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- भागवत कथा छठवा दिन: श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
वेदांश केसरी
राबर्ट्सगंज, सोनभद्र। नगर के डॉ कन्हैयालाल मार्ग पर स्थित एक आवास में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा पुराण के छठवें दिन कथा व्यास सासाराम ओझा ने श्री कृष्ण रुक्मिणी विवाह प्रसंग व सुदामा चरित्र का वर्णन किया जिसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

कथावाचक सासाराम ओझा ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि विदर्भ के राजा भीष्मक के घर रुक्मिणी का जन्म हुआ। बाल अवस्था से भगवान श्रीकृष्ण को सच्चे हृदय से पति के रूप में चाहती थीं।
लेकिन भाई रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ कराना चाहता था। रुक्मिणी ने अपने भाई की इच्छा जानी तो उसे बड़ा दुख हुआ। अत: शुद्धमति के अंतपुर में एक सुदेव नामक ब्राह्मण आता-जाता था। रुक्मिणी ने उस ब्राह्मण से कहा कि वे श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती हैं। सात श्लोकों में लिखा हुआ मेरा पत्र तुम श्रीकृष्ण तक पहुंचा देना।

कथावाचक ने बताया कि रुक्मिणी ने स्वयं को प्राप्त करने के लिए उपाय भी बताया। पत्र में रुक्मिणी ने बताया कि वह प्रतिदिन पार्वती की पूजा करने के लिए मंदिर जाती हैं, श्रीकृष्ण आकर उन्हें यहां से ले जाओ।

पत्र के माध्यम से रुक्मिणी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप इस दासी को स्वीकार नहीं करेंगे तो मैं हजारों जन्म लेती रहूंगी। मैं किसी और पुरुष से विवाह नहीं करना चाहती हूं।आचार्य ने बताया कि पार्वती के पूजन के लिए जब रुक्मिणी आई, उसी समय प्रभु श्रीकृष्ण रुक्मिणी का हरण कर ले गए।

अत: रुक्मिणी के पिता ने रीति रिवाज के साथ दोनों का विवाह कर दिया। इंद्र लोक से सभी देवताओं द्वारा पुष्पों की वर्षा की तथा खुशियां लुटाई। इसके बाद सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया।

इस अवसर पर पं. सुंदरम कुमार ओझा, पं. पीयूष कुमार ओझा, पं. सोनू मिश्रा, जय कुमार केसरी, अशोक कुमार केसरी, प्रीति केसरी सरिता देवी, विनीत केसरी, वेदांश केसरी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।





























