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- अधिवक्ताओं के हितों को अनदेखा कर रही है
उत्तर प्रदेश सरकार - संयुक्त अधिवक्ता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखा पत्र
सोनभद्र। प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए सदैव आवाज बुलंद करने वाले संयुक्त अधिवक्ता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शरण मिश्र ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए कैशलेश इलाज की मांग की है।

श्री मिश्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में मांग की है कि जब वेतन भोगी कर्मचारियों को आप कैशलेश इलाज की सुविधा देने की घोषणा कर सकते है तो अधिवक्ताओं के लिए क्यों नहीं।

उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि अधिवक्ता गैर वेतन भोगी होता है और उसकी दिन की या महीने की कोई निश्चित आमदनी नहीं होती जिससे वो भविष्य की परेशानियों के बारे में कुछ धन बचा कर रख सके।

आज शिक्षा और मेडिकल में सबसे अधिक पैसा लग रहा है। ऐसे में कोई अधिवक्ता या उसके घर वाले किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होते है तो उसका सब कुछ दांव पर लग जाता है। इलाज के अभाव में प्रतिवर्ष हजारों अधिवक्ता दम तोड़ रहे है।

अभी हाल ही में जनपद सोनभद्र के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिओम सेठ जो ओबरा तहसील में वकालत करते थे महीनों इलाज के अभाव में तड़पते रहे और अंततः पैसे के अभाव में उनकी इलाज ठीक से ना हो पाने के कारण उनका दुखद निधन हो गया और ना तो सरकार से उन्हें कोई मदद मिली और ना ही बार कौंसिल से।

इसलिए संयुक्त अधिवक्ता महासंघ आपसे मांग करता है कि आप जल्द से जल्द प्रदेश के अधिवक्ताओं को पच्चीस लाख की कैशलेश इलाज की व्यवस्था करने और

उत्तरप्रदेश में अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने की घोषणा करें अन्यथा प्रदेश के अधिवक्ताओं को अपनी इन दोनों मांगों के लिए प्रदेश व्यापी आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसकी समस्त जिम्मेवारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी।




























