HIGHLIGHTS
- श्री गणेश की पूजा संपन्न, विघ्नहर्ता श्री गणेश की मूर्ति हुई विसर्जित
- ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर भक्त गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आना गीत पर थिरकते चलते रहे।
- विसर्जन यात्रा में सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम, एडिशनल एसपी कल्लू सिंह निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायाजा लेते रहे

सोनभद्र। गणेशोत्सव पर्व को लेकर सोनभद्र नगर में जगह-जगह स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन बुधवार की रात भक्तों ने नम आंखों से किया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर भक्त गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आना गीत पर थिरकते चलते रहे।
विसर्जन यात्रा में जमकर अबीर गुलाल उड़ाया गया नगर के उत्तर मोहाल स्थित दुग्धेश्वर मंदिर के समीप, गुरुद्वारे के पास व नई बस्ती रोड पर स्थापित भव्य पंडाल में विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन स्थानीय नागरिकों द्वारा शनिवार को किया गया।

ज्ञातव्य हो कि श्री गणेश जी की मूर्ति पंडाल में शुक्ल पक्ष गणेश चतुर्थी को स्थापित की गई, पुराणों के अनुसार-” इस दिन गणेश जी का जन्म हुआ था और शुक्ल पक्ष एकादशी को भगवान गणेश की शोभा यात्रा संपूर्ण नगर में भ्रमण किया।


इस शोभायात्रा में डीजे के भक्ति मय धुन पर युवक नाचते- गाते नगर में भ्रमण करते हुए मूर्ति विसर्जन के लिए ले गए।
इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने बताया स्वाधीनता आंदोलन में गणेश चतुर्थी का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। परंपरा की शुरुआत महाराष्ट्र में देशभक्त, क्रांतिकारी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा आरंभ किया गया था,

इस पर्व को मनाने के पीछे उनका उद्देश्य था कि गणेश पूजा की बहाने सभी हिंदू एक होकर स्वतंत्रता आंदोलन में अधिक से अधिक भाग ले और इनकी यह मनसा सफल रही। 15 अगस्त 1947 को हमें आजादी मिली।
स्वाधीन भारत में आरंभ हुई यह परंपरा आज पूरे देश और विदेश में प्रचलित है। शुक्ल पक्ष गणेश चतुर्थी से लेकर शुक्ल पक्ष के अनंत चतुर्दशी तक पूरे देश में बड़े ही धूमधाम के साथ गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है।






























