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- व्यापारिक कल्याण दिवस के रूप में मनाई गई दानवीर भामाशाह जयंती

सोनभद्र। दानवीर भामाशाह की जयन्ती के अवसर पर कलेक्ट्रेट सभागार में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लखनऊ से मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का सजीव प्रसारण कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया। इस दौरान सर्वोच्च राजस्व कर देने वाले व सामाज में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों को सम्मानित भी किया गया।

दानवीरता एवं देशभक्ति का अनुपम उदाहरण है भामाशाह की जीवन गाथा –
इस मौके पर जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह ने उपस्थित व्यापारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि “दानवीर भामाशाह के पिता का नाम भारमल था, इनका जन्म 29 जून, 1547ई0 को तत्कालीन राजस्थान के मेवाड राज्य में ओसवाल जैन परिवार में हुआ था। महाराणा प्रताप की सेना के प्रधान पद पर रहते हुए 18 जून, 1576 ई० को भामाशाह ने हल्दीघाटी का युद्ध में अप्रतिम वीरता का प्रदर्शन किया।

मुगल सेना से युद्ध में जब महाराणा प्रताप वित्तीय संकट से जूझ रहे थे, भामाशाह ने उदारतापूर्वक अपनी सम्पत्ति का एक बड़ा हिस्सा दान में देकर महाराणा प्रताप को सैन्य पुनर्गठन एवं अभियान जारी रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भामाशाह की मृत्यु सन् 1600 ई0 में हुई। महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह ने गंगोद्भव तीर्थ में दाह संस्कार कराया तथा उनके सम्मान में छतरी रखवायी। भामाशाह की जीवन गाथा दानवीरता एवं देशभक्ति का अनुपम उदाहरण है और इनका योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।”

आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए सीएसआर का उपयोग करें छोटे व बड़े व्यापारी –
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्र ने आज घोषणा की है कि दानवीर भामाशाह की जयन्ती 29 जून को प्रत्येक वर्ष व्यापारिक कल्याण दिवस के रूप में मनायी जाये। जनपद के छोटे से बड़े व्यापारी सी0एस0आर0 मद का उपयोग आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों के जीवन स्तर में सुधार लाने हेतु करें। इस दौरान जिलाधिकारी ने व्यापारिकगण व उपस्थित जनमानस से अपील किया कि वह जनपद में प्रारंभ किये गये नागरिक सुरक्षा संगठन में भी अपनी भागीदारी निभायें।



























