HIGHLIGHTS
- अधिकारियों की मिलीभगत, गैर-एनटीपीसी लोगों का कब्जा, करोड़ों का राजस्व नुकसान
रंजीत रॉय
शक्तिनगर/सोनभद्र: एनटीपीसी सिंगरौली में अवैध आवास आवंटन का बड़ा घोटाला सामने आया है। कर्मचारियों के लिए बने मकानों में गैर-एनटीपीसी लोग वर्षों से अवैध रूप से रह रहे हैं, और हैरानी की बात यह है कि बिजली बिल, पैनल रेट और अन्य शुल्क तक वसूले नहीं जा रहे। लाखों रुपये की राजस्व हानि और अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप ने कंपनी की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संविदा श्रमिकों के साथ भेदभाव, करीबी लोगों को फायदा :
• वर्षों से काम कर रहे श्रमिकों को आवास नहीं
• अधिकारियों के करीबी नए श्रमिकों को तुरंत आवंटन
• पारदर्शी नीति की माँग ने तूल पकड़ा विवाद

संविदा श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें वर्षों की सेवा के बाद भी आवास का हक नहीं मिला। वहीं, अधिकारियों के प्रभाव में आने वाले नए श्रमिकों को तुरंत मकान मुहैया कराया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष और समान अवसर आधारित नीति लागू करने की मांग की है।
दस्तावेज़ों में हेरफेर की आशंका, सीबीआई तक पहुँचेगा मामला :
शिकायत में आशंका जताई गई है कि मानव संसाधन विभाग के कुछ अधिकारी जाँच से पहले दस्तावेज़ों में छेड़छाड़ कर सकते हैं।
इसलिए, शिकायतकर्ता ने रिकॉर्ड को सुरक्षित अभिरक्षा में रखने की अपील की है।

यदि इस मामले में शीघ्र, निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) तक ले जाई जाएगी।

मुख्य आरोप :
• अवैध आवास आवंटन → गैर-एनटीपीसी लोगों का कब्जा
• राजस्व हानि → बिजली बिल, पैनल रेट और शुल्क की वसूली नहीं
• संविदा श्रमिकों के साथ भेदभाव → वर्षों की सेवा के बावजूद आवास से वंचित
• दस्तावेज़ी हेरफेर की आशंका → जाँच में बाधा डालने की कोशिश

मुख्य माँगें :
1. उच्च स्तरीय जाँच समिति का गठन
2. अवैध निवासियों को तत्काल बेदखल करना
3. बकाया राशि की वसूली
4. निष्पक्ष आवास आवंटन नीति
5. दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्यवाही

एनटीपीसी देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। यदि इस घोटाले पर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इससे न केवल संगठन की साख पर असर पड़ेगा बल्कि भारत सरकार के हितों पर भी प्रतिकूल प्रभाव होगा ।






























