भलुवा माइंस की हैवी ब्लास्टिंग से कांप रहा ओबरा, मकानों में दरारें और जनजीवन भयभीत

HIGHLIGHTS

  • भलुवा माइंस की हैवी ब्लास्टिंग से कांप रहा ओबरा, मकानों में दरारें और जनजीवन भयभीत
  • प्रशासनिक लापरवाही पर फूटा जनता का गुस्सा, निरीक्षण के दौरान खनन अधिकारी मौन


सोनभद जनपद की आदर्श नगर पंचायत ओबरा के वार्ड संख्या 14 में स्थित अल्ट्राटेक भलुवा माईस में हो रही अनियंत्रित और अत्यधिक हैवी ब्लास्टिंग से स्थानीय नागरिकों का जीवन नारकीय हो गया है। मकानों में  जल टंकियों में रिसाय, नौंव कमजोर होने की स्थिति और हर दोपहर भूकंप जैसे झटकों का डर यह सब अथ ओबरा के बाशिंदों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है ब्लास्टिंग से उड़ते पत्थरों, तेज ध्वनि और कंपन से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मानसिक तनाव में जीने को मजबूर हैं।

दोपहर 1 से 2 बजे के बीच ब्लास्टिंग का समय लोगों के लिए सबसे डरावना होता है, जब वे अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस करते हैं।

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शिकायतों पर कागजी कार्रवाई, ज़मीनी हकीकत से मुंह मोड़ता प्रशासन

इस गम्भीर विषय को लेकर छात्र नेता अभिषेक अग्रहरी ने 03 अप्रैल व 28 अप्रैल 2025 को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कीं (शिकायत सं. 40020025005439 और 40020025008766), लेकिन अधिकारियों ने इन शिकायतों पर बिना मौके पर आए ही कागज़ी रिपोर्ट बनाकर औपचारिकता पूरी कर दी।

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कई रिमाइंडर भेजे जाने के बाद खनन निरीक्षक मनोज पाल 22 जुलाई को निरीक्षण के लिए ओबरा पहुंचे, लेकिन निरीक्षण से पहले वह सीधे अल्ट्राटेक के कार्यालय में चले गए। शिकायतकर्ता के फोन के बाद ये मौके पर पहुंचे, जहां पहले से ही भारी संख्या में स्थानीय लोग अपनी पीड़ा साझा करने के लिए मौजूद थे।

जनता ने अधिकारियों को बताया कि उनके घरों पर पत्थर गिरते हैं, बच्चे डर के मारे रोते हैं, और कई घरों में दरारें साफ देखी जा सकती हैं। सड़कें ओवरलोड गाड़ियों के आवागमन से टूट चुकी हैं और कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।

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निरीक्षण अधूरा, जवाब नदारद

जैसे ही जनता ने खनन निरीक्षक से सवाल पूछने शुरू किए, उन्होंने मौके से बिना जवाब दिए चुपचाप निकल जाना बेहतर समझा। पत्रकारों ने जब उनकी प्रतिक्रिया जाननी बाहीं तो उन्होंने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया. जिससे लोगों में गहरी नाराजगी फैल गई।

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लोकतंत्र की असफलता का प्रतीक बनता एक मामला

यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक निष्क्रियता और जनविरोधी रवैये का उदाहरण बन चुका है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई और प्रभावित परिवारों को मुआवजा व राहत नहीं मिली, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रभाव में दबी आवाजें अब शांत नहीं रहेंगी।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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