हो मानदेय।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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