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- दस दिवसीय ‘‘जनजातीय नृत्य कार्यशाला’’ का हुआ भव्य उद्घाटन
रमेश देव पाण्डेय (जिला संवाददाता)
वाराणसी। सोमवार को दस दिवसीय ‘‘जनजातीय नृत्य कार्यशाला’’ उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति कला संस्कृति संस्थान (संस्कृति विभाग), उत्तर प्रदेश सरकार एवं जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान का उद्घाटन मुख्य अतिथि महेन्द्र प्रसाद वरिष्ठ समाज सेवी वाराणसी, विशिष्ठ अतिथि-बुधिराम गोंड, बाबू लाल पटेल आदि द्वारा आदिवासी महानायक बिरसा मुण्डा जी के मूर्ति पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि दस दिवसीय जनजातीय नृत्य कार्यशाला में जनजातीय समाज की विलुप्त होती गोंडी नृत्य, कर्मा एवं शैला नृत्य को गहनता पूर्वक सिखाया जा रहा है। जिसे आप सभी सीख कर आदिवासी संस्कृति को मजबूती प्रदान करने में सहायक होगी। वर्तमान में जनजातीय समाज की अनेक संस्कृति विलोपन के कगार पर है जिसे उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, सस्कृति विभाग, लखनऊ के प्रयास से जीवन्त करने का कार्य किया जा रहा है। जिसके धन्यवाद करता हूॅ।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों ने भी कार्यशाला के संचालन को सराहना किया। कार्यशाल के प्रशिक्षक विनोद कुमार गोंड एवं सहायक दिलीप ने प्रतिभागियों को प्रथम दिन में जनजातीय नृत्य को कब, कैसे और किस पर्व एवं त्योहार पर किया जाता है, जिसे सहजता पूर्वक प्रतिभागियों को बताया।
कार्यशाला में बृजभान मरावी सचिव/प्रबंधक-जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी ने कहा कि दस दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से जनपद की दुर्लभ गोंडी जनजातीय नृत्य-गीत की बारिकियों को रोचात्मक बनाकर मंच पर कैसे प्रस्तुत किया जाए इस तरह से प्रशिक्षित किया जाएगा। और नये उम्र के बच्चों को सिखाया जाएगा। कार्यशाला में प्रियका गोंड, विजयलक्ष्मी गोंड, आॅचल गोंड, बलिराम, प्रितम गोंड, रंजीत गोंड आदि ने प्रतिभाग किया।













