महिला, बाल हित के रक्षक पीएलवी रहें संवेदी और सजग- प्राधिकरण सचिव शैलेन्द्र

HIGHLIGHTS

  • महिला, बाल हित के रक्षक पीएलवी रहें संवेदी और सजग-प्राधिकरण सचिव एडीजे शैलेन्द्र
    -बिना वारंट,
  • होटल ढाबे की तलाशी का अधिकार पुलिस को नहीं- कहा संयुक्त निदेशक अभियोजन मनोज यादव ने

सोनभद्र। नि:संदेह पीएलवी शोषितों और पीड़ितों के बीच न्याय का सेतु हैं और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अत्यावश्यक अंग बन चुके हैं, बावजूद इसके यह आवश्यकता महसूस की जा रही है

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कि पीएलवी /अधिकार मित्र और अधिक सामुदायिक भाव से महिला और बाल हितों के प्रति संवेदनशील और सजग रहें। बुधवार को एडीआर भवन स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनभद्र के तत्वाधान में आयोजित एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण समारोह के दौरान अपर जनपद न्यायाधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनभद्र शैलेंद्र यादव ने अधिकार मित्रों से कही।
     

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बाल एवं महिला संरक्षण विषय पर अधिकार मित्रों और लॉयर पैनल को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि श्री यादव ने कहां कि सूर्यास्त के बाद बच्चों और महिलाओं को गिरफ्तार नहीं किया जा

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सकता विशेष परिस्थिति और अत्यंत संवेदनशील मामले में महिलाओं को महिला पुलिस के साथ ही गिरफ्तार किया जा सकता है साथ ही बच्चों की गिरफ्तारी के समय पुलिस बल बावर्दी उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती ना ही उनके साथ सीधे तौर पर शक्ति से पेश आ सकती है,

अलावा इसके उन्होंने दिव्यांगजन, महिला अधिकार के अलावा बालक एवं बालिका सुधार गृह, कारागार में बंदियों के अधिकार इत्यादि सहित राष्ट्रीय लोक अदालत और राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान की गूढ़ जानकारी पीएलवी/अधिकार मित्रों को दी।

पात्र गरीब चाहे वह किसी भी जाति धर्म संप्रदाय का हो भले ही वह अभियुक्त हो, उसे अपने मुकदमे की पैरवी के लिए नि: शुल्क अधिवक्ता प्रदान करने की हक की जानकारी दी।

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श्री यादव ने संवैधानिक अधिकार, मूलभूत अधिकार एवं विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्य प्रणाली और महिला अधिकार, तलाक, घरेलू हिंसा, मातृत्व लाभ, जूविनाइल से संबंधित बाल विवाह आदि पर भी जानकारी दी।
 

डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस जयप्रकाश ने फंडामेंटल राइट और मौलिक अधिकार आदि की जानकार दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निशुल्क वकील दिए जाने के बारे में भी प्रकाश डाला।

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संयुक्त निदेशक अभियोजन मनोज यादव ने राइट टू एजुकेशन, अनैतिक व्यापार अधिनियम 1956, लिव इन रिलेशनशिप तथा भारत में मानव तस्करी और देह व्यापार को रोकना ही है 1956 का उद्देश्य आदि पर प्रकाश डालते हुए वेश्यावृत्ति और उकसाने वाले तत्वों पर भी गूढ़ जानकारी और सज़ा के प्राविधान की जानकारी दी,

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यह भी बताया कि बिना वारंट होटल ढाबा की तलाशी का अधिकार पुलिस को नहीं है। साथ ही यौन कर्मी से संबंधित मुद्दे और भेदभाव वित्तीय सुरक्षा अथवा वैकल्पिक रोजगार के अभाव में वेश्यावृत्ति आदि को मिल रहे बढ़ावा की जानकारी देते हुए कहा कि

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यौन कर्मी की आयु 18 से काम नहीं होनी चाहिए।उत्पीड़न की स्थिति में वह चाहे तो कानून या पुलिस की सहायता ले सकता है। कहा कि यौन कमी को सभी प्रकार का भारतीय अधिकार है।

वन स्टाप सेंटर इंचार्ज दीपिका सिंह ने घरेलू हिंसा, जिला प्रोबेशन कार्यालय की भूमिका के अलावा पीड़ितों को सहायतार्थ
18 1 एवं 1090 पर सूचना के अलावा सुरक्षा संरक्षण एवं

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चिकित्सा आदि के लिए तथा महिला कल्याण योजना की जानकारी हेतु वन स्टाप सेंटर से संपर्क करने एवं मिशन शक्ति एप को डाउनलोड करने पर बल देते हुए बताया कि महिला हिंसा, उत्पीड़न एवं तमाम समस्याओं का समाधान का मार्गदर्शन मिशन शक्ति एप पर होता है।

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कहां कि वन स्टाप सेंटर एक छतरी की तरह होता है महिला हेल्प उसका प्रार्थना पत्र तैयार करना उन्हें राहत प्रदान कर अग्रिम कार्रवाई हेतु मार्गदर्शन, उपचार, आश्रय प्रदान करता है।बताया कि पीड़ित महिला वन स्टाप सेंटर में 5 दिन के लिए रह सकती है फिर चाहे तो वह होम शेलटर जा सकती है।

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  महिला समानता, कार्य स्थल पर टीका टिप्पणी, अश्लील फब्तियां, लैंगिक अपराध आदि की रोकथाम के लिए कार्य स्थल पर गठित आंतरिक परिवार कमेटी में शिकायत करने, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता की जानकारी दी।

वन स्टाप की कार्यकत्री अनुराधा जायसवाल ने दहेज निषेध, कार्य स्थल पर यौन शोषण पर विचार व्यक्त करते हुए बताया कि वह लोग सर्वे का कार्य करती हैं और पीड़ितों को उचित सलाह देते हैं, समाधान न होने पर उन्हें विधिक सेवा प्राधिकरण में जाने की जानकारी देते है।

संचालन कर रहे वक्ता चीफ लीगल एड डिफेंस शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि महिलाओं को विशेष अधिकार दिया गया है उन्हेंपरुष सिपाही गिरफ्तार नहीं कर सकता।

Shree digital desk
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पूर्व सदस्य किशोर पूर्व सदस्य किशोर न्याय बोर्ड के ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि अपराध अपराध ही होता है अपराध किए हुए बच्चे से पुलिस या अन्य कोई अधिकारी पूछताछ करता है तो उसे उसके माता-पिता की उपस्थिति में ही पूछताछ करने का अधिकार है

बाल अपचारी से थाने में बावर्दी में पूछताछ नहीं किया जा सकता है विशेष स्थिति में किसी सुरक्षित स्थान पर ही पूछताछ की जा सकती है। श्री त्रिपाठी ने सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (एसआईआर) की जानकारी के अलावा

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बाल किशोर न्यायालय की कार्य प्रणाली से पीएलवी और पैनल दायरों को अवगत कराया। इसके पूर्व विशेष प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनभद्र सचिव अपर जनपद न्यायाधीश शैलेंद्र यादव ने दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से किया। व संचालन चीफ लीगल एड डिफेंस शमशेर बहादुर सिंह ने किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनभद्र के सचिव अपर जनपद न्यायाधीश शैलेंद्र यादव, संयुक्त निदेशक अभियोजन मनोज कुमार यादव, ओम् प्रकाश त्रिपाठी पूर्व सदस्य किशोर न्याय बोर्ड सोनभद्र, सखी वन स्टाप सेंटर इंचार्ज दीपिका सिंह, कार्यकत्री अनुराधा जायसवाल, डिप्टी


चीफ लीगल एड डिफेंस जय प्रकाश, पीएलवी कमाल अहमद, निगार फरजाना, सरिता लाहा, रंजू भारती, सुमन, सपना, अजय मिश्रा, दीपन, भोला, प्रदीप मिश्रा, मनोज पाठक समेत पैनल लायर आदि उपस्थित रहे। जानकारी अपर जनपद न्यायाधीश सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनभद्र शैलेंद्र यादव ने दी।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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