नाबालिग लड़की को बहला फुसलाकर भगाने के मामले मे दोषी चंपा देवी को 5 वर्ष की कैद

HIGHLIGHTS

  • दोषी चंपा देवी को 5 वर्ष की कैद
  • 5 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर 15 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी
  • जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी।
  • अर्थदंड की धनराशि में से 3 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी
  • करीब साढ़े 7 वर्ष पूर्व 15वर्षीय नाबालिग लड़की को बहला फुसलाकर भगाने का मामला

सोनभद्र। करीब साढ़े 7 वर्ष पूर्व 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को बहला फुसलाकर भगाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने सोमवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी चंपा देवी को 5 वर्ष की कैद एवं 5 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर 15 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित की जाएगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 3 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी।

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अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाना क्षेत्र स्थित एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने चोपन थाने में 18 फरवरी 2018 को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी को 15 फरवरी 2018 को 11 बजे दिन पप्पू पुत्र रामजियावन   निवासी पटवध,बिरनखाड़ी, थाना चोपन, जिला सोनभद्र बहला फुसलाकर भगा ले गया। जब पप्पू के पिता रामजियावन से इस संदर्भ में पूछताछ किया तो वे उल्टी सीधी बात करते हुए मारने की धमकी देने लगे।

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16 फरवरी 2018 को सुबह 10 बजे बेटी ने फोन किया और बताया कि गोपीगंज में हूं और फोन कट गया। जब दुबारा फोन किया गया तो बताया गया कि लड़की यहां है और लेकर आने वाला छोड़कर भाग गया है। इस तहरीर पर  एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दिया और पर्याप्त सबूत मिलने पर कोर्ट में पप्पू पुत्र रामजियावन व चंपा देवी पत्नी पप्पू निवासी पटवध, थाना चोपन, जिला सोनभद्र के विरूद्ध चार्जशीट विवेचक ने दाखिल किया था।

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मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्को को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी चंपा देवी को 5 वर्ष की कैद एवं 5 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 15 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वही अर्थदंड की धनराशि में से 3 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी। वहीं आरोपी पप्पू को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। अभियोजन पक्ष की ओर ले सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और नीरज कुमार सिंह ने बहस की।

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