HIGHLIGHTS
- रॉबर्ट्सगंज नगर में 35 वर्षों बाद भरत मिलाप का मंचन
- राम भरत के मिलन से भाव विभोर हुआ नगर, हर तरफ जय श्री राम की गूंज
- भरत मिलाप की मार्मिक लीला का मंचन देख भाव विभोर हुए श्रद्धालु

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सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज के रामलीला मैदान पर श्री रामलीला समिति के तत्वाधान में आयोजित लीला मंचन के 12वें दिन रावण वध के बाद देर रात भरत मिलाप लीला का आयोजन किया गया।
बता दे की यह भरत मिलाप की परंपरा मां शीतला धाम चौक पर 35 वर्ष बाद समिति के द्वारा पुन प्रारंभ कराया गया।

पारंपरिक रामलीला के तहत संपन्न हुए भरत मिलाप के मार्मिक प्रसंग को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर जुटे रहे। लीला की शुरुआत में दिखाया गया कि विभीषण के राज्याभिषेक के बाद श्री राम, जानकी, लक्ष्मण, हनुमान सहित अन्य पुष्पक विमान पर सवार होकर अयोध्या के लिए निकले।

यह शोभायात्रा रामलीला मैदान से नगर के मेंन चौक तक निकली। मार्ग में दोनों तरफ श्रद्धालु प्रभु पर पुष्प वर्षा कर रहे थे। हर कोई उनकी सुंदर मूरत अपनी आंखों में कैद कर रहा था।

लीला मंचन के मुताबिक श्रीराम, रावण का वध करने के पश्चात पुष्पक विमान से अयोध्या के लिए आते हैं तो रास्ते में ऋषि भारद्वाज मुनि के यहां विश्राम करते हैं और हनुमान से भरत को अपने आने की सूचना देने को कहते हैं। हनुमान साधु वेश में भरत को प्रभु श्रीराम के आगमन की सूचना देते हैं।

सभी अयोध्यावासी भरत के साथ श्रीराम से मिलने चल देते हैं। आश्रम से पूर्व रथ से उतरकर भरत शत्रुघ्न दौड़ते हुए अपने बड़े भाई श्री राम के चरणों में दंडवत करते हैं। श्री राम उन्हें अपने गले लगते हैं। भरत मिलाप के प्रसंग को देखकर उपस्थित राम भक्त भाव विभोर हो जाते हैं।


लीला मंडली द्वारा भजन के माध्यम से भरत मिलाप प्रस्तुत कर उनके जीवन चरित्र को प्रदर्शित किया। चारों भाइयों के मिलन पर वहां जय श्रीराम,हर हर महादेव की जयकारे से पूरा नगर गूंज उठा। भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी।

वहीं रामलीला समिति के संरक्षक जितेंद्र सिंह द्वारा 123 साल पुराने रामलीला का इतिहास बताते हुए कहा कि नगर में आयोजित होने वाले इस रामलीला की शुरुआत रॉबर्ट्सगंज टाउन एरिया के प्रथम चेयरमैन बद्री नारायण केसरवानी ने किया।


जो आज भी निरंतर जारी है। कार्यक्रम के अंत में समिति के अध्यक्ष पवन कुमार जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राकेश गुप्ता, प्रमोद गुप्ता ,आनंद मिश्रा, प्रशांत जैन, विनोद कनोडिया, डॉ. धर्मवीर तिवारी ,

चन्दन केसरी,कृष्ण मुरारी गुप्ता, अनिल द्विवेदी, संगम गुप्ता, घनश्याम सिंघल, सुमन केसरी,उमेश केसरी रामजी मोदनवाल, हर्ष केसरी साहित्य सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।























