भाजपाईयों ने सुनी PM मोदी की मन की बात

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  • भाजपाईयों ने सुनी PM मोदी की मन की बात


सोनभद्र। मन की बात रविवार को बुथ संख्या 14 पर बुथ अध्यक्ष के नेतृत्व में सुना गया जिसमें बूथ पर मुख्य अतिथि डॉ धर्मवीर तिवारी के साथ देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात को सुन गया।

जिसमें मोदी जी ने कहा कि मन की बात में एक बार फिर बात होगी देश की सफलताओं की, देशवासियों की उपलब्धियों की | पिछले कुछ हफ्तों में, sports हो, science हो या संस्कृति, बहुत कुछ ऐसा हुआ है जिस पर हर भारतवासी को गर्व है | अभी हाल ही में शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष से वापसी को लेकर देश में बहुत चर्चा हुई।

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जैसे ही शुभांशु धरती पर सुरक्षित उतरे, लोग उछल पड़े, हर दिल में खुशी की लहर दौड़ गई | पूरा देश गर्व से भर गया | मुझे याद है, जब अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 की सफल landing हुई थी तब देश में एक नया माहौल बना | Science को लेकर, Space को लेकर बच्चों में एक नई जिज्ञासा भी जागी | अब छोटे-छोटे बच्चे कहते हैं, हम भी space में जाएंगे, हम भी चाँद पर उतरेंगे – Space Scientist बनेंगे |

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हम सभी को गर्व से भर देने वाली एक और खबर आई है, UNESCO से | UNESCO ने 12 मराठा किलों को World Heritage Sites के रूप में मान्यता दी है | ग्यारह किले महाराष्ट्र में, एक किला तमिलनाडु में | हर किले से इतिहास का एक-एक पन्ना जुड़ा है | हर पत्थर, एक ऐतिहासिक घटना का गवाह है | सल्हेर का किला, जहाँ मुगलों की हार हुई |

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शिवनेरी, जहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ | किला ऐसा जिसे दुश्मन भेद न सके | खानदेरी का किला, समुद्र के बीच बना अद्भुत किला | दुश्मन उन्हें रोकना चाहते थे लेकिन शिवाजी महाराज ने असंभव को संभव करके दिखा दिया | प्रतापगढ़ का किला, जहाँ अफजल खान पर जीत हुई, उस गाथा की गूंज आज भी किले की दीवारों में समाई है |

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विजयदुर्ग, जिसमें गुप्त सुरंगें थी, छत्रपति शिवाजी महाराज की दूरदर्शिता का प्रमाण इस किले में मिलता है | मैंने कुछ साल पहले रायगढ़ का दौरा किया था | छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने नमन किया था | ये अनुभव जीवन भर मेरे साथ रहेगा |
आप कल्पना कीजिए, बिल्कुल भोर का वक्त,

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बिहार का मुजफ्फरपुर शहर, तारीख है, 11 अगस्त 1908 हर गली, हर चौराहा, हर हलचल उस समय जैसे थमी हुई थी | लोगों की आँखों में आँसू थे, लेकिन दिलों में ज्वाला थी | लोगों ने जेल को घेर रखा था, जहां एक 18 साल का युवक, अंग्रेजों के खिलाफ अपना देश-प्रेम व्यक्त करने की कीमत चुका रहा था | जेल के अंदर, अंग्रेज अफसर, एक युवा को फांसी देने की तैयारी कर रहे थे | उस युवा के चेहरे पर भय नहीं था, बल्कि गर्व से भरा हुआ था |

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वो गर्व, जो देश के लिए मर-मिटने वालों को होता है | वो वीर, वो साहसी युवा थे, खुदीराम बोस | सिर्फ 18 साल की उम्र में उन्होंने वो साहस दिखाया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया | तब अखबारों ने भी लिखा था – “खुदीराम बोस जब फांसी के फंदे की ओर बढ़े, तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी” |

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ऐसे ही अनगिनत बलिदानों के बाद, सदियों की तपस्या के बाद, हमें आज़ादी मिली थी | देश के दीवानों ने अपने रक्त से आजादी के आंदोलन को सींचा था । मन की बात सुनने वाले में सभासद विनोद सोनी, बूथ अध्यक्ष शशिकांत पाण्डेय,योगेश सिंह,उत्कर्ष, रवि कसेरा, मालवीय, सनद दुबे, अनूप,विशाल सहित अन्य लोग रहे।

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