अवैध मदरसा प्रकरण में अंजुमन इस्लामिया कमेटी के सदर समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का हुआ आदेश

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  • अवैध मदरसा प्रकरण में अंजुमन इस्लामिया कमेटी के सदर समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का हुआ आदेश


सोनभद्र। मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में संचालित एक अवैध मदरसा और मदरसे के नाम पर अवैध चंदा उगाही के गंभीर आरोपों के मामले में न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए थाना कोतवाली रॉबर्ट्सगंज को मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्यवाही करने का आदेश जारी किया है।

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यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा, काशी क्षेत्र के सदस्य अल्ताफ अहमद क़ादरी ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को एक विस्तृत शिकायत प्रेषित की।

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शिकायत में कहा गया था कि अंजुमन इस्लामिया कमेटी, रॉबर्ट्सगंज के अध्यक्ष मुस्ताक अहमद व अन्य पदाधिकारी जामा मस्जिद के पीछे स्थित एक भवन में बिना किसी सरकारी अनुमति या पंजीकरण के मदरसे का संचालन कर रहे हैं।

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शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि उक्त पदाधिकारियों द्वारा “मदरसा अंजुमन इस्लामिया” के नाम से कैलेंडर एवं प्रचार सामग्री छपवाकर आम जनमानस से आर्थिक सहयोग की अपील की गई, साथ ही रसीद काटकर अवैध रूप से चंदा उगाही की गई।

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शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्यवाही न किए जाने पर, शिकायतकर्ता के पक्ष से अधिवक्ता रविन्द्र बहादुर सिंह पटेल के माध्यम से माननीय न्यायालय में प्रकीर्ण वाद प्रस्तुत किया गया।

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मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी दस्तावेज़ों, साक्ष्यों एवं तर्कों का गहन परीक्षण किया।
अंततः अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री अमित कुमार ने मामले को गंभीर मानते हुए, थाना कोतवाली रॉबर्ट्सगंज को आदेश दिया कि वे अंजुमन इस्लामिया कमेटी के सदर मुस्ताक अहमद समेत अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्यवाही प्रारंभ करें।

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इस आदेश के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़ा बताया जा रहा था, जिस कारण प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई ठप पड़ी थी।
न्यायालय के आदेश से शिकायतकर्ता पक्ष में न्यायिक उम्मीदें फिर से जीवित हो गई हैं।

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अल्ताफ अहमद क़ादरी ने कहा कि, “हमने केवल यह मांग की थी कि जो भी संस्था या व्यक्ति समाज और धर्म के नाम पर अवैध रूप से आर्थिक गतिविधियाँ चला रहा है, उसकी निष्पक्ष जाँच हो। न्यायालय का यह आदेश कानून के शासन में आस्था को मजबूत करता है।”

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