HIGHLIGHTS
- टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता का शिक्षक संगठनो ने किया विरोध प्रदर्शन, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
- पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ ने टेट का किया विरोध जताया आक्रोश
- पीएम एवं शिक्षा मंत्री नामित ज्ञापन डीएम प्रतिनिधि को देखकर बुलंद की आवाज
सोनभद्र। जनपद में उत्तर प्रदेशीय पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर एवं उत्तर प्रदेशीय पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर तले जिलाध्यक्ष योगेश पाण्डेय व रविभूषण सिंह के नेतृत्व में हजारों की संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाओं ने जिला कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन करते हुए

शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संशोधन कर अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता से मुक्त करने के संबंध में प्रधानमंत्री एवं शिक्षा मंत्री भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।

इस दौरान जिलाध्यक्ष रविभूषण सिंह ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम में शिक्षक नियुक्त होने अथवा पदोत्रति और हेतु टेट टीईटी उत्तीर्णिता को अनिवार्य किया गया था। जिसमें अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी टेट (टीईटी) उत्तीर्ण होना अनिवार्य होने से संबंधित कोई आदेश दिशा निर्देश नहीं था।
भारत सरकार अथवा किसी राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में कोई कार्यवाही की गई थी परंतु हाल में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर यह आदेश जारी किया गया है कि देश में शिक्षक बने रहने के लिए टेट (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मात्र 5 साल की सेवा काल के बचे शिक्षकों को छूट दी गई है परंतु पदोत्रति में उन्हें भी छूट नहीं दी गई है। जिसमें प्रदेश के लगभग 8 लाख शिक्षक व शिक्षिकाओं की नौकरी, प्रोत्रत पर खतरा उत्पन्न हो गया है।

वही टेट (टीईटी) उत्तीर्ण करने हेतु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2 वर्षों का समय दिया गया है। ऐसे में प्रदेश के वरिष्ठ शिक्षक व शिक्षिकाओं को टेट (टीईटी) उत्तीर्ण होना संभव प्रतीत नही होता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र एवं प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आगे एक बड़ा आंदोलन एवं शिक्षक समाज रोड पर उतरने को बाध्य होगा। वही अन्य शिक्षक संगठन के अध्यक्षो ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति के समय जो योग्यता मानदंड थे, उन्हीं के अनुसार शिक्षकों की भर्ती हुई थी। पहले हाई स्कूल योग्यता थी, फिर इंटरमीडिएट और बाद में स्नातक की गई।

उन्होंने बताया कि 2017 में संसद में एक कानून पास किया गया था, जिसमें सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया गया। लेकिन इस कानून को न तो जिलों में भेजा गया और न ही प्रदेश में लागू किया गया। शिक्षकों ने इस फैसले का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।

इस प्रदर्शन व ज्ञापन कार्यक्रम में धीरेंद्र पति तिवारी महामंत्री, मंडल उपाध्यक्ष कमलेश कुशवाहा, शिवम अग्रवाल यूटा अध्यक्ष, योगेश पाण्डेय, अध्यक्ष प्रा० शि० संघ, राज मौर्या अटेवा अध्यक्ष, रविन्द्र चौधरी अध्यक्ष प्रा० शि० संघ,

इंदु प्रकाश महामंत्री राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, महेन्द्र जायसवाल, सूर्यप्रकाश, अखिलेश गुंजन, अनिल सिंह, सुनील सिंह, प्रदीप सिंह, दयाशंकर सिंह, रामगोपाल, अजय कुशवाहा, इंदु सिंह, संतोष पाण्डेय, संजय कुमार, मनोज सिंह, राजेश जायसवाल सहित हजारों की संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।



























