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- चकबन्दी प्रक्रिया को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीण, धरना स्थल पर पहुंच अधिकारियो ने की वार्ता
घोरावल, सोनभद्र। जनपद में घोरावल तहसील के ग्राम भैसवार में चकबन्दी प्रक्रिया का विरोध प्रदर्शन के परिक्षेप में उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी व एसओसी चकबन्दी ने विरोध प्रदर्शन करने वालो से सीधा संवाद किया। इस दौरान अधिकारियों ने लोगो को आश्वस्त किया कि चकबन्दी प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण किया जाना शासन की शीर्ष प्राथमिकता है। चकबन्दी प्रक्रिया में यदि किसी प्रकार की समस्या हो तो सक्षम स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते है।

ग्राम भैसवार में चकबन्दी प्रक्रिया के सम्बन्ध किये जा रहे विरोध प्रदर्शन के परिपेक्ष में उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी एवं चकबन्दी विभाग के अधिकारी द्वारा धरना स्थल पर सम्बन्धित पक्षों से मुलाकात कर जानकारी प्राप्त कर, उन्हें चकबन्दी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गयी।

इस दौरान उप जिलाधिकारी ने कहा कि न्यायालय अथवा शासन से चकबन्दी प्रक्रिया रोके जाने का कोई भी आदेश नहीं और जहाँ तक अनियमितता का प्रश्न है, यदि कोई भी व्यक्ति इस सम्बन्ध में अपनी शिकायत करना चाहता है तो सक्षम स्तर पर जिलाधिकारी डीडीसी चकबन्दी बन्दोबस्त अधिकारी एवं चकबन्दी विभाग के अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते है।

चकबन्दी विभाग द्वारा ग्राम भैसवार में सन 1986 से चकबन्दी प्रक्रिया प्रारम्भ है। चकबन्दी प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किये जाने का आदेश चकबन्दी आयुक्त द्वारा दिया गया। इस दौरान ग्राम भैंसवार परगना बड़हर, तहसील घोरावल स्थित बछनार बीर बाबा नामक स्थल पर चकबन्दी प्रकिया से असंतुष्ट धरना पर बैठे ग्राम के कृषकों से वार्ता के लिए उपस्थित हुये।

भारतीय किसान (लोक शक्ति) के जिलाध्यक्ष बिरजू कुशवाहा के नेतृत्व में ग्राम के कृषक धरने पर हैं। धरना में शामिल कृषको की मांग यह है कि जिलाधिकारी द्वारा 31 मार्च 1992 को चकबन्दी प्रक्रिया निरस्त कर सारे नियमो में चकबन्दी प्रक्रिया शुरु किये जाने के आदेश की अवहेलना किया गया चकबन्दी में बटा तरमीम एवं जोत कोड़, कब्जा के आधार पर भूचित्र अंकित नही किया गया तथा यह भी मांग है कि 450 बीघा फर्जी खतौनी के सम्बन्ध में चकबन्दी अधिकारी संजीव राय के अनिमियत आदेश को निरस्त किया जाय।

जिलाध्यक्ष बिरजू कुशवाहा व संजय कुमार यादव पूर्व प्रधान को विस्तार से सुना गया। उपजिलाधिकारी द्वारा ग्राम के कृषको की समस्याओं को सुनने के बाद विचारोपरान्त कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में पारित आदेश से असंतुष्ट कृषकगण सक्षम न्यायालय मे वाद योजित कर अनुतोष प्राप्त कर सकते हैं।
इससें पूर्व दिनांक 05 जुलाई को तहसील में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष रूप से ग्राम भैंसवार के कृषको को सुना गया था और कृषको को यह अवगत कराया गया था कि समस्याओं के समाधान हेतु चकबन्दी अधिकारी, बन्दोबस्त अधिकारी चकबन्दी व उप संचालक चकबन्दी के न्यायालय ग्रामवासियों के लिए उपलब्ध है। कृषकगण अपनी समस्या का निस्तारण न्यायालयों के माध्यम से प्राप्त कर सकते है।

इस दौरान एसओसी चकबन्दी द्वारा बताया गया कि ग्राम भैंसवार वर्ष 1986 से चकबन्दी प्रक्रिया में है। इस ग्राम की चकबन्दी प्रक्रिया में धारा 10 के तक की कार्यवाही को 31 मार्च 1992 को जिलाधिकारी द्वारा निरस्त कर दिया गया था, जो पुनः प्रारम्भिक स्थिति से शुरु होकर वर्तमान में गतिमान है। ग्राम की चकबन्दी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा रिट सं0 471/2020 में 18.02.2020 को आदेश पारित किया गया है।

यह भी स्पष्ट करना है कि बिरजू कुशवाहा की पत्नी तथा संजय कुमार यादव स्वयं चकबन्दी समिति के अध्यक्ष रहे है, चकबन्दी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में ग्राम प्रधान का महत्वपूर्ण योगदान होता है, इनके द्वारा तत्समय चकबन्दी का विरोध नहीं किया गया।

वही धरना पर बैठे कृषकों को सुनने के उपरान्त उन्हें अवगत कराया गया कि उनकी जो भी समस्याएं है उनका नियमानुसार निराकरण न्यायिक प्रक्रिया के अन्तर्गत संभव है। कृषक न्यायालय की शरण लेकर अनुतोष प्राप्त कर सकते है।























